आचार्य श्रीहरि
दिल्ली । घोर आश्चर्य ,भीषण आश्चर्य, आत्मघाती आश्चर्य, समर्पण कारी आश्चर्य, विश्वास घात का आश्चर्य, वैचारिक पतंग का आश्चर्य, नैतिक पतन का आश्चर्य, रंगबदलू दलबदलू, विश्वास घाती आदि यही सब मेरे खिलाफ बका जा रहा है, बोला जा रहा है , प्रचारित किया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि मुझे धमकियां भी मिल रही हैं कि बर्बाद हो जाओगे, कीड़े मकोड़े की तरह मारे जाओगे, हाशिए पर फेक दिए जाएंगे, बात करने वाला भी कोई नहीं मिलेगा, कुत्ते बिल्ली की मौत होगी। इसके अलावा मुझ पर हिंदुत्व से गद्दारी करने, घुसपैठिए होकर राष्ट्रवादी हिंदूवादी होने का ढोंग रचने का भी आरोप लग रहा है। इन सभी नकारात्मक भावनाओं और प्रतिक्रियाओं से मेरा अटल विचार और सक्रियताए न तो प्रभावित होती हैं और न हीं रुकती है, खतरों से खेलना, आग के ऊपर चलना, बिल्ली के गले में घंटी बांधना, दुश्मन के दांव में जाकर मार करना, मेरा प्रिय स्वभाव और कर्म है, चट्टानों , समुद्र के लहरों से टकरा टकरा कर जितना या फिर टकरा टकरा कर चूर चूर हो जाना मेरी नियति रही है।
मेरा अपराध क्या है? मेरा दोष क्या है? मेरा कर्म क्या है? क्या मैं सही में इस तरह के आरोपों का पात्र हूं? क्या सही में मैं इस तरह लांछनों का अभियुक्त हूं? मेरा अपराध, मेरा दोष, मेरा कर्म भी देख लीजिए, मेरा अपराध, मेरा दोष, मेरा कर्म सिर्फ इतना है कि मैने कांग्रेस से चुनाव लड़ने का आत्म फैसला ले लिया, आत्म निर्णय ले लिया। अब यहां यह प्रश्न उठता है कि हमने कांग्रेस से चुनाव लड़ने का फैसला और निर्णय क्यों लिया? मुझसे वजहें पूछी जा रही है, कारण पूछा जा रहा है। व्यक्ति की स्वतंत्रता अच्छुन्न होती है, दबाव रहित होती है और नैसर्गिक होती है। कोई भी व्यक्ति इस तरह का आत्म निर्णय लेने पात्र होता है, अपना राज और अपनी नीति हमेशा गोपनीय होती है। मै बाध्य नहीं हूं कि यह बताऊं कि हमने कांग्रेस से चुनाव लड़ने का निर्णय क्यों लिया? मुझे कोई बाध्य भी नहीं कर सकता है।
मैं कौन हूं ? यह मुझे भी नहीं मालूम है। मै सिर्फ इतना जानता हूं कि मैं एक साधारण मनुष्य हूं, मै कोई हैसियत वाला मनुष्य नहीं हूं, मै अपने परिश्रम का भी उचित मजदूरी लेने में नाकाम रहा, अपने परिश्रम का सम्मान लेने से भी वंचित रहा। सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी
सच है दुनियावालों कि हम हैं अनाड़ी, बस इसी मंत्र के साथ दौड़ता चला गया, न मुड़कर देखा और ना ही आराम किया।कालनेमियो की धमाचौकड़ी के मकड़जाल को तोड़ा, उनकी लालच, उनकी सहानुभूति, उनके शब्दजाल के बहकावे मे नहीं फसा, अकेला था, अकेला ही लड़ा, ना कोई दोस्त बना और ना ही कोई हितैषी बना, जब आप किसी के हित को संरक्षित नहीं करते हैं, किसी के लालच को तुष्ट नहीं करते हैं, किसी के लिए चांद सितारे की मानसिकता की सवारी नहीं कराते हैं तो फिर आप बेकार मनुष्य हैं, निरर्थक मनुष्य हैं, धरती के बोझ है, मनुष्य के नाम पर कलंक है, ऐसे चरित्र और कर्म के मनुष्य का कोई दोस्त या हितैषी हो ही नहीं सकते हैं, ऐसे चरित्र और कर्म के मनुष्य सिर्फ और सिर्फ अपमान, तिरस्कार, उपेक्षा और कलंक के पात्र बना दिए जाते हैं। मैने अपनी जिंदगी ना जाने कितने बार, कसूरहीन,बेवजह अपमान, तिरस्कार, उपेक्षा, कलंक का दंश झेला, इसकी कोई गिनती नहीं है, फिर भी मै डिगा नहीं , कोई चिंता या अवसाद नहीं, क्योंकि मैने ऐसी जिंदगी खुद चुनी थी, मैने राष्ट्र और सनातन के प्रहरी बनना, संरक्षक बनना स्वयं चुना था, ब्रह्मचर्य रहकर जिंदगी का बलिदान कर देना मेरा खुद लक्ष्य था तो फिर मलाल कैसा?
कांग्रेस मुझे अपनी पार्टी में शामिल क्यों करेगी, मुझे चुनाव का टिकट कांग्रेस क्यों देगी, मैने तो जिंदगी भर कांग्रेस की कब्र खोदी है , कांग्रेस को नंगा किया है, कांग्रेस के सनातन विरोधी नीतियों को उजागर किया है, जाने अनजाने में संघ और बीजेपी के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया है। ये सभी बातें सौ आने सही हैं, दुरुस्त हैं, मै जन्मजात कांग्रेस विरोधी रहा हूँ, कांग्रेस विरोध का खून मेरे रगो में दौड़ता रहा है, मेरा पूरा खानदान ही कांग्रेस विरोधी रहा है, कांग्रेस विरोध का ज्ञान हमने परिवार से ही सीखा है। मैने इमरजेंसी देखी थी, सिख दंगा देखा था, कश्मीर में सनातनियों का संहार देखा है, उनका कत्लेआम देखा है, मैने गोधरा नरसंहार को देखा है, कारसेवकों की वीभत्स और छत विक्षत शवों को देखा था, मैने गोधरा कारसेवकों के नरसंहार पर सोनिया गांधी और अन्य कांग्रेसियों का अतिरंजित और अपमान जनक बयानबाजी देखी है, हिंदू कारसेवक मरने लायक थे और मर गए, ऐसी कांग्रेसी मानसिकता देखी है, गुजरात दंगों को लेकर हिंदुओं को दंगाई कहने, हिन्दुओं को मौत का सौदागर कहने वाली बयानबाजी देखी है, देश को हिंदुओं से खतरे की राहुल गांधी की बात मैने सुनी है, मैने भारत विखंडन की कांग्रेसी करतूत पढ़ी है, मैने भारत विखंडन में दस लाख से अधिक हिंदुओं के कत्लेआम को पढ़ा है, मैने डायरेक्ट एक्शन को पढ़ा है, मैने हिंदू विरोधी संविधान को पढ़ा है, फिर मै कांग्रेस विरोधी क्यों नहीं होता, कांग्रेस विरोधी होने के पीछे की मेरी कहानी यही है।
हिंदू कौन हैं? इस पर मेरी समझ अपनी अलग है और बनी बनाई अवधारणा से बहुत भिन्न है। मात्र भगवा रंग पहनने वाले हिंदू कदापि नहीं है,मंदिर जाने वाले सभी लोग हिंदू नहीं होते हैं, प्रति दिन करोड़ों लोग मंदिर जाते हैं पर वे लालची, ढोंगी, मनोरंजन कारी होते हैं, आप इन्हें उसी मंदिर की सुरक्षा के लिए आमन्त्रित कीजिए, पांच लोग भी सामने नहीं आयेंगे। इसीलिए मैं मंदिर जाकर नाचने गाने वाले लोगों को हिंदू नहीं मानता हूं। हिंदू तो वीर शिवाजी थे, जिन्होंने मुगलों की ताकत तलवारों पर तोली थी, हिंदू तो वीर सावरकर थे, जिन्होंने हिंदुओं को चिरवायु होने, सुरक्षित होने का मंत्र दिया था, हिंदुओं का सैन्यीकरण और राजनीति का हिंदूकरण का सिद्धांत दिया था, हिंदू सिर्फ इसी सिद्धांत पर चलकर बच सकते हैं, मै इसी सिद्धांत का सारथी हूं। हिंदू तो बिरसा मुंडा थे, जिन्होंने अंग्रेजों और ईसाई मिशनरियों को भगाने के लिए हूलगुलान शुरू किया था। शेष सभी नाममात्र के कालनेमी हिंदू हैं।
कांग्रेस एक अंग्रेज ए यू ह्यूम के वीर्य से पैदा लेकर अपने आप को भारत के विरासत होने का दावा कर सकती है? क्या यह सही नहीं है कि कांग्रेस की स्थापना एक अंग्रेज ए यू ह्यूम ने अंग्रेजी शासन की दलाली के लिए की थी। एक ढोंगी, हिंसक और मुस्लिम परस्ती के लिए कुख्यात महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित कांग्रेस कर सकती है। क्या महात्मा गांधी ने खिलाफत आंदोलन को समर्थन नहीं दिया था, क्या महात्मा गांधी ने दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों की सुरक्षा के लिए भारतीय सैनिकों को भेजने का समर्थन नहीं किया था? कांग्रेस उस मुस्लिम लीग से दोस्ती कर चुनाव लड़ सकती हैं, मुस्लिम लीग की चरण वंदना कर सकती है जिस मुस्लिम लीग ने भारत विभाजन कराई थी। कश्मीर में सनातनियों का संहार और कत्लेआम करने वाले मुस्लिम आतंकियों को कांग्रेस में शामिल करा सकती है , उनकी चरण वंदना कर सकती है, तमाम तरह के हिंदू विरोधी मुसलमानों और ईसाइयों के लिए कांग्रेस अपने घर में जगह बना सकती है और सम्मान दे सकती है, हिन्दुओं के अस्तित्व संहार के लिए कुख्यात और हिंसक गिरोहों को साथ रख सकती हैं, उन्हें मंत्री बना सकती है, सांसद बना सकती है, कांग्रेस को हिंदुओं की पार्टी कहने वाले जिन्ना के औलादों को कांग्रेस गले लगा सकती है तो फिर सिर्फ हिंदुओं से ही कांग्रेस को दुश्मनी क्यों रखनी चाहिए? कांग्रेस को मेरे जैसे पक्के हिंदूवादी, राष्ट्रवादी शख्सियत को गले लगाने में झिझक नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस को लाभ क्या है? स्वतंत्र भारत में कांग्रेस ने आज तक एक भी पक्के, निडर हिंदू को जगह नहीं दी है, हिंदुत्व के नाम पर सेक्युलर और कालनेमी हिंदुओं को स्थापित किया है जो सिर्फ हिंदुओं की कब्र ही खोदी है, मुस्लिम और ईसाई अस्मिताओं का ही संरक्षण किया है। कांग्रेस को मै एक दृष्टि देता हूं। नरेंद्र मोदी ने हिंदू विरोधियों को भी गले लगाया, कांग्रेसियों को तोड़ तोड़ कर अपनी पार्टी समृद्ध की है। हेमंता शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया, जगदीप धनकड़ को उप राष्ट्रपति बनाया, आज की तारीख में बीजेपी के 60 प्रतिशत सांसद घुसपैठिए, दलबदलू, हिंदू विरोधी है। ठीक इसी प्रकार मेरे जैसे पक्के निडर हिंदू वादी, राष्ट्रवादी को स्थापित कर कांग्रेस अपना हिंदू विरोधी पाप, कलंक धो सकती है, अपनी खोई हुई खानदानी सत्ता हासिल कर सकती है, अब हिंदू समर्थन के बिना कांग्रेस को सत्ता कदापि नहीं मिल मिलेगी, इसलिए कांग्रेस को हिंदुओं के साथ दुश्मनी समाप्त करनी ही होगी। इस प्रश्न पर कांग्रेस मेरे साथ वार्ता रणनीति की रहा पर चल रही है।



