रायपुर (छत्तीसगढ़): रंगों में उतरे डॉ. अंबेडकर के जीवन-दर्शन और विचारों को रंगों में उतारने के लिए अम्बेडकर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (अम्बेडकर चैंबर) द्वारा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय (आई.के.एस.वी.), खैरागढ़ के चित्रकला विभाग के सहयोग से अम्बेडकर आर्ट (पेंटिंग) वर्कशॉप का सफलता आयोजन किया गया। यह कलात्मक पहल 19 जनवरी 2026 को हुई जिसे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती से जुड़े शैक्षणिक एवं रचनात्मक आयोजनों के अंतर्गत आयोजित किया गया।
इस विशिष्ट कला कार्यशाला में चित्रकला विभाग के 52 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने डॉ. अंबेडकर के जीवन, संघर्ष, दर्शन और संवैधानिक दृष्टि को सशक्त दृश्य अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किए। समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, शिक्षा, सामाजिक न्याय और संवैधानिक नैतिकता जैसे विषय को चित्रों में उकेरा गया।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी और यह एशिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय माना जाता है जो पूर्णतः संगीत, नृत्य, ललित कला और रंगमंच को समर्पित है। अपनी विशिष्ट पहचान और कला शिक्षा में अग्रणी भूमिका के लिए यह विश्वविद्यालय व्यापक रूप से प्रतिष्ठित है।
प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं संस्थागत नेतृत्व की उपस्थिति
यह कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा, माननीय कुलपति, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के संरक्षण में आयोजित हुआ, जिन्होंने मुख्य संरक्षक के रूप में उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई।
अम्बेडकर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के राष्ट्रीय अध्यक्ष रुसेन कुमारविशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने कार्यक्रम को संस्थागत सहयोग प्रदानकिए।
कार्यक्रम का शैक्षणिक मार्गदर्शन एवं विभागीय समन्वय प्रो. मानस साहू, डीन, दृश्य कला संकाय तथा डॉ. विकास चंद्र, चित्रकला विभाग द्वारा किया गया। विजिटिंग प्रोफेसर संजय कुमार एवं चंदन पी. डेकाटे ने सक्रिय सहयोग किया।
निर्णायक मंडल ने सराही गहराई, मौलिकता और सामाजिक चेतना
चित्रकृतियों का मूल्यांकन प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. रवि नारायण गुप्ता, डॉ. छगेंद्र उसेंडी, संदीप किंडो एवं कपिल सिंह वर्मा शामिल थे।
निर्णायक मंडल ने चित्रों में निहित विचारों की गहराई, मौलिकता, तकनीकी दक्षता और विषयगत प्रासंगिकता की सराहना की। मेरिट के आधार पर पाँच विद्यार्थियों का चयन पुरस्कार हेतु किया गया।
अम्बेडकर आर्ट वर्कशॉप के विजेता
1. प्रथम स्थान – श्रेयश त्रिपाठी (एमएफए, प्रथम वर्ष)
2. द्वितीय स्थान – श्रुति साहू (एमएफए, द्वितीय वर्ष)
3. तृतीय स्थान – पुष्पेंद्र कुमार केवट (एमएफए, द्वितीय वर्ष)
4. चतुर्थ स्थान – अनमोल गोयल (एमएफए, प्रथम वर्ष)
5. पंचम स्थान – अंकित कुमार साहू (बीएफए, चतुर्थ वर्ष)
विजेताओं को नकद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रथम पुरस्कार ₹10,000, द्वितीय ₹7,000, तृतीय ₹5,000, चतुर्थ ₹3,000 तथा पंचम पुरस्कार ₹2,000 का रहा।
कुलपति ने छात्रों से अंबेडकर के मार्ग पर चलने का आह्वान किया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा, माननीय कुलपति, आई.के.एस.वी. ने कहा कि निरंतर प्रयास, अनुशासन और ईमानदारी सफलता की अनिवार्य शर्तें हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कला क्षेत्र के प्रति समर्पित रहते हुए समाज के लिए सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि अम्बेडकर आर्ट वर्कशॉप केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक गहन शैक्षणिक और सामाजिक पहल है, जो युवा मनों को डॉ. अंबेडकर की संवैधानिक दृष्टि से जोड़ती है। कला के माध्यम से अंबेडकर को समझने पर छात्र समानता, न्याय, गरिमा और बंधुत्व जैसे मूल्यों को गहराई से आत्मसात करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को अपनाने, नैतिक साहस विकसित करने, सत्य के पक्ष में खड़े होने और अपनी कला के माध्यम से समाज की आवाज़ बनने का आह्वान किया।
कला, सामाजिक चेतना और आर्थिक सशक्तिकरण का संगम
अम्बेडकर चैंबर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रुसेन कुमार ने अपने संबोधन में कला की सामाजिक जिम्मेदारी और डॉ. अंबेडकर के आर्थिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “कला केवल सौंदर्य की अभिव्यक्ति नहीं है, यह सामाजिक चेतना की भाषा भी है। यह कार्यशाला युवा कलाकारों को रंगों के माध्यम से डॉ. अंबेडकर के विचारों को समझने और समाज तक पहुँचाने का अवसर देती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज के युवा कलाकारों को केवल चित्रकार ही नहीं, बल्कि ‘आर्ट एंटरप्रेन्योर’ बनने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए, ताकि वे अपनी कला के माध्यम से पहचान, आजीविका और आर्थिक स्वतंत्रता अर्जित कर सकें। डॉ. अंबेडकर का सपना सामाजिक उत्थान के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण का भी था, क्योंकि आर्थिक स्वतंत्रता के बिना समानता और गरिमा अधूरी रहती है।
रुसेन कुमार ने कहा कि जब कलाकार अपने कार्य का मूल्य समझता है, उसे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करता है और नेटवर्क, प्रदर्शनी एवं बाजार के अवसर विकसित करता है, तब वह न केवल अपनी आय बढ़ा सकता है, बल्कि डा. अम्बेडकर के जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाता है।
सामाजिक उत्तरदायित्व का माध्यम बनी कला
रुसेन कुमार ने बताया कि अम्बेडकर आर्ट वर्कशॉप को डॉ. अम्बेडकर के प्रति रचनात्मक और बौद्धिक श्रद्धांजलि के रूप में परिकल्पित किया गया था। इसका उद्देश्य युवा कलाकारों को उन विचारों से जोड़ना था, जिन्होंने आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी।
रुसेन कुमार ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन केवल एक ऐतिहासिक यात्रा है जिसमें समानता, न्याय और मानव गरिमा के लिए संघर्ष का जीवंत दर्शन मिलता है। जब उनके विचार शब्दों से आगे बढ़कर रंगों और रेखाओं में उतरते हैं, तब कला एक सामाजिक चेतना का माध्यम बन जाती है। रंगों में उतरे जीवन दर्शन और विचार इसी भावना को अभिव्यक्त करता है, जहाँ युवा कलाकारों ने चित्रकला के माध्यम से अंबेडकर के संघर्ष, संविधान निर्माण की दृष्टि और सामाजिक परिवर्तन के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किए। यह कार्यशाला रचनात्मकता का शानदार मंच बनी और साथ में नई पीढ़ी को अंबेडकर के मूल्यों से जोड़ने वाली एक प्रेरक पहल भी सिद्ध हुई।
उत्साहजनक सहभागिता और उच्च गुणवत्ता को देखते हुए रुसेन कुमार ने कहा कि अम्बेडकर आर्ट वर्कशॉप का आयोजन नियमित रूप से कियाजाना चाहिए, ताकि सामाजिक चेतना से युक्त कला को प्रोत्साहन मिले और उभरते कलाकारों को मंच, पहचान और सम्मान प्राप्त हो सके।



