कांग्रेस की आईटी सेल के साथ उनके संबंध की बात करें तो यह कहना मुश्किल है कि वे प्रत्यक्ष रूप से इस सेल द्वारा ‘पालित’ हैं या नहीं। हालांकि, उनकी पोस्ट्स में कांग्रेस के प्रति एक स्पष्ट झुकाव और विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा, के खिलाफ आलोचना देखी जा सकती है। यह संभव है कि वे कांग्रेस की विचारधारा से प्रेरित हों या उनकी कुछ पोस्ट्स का उपयोग पार्टी के प्रचार के लिए हो। फिर भी, उनकी अराजक और अतिवादी भाषा कांग्रेस के लिए भी एक ‘लायबिलिटी’ साबित हो सकती है, क्योंकि यह गंभीर राजनीतिक विमर्श को नुकसान पहुंचाती है और पार्टी की छवि को धूमिल कर सकती है।
संदीप जैसे व्यक्तियों का विश्लेषण करते समय यह समझना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर एक्टिविज्म अक्सर ध्यान आकर्षित करने का माध्यम बन जाता है। उनकी लेखन शैली और सामग्री से लगता है कि वे तथ्यों और तर्कों से अधिक भावनात्मक अपील पर निर्भर करते हैं। इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और वे एक गंभीर सामाजिक कार्यकर्ता के बजाय प्रचारक की छवि बनाते हैं। कांग्रेस को ऐसे व्यक्तियों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है, ताकि उनकी विश्वसनीयता और प्रभाव बरकरार रहे।