कांग्रेस का असली खेल: कांग्रेस ने मुसलमानों-ईसाइयों में भी जाति पैदा की

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दिल्ली। भाजपा और कांग्रेस की वैचारिक कहा सुनी में यह बात कांग्रेस ने साबित कर दी है कि भाजपा हिन्दू मुस्लिम करती है। भाजपा सत्तर सालों में यह बात साबित नहीं कर पाई कि कांग्रेस अगड़ा पिछड़ा करती है। उसने समाज को जाति के नाम पर बांटा और जो मुसलमान और क्रिश्चियन गर्व से कहते थे कि उनमें अगड़ा पिछड़ा नहीं है। कांग्रेस ने अपने सत्तर सालों की राजनीति में उनके बीच भी अगड़े और पिछड़े बनाए।

यह सच है कि कांग्रेस हिन्दू-मुसलमान नहीं करती। लेकिन कांग्रेस ने हिन्दू को हिन्दू से लड़ाया। क्रिश्चियन को क्रिश्चियन के खिलाफ खड़ा किया और मुसलमान-मुसलमान के बीच भेद पैदा किया। यह सिम्पल सी बात भाजपा भारतीय समाज को समझाने में सफल नहीं हो पाई है।

भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम विभाजन का आरोप कांग्रेस ने स्थापित कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने इससे कहीं अधिक सूक्ष्म और प्रभावी तरीके से समाज के हर तबके में जाति आधारित भेदभाव पैदा किया, यहां तक कि उन समुदायों में भी जहां जाति की अवधारणा मूल रूप से लागू नहीं होती।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण मुस्लिम समुदाय है। इस्लाम में जाति-व्यवस्था हराम मानी जाती है और कुरान-सुन्नत में सब मुसलमान बराबर बताए गए हैं। लेकिन कांग्रेस ने मुसलमानों के बीच भी ‘अगड़ा-पिछड़ा’ का फर्क पैदा किया। विभिन्न राज्यों में कांग्रेस सरकारों ने मुस्लिम समुदाय की कई जातियों या उप-समूहों को OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) में शामिल किया, जैसे कर्नाटक में ‘श्रेणी 2बी’ के तहत मुस्लिमों को अलग आरक्षण दिया गया। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी कांग्रेस ने मुस्लिमों के लिए 4-5% आरक्षण की कोशिश की, जिसे OBC कोटा से अलग या उसके अंदर व्यवस्थित किया। इससे मुसलमानों में ‘पिछड़े मुसलमान’ और ‘अन्य’ का विभाजन हुआ। कई मुस्लिम नेता और संगठन रिजर्वेशन के लालच में इस्लामी सिद्धांतों को नजरअंदाज कर कांग्रेस के साथ खड़े हो गए।

इसी तरह ईसाई समुदाय में भी कांग्रेस ने ST (अनुसूचित जनजाति) और OBC जैसी श्रेणियां बनाईं। दलित ईसाई या आदिवासी ईसाई को अलग लाभ देने की नीतियां अपनाईं, जिससे एक समान धर्म के लोग आपस में बंट गए। हिंदुओं में तो कांग्रेस ने जाति को राजनीतिक हथियार बनाया ही-ओबीसी, एससी, एसटी के नाम पर वोट बैंक बनाए और अगड़े-पिछड़े की लड़ाई को भड़काया। यह बात जो सार्वजनिक है, भाजपा अपने मतदाताओं को भी आज तक समझा नहीं पाई है।

कांग्रेस की यह नीति ‘तुष्टिकरण’ से आगे बढ़कर समाज को अंदर से तोड़ने वाली रही। मुसलमान जो होली में रंग छू जाने भर से, मरने मारने को उतारू हो जाता है। अपने Religious texts को लेकर इतना प्रतिबद्ध समाज, रिजर्वेशन के लिए जाति स्वीकार करने को तैयार हो गया। मानों मुसलमानों के वर्ग ने कांग्रेस के बहकावे में आकर अपने सेल्फ रिस्पेक्ट से ही समझौता कर लिया! इस तरह कांग्रेस ने मुसलमानों के एक वर्ग को मुसलमानों की मुख्यधारा से काट दिया। कांग्रेसी बहकावे में आकर वे तैयार हो गए एक ही सफ में खड़े होने वालों के बीच अलग सफ में खड़े होने को।

ईसाई समुदाय में भी भेद पैदा हुआ। यह विभाजन कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए किया, लेकिन भाजपा इसे प्रभावी ढंग से उजागर नहीं कर पाई। इस तरह कांग्रेस ने साबित किया कि वह ‘बांटो और राज करो’ की सबसे बड़ी मास्टर है-न सिर्फ हिंदू-हिन्दू में-मुस्लिम-मुस्लिम में, बल्कि हर समुदाय के अंदर।

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आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों से मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान स्टेप से जुड़े हुए हैं

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