मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए माफिया का साथ

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वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बनाई गयी त्रिस्तरीय रणनीति का प्रभाव और परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा। प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के आतंक के किले ढह रहे हैं । माफिया किसी भी मत, मजहब, संप्रदाय का हो योगी जी केवल उसका अपराध देखते हैं किन्तु प्रदेश के अन्य राजनैतिक दल अपराधियों को भी अपने वोट बैंक से जोड़ लेते हैं। वर्तमान में एक वर्ग विशेष के माफिया की मौत के बाद एक खास वोट बैंक को लुभाने के लिए राजनैतिक दल जिस प्रकार उसका महिमा मंडन कर रहे हैं वो खतरनाक है यद्यपि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

प्रदेश को वह समय भी स्मरण है जब यहाँ माफिया जेलों में शरण लेते थे और जेल में एक तरह से उनकी सरकार चलती थी, वहां उन्हें हर प्रकार का संरक्षण प्राप्त होता था, जेल से ही वह अपना अपराधों का कारोबार चलाया करते थे। 2017 से परिस्थितियां बदल गई हैं क्योकि जेलों में बंद अपराधियों पर अब कड़ी निगरानी रखी जाती है।

प्रदेश में विगत सात वर्षों से संगठित अपराध के सफाये पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रदेश में माफियाराज के सफाये के लिए त्रि़स्तरीय योजना बनाई गयी है। कार्ययोजना के अंतर्गत फरार अपराधियों की धरपकड़, अदालत में प्रभावी पैरवी कर सजा दिलाने और उनकी चल -अचल संपत्ति को जब्त करने और उनके अवैध कब्जों को हटाने का अभियान अब रंग लाने लगा है। दूसरी तरफ जेलों में भी इन लोगो को मिलने वाली सुख सुविधाएं पूरी तरह से बंद कर दी गईं हैं।

2017 से पूर्व किसी भी माफिया ने सपने में नही सोचा था कि यह प्रदेश अब उनके लिए बेगाना हो चुका है और यहां से उनका दाना -पानी उठने वाला है। प्रयागराज में माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ सहित उमेश पाल हत्याकांड के चार शूटरों के ढेर होने के बाद जनमानस में शासन के प्रति आश्वस्ति का भाव उत्पन्न हुआ। विगत दिनों जेल में बंद कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से हुई मौत से माफियाओं का दिल दहल गया और पीड़ितों ने चैन की सांस ली ।

इधर जेल में बंद माफिया की मौत के बाद, मुस्लिम वोट बैंक को कब्ज़े में करने के लिये, तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों के बीच माफिया को मसीहा साबित करने की होड़ मच हुई है।असदुद्दीनओवैसी मुख्तार उनके घर खाना खाते दिखे, सपा से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्य उनके घर पर पहुंचते हैं। सपा, बसपा, कांग्रेस उनकी मौत को साजिश बताकर जाँच की मांग कर रही है। और तो और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जिनके अपने बड़े भाई को मुख़्तार ने मौत के घाट उतारा था वो भी माफिया को माफिया कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि कहीं वोट बैंक न टूट जाए। माफिया से सहानुभूति प्रदर्शित करने का खेल जारी है और इन सभी दलों को लग रहा है कि ऐसा करने से प्रदेश की राजनीति में उनकी जमीन मजबूत हो रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा खतरनाक अपराधी माने गए व्यक्ति के बीमारी से मर जाने को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और उनके समर्थन के लिए उत्साहित रहने वाला पश्चिमी मीडिया मोदी जी के मिशन 400 को रोकने के लिए एक सुनहरे ईश्वरीय अवसर के रूप में देख रहा है और निरंतर अनर्गल प्रलाप कर रहा है। वामपंथी पत्रकार उसे गरीबों का मसीहा बता रहे हैं।

एक गलत नेरैटिव गढ़ा जा रहा है कि माफिया मुख्तार अंसारी गरीबों का मसीहा था और गरीब बेटियों की शादियाँ करवाता था। माफिया मुख्तार अंसारी का 46 वर्षों का आपराधिक इतिहास रहा है, उस पर 65 मुकदमे दर्ज हुए थे। 2005 का मऊ दंगा मुख्तार ने कराया था और वह खुलेआम असलहा लेकर घूम रहा था। उसके आतंक का आलम यह था कि जज फैसला देने से डरते थे और पंजाब की कांग्रेस सरकार ने उसको दामाद की तरह पलकों पर बिठा के रखा था। 2017 से पूर्व किसी ने भी सपने में नही सोचा था कि मुख्तार अंसारी जैसे माफिया को कभी सजा सुनायी जाएगी किंतु योगी सरकार अथक प्रयास करके उसको पंजाब से उत्तर प्रदेश लेकर आई और पिछले डेढ़ साल में उसको आठ मामलो में आठ बार सजा सुनाई गई, जिसमें दो मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मुख्तार अंसारी की पूर्वांचल की सियासत पर मजबूत पकड़ थी और सपा, बसपा , कांग्रेस जैसे सभी दल उसका साथ पाने के लिए उत्साहित रहते थे। वह कई सीटों पर न केवल अपने उम्मीदवार तय करता था अपितु उन्हें जिताने में भी कामयाब होता था।

हत्या, दंगा, गैंगवार सहित हर तरह के आपराधिक रिकॉर्ड कायम करने के बाद 1995 में वह गाजीपुर सदर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा किंतु हार गया, फिर मऊ से चुनाव लड़ा और निर्दलीय विधायक बनने में सफल रहा। अब उसने पूर्वांचल के दूसरे जिलों में भी अपनी पकड़ मजबूत बनाने का प्रयास किया। मुख्तार लगातर पांच बार विधायक बना। मुख्तार ने पूर्वांचल में दलित -मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत बनाने में भी बड़ी भूमिका अदा की थी। वह 2009 में वाराणसी से भाजपा नेता डा. मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था और डा. जोशी वह चुनाव बहुत कठिनाई से जीते थे।

समय बदला, मुख्तार अंसारी जमानत के लिए गुहार लगाते समय अपने पूर्वजों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार का सदस्य होने की दुहाई देने लगा। मुख्तार की मौत के बाद आतंक का एक अध्याय तो समाप्त हो गया किंतु मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का खतरनाक दौर और तेज हो गया है। मुस्लिम तुष्टिकरण के सहारे चलने वाले राजनैतिक दल उसके दरवाजे पर अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए पहुंच रहे हैं क्योंकि इन दलों की रोजी -रोटी ऐसे ही माफियाओं के बलबूते चलती रही है। जनता के बीच भय पैदा करने, मतदाता को प्रभावित करने के लिए इन तत्वों का सहयोग लिया जाता था। वो लोग भी मुख्तार के लिए आंसू बहा रहे हैं जो जम्मू कश्मीर में आतंकवादी बुरहान वानी के लिए रो रहे थे और कभी याकूब मेमन की फांसी को रुकवाने के लिए देर रात सुप्रीम कोर्ट खुलवा रहे थे।

मुख्तार की मौत का सियासी लाभ लेने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जेल में मौत पर सवाल खडे़ किये। चाचा शिवपाल यादव ने श्री कहकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि व्यक्त की। कांग्रेस महासचिव अनिल यादव ने सांस्थानिक हत्या का आरोप लगा दिया। राजनैतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि मुख्तार की मौत से उसके असर वाले क्षेत्रों में उसके परिवार के प्रति सहानुभूति उमड़ी है और ये लोग उसे गरीबो का मसीहा बताकर सहानुभूति का लाभ उठाना चाहते हैं। ये लोग इतना भी नहीं सोच पा रहे कि उन्हीं क्षेत्रों में वो लोग भी रहते हैं जिनका मुख़्तार ने सब कुछ छीन लिया था।
वोट बैंक के लालच में अपराध और अपराधियों का महिमा मंडन एक खतरनाक रणनीति है जो समाज में नए अपराधियों के जन्म का कारक बन सकती है। राजनैतिक दलों को परिपक्वता का व्यवहार करना चाहिए। जो लोग स्वयं को समाज का नेता मानते हैं समाज उनसे सुलझे हुए व्यवहार की अपेक्षा करता है न कि अपराधियों के साथ खड़े होने की, पता नहीं ये कब चेतेंगे और मूल्यों की राजनीति करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव का अस्वीकार किया माफीनामा

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सुप्रीम कोर्ट ने एलोपैथ को लेकर भ्रामक विज्ञापन मामले में पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव के माफीनामा को अस्वीकार कर दिया है। जस्टिस हीमा कोहली की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आपकी ओर से आश्वासन दिया गया और उसके बाद उल्लंघन किया गया। यह देश की सबसे बड़ी अदालत की तौहीन है और अब आप माफी मांग रहे हैं। यह हमें स्वीकार नहीं है। आप बेहतर हलफनामा दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।

आचार्य बालकृष्ण ने 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बिना शर्त माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में आचार्य बालकृष्ण ने विज्ञापन पर खेद प्रकट करते हुए कहा था कि विज्ञापन में जो अपमानजनक वाक्य हैं, उन पर हमें खेद है। आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि के फॉर्मूलेशन के चमत्कारी क्षमताओं के बारे में दिए गए उन भ्रामक दावों पर बिना शर्त माफी मांगी थी जो आधुनिक चिकित्सा पर संदेह पैदा करते हैं।

पतंजलि आयुर्वेद की ओर से बालकृष्ण ने 21 नवंबर, 2023 को दिए गए आदेश में दर्ज किए गए बयान के उल्लंघन के लिए कोर्ट में माफीनामा दाखिल करते हुए कहा था कि उनकी तरफ से भविष्य में भी ऐसे विज्ञापन नहीं जारी किये जायेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह को दी जमानत

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दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में जमानत दे दी है। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि जमानत के दौरान संजय सिंह राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। उनकी जमानत के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के इस दावे की कलई खुल गई कि पीएमएलए एक्ट में गिरफ्तारी के बाद जमानत नहीं होती। गौरतलब है कि संजय सिंह बेगुनाह साबित नहीं हुए हैं, उन्हें जमानत मिली है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू से पूछा है कि संजय सिंह 6 महीने से जेल में बंद हैं। जांच एजेंसी बताए कि उनको आगे भी जेल में रखने की क्या जरूरत है? कोर्ट ने राजू से 2 बजे तक इस पर निर्देश लेकर आने को कहा। दो बजे के बाद राजू ने कहा कि उन्हें संजय सिंह को जमानत देने पर कोई आपत्ति नहीं है। उसके बाद कोर्ट ने संजय सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 फरवरी को संजय सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। संजय सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख क‍िया था।

ED की चार्जशीट में संजय सिंह पर 82 लाख रुपए का चंदा लेने का जिक्र है। इसको लेकर ही 4 अक्टूबर को ED उनके घर पहुंची थी और उनसे 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।। दिल्ली शराब नीति केस में ED की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पिछले साल 02 मई को जारी की गई थी। जिसमें AAP सांसद राघव चड्ढा का भी नाम सामने आया था। आप नेता आतिशी मारलेना ईडी उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने राज्य सभा सांसद राघव चड्ढ़ा, मंत्री सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक का नाम भी भविष्य में गिरफ्तार होने वाले लोगों में शामिल किया। एक तरफ आप के नेता जमानत पर बाहर आ रहे हैं और दूसरी तरफ नए नेताओं के जेल की जाने की बात दिल्ली सरकार की मंत्री कर रहीं हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था लम्बी छलांग लगाने को तैयार

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वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही (अक्टोबर-दिसम्बर 2023) में भारत में आर्थिक विकास की दर 8.4 प्रतिशत रही है। कुछ विदेशी अर्थशास्त्री भारत की आर्थिक विकास दर को कमतर आंकते हुए दिखाई दे रहे हैं जबकि यह लगातार तिमाही दर तिमाही आगे बढ़ती ही जा रही है। अब तो विश्व की कई आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों ने भी वर्ष 2024 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के सम्बंध में अपने अनुमानों को बेहतर किया है, परंतु अभी भी इन संस्थानों के यह अनुमान वास्तविक आर्थिक विकास दर की तुलना में बहुत कम हैं। दरअसल, विदेशी आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा विशेष रूप से भारत की आर्थिक विकास दर को आंके जाने के सम्बंध में उपयोग किए जा रहे मॉडल अब बोथरे साबित हो रहे हैं। हाल ही के समय में भारत के नागरिकों में “स्व” का भाव विकसित होने के चलते देश में धार्मिक पर्यटन बहुत तेज गति से बढ़ा है। उदाहरण के लिए अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में श्रीराम लला के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात प्रत्येक दिन औसतन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। यह तो केवल अयोध्या की कहानी है इसके साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन में महाकाल लोक, जम्मू स्थित वैष्णो देवी मंदिर, उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री एवं यमनोत्री जैसे कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है। भारत में धार्मिक पर्यटन में आई जबरदस्त तेजी के बदौलत रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित हो रहे हैं, जो देश के आर्थिक विकास को गति देने में सहायक हो रहे हैं। परंतु, यह तथ्य विदेशी आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों को दिखाई नहीं दे रहा है, जो कि केवल भारत की ही विशेषता है।

उक्त तथ्यों के अतिरिक्त अन्य कई कारक भी भारत की आर्थिक विकास दर को अब 9 से 10 प्रतिशत की सीमा में ले जाने को तैयार दिखाई दे रहे हैं। आज भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना में भारत से आगे चल रही विश्व के अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर में ठहराव आ गया है। जैसे अमेरिका एवं यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं आगे आने वाले समय में प्रतिवर्ष केवल 2 अथवा 3 प्रतिशत की दर से ही आगे बढ़ पाएंगी। इसी प्रकार चीन की अर्थव्यवस्था भी अब ढलान पर दिखाई दे रही है। जापान एवं जर्मनी की अर्थव्यवस्थाओं में तो आर्थिक मंदी देखी जा रही है। इस प्रकार विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत के अमृत काल में केवल भारतीय अर्थव्यवस्था ही तेज गति आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। वैसे भी भारत में अमृत काल तो अभी शुरू ही हुआ है एवं यह अगले 23 वर्षों अर्थात वर्ष 2047 तक यह खंडकाल जारी रहेगा। कुछ अर्थशास्त्री तो भारत के अमृत काल के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था के इसी तरह तेज गति से आगे बढ़ते रहने की संभावनाएं व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि भारत में वर्ष 1991-92 में प्रारम्भ किए आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र के सुधार कार्यक्रम को अब 32 वर्ष पूर्ण हो गए हैं, हालांकि वर्ष 1991-92 के बाद भी भारत में आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्रों में सुधार कार्यक्रम लगातार जारी रहे हैं। अत: स्थिर हो चुके इन सुधार कार्यक्रमों के फल खाने का समय अब आ गया है।

भारत द्वारा वर्ष 1947 में राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात, पिछले 77 वर्षों के दौरान भारत में लोकतंत्र लगातार मजबूत हुआ है एवं आज पूरे विश्व में भारत इस दृष्टि से प्रथम पायदान पर खड़ा है। भारत में लोकतंत्र के लगातार मजबूत होते जाने से विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा है जिसके चलते भारत में उद्योग जगत को पूंजी की कमी नहीं के बराबर रही है। पर्याप्त पूंजी की उपलब्धता के चलते भारत में आर्थिक विकास को गति ही मिली है। भारत में लगातार तेज हो रही आर्थिक विकास की दर के कारण भारत में बिलिनियर (100 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की सम्पत्ति वाले नागरिक) की संख्या में सुधार हुआ है। पिछले वर्ष भारत में 94 नए बिलिनियर बने हैं। जबकि चीन में 115 बिलिनियर कम हुए हैं। विश्व में बिलिनियर की संख्या के मामले में भारत चीन एवं अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है। भारत में आज 271 बिलिनियर हैं जबकि चीन में 814 एवं अमेरिका में 800 बिलिनियर हैं। मुंबई महानगर में तो अब 92 बिलिनियर निवास कर रहे हैं, जो चीन के बीजिंग महानगर के 91 बिलिनियर से अधिक है। इस प्रकार अब एशिया के किसी भी महानगर में सबसे अधिक बिलिनियर भारत के मुंबई महानगर में निवास कर रहे हैं। पूरे विश्व भारत के मुंबई महानगर से आगे अब केवल अमेरिका का न्यूयॉर्क महानगर (119 बिलिनियर) एवं ब्रिटेन का लंदन महानगर (97 बिलिनियर) ही है। वर्ष 2022-23 में चीन में बिलिनियर की संख्या घटी है। चीन में बिलिनियर की सम्पत्ति 15 प्रतिशत से कम हुई है। जबकि भारत में बिलिनियर की सम्पत्ति में वृद्धि दर्ज हुई है। यह भारत में तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास दर के चलते सम्भव हो सका है।

एक और कारक जो आगे आने वाले समय में भारत की आर्थिक विकास दर को लगातार उच्च स्तर पर बनाए रखने में सहायक हो सकता है वह है भारत में प्रति व्यक्ति वार्षिक औसत आय का लगभग 2500 अमेरिकी डॉलर का होना है जो चीन में 13,000 से 14,000 अमेरिकी डॉलर के एवं दक्षिणी कोरीया में 32,000 से 33,000 अमेरिकी डॉलर के बीच की तुलना में बहुत कम है। इस दृष्टि से भारत को अभी बहुत आगे तक जाना है और यह केवल आर्थिक विकास की औसत दर को 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष के आसपास बनाए रखने से ही सम्भव होगा। इस प्रकार भारतीय नागरिकों में अपनी औसत आय को विकसित देशों की तुलना में बेहतर करने की अभी बहुत गुंजाईश है और यह भावना भारत की आर्थिक विकास दर को बढ़ाए रखने में सहायक होगी। दूसरे, भारत में तकनीकी क्षेत्र विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास की दर बहुत प्रभावकारी है, डिजिटल क्षेत्र में तो भारत आज पूरे विश्व को ही राह दिखाता नजर आ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास के चलते भारत में विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों, व्यवसाईयों, प्रबंधकों, कृषकों आदि की उत्पादकता में भी सुधार दृष्टिगोचर है जो निश्चित ही भारत में आर्थिक विकास की गति को तेज करने में सहायक होगा।

आज अमेरिका एवं कनाडा में निवासरत एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य कर रहे भारतीय मूल के नागरिक वापिस भारत आकर बसने के बारे में गम्भीरता से विचार कर रहे हैं क्योंकि अब अमेरिका एवं अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत में लगातार तेज हो रही आर्थिक विकास की दर उन्हें आकर्षित कर रही है। उन्हें आज भारत में अधिक आय अर्जन के अतिरिक्त साधन उत्पन्न होते दिखाई दे रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, लगभग 38,000 भारतीय जो अमेरिका में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत हैं वे अब भारत वापिस आना चाहते हैं क्योंकि अमेरिका में कई कम्पनियां (गूगल, एमेजोन, माइक्रोसोफ्ट एवं मेटा सहित) अपने कर्मचारियों की छंटनी करती दिखाई दे रही हैं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था तो स्पष्टत: आर्थिक मंदी की चपेट में आ चुकी है। जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अक्टोबर-दिसम्बर 2023 की तिमाही में 8.4 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल की है। कई विदेशी वित्तीय संस्थानों ने वर्ष 2024 में भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को आगे बढ़ा दिया है।

अब तो भारत में, ग्रामीण इलाकों सहित, विभिन्न उत्पादों के खपत का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा विकास कार्यों के लिए अपने बजट में खर्च को लगातार बढ़ाया जा रहा है जिससे सामान्य नागरिकों के हाथों में अधिक पैसा पहुंच रहा है तथा इससे नागरिकों के बीच विभिन्न उत्पादों के खपत का स्तर बढ़ता दिखाई दे रहा है। शहरी उपभोक्ता तो रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के साथ साथ चार पहिया वाहन एवं मकान आदि खरीदने पर भी भारी मात्रा में पैसा खर्च कर रहे हैं। घरेलू खपत में बढ़ौतरी के साथ ही भारत से निर्यात में भी तेजी देखी जा रही है। फरवरी 2024 माह में निर्यात का स्तर पिछले 11 माह में सबसे अधिक रहा है। केंद्र सरकार का अनुमान है कि भारत वित्तीय वर्ष 2023-24 में निर्यात के क्षेत्र में अपने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ देगा। मोर्गन स्टैनली के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर यह है कि भारत में निवेश : सकल घरेलू उत्पाद अनुपात में एक बार फिर सुधार दिखाई दे रहा है। यह अनुपात आज 34 प्रतिशत तक पहुंच गया है और उम्मीद की जा रही है वित्तीय वर्ष 2027 तक यह बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। जिससे भारत की आर्थिक विकास दर को और अधिक बल मिलेगा।

हां, भारत में एक क्षेत्र अभी भी ऐसा है जिसके लिए चिंता होना स्वाभाविक है। वह क्षेत्र है आय की असमानता का। भारत की 10 प्रतिशत आबादी के पास देश की 77 प्रतिशत सम्पत्ति जमा हो गई है। एक रिसर्च पेपर में यह बताया गया है कि भारत में आर्थिक विकास के साथ साथ आर्थिक असमानता भी बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंत तक भारत की एक प्रतिशत आबादी की देश की कुल आय एवं सम्पत्ति में 22.6 प्रतिशत एवं 40.1 प्रतिशत की भागीदारी रही है। आय की असमानता को देश में आर्थिक विकास को गति देकर ही दूर किया जा सकता है, जिसके लिए केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भरसक प्रयास किए जा रहे हैं।

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