हरिद्वार: प्रेस क्लब हरिद्वार एवं भारतीय संवाद परिषद के संयुक्त तत्त्वावधान में एक भावपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रेस क्लब सभागार में 1986 से 2025 तक के सभी पूर्व अध्यक्षों के चित्रों का लोकार्पण किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शिवशंकर जायसवाल, कौशल सिखौला एवं गोपाल रावत ने संयुक्त रूप से इन चित्रों का अनावरण किया। यह पहल प्रेस क्लब की कार्यकारिणी द्वारा पत्रकारिता के इतिहास को संरक्षित करने और पूर्वजों के योगदान को याद रखने के उद्देश्य से की गई है।

समारोह में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने अनुकरणीय योगदान के लिए प्रसिद्ध स्वर्गीय वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कमलकांत बुधकर की स्मृति में प्रेस क्लब सभागार का नामकरण “बुधकर भवन” के रूप में किया जाएगा। डॉ. बुधकर हरिद्वार प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य, कविता एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में हिन्दी पत्रकारिता के प्राध्यापक रह चुके थे और कुम्भ मेले जैसे बड़े आयोजनों में सक्रिय पत्रकार के रूप में जाने जाते थे।
प्रेस क्लब के वर्तमान अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी एवं महामंत्री दीपक मिश्रा ने कहा, “स्वर्गीय डॉ. कमलकांत बुधकर के आदर्शों और योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी स्मृति में सभागार का नाम ‘बुधकर भवन’ रखना हमारे लिए गौरव की बात है। हम सभी पत्रकार उनके दिखाए मार्ग पर चलकर पत्रकारिता के मिशन को ईमानदारी से निभाएंगे।”
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रेस क्लब में होली मिलन कार्यक्रम भी उत्साह के साथ मनाया जाएगा, जिसमें सदस्यों और अतिथियों की भागीदारी रहेगी।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शिवशंकर जायसवाल एवं आदेश त्यागी ने पूर्व अध्यक्षों के चित्र स्थापित करने और सभागार के नामकरण के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब हमेशा से पत्रकारों के हितों के लिए निर्णायक भूमिका निभाता रहा है और यह कदम इतिहास को जीवंत रखने की दिशा में सराहनीय है।
कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष काशीराम सैनी, कौशल सिखौला, गोपाल रावत, रमेश खन्ना, रजनीकांत शुक्ला, सुभाष कपिल, बालकृष्ण शास्त्री, अविक्षित रमन, प्रदीप गर्ग, आदेश त्यागी, दीपक नौटियाल, संजय आर्य, अमित शर्मा, अमित गुप्ता सहित अन्य गणमान्य पत्रकार और सदस्य उपस्थित रहे।
यह समारोह हरिद्वार की पत्रकारिता जगत में सम्मान और स्मृति को जीवित रखने की एक खूबसूरत मिसाल पेश करता है।
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पत्रकारिता और साहित्य की दुनिया से परिचय कराने और इन विधाओं का संस्कार देने वाले एकमेव मार्गदर्शक व गुरु मेरे पूज्य मामा की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए हरिद्वार के पत्रकार बन्धुओं व साहित्य समाज के सभी महानुभावों के प्रति सादर विनत हूँ।



