कार्पोरेट जिहाद : गैर मुसलमानों पर नए संकट के रूप में सामने आया है नासिक कन्वर्जन केस

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दिल्ली । अभी तक आपने लव जिहाद, लैंड जिहाद, जनसंख्या जिहाद, धर्मांतरण जिहाद, थूक जिहाद, ड्रग जिहाद के बारे में सुना होगा, किंतु इस बार जो नया इस्‍लामिक जिहाद सामने गैर मुसलमानों के लिए संकट के रूप में आया है, वह है कार्पोरेट जिहाद।

वैसे हर जिहाद की अपनी एक शैली है, मसलन लव जिहाद में मुस्लिम युवक हिंदू एवं अन्‍य गैर मुसलिम लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाकर, पहचान छिपाकर या प्रलोभन देकर शादी करते हैं और धर्मांतरण कराते हैं। लैंड जिहाद में सरकारी या अन्य समुदाय की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने या मजहबी स्थल बना दिया जाता है।

जनसंख्या जिहाद वह है जिसमें कि तेजी से जनसंख्या बढ़ाकर डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) बदलने की सोची-समझी साजिश रची जाती है और क्षेत्र को अपनी जनसंख्‍या में बहुसंख्‍यक कर वहां अल्‍पसंख्‍यक हो चुके लोगों पर प्रताड़ना आरंभ कर दी जाती है। धर्मांतरण जिहाद, जबरन या लालच देकर इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराना है। थूक जिहाद खाद्य पदार्थों में थूककर या अशुद्ध करके बेचना, जिसका वीडियो अक्‍सर सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। ड्रग जिहाद दरअसल युवाओं को नशे की लत में फंसाकर कमजोर करने के लिए अभी तक जाना जाता रहा है, पर अब जो संकट आन खड़ा है, वह है कार्पोरेट जिहाद का।

महाराष्ट्र के नासिक शहर से सामने आया कन्वर्जन और उत्पीड़न से जुड़ा मामला इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी से जुड़ा है, जहां काम करने वाली कुछ महिला कर्मचारियों ने अपने साथ यौन शोषण, धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप उन लोगों पर लगाए हैं, जोकि मुसलमान हैं।

उक्‍त मामला तब सामने आया है, जब कंपनी में काम करने वाली कुछ महिला कर्मचारियों के व्यवहार और जीवनशैली में अचानक बदलाव देखा गया। सहकर्मियों के अनुसार, इन महिलाओं ने अपने पहनावे और रहन-सहन में बड़े बदलाव किए। उन्होंने पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से दूरी बनानी शुरू कर दी, रमजान के दौरान रोजा रखने लगीं और अपनी पुरानी आदतों को छोड़ दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने मित्रों और सहेलियों से भी दूरी बना ली और अपने व्यक्तिगत जीवन में भी बदलाव दिखने लगा।

शुरुआत में इन महिलाओं ने डर, सामाजिक दबाव और नौकरी खोने की आशंका के चलते चुप्पी साधे रखी, लेकिन समय के साथ जब स्थिति असहनीय हो गई, तब नौ महिला कर्मचारियों और एक पुरुष कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद यह मामला सार्वजनिक रूप से सामने आ सका है।

गंभीर आरोप: शोषण और धर्म परिवर्तन का दबाव

पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी के कुछ वरिष्ठ कर्मचारी, विशेष रूप से टीम लीडर्स और एचआर मैनेजर, अपने पद का दुरुपयोग कर इन्‍हें इस्‍लाम में कन्‍वर्ट करने का लगातार प्रयास कर रहे थे। कर्मचारियों को नौकरी में आगे बढ़ने, प्रमोशन और बेहतर अवसरों का लालच दिया जाता था। इसके बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता और धीरे-धीरे उन पर धार्मिक दबाव बनाया जाता था। कुछ पीड़ितों ने तो यहां तक बताया कि उन्हें गोमांस खाने के लिए मजबूर किया गया और ऑफिस परिसर में नमाज पढ़ने का दबाव डाला गया। साथ ही, उनके धार्मिक हिन्‍दू आस्‍थाओं, प्रतीकों का अपमान किया गया और उनकी अपनी श्रद्धा को कमजोर करने की कोशिश की गई।

इस मामले में यह भी सामने आया कि यदि कोई कर्मचारी विरोध करता था या दूरी बनाने की कोशिश करता था, तो उसे धमकाया जाता था। यहां तक कि कुछ मामलों में उनके परिवार वालों से संपर्क करने की भी कोशिश की गई। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने इसकी गहराई में जांच करने का निर्णय लिया। पुलिस के अनुसार, यह मामला संगठित तरीके से चलाया जा रहा था, जिसके कारण सबूत जुटाना चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए महिला पुलिसकर्मियों को भेष बदलकर कंपनी में भेजा गया। उन्होंने अंदर रहकर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी और महत्वपूर्ण सबूत जुटाए। उन्होंने उनके व्यवहार और लड़कियों से बात करने के तरीके के सबूत जुटाए।

जांच के दौरान पुलिस ने करीब 40 स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इनमें आरोपियों द्वारा महिला कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार, छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों के कई मामले सामने आए। इसके अलावा पुलिस ने पीड़ितों से संवाद स्थापित कर उनका विश्वास जीता, जिससे वे खुलकर अपनी बात रख सकीं। तब जाकर त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कंपनी के छह टीम लीडर्स और एक एचआर मैनेजर शामिल हैं। इन सभी पर यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न, धमकी देने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप हैं।

“वीकेंड ट्रिप” के नाम पर शोषण

जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। आरोप है कि कर्मचारियों को “वीकेंड ट्रिप” के नाम पर बड़े रिसॉर्ट्स या वाटर पार्क ले जाया जाता था। वहां उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जाता और उन पर दबाव बनाया जाता था। यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की जाती थी, ताकि पीड़ितों को मानसिक रूप से कमजोर किया जा सके। हिन्‍दू पीड़‍ित युवतियों ने साक्ष्‍यों के साथ बताया कि उन्होंने पिछले चार वर्षों में कई बार एचआर विभाग से शिकायत की थी, लेकिन हर बार उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।

देखा जाए तो यह पूरा प्रकरण कार्यस्थल के भीतर पनप रही एक गंभीर और चिंताजनक इस्‍लामिक जिहादी प्रवृत्ति की व्यापक तस्वीर पेश करता है, जहाँ महिलाओं की गरिमा, उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आस्था तीनों को एक साथ चुनौती दी गई है, उसकी लिए खतरा पैदा किया गया। इस मामले में छह प्रमुख आरोपितों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और आसिफ अंसारी के खिलाफ कुल नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें एक टीम लीडर और एचआर विभाग से जुड़ा एक प्रतिनिधि भी शामिल है। शिकायत करने वाली अधिकांश महिलाएँ 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हैं, जोकि इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक गंभीर बना देता है।

यदि इस प्रकरण की परतें खोलें, तो सामने आता है कि कुछ मामलों में रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के साथ अश्लील बातचीत की, उसके शरीर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं और बार-बार मना करने के बावजूद उसके निजी जीवन में दखल देता रहा। आरोप यह भी है कि वे उस पर नजर रखता था और मानसिक व शारीरिक रूप से उसे प्रताड़ित करता रहता।

दूसरी ओर, तौसीफ अत्तर और दानिश शेख से जुड़े मामलों में आरोप और भी गंभीर रूप में सामने आते हैं। एक पीड़िता के अनुसार, तौसीफ अत्तर ने विवाह का झाँसा देकर उसके साथ संबंध बनाए, जबकि दानिश शेख ने कार्यस्थल पर अश्लील हरकतें कीं। इन दोनों पर हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम अक्‍सर किया । निदा खान का नाम भी एक प्रकरण में सामने आया है, जहाँ धार्मिक अपमान से जुड़ी शिकायत दर्ज की गई है।

शफी शेख और आसिफ अंसारी के खिलाफ भी कई शिकायतें दर्ज हुई हैं। इन दोनों ने महिलाओं के प्रति अश्लील शारीरिक टिप्पणियाँ कीं, उन्हें गलत नजर से देखा और अनुचित तरीके से छूने की कोशिश की। कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि मीटिंग जैसे औपचारिक माहौल में भी शफी शेख ने मर्यादा का उल्लंघन करते हुए अपमानजनक व्यवहार किया, अश्‍लील हरकतें करता था।

एक अन्य गंभीर पहलू उन घटनाओं का है, जहाँ कई आरोपित जिनमें तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और दानिश शेख शामिल हैं पर सामूहिक रूप से धार्मिक दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। पीड़िताओं का कहना है कि उन्हें जबरन नमाज पढ़ने के लिए बाध्य किया गया और मांसाहार करने के लिए दबाव बनाया गया, ताकि उनका धर्म परिवर्तन कराया जा सके। इसके साथ ही, देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ कर कार्यस्थल का माहौल असहज और भयपूर्ण बनाया गया।

कुछ मामलों में आरोपितों का व्यवहार संगठित रूप में सामने आता है। उदाहरण के तौर पर, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और शफी शेख पर एक पीड़िता का पीछा करने, अश्लील टिप्पणियाँ करने और दुर्भावनापूर्ण इरादे से उसे छूने के आरोप हैं। इन सभी पर मिलकर पीड़िता के धर्म के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग कर माहौल को दूषित करने का भी आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा, कुछ घटनाओं में पीड़िताओं के निजी जीवन को निशाना बनाया गया। तौसीफ अत्तर पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला के वैवाहिक जीवन और संतान न होने जैसे निजी विषयों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं और जबरन नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। वहीं, रजा मेमन और शफी शेख पर यह आरोप है कि उन्होंने एक अन्य पीड़िता के साथ जबरदस्ती नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की, उसके शरीर को लेकर अश्लील टिप्पणियाँ कीं और अनुचित व्यवहार किया।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और चिंताजनक पहलू यह सामने आया कि शिकायतों के बावजूद कंपनी स्तर पर समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे आरोपितों का मनोबल बढ़ा और घटनाएँ लगातार दोहराई जाती रहीं, जिससे पीड़िताओं को और अधिक मानसिक व सामाजिक दबाव झेलना पड़ा।

फिलहाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें एचआर विभाग से जुड़ी एक महिला भी शामिल है। इस पूरे मामले की जाँच एसीपी (क्राइम) संदीप मिटके के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) द्वारा की जा रही है। साथ ही, पुलिस ने अन्य संभावित पीड़िताओं से आगे आने की अपील की है और संपर्क के लिए व्हाट्सऐप नंबर (9923323311) जारी किया है। पुलिस को उम्‍मीद है कि कम से कम 50 से अधिक पीड़‍िताएं सामने आएंगी।

महाराष्‍ट्र सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। वहीं, कुछ राजनीतिक नेताओं ने इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” जैसे शब्दों से भी जोड़ा गया है और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या साजिश की आशंका जताई जा रही है।

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