विष्णु शर्मा
दिल्ली। धुरंधर 2 को लेकर उसके विरोधी भी इस एक बात पर तो सहमत हैं कि ये मूवी नहीं बवंडर है, बॉक्स ऑफिस पर सुनामी ला रही है और कई सारे रिकॉर्ड्स तोड़ने वाली है. वैसे इसमें जितना इसके कलाकारों, लेखक, निर्देशक और प्रशंसकों को श्रेय जाएगा, इसके विरोधियों को भी मिलेगा क्योंकि बिना फ़िल्म समीक्षकों और प्रमोशन के गालियाँ दे देकर उन्होंने इस मूवी को घर घर की चर्चा बना दिया है.
पहले जान लेते हैं कि लोग इस मूवी से क्यों दुखी हैं? क्योंकि एक तो इसमें मोदी जी हैं, नोटबंदी का ऐलान कर रहे हैं. फिर इसमें नोटबंदी क्यों की गई, उसका कनेक्शन ISI की नकली नोटों की साजिश को नेस्तनाबूद करने से जोड़ा गया है. हालांकि फ़िल्म में नोटबंदी से हुई परेशानियों और बैंक मैनेजर्स के गोलमाल के चलते सरकार द्वारा उसे उपलब्धि ना मानने का ज़िक्र नहीं. सो उनके इस दुख में कुछ मोदी जी के प्रशंसक भी हैं.
दूसरा दुख जिसे ढंग से व्यक्त नहीं कर पा रहे, वो है माफिया अतीक अहमद का कनेक्शन ISI से दिखाना और रॉ द्वारा उसे मरवाना. ‘सदियों तलक कोई अतीक अहमद नहीं होगा’ गाने वाले सांसद शायर तो शॉक में ग़ायब ही हो गए हैं. लेकिन ‘धुरंधर 2’ ने ऐसे इंतज़ाम कर दिए हैं कि दोबारा हो भी नहीं. ईद से पहले कुछ लोग इस बात से भी नाराज हैं कि एंटी मुस्लिम फ़िल्म दिखायी गई और इसमें दाऊद इब्राहिम यानी बड़े साहब और अतीक अहमद के किरदार दो मुस्लिम कलाकारों ने ही किए हैं. सब पर भारी पड़ते दिखे हैं अतीक का रोल करने वाले सलीम सिद्दीकी, जितनी देर स्क्रीन पर रहे, लोगों के चेहरे पर मुस्कान थी और पलक यहीं झपकाईं. हालांकि पुलिस की चार्जशीट में अतीक का कुबूलनामा ISI से रिश्तों का खुलासा करता है.
एक और आरोप है कि काल्पनिक घटनाओं को भी सच्चे की तरह प्रस्तुत किया गया. जबकि सच ये है कि एक काल्पनिक किरदार जसकीरत सिंह रांगी यानी हमजा अली मदारी )रणवीर सिंह) के बहाने कई सारी सच्ची घटनाओं को जोड़कर ये मूवी बनाई गई है. हालांकि कुछ शरारतें भी हैं, जैसे जमील जमाली (राकेश बेदी) के किरदार का क्लाइमेक्स में जबरदस्त खुलासा . इससे पाकिस्तान में असली वाले नेताजी परेशान हो गए हैं कि अब बड़े साहब भी उन पर शक करने लगेंगे.
अब जानिये मूवी में ऐसा क्या है कि ये पहली वाली से भी बेहतर होने जा रही है. पहली मूवी में अक्षय खन्ना और काफ़ी हद तक संजय दत्त भी लोगों को पसंद आए थे, इस चक्कर में रणवीर का किरदार दबता सा लगा था, हालांकि वो स्क्रिप्ट की माँग थी. ‘धुरंधर 2’ रणवीर के रोल को ‘लार्जर देन लाइफ’ बना देती है. पहले सीन से ही रणवीर ‘एनिमल’ के रणबीर को मात देते दिखते हैं. इमोशनल से लेकर रोमांटिक और फाइट सीन्स तक रणवीर सिंह में आप फिर से ‘बाजीराव’ को देखते हैं.
मूवी का एक बेहतरीन हिस्सा है गुमनाम बंदूकधारियों का पाकिस्तान में आतंक, एक एक करके उन सारी आतंकी हरकतों के बदले लिए गए जो उन्होंने भारत में अंजाम दी थीं. रुपेन कात्याल के हत्यारे के मुंह से जिस तरह अजीत डोभाल बने अजय सान्याल (माधवन) ने लाइव चैट पर ‘भारत माता की जय’ कहलवाया, थिएटर तालियों से गूंज गया. बलूचों का जो इस्तेमाल इस मूवी में दिखा है, वो रियल से कम नहीं लगता. लियारी की गैंगवार का लाइव वीडियो कई साल से वायरल था, वो भी पर्दे पर दिखी. ऐसे में आम देशभक्त भारतीयों को पाकिस्तान की राजनीति, गैंगवार को इतनी बारीकी से समझने का मौक़ा पहली बार मिला है. इसके लिए आदित्य राज कौल की रिसर्च और आदित्य धर के निर्देशन जॉय स्टैंडिंग ओविएशन बनता ही है. ख़ास तौर पर जस्सी के पहले जीवन को शानदार तरीके से दिखाना. रणवीर का किरदार जितना रियल दिखाया गया था, उससे वो इसी दुनिया का लगा. उसके अलावा पिंडा के रोल में उदयवीर संधू और दाऊद के रोल में दानिश इकबाल प्रभावित करते हैं. आलम के रोल में गौरव गेरा का रोल तो पहली के मुक़ाबले और भी बढ़िया था.
पाकिस्तान पर जब भी कोई मूवी बनती है, तो भारत में एक बड़ा तबका रहा है जो उसे आतंकी अड्डे वाला देश दिखाने से बचता है, बल्कि मैं हूँ ना, बजरंगी भाईजान या टाइगर सीरीज की तरह अमन पसंद और आतंक का भुक्तभोगी दिखाने में ज़्यादा दिलचस्पी रखता है. ऐसे में ये पाकिस्तान की ये ठेठ आतंकी तस्वीर उन्हें विचलित करती है.
ये सही है कि इस दूसरी मूवी में अक्षय खन्ना के एंट्री सॉंग जैसा कोई गाना नहीं बन पाया लेकिन ये भी सच है कि ये मूवी पहली वाली से बेहतर है. बावजूद उसके मूवी कई बड़े मुद्दों-घटनाओं को छोड़ती हुई आगे बढ़ती है. अतीक अहमद तो लिया लेकिन मुख्तार अंसारी, इंडियन मुजाहिदीन बनाकर देश भर में बम धमाके करने वाले भटकल भाइयों को छोड़ दिया. देश की उस अजेंडख़ोर विद्वान जमात का भी कुछ नहीं दिखाया जो पाकिस्तान परस्ती में अपने देश की हर अच्छी बात का विरोध करती है. मूवी कश्मीर भी नहीं जाती जबकि उसी समय जमशेद ख़ान के स्टिंग ऑपरेशन से पूरी हुर्रियत के कारनामों के खुलासे के बाद उसका बोरिया बिस्तर बांध गया था. फ़िल्म ऐसे लोगों के बारे में भी कुछ नहीं कहती जो देश के हर संवेदनशील ठिकाने पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर उसकी लाइव फीड पाकिस्तान में दे रहे है.
Star Rating: 4.5
बावजूद इसके मूवी आपको 3 घंटे 40 मिनट तक पलकें भी झपकाने नहीं देती. रही बात म्यूजिक की तो कई पुराने गाने जैसे हम प्यार करने वाले.., ओये ओये, बाजीगर ओ बाजीगर जैसे गाने आनंद देते हैं. संजय दत्त (एसपी असलम) की मैयत पर बजा उनका ही गाना तम्मा तम्मा लोगे.. लोगों के चेहरों पर दिलचस्प मुस्कान लाता है. महिला किरदार थोड़ी थोड़ी देर के लिए आयीं लेकिन दमदारी के साथ. गोरी भाभी ने इस बार हमजा के थप्पड़ लगाया, तो निर्देशक आदित्य की पत्नी याम्मी गौतम धर आरके आतंकी को सजा देने आयीं और सारा अर्जुन पर हमजा की असलियत खुलने के बाद की प्रतिक्रिया देखने लायक थी. अंत में मूवी के विलेन अर्जुन रामपाल का जिक्र जरूरी है, क्योंकि उन्हीं हीरो के कद के बराबर ही विलेन को खतरनाक बनाये रखा. सो उनकी मौत का सीन भी काफ़ी खतरनाक रखा गया है. हालाकि क्लाइमेक्स में राकेश बेदी सब पर भारी पड़ते हैं.



