कांग्रेस पर ‘लायबिलिटी’ तो नहीं बन रहा संदीप सिंह

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दिल्ली। संदीप सिंह, जो स्वयं को ‘द एक्टिविस्ट संदीप’ के रूप में प्रस्तुत करते हैं और सोशल वर्कर होने का दावा करते हैं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। उनकी पोस्ट्स और लेखन शैली पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि उनकी भाषा अक्सर आक्रामक, अतिशयोक्तिपूर्ण और तथ्यात्मक रूप से कमजोर होती है। यह लेखन शैली न केवल उनकी विश्वसनीयता को कम करती है, बल्कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को भी गंभीरता से लेने में बाधा डालती है। उनकी पोस्ट्स में तर्क की कमी और भावनात्मक उत्तेजना का अधिक उपयोग देखा जाता है, जो एक प्रभावी सामाजिक कार्यकर्ता के लिए आवश्यक संतुलन का अभाव दर्शाता है।

कांग्रेस की आईटी सेल के साथ उनके संबंध की बात करें तो यह कहना मुश्किल है कि वे प्रत्यक्ष रूप से इस सेल द्वारा ‘पालित’ हैं या नहीं। हालांकि, उनकी पोस्ट्स में कांग्रेस के प्रति एक स्पष्ट झुकाव और विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा, के खिलाफ आलोचना देखी जा सकती है। यह संभव है कि वे कांग्रेस की विचारधारा से प्रेरित हों या उनकी कुछ पोस्ट्स का उपयोग पार्टी के प्रचार के लिए हो। फिर भी, उनकी अराजक और अतिवादी भाषा कांग्रेस के लिए भी एक ‘लायबिलिटी’ साबित हो सकती है, क्योंकि यह गंभीर राजनीतिक विमर्श को नुकसान पहुंचाती है और पार्टी की छवि को धूमिल कर सकती है।

संदीप जैसे व्यक्तियों का विश्लेषण करते समय यह समझना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर एक्टिविज्म अक्सर ध्यान आकर्षित करने का माध्यम बन जाता है। उनकी लेखन शैली और सामग्री से लगता है कि वे तथ्यों और तर्कों से अधिक भावनात्मक अपील पर निर्भर करते हैं। इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और वे एक गंभीर सामाजिक कार्यकर्ता के बजाय प्रचारक की छवि बनाते हैं। कांग्रेस को ऐसे व्यक्तियों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है, ताकि उनकी विश्वसनीयता और प्रभाव बरकरार रहे।

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