कोरोना से बचाव में ‘आरोग्य मित्र’ की भूमिका में होंगे संघ के स्वयंसेवक

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ओमप्रकाश सिसोदिया

शुक्रवार को भोपाल प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक बैठक में संवाद किया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। इसकी तीसरी आवृत्ति आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में संघ के कार्यकर्ताओं को आवश्यक तैयारी कर लेनी चाहिए। नगर गांव में चयनित कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण हो जाए इस बात की चिंता की जाए। संघकार्य के विस्तार के लिए आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना बनाने के लिए भी उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा है।

सरकार्यवाह होसबाले ने संघकार्य विस्तार की दृष्टि से स्वयंसेवकों से कहा कि संघ कार्य भौगोलिक और सर्वस्पर्शी, दोनों प्रकार से बढ़ना चाहिए। इसके लिए स्वयंसेवकों को आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। विद्यार्थी शाखा के विस्तार पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमने भोपाल में श्रम साधकों के बीच विशेष प्रयास करके कार्य खड़ा किया है। उसी प्रकार सभी वर्गों एवं क्षेत्रों में कार्य पंहुचाना है । उन्होंने कहा कि हमें अब  कार्यविस्तार के साथ कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए।

( लेखक मध्यभारत के प्रांत प्रचार प्रमुख हैॅ)

पत्रकार हामिद ने पाकिस्तान की पोल खोली

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इमरान सरकार की आलोचना पाक सेना के खिलाफ कठोर टिप्पणी करने पर अनिश्चित काल तक हटाए गए पाकिस्तानी के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने की है। उन्होंने कहा है कि इमरान खान एक ‘असहाय’ प्रधानमंत्री हैं और देश के मीडियाकर्मियों में डर का माहौल बनता जा रहा है।

मंगलवार को डॉन अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, इस्लामाबाद से बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को दिए इंटरव्यू में मीर ने पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता के घटते दायरे और पत्रकारों के प्रति बढ़ते ‘डर के माहौल’ की आलोचना की।

बीबीसी के शो ‘हार्ड टॉक’ के होस्ट स्टीफन सैकर से मीर ने कहा, ‘पाकिस्तान में लोकतंत्र होकर भी नहीं है। यहां सिर्फ नाममात्र के लिए ही लोकतंत्र रह गया है। यहां संविधान भी नाममात्र का है और मैं पाकिस्तान में सेंसरशिप का जीता जगता उदाहरण हूं।’

मीर ने कहा कि देश में मीडियाकर्मियों पर जिस तरह से हमले हो रहे हैं, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस्लामाबाद से बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में मीर ने प्रेस की आजादी के लिए सिकुड़ती जगह और पाक में पत्रकारों के लिए भय के बढ़ते माहौल की भी निंदा की।

उन्‍होंने होस्‍ट स्टीफन सैकर के साथ हुई बातचीत में कहा कि पाकिस्‍तान के पत्रकार वहां पर कानून का राज चाहते हैं। यदि कोई पत्रकार इस बाबत किसी सवाल का जवाब चाहता है तो उसकी आवाज को दबाना नहीं चाहिए।

क्‍या पत्रकारों पर हुए हमले में पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी का भी हाथ है? पूछे जाने पर मीर ने कहा कि इसके दस्‍तावेजी सबूत मौजूद हैं। स्‍टेट एजेंसी और पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसियों पर पत्रकारों पर हमले करवाने और उन्‍हें अगवा कराने के आरोप बार बार लगते रहे हैं। उनके खिलाफ भी सरकार और सेना की तरफ से कई मामले दर्ज करवाए गए हैं, जिसके लिए वह पूरी जिंदगी जेल में सड़ने को भी तैयार हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि यदि वह ऐसा करते हैं और उन्‍हें सजा होती है तो कम से कम इससे पूरी दुनिया को इस बारे में पता तो चल जाएगा कि आखिर पाकिस्‍तान में हो क्‍या रहा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री इमरान खान व्यक्तिगत तौर पर उन पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं? इस पर मीर ने जवाब दिया, ‘मेरे ऊपर लगाई गई पाबंदी के लिए इमरान खान सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं। मुझे नहीं लगता कि वह मुझे (टीवी से) हटाना चाहते हैं। लेकिन पिछले प्रधानमंत्रियों की तरह वह बहुत ताकतवर प्रधानमंत्री नहीं हैं। वह असहाय हैं और मेरी मदद नहीं कर सकते।’

उन्‍होंने इंटरव्‍यू में कहा कि पाकिस्‍तान में हमेशा से ही प्रेस की आजादी को लेकर सरकार की आलोचना होती रही हैं। जून में तीन इंटरनेशनल राइट्स ग्रुप ने अपने एक संयुक्‍त बयान में पाकिस्‍तान में प्रेस पर लगी पाबंदी पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की थी। इस बयान में सरकार की भी कड़ी आलोचना की गई थी। ह्यूमन राइट वाच, एमनेस्‍टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल कमीशन आफ ज्‍यूरिस्‍ट्स ने कहा था कि इसके खिलाफ दोषियों को सजा दी जानी चाहिए।

बता दें कि पाकिस्तान के ताकतवर सैन्य प्रतिष्ठान के विरुद्ध कड़ी टिप्पणी करने पर मीर के कार्यक्रम पर अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। वह जियो न्यूज चैनल पर प्राइमटाइम राजनीतिक चर्चा के शो ‘कैपिटल टॉक’ के मेजबान थे, जिसे अब बंद कर दिया गया है। इस्लामाबाद में पत्रकार और यू-ट्यूबर असद अली तूर पर तीन अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हमले के विरोध में 28 मई को पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें मीर ने आक्रोश से भरा भाषण दिया था। मीर ने हमले की जवाबदेही तय करने की मांग की थी, जिसके बाद 30 मई को उनका शो बंद कर दिया गया था। देश की सेना के विरोध में बोलने वाले पत्रकारों पर इस तरह के हमले होते रहे हैं।

3 स्थानीय रिपोर्टर पत्रकार की हत्या के आरोप में गिरफ्तार

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पुलिस ने बिहार के पूर्वी चंपारण में तीन आरोपियों को टीवी चैनल के रिपोर्टर मनीष कुमार सिंह  की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे अब पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमरेंद्र कुमार, अशजद आलम और महेंद्र सिंह के तौर पर हुई है और ये सभी स्थानीय रिपोर्टर हैं। एसपी नवीन चंद्रा ने बताया कि आरोपी अमरेंद्र के घर से मृतक पत्रकार मनीष का बैग, आई कार्ड, हेडफोन समेत कई सामान जब्त किया गया है।

घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं अब तक हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मालूम हो कि तीन दिनों से लापता रहे टीवी न्यूज चैनल के रिपोर्टर मनीष कुमार सिंह का शव मंगलवार को तालाब में मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मनीष ‘सुदर्शन न्यूज’ चैनल में अरेराज अनुमंडल संवाददाता के पद पर कार्य करते थे।

उल्लेखनीय है कि मनीष शनिवार की शाम से गायब थे, जिसके बाद उनके पिता संजय सिंह ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अमरेंद्र कुमार और असजद आलम समेत 13 लोगों को नामजद किया था। मंगलवार को जिले के हरसिद्धि थाना क्षेत्र स्थित मठलोहियार गद्दी टोला के समीप तालाब से मनीष का शव बरामद हुआ था। उनकी एक आंख भी गायब थी।

बताया जाता है कि मनीष कुमार एक पार्टी में जाने के लिए घर से बाहर निकले थे, उसके बाद वह वापस ही नहीं लौटे। तब जाकर उनकी गुमशुदगी की बात पता चल सकी। गायब होने से पहले मनीष ने अपने परिवार को मठ लोहियार गांव के गद्दी टोला के पास होने की बात कही थी। पत्रकार ने कहा था कि वह पार्टी से जल्द वापस लौटेंगे। मनीष को आखिरी बार अमरेंद्र कुमार, अशजद आलम और महेंद्र सिंह के साथ देखा गया था। घटना वाली जगह से पुलिस को CCTV फुटेज मिला था, जिसमें तीनों गिरफ्तार आरोपी और मनीष साथ जाते दिख रहे थे, लेकिन लौटने के समय पर जर्नलिस्ट उनके साथ नहीं था। इसके बाद पुलिस को तीनों पर शक हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे का मकसद अभी तक स्पष्ट नहीं है।

मनीष के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया था। शव के सड़ने की वजह से उसे SKMCH रेफर कर दिया गया। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए मुजफ्फरपुर पहुंचा।

एक स्थानीय अखबार से जुड़े संजय सिंह का आरोप है कि जमीन के विवाद में उनके बेटे की हत्या की गई है। संजय सिंह का कहना है कि उनके बेटे का गला रेता गया था, जबकि शरीर पर कई जगह चाकू से गोदने के निशान थे। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस पर भी इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।

विस्थापित हिन्दुओं का यथार्थ है पुण्यपथ

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संस्कार भारती, बिहार के तत्वधान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के‌ पटना मुख्यालय, विजय निकेतन  के चाणक्य सभागार में सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’ की पाकिस्तानी हिन्दुओं के उपर केन्द्रित उपन्यास पुण्यपथ पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर बोलते हुए संस्कार भारती के अखिल भारतीय महामंत्री अमीर चंद ने कहा कि पुण्यपथ आज के समय में विस्थापित हिन्दुओं का यथार्थ है।सर्वेश ने जो हिम्मत अपने कलम के माध्यम से दिखाई है वह प्रशंसनीय है।मैंने जब यह किताब पढ़ी मैं अंदर से हिल गया। विस्थापित हिन्दुओं का सम्मान लौटाना आज के समय की माँग है। कल का सुखद संयोग इस बात की गवाही दे रहा था कि मनोयोग से किया गया अपनों के लिए किया गया प्रयास कभी विफल‌ नही होता है।

गीता में भगवान कहते हैं कि

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।

भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।।18.61

हे अर्जुन ! ईश्वर सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें रहता है और अपनी माया से शरीर रूपी यन्त्र पर आरूढ़ हुए सम्पूर्ण प्राणियों‌ को उनकी नीयत के हिसाब से भ्रमण कराता रहता है।

प्रसिद्ध सिने समीक्षक विनोद अनुपम ने कहा कि पुण्यपथ के विषय पर और बातें होनी चाहिए। सर्वेश ने जो आज किया है बहुत पहले किया जाना चाहिए था लेकिन यह इस देश का दुर्भाग्य है कि ऐसी बात पहले शुरु नही हुयी। आनंद कुमार ने कहा कि सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’ उन चंद लेखकों में से एक हैं जिन्होंने कभी राष्ट्रवाद की डोर नहीं छोड़ी। उनका पहला उपन्यास “परत” लव जिहाद की परतों को उधेड़ता उस विषय पर लिखा गया हिन्दी का इकलौता उपन्यास है, जिसे पाठकों ने खूब सराहा और यह किताब बेस्ट सेलर बनी।

सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’ ने पुस्तक की भूमिका पर बोलते हुए कहा कि मैं एक साहित्यकार का धर्म निभा रहा हूँ। अपने समय के सत्य को उधृत करना ही साहित्यकार का कर्तव्य है और मैं उसको जी रहा हूँ।

प्रो. अरुण भगत ने किताब पर बोलते हुए कहा कि यह पाकिस्तानी हिन्दुओं की पीड़ा को केंद्र में रख कर लिखा गया उपन्यास समाज की आँखे खोलने वाली है। उनकी यह पुस्तक समाजोपयोगी है।यह किताब उत्कृष्ट साहित्य का नमूना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा ने कहा कि पुण्यपथ, हर हिन्दू के घर में होनी चाहिए ताकि उनको विस्थापित हिन्दुओं की पीड़ा का एहसास हो सके।

इस मौके पर जलज कुमार अनुपम ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि अपने और पराये लोगों के बीच की रेखा की पहचान करना नितांत आवश्यक है। जो धर्म के साथ नही है इसका सीधा मतलब है कि वह अधर्म के साथ है क्योंकि मौन भी अधर्म ही होता है। इस मौके पर प्रसिद्ध रंग निर्देशक संजय उपाध्याय, संस्कार भारती, बिहार के संगठन मंत्री वेद प्रकाश, संजय पोद्दार, नीतू कुमार ‘नूतन’, और डा. संजय कुमार चौधरी के अलावे अनेकों बुद्धिजीवी लोग बहुत दूर से चल कर आये और कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

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