भारत के हिस्से डील में नफ़ा है या नुक़सान

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कल्पेश पटेल

रायगढ़ : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया था कि भारत अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के सामान खरीदेगा…..इसमें कोई समय सीमा नहीं बताई थी और ना यह बताया था कि क्या खरीदेगा.

हालांकि यह तय था कि डील की details जब आएँगी, उसमे यह clear होगा.

लेकिन जैसा होता है….हमारे कुछ विघ्नकर्ता और रोंदू type के लोगों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया….. हाय मोदी ने सरेंडर कर दिया…. हाय 500 बिलियन का सामान खरीदने को मजबूर कर दिया… हाय मार दिया 😂😂

जबकि भारत का सालाना import 850 बिलियन डॉलर का है….. तो ऐसे में 500 बिलियन सिर्फ अमेरिका से खरीदना ना संभव है और ना ही practical है.

आज सारी details आ चुकी हैं.

भारत इस समय लगभग 45 बिलियन का सामान अमेरिका से सालाना import करता है…. वहीं 65-70 बिलियन डॉलर का सामान Export करता है.

नई डील में इसे बढ़ाया जाएगा…. और भारत अगले 5 साल में अमेरिका से 500 बिलियन का सामान खरीदेगा…… वहीं बदले में भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी market में बड़े स्तर पर एंट्री मिलेगी

अब सवाल है कि भारत अमेरिका से क्या खरीदेगा?

इसके लिए आपको पिछले दिनों आये बजट की कुछ घोषणाओ को भी ध्यान रखना होगा… क्यूंकि कई चीजें वहां Map हो रही हैं.

India ने नये India–US trade deal में अगले कुछ सालों में USA से बहुत बड़े पैमाने पर सामान खरीदने की प्रतिबद्धता दी है, खासकर energy, defence/aircraft, technology और कुछ agriculture sectors में

मुख्य‑मुख्य चीज़ें जो India USA से आयात करेगा

Petroleum और LNG: भारत अब U.S. petroleum products, LNG और अन्य energy products को थोड़ा ज्यादा आयात करेगा…. आशा है वेनेज़ुएला के क्रूड oil को भी इसी में जोड़ा जाएगा.

Coking coal: Steel sector के लिए U.S. से coking coal खरीदने पर भी समझौते में जोर दिया गया है। भारत दुनिया में Coking Coal import करने वाला सबसे बड़ा देश है…. यह हमारे steel सेक्टर के लिए जरूरी component है. फिलहाल हमारी जरूरत का 40% Coking Coal अमेरिका से आता है…. आगे यह 50%+ होगा.

Defence equipment: Deal के तहत defence materials और संबंधित systems की खरीद बढ़ाई जाएगी… इसमें 100 FGM-148 Javelin anti-tank missiles, 216 M982A1 Excalibur precision artillery rounds, और MQ-9B Sea Guardian drones (नेवी के लिए) जैसी कुछ deals हैं.. जो होने वाली हैं.

Aircraft और Aircraft parts: Civil aviation और defence दोनों के लिए aircraft व उनके parts की बड़ी खरीद के लिये India ने प्रतिबद्धता दी है।

उदाहरण के लिए Tejas MK2 के Engine के लिए GE से TOT डील होने वाली है… वह इसी Framework में आएगा. टाटा ग्रुप मिलिट्री एयरक्राफ्ट बना रहा है.. उसके लिए एयरक्राफ्ट components भी अमेरिका से आएंगे.

इसके अलावा महिंद्रा Defence और अडानी ग्रुप भी Aviation मैन्युफैक्चरिंग में आ गया है… उन्हें भी एयरक्राफ्ट Components चाहिए.

इन सभी Components पर Duty बहुत कम या शून्य हो जायेगी…. हमें सामान सस्ता मिलेगा… फिनिश्ड product भी सस्ता हो जाएगा… हमारा Aviation Export कई गुणा बढ़ेगा.

Electronics और Telecom gear: Electronics, telecom equipment, और broader technology products (जिसमें GPUs और data‑center hardware भी शामिल हैं) के U.S. imports बढ़ाए जाएंगे.

इसमें सबसे ज्यादा खर्च होगा. IT products, Network और Security products… खासकर Hardware अमेरिका से आज भी import होते हैं…. अब उन पर Duty कम होगी… Import बढ़ेगा…. और भारत में Datacenters setup करना… Cloud Region बनाना आसान होगा… क्यूंकि Capex Cost कम हो जायेगी.

भारत बड़े स्तर पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रहा है.. हमें बहुत बड़े स्तर पर Nvidia GPU और अन्य AI Hardware चाहिए. अमेरिका इन उत्पादों का सबसे बड़ा Exporter है…..चीन से हम खरीदेंगे नहीं.. इसलिए अमेरिका से लेंगे… और जो लेंगे, वो अब सस्ता पड़ेगा.. क्यूंकि उस पर tariff कम या शून्य हो जाएगा.

इस बार बजट में भी Cloud Service Providers और Datacenters बनाने वालों को टैक्स छूट दी गई है.

अब बड़े स्तर पर देसी विदेशी कम्पनिया भारत में Cloud Service Region, Datacenters, और GCC बनाएंगी.

अकेला यही segment कई सौ बिलियन डॉलर्स का Investment करवाएगा….. सामान अमेरिका से भी आएगा और हमारा भी लगेगा.

Pharmaceuticals और medical devices: U.S. pharma products और medical devices पर Duty कम होंगी. हम आज भी बड़ी Medical डिवाइस अमेरिका से import करते हैं… अब यह सस्ती होंगी… इससे Medical इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना आसान होगा.

अब भारत भी बड़े स्तर पर Medical डिवाइसस बनाने लग गया है. उनके market पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा.. क्यूंकि Duty कम होने पर भी अमेरिका की डिवाइसस भारतीय डिवाइसस से महंगी होंगी. हाँ.. जिसे केवल अमेरिकी ही चाहिए.. उसे सस्ती मिल जायेगी.

Agricultural products: तमाम हो हल्ले के बीच भारत ने कुछ ख़ास चीजों पर Tariff कम करने पर सहमति दी है….. अच्छी बात यह है कि इससे भारतीय किसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

Almonds, walnuts, pistachios, soybean oil, red sorghum (feed), processed fruits, wine और spirits जैसे U.S. food & agri products पर India ने tariffs कम करने की सहमति दी है, जिससे इनका आयात बढ़ेगा.

Precious metals और stones: Precious metals व कुछ high‑value materials भी लंबे‑अवधि खरीद commitment में शामिल हैं।

कुलमिलाकर यह अच्छी डील है भारत के लिए. इससे हमारा export 1 ट्रिलियन के स्तर को जल्दी ही पार कर लेगा और साथ ही हम 10 ट्रिलियन USD की अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा देंगे.

यहाँ आप भारत अमेरिका की डील को Isolation में मत देखिये… भारत ने पिछले ही दिनों EU, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, New Zealand, Middle East GCC के साथ FTA और अन्य agreement किये हैं…. इन सबका Cascading effect बड़ा जबरदस्त होगा.

सबसे बड़ा असर फार्मा, Textiles, IT Hardware, Defence, Automobiles, Cloud/AI इंफ्रास्ट्रक्चर and services पर पड़ेगा….. Rocket लगने वाला है इन सभी क्षेत्रों को.

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