आतंकवाद पर विकृत राजनीति करते कांग्रेस तथा अन्य विरोधी दल

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दिल्ली । राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को हुए लाल किला कार बम धमाके की जांच, अत्याधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से की जा रही है। जांच से जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वह बहुत ही भयावह है। ये आतंकवादी डॉक्टर्स रॉकेट और ड्रोन जैसी चीज़ें बना रहे थे और राजधानी दिल्ली पर हमास की स्टाइल में हमले करने का षड्यंत्र रच रहे थे। इस आतंकवादी समूह ने 32 कार बम धमाके करने की योजना बनाई थी । ये लाखों हिन्दुओं को मारकर बाबरी विध्वंस का बदला लेना चाहते थे । दिल्ली लाल किले धमाके की जांच अभी चल रही है और हर दिन नए खूंखार और सफेदपोश अपराधी पकड़े जा रहे हैं।

जहाँ एक ओर सभी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर अपराधियों की खोजबीन में लगी हैं वहीं विरोधी दल परोक्ष रूप से आतंकवादियों के बचाव में लगे हैं। धमाके के कुछ समय बाद ही विपक्षी पार्टियों ने सोशल मीडिया में यह प्रोपेगेंडा चला दिया कि बम धमाका बिहार चुनाव के मद्देनजर हुआ है। आतंकवाद के विरोध में कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया बहुत ठंडी व सीमित रही। विरोधियों ने आतंकवादियों के स्थान पर अपनी सुरक्षा एजेंसियों को ही कठघरे में खड़ा किया।

पूर्व गृहमंत्री पी चिदम्बरम जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कठम नहीं उठाया उनका एक बहुत लंबा चौड़ा डिजाइनर पोस्ट आता है जिसमें वह दो प्रकार के आतंकियों से देश को खतरा बताते हैं और परोक्ष रूप से हिन्दुओं को कोसते हैं। चिदंबरम वही पूर्व गृहमंत्री हैं जिन्होंने हिंदू आतंकवाद व भगवा आतंकवाद जैसे शब्द गढ़े थे, उनके कार्यकाल में ही इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन पनपे तब पी चिदम्बरम साहब ने उनको रोकने के लिए कुछ नहीं किया अपितु उनके कार्यकाल में हुए आतंकी धमाकों के अपराधियों के विरुद्ध कमज़ोर केस बनाए गए जिससे बाद में वो बरी हो जाएं।

कांग्रेस के एक पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने दो हाथ आगे निकलते हुए कहा कि यह धमाका कश्मीर में हो रहे अन्याय का परिणाम भी हो सकता है और साथ ही उन्होंने इसमें राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ की भूमिका भी जांच की मांग कर डाली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आतंकवाद की घटना में पकड़े जा रहे युवाओं को भटका हुआ युवा बता दिया। जम्मू कश्मीर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती तो सदा से ही आतंकवाद का समर्थन व सरंक्षण करने वाले बयान देती रहती हैं तो इस बार भी वही कर रही हैं यही हाल वहां के सत्तारूढ़ अब्दुला परिवार का है। समाजवादी नेता अबू आजमी को भी यह बात अच्छी नहीं लग रही कि दिल्ली बम धमाके में इतने सारे डाक्टर्स पकड़े जा रहे हैं।

कांग्रेस के नेतृत्व में मुस्लिम तुष्टिकरण में लगा संपूर्ण विपक्ष कही न कहीं, किसी न किसी रूप में आतंक की पैरवी करता नजर आ रहा है। यह वही विपक्ष है जिसके नेता सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते फिरते हैं और आपरेशन सिंदूर के समय भारत सरकार का साथ देने की बजाए चीन और पाकिस्तान की भाषा बोलते नजर आ रहे थे। ये पाकिस्तान की मीडिया के नायक हैं । आज संपूर्ण विपक्ष आतंकवाद का प्रचारक बन गया है। यह दल और इनके नेता इस्लामिक आतंकवाद की निंदा नहीं करते अपितु जब आतंकवााद के खिलाफ कार्यवाही प्रारंभ हो जाती है तब ऐसी -ऐसी बयानबाजी करते हैं कि जांच की दिशा और दशा प्रभावित हो जाए। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह सरीखे लोग मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ओसामा जी और साहब जैसे संबोधन प्रयोग करते हैं। इनका राष्ट्रीय विचार कुछ नहीं है सिर्फ अपने वोट बैंक को साधना है।

दिल्ली बम धमाके के बाद कांग्रेस के नेताओं के बयानों से यह सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस कट्टरपंथी मुस्लिम तुष्टिकरण में किसी भी सीमा तक जा सकती है। उसके नेताओं के बयान यह आभास भी दे रहे हैं कि अगर इस समय गलती से भी उनके नेतृत्व वाली सरकार होती तो कार बम धमाके को महज सीएनजी धमाका कहकर छोड दिया जाता या फिर इसके पीछे षड्यंत्र करके एक बार फिर हिंदू आतंकवाद के एंगिल से जांच कर संघ को बदनाम किया जाता।

सौभाग्य से वर्तमान में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व मे एक मजबूत सरकार है। गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर चुके हैं कि हम आतंकियो को पाताल से भी खोजकर लाएंगे और कठोरतम दंड देंगे। सुरक्षा एजेंसियां अपराधियों को ढूँढने में लगी हैं। दिल्ली कार बम धमाके की जांच की तह तक पहुंचना सरकार का पहला लक्ष्य है। षड्यंत्र की सभी परतें खुलने और सभी प्रमाण हाथ में आ जाने के बाद ही सरकार आगे की कार्यवाही करेगी।

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मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित का लखनऊ में निवास है। वे लेखक, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं

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