अनुज अग्रवाल
दिल्ली । दुनिया को नियंत्रित करने वाली इल्लूमिनाती सेंट्रल कमांड है जिस पर यहूदी बैंकर समूहों का नियंत्रण है। कई अरब शेख भी अब इस नेटवर्क का हिस्सा हैं । इन दिनों बराक ओबामा और बिल गेड्स इसके प्रमुख कमांडर माने जाते हैं और अब ट्रंप इसको अपने क़ब्ज़े में लेने की कोशिश में हैं । दुनिया के हर देश में वही राजनीतिक दल काम कर सकता है जिसको यह कमांड परमिशन देती है । परमिशन मतलब इल्लूमिनाती नेटवर्क के “ मार्केट इकॉनमी “ एजेंडे का हिस्सा बनकर काम करना ।
“वर्ल्ड इकॉनमी फोरम” ,इल्लूमिनाती के मेन एजेंडे यानि दुनिया पर उनके नियंत्रण बनाए रखने की नीतियाँ तैयार करने और उनको अपने नेटवर्क वाले दुनिया के राजनीतिक दलों और कारपोरेट घरानों के सिंडिकेट को ट्रेंड करने वाली संस्था है । हर देश के एलीट क्लास यानि सत्ता , धर्म, मीडिया,उद्योग व्यापार फ़िल्म उद्योग आदि से जुड़े लोगों को “फ्री मेसान” क्लब से जोड़ा जाता है । भारत में इस क्लब से जुड़े लोगों की संख्या लगभग तीस लाख से अधिक है । यह नेटवर्क वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की नीतियों को अपने अपने देश में लागू करने के हिडन एजेंडे पर काम करता रहता है और इसके एवज में उसे अकूत धन और अय्याशी के सामान उपलब्ध कराए जाते हैं जिनका माध्यम “एपिस्टीन नेटवर्क” होता है , जहाँ जुड़े हुए लोगों के हर काम पर नज़र भी रखी जाती है और रिकार्ड भी रखा जाता है ताकि वे ग़द्दारी ना कर सकें । यह नेटवर्क समय समय पर “सेफ़्टी वॉल्व थ्योरी “ के तहत अपने पुराने कुकर्मों का भंडाफोड़ करता रहता है । पहले विकिलीक्स फाइल्स और अब एपिस्टीन फाइल के खुलासे इसी खेल का हिस्सा हैं । इस गैंग को पता है कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ या उखाड़ पाएगा । चीन , रूस और ईरान तक में भी यह नेटवर्क बहुत प्रभावी हो चुका है ।



