आशुतोष कुमार सिंह
दिल्ली। 02 तारीख, फरवरी का महीना, सन 2026। रात्रि का समय। बेटे के पेट में दर्द होना शुरू हुआ। रात्रि के 9 बज रहे थे। दिल्ली के जाने माने होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. पंकज अग्रवाल की सलाह पर उसको दवा दी गई…थोड़ा राहत मिला। फिर दर्द। दर्द और दवा का दौर सुबह 3 फरवरी तक चलता रहा। सुबह दूसरी दवा शुरू की गई। बेटे को स्थानीय एलोपैथिक चिकित्सक के पास लेकर गए। उन्होंने तुरंत भर्ती करने को कहा। और कुछ टेस्ट लिखा। हमने तुरंत भर्ती तो नहीं किया लेकिन सारे टेस्ट कराए। इस बीच दर्द आराम हो चुका था। पेशाब ठीक से होने लगा था।
दोपहर बाद अल्ट्रासाउंड कराने ले गए। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में अपेंडिसाइटिस होने की आशंका जताई गई और सीटी कराने की सलाह दी गई। इस बीच हमारे मित्र बड़े भाई डॉ मनीष कुमार को मैंने अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट दिखाई, उन्होंने कहा कि आप मेरे नजफगढ़ स्थित सेंटर पर लेकर आइए। हम उनके यहां शाम को 8 बजे पहुंचे। उन्होंने एक दवा प्रिसक्राइव किया और सुबह तक ऑबजर्ब करने के लिए कहा। पूरी रात दर्द नहीं हुआ, पेशाब और स्टूल समयानुसार होता रहा। 4 तारीख की सुबह में हमने निर्णय लिया कि इसे किसी बड़े अस्पताल में एडमिट कराते हैं। अपने चिकित्स मित्रो की सलाह पर द्वारका में स्थित अग्रसेन अस्पताल में 12 बजे के आस-पास भर्ती कराया गया। एंटीबायोटिक्स, डीएनएस एवं एनस का डोज शुरू हुआ। इस बीच क्लिनिकली बेटा बिल्कुल ठीक रहा। रात भर उसे जब भी प्यास लगी पानी मांग कर पिता रहा। सुबह उसका स्टूल भी ठीक हुआ।
दोपहर बाद चुकी पिछले तीन दिनों से उसने दूध नहीं पिया था, सो दूध दिया गया। दूध पीने के बाद उसने पेट दर्द की शिकायत की, जो कि आधे घंटे में सेटल हो गई थी। फिर अग्रसेन अस्पताल प्रशासन ने कहा कि उनके यहां कोई शिशु रोग सर्जन नहीं है, अतः बेटे को ऐसे जगह एडमिट कराएं जहां पर सर्जन हो। उनकी सलाह एवं एक अन्य चिकित्सक मित्रो की सलाह पर बेटे को लेकर आकाश अस्पताल, द्वारका पहुंचे हम।
वहां पर कुछ देर इमरजेंसी में बेटे को रखा गया। इस दौरान एडमिशन प्रोसेस चलता रहा। मेरा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी एसबीआई थी। उनके यहां से अप्रूवल आने में एक से दो घंटे लग गए। शाम को 8 बजे तक अप्रूवल आ चुका था। बेटे के लिए रूम नं. 607 बुक हो चुका था। रूम में पहुंचते ही एंटीबायोटिक का दौर शुरु हुआ। अभी तक क्लिनिकली बेटा ठीक था। अस्पताल की ओर से कहा गया था कि पानी नहीं पिलाना है, बच्चे को। बेटा पानी के लिए तड़प रहा था। मैंने जानने की कोशिश की कि क्या ऑपरेशन प्लान कर रहे हैं ये लोग या कंजरवेटिव ट्रिटमेंट ही चलेगा। कोई साफ-साफ कुछ नहीं बता रहा था। जब ऑपरेशन का कोई कंफरमेशन नहीं मिला मुझे तब लड़-झगड़कर मैंने बच्चे को पानी पिलाने के लिए डॉक्टरों पर दबाव बनाया। उन्होंने थोड़ा सा अलाऊ किया। सुबह 3 बजे तक ऑपरेशन करना है कि नहीं कंफर्म नहीं था। सर्जन का विजिट अभी तक नहीं हुआ था। सुबह 5 बजे मैंने फिर कड़ा रूख अख्तियार किया और यह जानने की कोशिश की कि यह बताया जाए कि ऑपरेशन होना है या नहीं। कहा गया कि ऑपरेशन होगा। लेकिन तब तक कोई भी ओटी बुक नहीं था।
सुबह 9:30 के आस-पास सर्जन डॉ. अंजनी आए। आते ही उन्होंने सर्जरी से संबंधित कंप्लिकेशंस को बताया। मतलब यह था कि वे सर्जरी करने के लिए मन बनाकर ही आए थे। तब तक हम भी इस बात से कंविंस हो चुके थे कि अगर सर्जरी ही करनी है तो जल्दी करें। 6 फरवरी तकरीबन 10:50 सुबह बच्चे को ओटी में ले जाया गया। दोपहर बाद 12:40 में हमें कॉल आया कि बच्चा ओटी से वापस आ गया है। हम भागते हुए पहुंचे। अथर्व ऑपरेशन के बाद लगभग होश में आ चुका था। पानी की रट लगा रहा था। लेकिन ऑपरेशन के बाद भी पानी नहीं देना था। उसके पेट में एक पाइप लगा दिया गया था, जिससे पेट के अंदर से कथित रूप से गंदगी बाहर निकल रही थी। अपेंडिक्स के ऊपर फैट का लेयर होने के कारण उसे नहीं निकाला जा सका था।
बच्चे को ऑबजर्वेशन के लिए PICU में शाम तक रखा गया। शाम को 8 बजे तक उसे रूम नंबर 607 में शिफ्ट कर दिया गया। इस बीच बच्चे का यूरीन सामान्य तरीके से पास होने लगा था। लेकिन पानी नहीं मिलने से बेटे की तड़प बढ़ती जा रही थी। जब वह कहता था कि, “पापा थोड़ा पानी दे दो, जल्दी पानी दे दो…वहां से पानी दे दो…उस बर्तन में पानी है…आप झूठ बोल रहे हैं…डॉक्टर झूठा है…मइया झूठी है…हॉस्पटिल झूठा है…” उसकी इस तड़प को शब्द देते हुए मेरा अंग सिहर रहा है, उस वक्त मेरी क्या हालत थी, इसको शब्दों में व्यां नहीं कर सकता। उस दौरान कितनी बार वाशरूम में जाकर अपने गिली हो चुकी आंखों को धोया हूं बता नहीं सकता।
7 फरवरी 2026 सुबह 10 बजे के बाद बेटे को ओरल डाइट अलाऊ हुआ…पानी दिया गया…पानी पीने के बाद पूरी तरह से नकारात्मक हो चुका बेटा, मुझसे तकरीबन आधे घंटे तक सकारात्मक तरीके से बातचीत किया। मेरे माथे को चुमा। थैक्यू बोला। और डॉक्टर वैन से घर वापस आने के बाद वह क्या-क्या करेगा क्या क्या खायेगा उसका लेखा-जोखा बताया। उस पल को एवं पिता-पुत्र संवाद को लिखा नहीं जा सकता है।
इसी तरह दो दिन बाद सॉफ्ट डाइट शुरू हुआ। 10 फरवरी को बेटे को स्टूल हुआ। 11 को बेटे को डिसचार्ज किया गया। पेट में लगी पाइप हटा दी गई। 11 को रात्रि 10 बजे तक हम एंश्योरेंस का क्लेम अप्रूव कराकर अपने घर पहुंच गए। तब से आज 13.02.26 की दोपहर तक बेटा लगातार रिकवरी की ओर बढ़ रहा है। अभी ओरल एंटिबायोटिक्स चल रहा है।
इन सबके बीच मैं अपने तमाम चिकित्सक मित्रो खासतौर से डॉ.पंकज अग्रवाल, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. शैलेन्द्र गोयल, डॉ दीलीप, संजय श्रीवास्तव सहित उन तमाम शुभचिंतकों एवं सहयोगियों को आभार प्रकट करता हूं। और आपसे आंकाक्षा रखता हूं कि आप सबकी शुभेच्छाएं ऐसे ही बनी रहेगी। साथ ही अग्रसेन अस्पताल एवं आकाश अस्पताल को भी आभार प्रकट करता हूं।



