डॉ. मोहन भागवत जी का संदेश – “शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण का माध्यम है”

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भोपाल: विद्या भारती द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग 2025 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि “शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना भी है।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्व आज भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को इस प्रकार विकसित करना होगा, जिससे व्यक्ति का चरित्र निर्माण हो और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए।

प्रमुख बिंदु:

✅ “विद्या भारती केवल शिक्षा नहीं देती, बल्कि समाज को सही दिशा भी देती है।”
✅ तकनीक के उपयोग के लिए मानवीय नीति आवश्यक – जो अच्छा है, उसे अपनाना होगा, और जो गलत है, उसे त्यागना होगा।
✅ भारत की संस्कृति ने हमेशा सबको जोड़ा है – हमें विविधता में एकता बनाए रखनी होगी।
✅ सकारात्मक सोच और रचनात्मक विचारों से ही समाज में बदलाव संभव।

🔹 700 से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी – इस अभ्यास वर्ग में देशभर से विद्या भारती के अखिल भारतीय पदाधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए, जो शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे

सरसंघचालक जी ने कहा कि “समाज में परिवर्तन लाने के लिए सबसे पहले व्यक्ति में परिवर्तन लाना होगा।” यह अभ्यास वर्ग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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