सीमा कुशवाहा का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 2020 में उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा में प्रदेश महासचिव के रूप में काम किया, लेकिन टिकट न मिलने पर पार्टी छोड़ दी। इसके बाद वे मुकेश साहनी की वीआईपी पार्टी में शामिल हुईं और 2023 में बिहार महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष बनीं। हालांकि, वहां भी स्थायित्व नहीं मिला, और अब वे आरजेडी के साथ जुड़ी हैं, जहां वे तेजस्वी यादव के साथ मंच साझा करती नजर आती हैं।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में करगहर विधानसभा सीट से उनकी उम्मीदवारी की चर्चा थी, लेकिन यह सीट कांग्रेस की सिटिंग सीट है, और कांग्रेस इसे छोड़ने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, जदयू ने नीतीश कुमार के करीबी, हाल ही में वीआरएस लेने वाले आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार राय को इस सीट से उतारने का फैसला किया है, जो कुर्मी समुदाय से हैं और नीतीश के विश्वासपात्र माने जाते हैं।
सीमा कुशवाहा का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित दिखता है। उनकी सोशल मीडिया लोकप्रियता और कुशवाहा समुदाय में पकड़ उन्हें मजबूत बनाती है, लेकिन बार-बार दल-बदल और टिकट न मिलने की स्थिति उनकी विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। यदि आरजेडी उन्हें वैकल्पिक सीट देती है, तो उनकी युवा अपील और सामाजिक जुड़ाव जीत की संभावना बढ़ा सकता है। हालांकि, जदयू और कांग्रेस जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के सामने उनकी राह कठिन है। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने सोशल मीडिया प्रभाव को वोटों में बदल पाती हैं या नहीं।