मुंबई : परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं। उस परिस्थिति में कैसे कार्य करना, संघ स्वयंसेवक इसका ही विचार करते हैं।
भ्रम की सत्ता तब तक चलती है, जब तक सत्य सामने नहीं आता। संघ के बारे में भी बहुत सारे भ्रम फैलाए जाते हैं। हम इसीलिए संघ का विचार सब तक पहुंचाने में लगे हैं।
प्रसिद्धि के लिए नहीं, प्रचार के लिए नहीं, अपना विचार आप तक पहुंचाने के लिए ही इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अँग्रेजी से हमारा बैर नहीं है। जहां अँग्रेजी के बिना काम नहीं चलता, वहां हम अँग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं। पर हमारा प्रयास रहता है कि अपनी भारतीय भाषा या फिर हिंदी भाषा का ही प्रयोग करें। हम अंग्रेजी को अपनी प्रमुख भाषा के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।
मैंने अपनी इच्छा जताई कि 75 वर्ष की आयु के बाद पद से मुक्त होकर कार्य करना चाहिए, लेकिन यह केवल मैं तय नहीं कर सकता। संघ के स्वयंसेवकों ने कहा कि आप ठीक ठाक हैं, इसलिए कार्य करते रहिए।
संघ का सरसंघचालक कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता, कोई क्षत्रिय नहीं बन सकता, कोई अन्य जाति का नहीं बन सकता।जो कोई भी बनेगा वह हिंदू ही होगा।
एससी/एसटी होना डिसक्वालिफिकेशन नहीं है, ब्राह्मण होना कोई क्वालिफिकेशन नहीं है। भविष्य में कोई एससी/एसटी भी संघ प्रमुख हो सकता है। हमारी सोच होती है कि सबसे योग्य कौन है।
इतने अन्याय होने के बाद भी प्रतिबंध हटने के बाद पूजनीय श्री गुरुजी ने एक बात कही थी—जो हुआ, सो हुआ, अपना समाज है। आपातकाल के बाद बालासाहब ने कहा—“फॉरगेट एंड फॉरगिव”।
तथागत बुद्ध को कोई कोस रहा था, पर तथागत शांत रहे। कोसने वाले ने चकित होकर पूछा, “ऐसा कैसे?” तथागत का उत्तर था, “आपने किसी को कुछ देना चाहा, पर उसने नहीं लिया, तो क्या होता है? वह वस्तु आपके पास ही पड़ी रहती है।” संघ स्वयंसेवक भी प्रतिकूल व्यक्ति, स्थिति, संस्थाओं से ऐसा ही व्यवहार करता है।
समाज में भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन चलते हैं। संघ के स्वयंसेवकों को बताया गया है कि इसमें आपको पूरा समर्थन देना है।
विवाह एक संस्कार है। जिम्मेदारी के साथ विवाह निभाना चाहिए।
जनसंख्या संतुलन के लिए 2.1 बच्चे होना आवश्यक है। .1 कुछ होता नहीं। इसलिए तीन बच्चे होना एक आदर्श स्थिति है। ऐसा चिकित्सक, समाज विज्ञानी आदि सभी मानते हैं।जनसंख्या असंतुलन के दो प्रमुख कारण हैं—मतांतरण और कन्वर्शन। ‘बर्थ रेट’ तो तीसरा विषय है।
स्वेच्छा से कोई मतांतरण करे तो कोई हर्ज नहीं, पर जोर जबरदस्ती से, लालच से अपना झुंड बढ़ाने के लिए जो मतांतरण कराया जाता है, वह बंद होना चाहिए। घर वापसी उसका उपाय है।
जनसंख्या असंतुलन एक अन्य कारण है घुसपैठ। ऐसे लोगों को बाहर निकालना चाहिए। पहले यह होता नहीं था। अब कुछ मात्रा में होने लगा है।
घुसपैठ के मामले में सरकार को बहुत कुछ करना है। सेंसेस होगा, SIR होगा, उसमें बहुत लोग सामने आते हैं। हम डिटेक्शन का काम कर सकते हैं। जो आते हैं, उनकी भाषा से सामने आता है। योग्य अधिकारियों, पुलिस को बताएं कि आप जांच-पड़ताल कीजिए। हम किसी विदेशी को रोजगार नहीं देंगे।
हमारा जोर Mass Production की बजाय Production by Mass पर होना चाहिए। अपने यहाँ हाथ ज़्यादा हैं, उन्हें काम चाहिए। खाली दिमाग शैतान का घर होता है। इसलिए नक्सलवाद होता है। हिंसा बढ़ती है और महिलाओं के प्रति अत्याचार बढ़ता है। अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता है।
जैविक आधार पर खेती करने से लागत कम होती है। खुद का बीज, खुद की खाद यानि पूरी खेती के मालिक खुद। ऐसे बहुत से उदाहरण देशभर में हैं। हमें खेती की लागत कम करनी चाहिए।
खेती की उपज के लिए भंडारण और उसका प्रसंस्करण होने से किसान को उसकी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे। यह काम सरकार को करना चाहिए। जब खेती में खर्चा कम होता है तो किसान को कर्ज नहीं लेना पड़ता है।
संघ स्वयंसेवकों के प्रयासों से पूरे भारतवर्ष में 5000 गाँवों में विकास की बात शुरू हुई है। लगभग 350 गाँव दिखाने लायक हो गए हैं। यहाँ लोगों ने इकट्ठा होकर भेदभावों को मिटाया और अपने अपने बलबूते गाँवों को ऊपर उठाया है। आर्थिक दृष्टि से, कृषि की दृष्टि से, संस्कारों की दृष्टि से, व्यसन मुक्ति की दृष्टि से, समरसता की दृष्टि से ऐसे अनेक पहलू हैं।
पारंपरिक व्यवसाय और महिला सशक्तिकरण के लिए ‘एक जिला एक उत्पाद’ जैसे अभियान कारगर सिद्ध हो रहे हैं।
जीडीपी देश की आर्थिक स्थिति नापने का कारगर तरीका नहीं है। वह इंपरफेक्ट है।
समाज की सजगता से विघातक गतिविधियों पर नियंत्रण में सहायता मिलती है।
सरकार को जो लोग सरकार में हैं वे चलाते हैं। संघ बैकसीट ड्राइविंग नहीं करता।
2047 में अखंड भारत की कल्पना करो। अब हम बहुत आगे बढ़ गए हैं। भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे।
हिंद की चादर बने नवम गुरु जी। कश्मीर के पंडितों की सुरक्षा के लिए; यही एकता है। सिख समाज से हमारा खून का रिश्ता है। हमारे बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। केशधारी और सहजधारियों के बीच वैवाहिक संबंध होते ही हैं। श्री गुरू ग्रंथ साहिब में केवल सिख संतों की नहीं, पूरे देश के संतों की वाणी है।
वंसत महोत्सव में हमारे तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस के भाषण पर आधारित पुस्तक सामाजिक समरसता और हिन्दुत्व में हमारा विचार पूरी तरह से स्पष्ट है। जातिगत भेदभाव के बारे में संघ की भूमिका स्पष्ट और ठोस है।
जिन लोगों ने 2 हजार साल तक विषमता झेली, उन भाइयों के लिए अगर 200 साल तक 100 Years of Sangh Journey –New Horizons



