दिल्ली। शिवानंद द्विवेदी सहर इन दिनों कहां हैं, सप्ताह में कोई ना कोई यह सवाल पूछ ही लेता है। निश्चित तौर पर यह प्रश्न पूछने वाले सभी सहर के मित्र और परिचित ही होंगे। जिनके नेटवर्क से अचानक शिवानंद बाहर चले गए हैं। उनका नाम पिछले दिनों भाजपा के आईटी सेल प्रमुख के लिए प्रमुखता से चला लेकिन अमितजी मालवीय गए नहीं, इसीलिए शिवानंदजी आए नहीं। ऐसा उनके जानने वाले ही बताते हैं।
कहां चले गए शिवानंद, इस प्रश्न के तलाश के लिए उंगलबाज.कॉम की टीम ने अपने अध्ययन से यह जानकारी निकाली है।
शिवानंद द्विवेदी भाजपा से जुड़े एक प्रमुख लेखक, संकलक और बौद्धिक कार्यकर्ता हैं। वे पार्टी की विचारधारा को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सक्रियता मुख्य रूप से किताबों के लेखन, संकलन और मोदी सरकार की उपलब्धियों को दस्तावेजीकृत करने में देखी जाती है। उदाहरण के लिए, उन्होंने अनिर्बान गांगुली के साथ मिलकर ‘अमित शाह और भाजपा की यात्रा’ (Journey of Amit Shah and BJP) नामक पुस्तक का सह-लेखन किया। यह किताब भाजपा के संगठनात्मक विकास और अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी की सफलता की यात्रा को विस्तार से बताती है। यह पुस्तक भाजपा की रणनीतिक मजबूती और चुनावी विजयों के पीछे की विचारधारा को समझने में मदद करती है।
इसके अलावा, शिवानंद द्विवेदी ने ‘अमृत काल की ओर’ (Towards Amrit Kaal) नामक पुस्तक का संकलन किया, जिसमें के.के. उपाध्याय के साथ मिलकर मोदी सरकार के नौ वर्षों की उपलब्धियों को संकलित किया गया। यह पुस्तक 2023 में भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा द्वारा जारी की गई थी। इस आयोजन में नड्डा ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ‘नफरत का मेगा शॉपिंग मॉल’ खोल रहे हैं, जबकि भाजपा सकारात्मक विकास की बात करती है। इस पुस्तक के माध्यम से द्विवेदी ने मोदी सरकार की नीतियों – जैसे आर्थिक सुधार, विदेश नीति, कोविड प्रबंधन और आत्मनिर्भर भारत – को बौद्धिक रूप से प्रस्तुत किया। यह कार्य भाजपा के बौद्धिक प्रकोष्ठ की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सरकार की उपलब्धियों को तथ्यपूर्ण और विचारधारा-सम्मत तरीके से प्रचारित किया जाता है।
शिवानंद द्विवेदी की सक्रियता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (SPMRF) से भी जुड़ी हुई है। SPMRF भाजपा की विचारधारा पर शोध करने वाला प्रमुख थिंक टैंक है, जो नीति सुझाव देता है और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को मजबूत करता है। यहां द्विवेदी ने कई लेख और विश्लेषण लिखे हैं, जो पार्टी की संगठनात्मक ताकत, नेताओं की छवि और नए मतदाताओं से जुड़ाव पर केंद्रित होते हैं। उनके लेखों में भाजपा की चुनावी सफलताओं के पीछे की वजहों – जैसे करिश्माई नेतृत्व, स्वच्छ छवि और युवा जुड़ाव – को विस्तार से विश्लेषित किया जाता है। यह फाउंडेशन भाजपा के बौद्धिक कार्यों का केंद्र बिंदु है, जहां द्विवेदी जैसे कार्यकर्ता विचारधारा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं।
भाजपा में बौद्धिक कार्यों की परंपरा लंबी है। 1990 के दशक से पार्टी ने इंटेलेक्चुअल सेल, इकोनॉमिक सेल और मीडिया सेल जैसे प्रकोष्ठ बनाए, ताकि बुद्धिजीवियों को जोड़ा जा सके। डॉ. सौरभ मालवीय और संजीव सिन्हा के नेतृत्व में कई पत्रकार और बौद्धिक भाजपा से जुड़े। शिवानंद द्विवेदी इसी परंपरा के हिस्से हैं। उनकी किताबें और लेख पार्टी की विचारधारा – एकात्म मानववाद, अंत्योदय और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद – को मजबूत करते हैं। वे मोदी सरकार की नीतियों को ‘अमृत काल’ के संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं, जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में है।
द्विवेदी की सक्रियता केवल लेखन तक सीमित नहीं है। वे भाजपा के बौद्धिक मंचों पर चर्चा और सेमिनारों में भाग लेते हैं, जहां पार्टी की नीतियों का बचाव और विपक्ष की आलोचना की जाती है। उनकी रचनाएं भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण सामग्री का हिस्सा बनती हैं। उदाहरणस्वरूप, अमित शाह की किताब में उन्होंने पार्टी के विस्तार – गुजरात से राष्ट्रीय स्तर तक – को दस्तावेजीकृत किया, जो कार्यकर्ताओं को प्रेरित करती है।
कुल मिलाकर, शिवानंद द्विवेदी भाजपा के बौद्धिक विंग के एक समर्पित सदस्य हैं। उनकी सक्रियता पार्टी को विचारधारा के स्तर पर मजबूत बनाती है। उनकी रचनाएं भाजपा की यात्रा को समझने का एक विश्वसनीय स्रोत हैं, जो पार्टी को एक विचार-आधारित संगठन के रूप में स्थापित करती हैं।



