बक्सर (बिहार) : सवाल पूछना एक स्वस्थ लोकतंत्र की जीवनरेखा है, जो जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी के लिए एक मूलभूत तंत्र का काम करता है। यह सुनिश्चित करता है कि चुने हुए प्रतिनिधि जवाबदेह रहें, सत्ता के केंद्रीकरण को रोकता है और जागरूक नागरिकों को बढ़ावा देता है। स्वतंत्र मीडिया द्वारा समर्थित सवाल पूछने वाली जनता सामूहिक लाभ को बढ़ावा देती है और लोकतांत्रिक लचीलेपन को मजबूत करती है।
भेदभावपूर्ण यूजीसी विनियमन 2026 के बाद से, भाजपा और उसके कट्टर समर्थक (“अंधभक्त”) सवाल उठाने पर रोक लगा रहे हैं, बहस बंद कर रहे हैं और चुप्पी की संस्कृति को सामान्य बना रहे हैं। “अंधभक्तों” की यह छवि सोशल मीडिया पर चल रही तीखी बहसों में साफ झलकती है, जहां ये अंधभक्त भाजपा और मोदी जी के खिलाफ हर जायज सवाल का विरोध कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि भाजपा के आई.टी. सेल ने उनके दिमाग पर कब्जा कर लिया है। राजनीतिक चर्चा सीमित हो गई है, खासकर बेरोजगारी, विकास या सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाने पर, विशेष रूप से भेदभावपूर्ण यूजीसी विनियमन 2026 के बाद से। जाहिर है, भाजपा के ये अंधभक्त इतना जहर घोल रहे हैं कि समय के साथ भाजपा की राजनीति का पतन निश्चित हो जाएगा।
प्रमोशन में आरक्षण — भाजपा
बैकलॉग आरक्षण — भाजपा
मिनिमम मार्क्स कंडीशन हटाई — भाजपा
#SC_ST एक्ट अध्यादेश — भाजपा
सैनिक स्कूल आरक्षण — भाजपा
फूले दम्पत्ति पर डाक टिकट — भाजपा
डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न — भाजपा
अंबेडकर जयंती पर अवकाश — भाजपा
200-प्वाइंट रोस्टर — भाजपा
MP में 73% आरक्षण — भाजपा
NEET में 64.5% आरक्षण — भाजपा
पंचायत चुनाव में आरक्षण — भाजपा
पसमांदा आरक्षण — भाजपा
मनरेगा में आरक्षण — भाजपा
प्रधानमंत्री आवास में आरक्षण — भाजपा
बैंक लोन में आरक्षण — भाजपा
#UGC जैसा काला कानून — भाजपा
इतना सब कुछ होने के बाद भी अगर कोई कहे कि भाजपा हिन्दुवादी है तो वह निश्चित रूप से अंधा है।
भाजपा के मतदाता और राष्ट्रवादी हिंदू होने के नाते, मैं मोदी जी से उनके अंधभक्तों के माध्यम से निम्नलिखित प्रश्न पूछने का अधिकार लेता हूँ:-
1) यूजीसी क़ानून तथा “जातिगत आरक्षण” और “कठोर कानून” बनाकर देश के “उद्यमी” वर्ग अर्थात् सामान्य वर्ग को लगातार भय और उत्पीड़न के वातावरण में रहने के लिये आप लोगों ने क्यों बाध्य किया है? हमारी क्या गलती है? कृपया बताने का कष्ट करें ।
2) मोदी जी बड़े अनुभवी हैं आप देश की हित और अहित के मुद्दों को समझते हैं । कृपया प्रकाश डालें कि आप लोगों द्वारा थोपी गई वर्तमान व्यवस्था से क्या देश की शिक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से पतन नहीं हो जायेगा? अतः इससे किसको लाभ मिलेगा? कृपया बतायें।
3) आप लोगों ने जिस प्रकार से मेडिकल की पढ़ाई में आरक्षण देकर पूरी चिकित्सा व्यवस्था को ही ख़त्म करने का निर्णय लिया है । जब आप लोगों को इलाज करना होता है तो सदैव श्रेष्ठ चिकित्सक को ही प्राथमिकता देते हैं पर देश के आम नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं?
4) हम सामान्य वर्ग के लोग देश के निचले पायदान पर खड़े अपने बंधु- बांधवों की चिंता करते हैं। आपसे लगातार माँग कर रहे हैं कि उनके किए पढ़ने में सुविधा दीजिए पर आप उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय आरक्षण जैसे भेद भाव पर आधारित व्यवस्था को हीं लागू करना चाहते हैं, ऐसा क्यों?
5) आपकी वर्तमान निर्णय ने गाँव और देश का वातावरण विषैला बना दिया है। यह साफ़-साफ़ दिख रहा है कि आप लोगों ने देश में डर/भय का वातावरण बनाया हुआ है। बड़े बड़े हिंदू मठाधीशों से लेकर नेतागण भी आप लोगों के अत्याचार के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं। क्या यह सच नहीं है? क्या ऐसी स्थिति स्व इन्दिरा गांधी द्वारा थोपी गई “आपात काल” में भी थी?
6) हमारा अनुभव कहता है कि केवल “लोभ और भय” हीं आप लोगों के नीति का अटूट हिस्सा है। शायद यहीं कारण है कि कोई विशिष्ट व्यक्ति/संस्थान आपके अत्याचार के ख़िलाफ़ नहीं उठ रहा है ।
7) मीडिया के माध्यम से यह भी ज्ञात हो रहा है कि बीजेपी ने गो-वध करने वाली कंपनियों से चंदा इकट्ठा किया है। अगर यह बात सत्य है तो हम लोगों ने भी आपको वोट देकर सनातन धर्म के विरुद्ध पाप किया है । आपसे अनुरोध है कि इस विषय पर आप अपना पक्ष अवश्य स्पष्ट करें।
8) अगर बीजेपी के अनुसार देश में सामान्य वर्ग की आबादी केवल 15% हैं तो किस अंक गणित के हिसाब से 85% आबादी वाले मुस्लिम, क्रिश्चियन, एससी/एसटी तथा ओबीसी आदि को लोग 15% वालों से असुरक्षित हो गए हैं? आपकी यह सोच देश के लिए घातक है ।
9) आपसे अनुरोध है कि सामान्य वर्ग के लोगों का आबादी के अनुसार उनकी जनसंख्या बतायें। हमारी अंक गणित कहती है कि सामान्य वर्ग के लोगों की संख्या कुल जनसंख्या का 40% के क़रीब है। आप इसे स्पष्ट करें अन्यथा वैकल्पिक जनगणना की योजना बनायी जाएगी ।
10) आपकी सवर्ण विरोधी मानसिकता सभी हदों को पार कर चुका है। क्या अभी तक किसी भी सवर्ण ने किसी जाति या राष्ट्र/धर्म के विरुद्ध कोई नारा दिया है ?
11) दलित, पिछड़े के जाति सूचक नाम लेने से आपको कष्ट होता है जबकि आप दूसरों को जाति सूचक शब्द के साथ अपमानित करवाते हैं , यह अधिकार आपको किसने दिया है???
12) आपने SC/ST एक्ट तथा UGC जैसे कानून इस देश और धर्म को बर्बाद करने के लिए ही बनाया है। हमारी शोध यह कहती है कि जिन वर्गों के लिए आपने यह कानून बनाया है वे भी इसे पसंद नहीं कर रहे हैं। आपको चुनौती दे रहा हूँ, आप अपनी मशीनरी से इसकी जाँच करा सकते हैं ।
13) आदरणीय मोदी जी का वह वक्तव्य याद आ रहा है, वे स्पष्ट कह रहे हैं कि कोई भी नीति हम लोग सोच समझकर और बहुत विचार करने के बाद ही लागू करते हैं। इसका अर्थ है कि भेदभावपूर्ण यूजीसी विनियमन 2026 सरकार द्वारा सुविचारित विनियमन है ।



