प्रशांत पोळ
नागपुर : वैसे भ्रष्टाचार के साथ कांग्रेस का नाम बहुत पहले से जुड़ता आया है। स्वतंत्रता के तुरंत बाद, वर्ष 1948 में, नेहरू सरकार ने भारतीय सेना के लिए 2000 पुरानी जीप्स का आर्डर दिया, जो ठीक करके नई जैसी बनाकर देनी थी। जिस ब्रिटिश कंपनी को ऑर्डर दिया, उसने 300 ब्रिटिश पाउंड प्रति जीप के हिसाब से दाम बताए थे। मजेदार बात यह, की 350 ब्रिटिश पाउंड की कीमत में ही अमेरिका या कनाडा में अच्छी नई जीप मिल रही थी। किंतु नेहरू के विश्वस्त कृष्ण मेनन, जो उस समय लंदन में भारत के उच्चायुक्त थे, ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को मनवाकर, उन्हें पुरानी (सेकंड हैंड) जीप, सेना के लिए खरीदने को विवश किया था।
कांग्रेस ने भ्रष्टाचार की कितनी दमदार शुरुआत की थी, इसकी बानगी देखिए – जिस कंपनी को इन 2000 जीप की ऑर्डर दी गई थी, वह M/s Anti-Mistantes, यह एक छद्म ( Shady) कंपनी थी, जिनकी जमा पूंजी मात्र 605 ब्रिटिश पाउंड थी..! इस कंपनी ने 2000 मे से केवल 155 जीपें ही भेजी, जिसमें से एक भी चलने के काबिल नहीं थी। भारतीय सेना ने वें सारी जीपें वापस कर दी, किंतु कंपनी ने उन्हें वापस लेने से इन्कार किया।
मेनन नहीं पर नहीं रुके। सेना के लिए जीपों की आवश्यकता तो थी। उन्होंने पहले से भी उंची कीमत पर, अर्थात 458 ब्रिटिश पाउंड की दर से, 1007 जीपों की ऑर्डर, M/s SCK Agencies को दी। दुर्भाग्य से, दो वर्षों में मात्र 49 जीपें भारतीय सेना को मिल सकी, किंतु पैसा पूरा गया।
इस पर कुछ कार्यवाही करना तो दूर, नेहरू ने कृष्ण मेनन को भारत का रक्षा मंत्री बनाया ! 1962 के चीन युद्ध के समय, कृष्ण मेनन भारत के रक्षा मंत्री थे। इसमें क्या आश्चर्य की हम युद्ध हार गए..!
कांग्रेस के भ्रष्टाचार का प्रारंभ यहां से हुआ था, जो आगे बढ़ता ही गया।
1958 में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने, अपने ही ससुर, जवाहरलाल नेहरू सरकार के राज में हुआ ‘मुंदडा घोटाला’ उजागर किया था।
इंदिरा गांधी के राज में भी अनेक घोटाले हुए। ‘नागरवाला कांड’ का उल्लेख इस पुस्तक में आया हैं। 1970 का ‘मारुती घोटाला’, आपातकाल मे ‘केओल ऑइल (Kuo Oil) घोटाला’, ‘पीएसयू टेंडर घोटाला’, ‘जमीन अधिग्रहण – स्लम क्लियरेंस घोटाला’ आदी अनेक। राजीव गांधी की सरकार ही बोफोर्स कांड के कारण गई थी। बाद में नरसिंहराव सरकार मे भी ‘हवाला’ से लेकर अनेक घोटाले हुए।
किंतु इन सब घोटालों को मात दी, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार ने। वर्ष 2004 से 2014 तक, दस वर्ष यूपीए – 1और यूपीए – 2 के रहे। इस पूरे दस वर्ष के कार्यकाल की विशेषता रही की मंत्रीगण बढ़ चढ़कर घोटाले करते रहे। यूपीए – 1 से कई गुना ज्यादा घोटाले, यूपीए – 2 में हुए।
मोबाइल नेटवर्क के लिए जब 2G स्पेक्ट्रम का आबंटन होना था, तो उसमें जमकर घोटाला हुआ। 1,76,000 करोड रुपए का सीधा घाटा सरकार को, अर्थात देश को हुआ। इस घोटाले में दूरसंचार मंत्री ए. राजा को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। बाद में वे गिरफ्तार हुए और अनेक महीनों तक दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद रहे। मोबाइल घोटाले में कनिमोझी, टेलिफोन कॉल रेट कांड मे दयानिधी मारन, एयरसेल-मैक्सिस घोटाले मे चिदंबरम जैसे यूपीए के मंत्रियों को जेल की हवा खानी पड़ी। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के शासनकाल मे 7 केंद्रीय मंत्री जेल के अंदर थे..!
यूपीए के दौरान कोयला खदानों की नीलामी में प्रचंड भ्रष्टाचार हुआ। देश का सीधा-सीधा 1.86 लाख करोड रुपए का नुकसान हुआ। पैसे खाकर यह कोल ब्लॉक, अत्यंत कम कीमत पर नीलाम कर दिए गए।
इटालियन फर्म से हेलीकॉप्टर खरीदी में भी भ्रष्टाचार हुआ। मात्र 12 चॉपर (हेलीकॉप्टर) 3,600 करोड रुपए में खरीदे गए। भारतीय सेना के लिए खरीदे जाने वाले टेट्रा ट्रक में भी भरपूर गोलमाल हुआ। तत्कालीन सेनाध्यक्ष, जनरल वी के सिंह को 14 करोड रुपए के रिश्वत की पेशकश हुई। सन 2010 में जब भारत में कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन हुआ, तो उसे भी कांग्रेस ने नहीं छोड़ा। कांग्रेस के मंत्री सुरेश कलमाड़ी ने खेलों के आयोजनों में भी घोटाला किया।
*इन घोटालों की सूची बहुत लंबी है। यह 10 वर्ष भारत के लिए अत्यंत दुखद रहे। अवसर हमारे आगे हाथ जोड़कर खड़े थे। हम तेज गति से भाग सकते थे। लंबी छलांग लगा सकते थे। किंतु सतत होने वाले भ्रष्टाचार और घोटालों ने देश को खोखला करके रख दिया था। सरकार के पास नई योजनाओं के लिए पैसे नहीं थे।*
नई योजनाएं तो दूर की बात, उन दिनों देश की सुरक्षा के लिए भी सरकार के पास पैसे नहीं थे। वर्ष 2013 में हमारे पास मात्र 20 दिनों के लिए गोला-बारूद थी। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के रिपोर्ट मे (CAG Report No 19 of 2013, Performance Audit on Ammunition Management) यह खुलासा हुआ था। उन दिनों यदि युद्ध छिड़ जाता, तो हमारी स्थिति गंभीर थी। टैंक के लिए लगने वाली गोला बारूद अपने न्यूनतम स्तर तक पहुंच गई थी। आर्टिलरी को आवश्यक ऐसे इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज नहीं थे। वायुसेना के विमान पुराने हो चुके थे। उन्हें तत्काल नए आधुनिक युद्ध विमान की आवश्यकता भी। किंतु इसकी कोई चिंता कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए में नहीं दिख रही थी। सभी मंत्री अपनी-अपनी व्यवस्थाएं बनाने में जुटे थे।
_(शिघ्र प्रकाशित ‘इंडिया से भारत : एक प्रवास’ इस पुस्तक के अंश।)



