पंकज कुमार झा
रायपुर। इस चित्र को ध्यान से देखिए। सन 2021 03 अप्रैल, शनिवार। जैसा कि पोस्ट में वर्णित है, छत्तीसगढ़ के तब के मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel जी, और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, तब के बस्तर सांसद Deepak Baij जी, दोनों असम में कथित ऐतिहासिक रोड शो के बाद एक रेस्तरा में थकान उतार रहे थे। हँसते-खिलखिलाते हुए कथित सफल चुनाव प्रचार को सेलिब्रेट कर रहे थे, आनंद मना रहे थे।
उसी दिन बस्तर संभाग के बीजापुर में नृशंस नक्सल हमले में देश ने सुरक्षा बलों के 22 जवानों को खोया था। 36 जवान बुरी तरह घायल भी हुए थे। उस हमले की जानकारी के घंटों बाद की यह तस्वीर है जो स्वयं बस्तर सांसद ने पोस्ट किया था।
उसी असम में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah जी भी थे। नक्सल वारदात की खबर लगते ही सारा चुनाव कार्य छोड़ उड़ पड़े थे थे छत्तीसगढ़ की तरफ। जब तक तब के मुख्यमंत्री और स्थानीय सांसद वहां मौज करते हुए फोटो पोस्ट करने में लगे थे, तब तक एक दौर की बैठक निपटा कर, घायलों की चिकित्सा आदि का प्रबंध कर अमित शाह जी नक्सलियों से बदला लेने की रणनीति की तैयारी भी कर चुके थे।
जबकि प्रदेश के ये दोनों हजरात कुल 30 घंटे के बाद थकान पूरी तरह उतार कर वापस छत्तीसगढ़ पहुंचे थे, तरो-ताजा होकर। गृह मंत्री अमित शाहजी ने तब की प्रदेश सरकार द्वारा नक्सलियों को जिस प्रश्रय और आसरे देने की बात की है, उसका इससे अधिक गंभीर साक्ष्य और क्या चाहिए भला? क्या लगता है आपको? बिना प्रश्रय और आसरा के ऐसी संवेदनाविहीन निष्ठुरता आ सकती है कभी सूबेदार और स्थानीय सांसद की?
अब जब माओवादी आतंक लगभग उन्मुक्ति के मुहाने पर है, जब केंद्र सरकार के संकल्प और Vishnu Deo Sai जी की सरकार के लगन से यह कोढ़ समाप्त होने की स्थिति में आ गया है, तब बार-बार Indian National Congress के ऐसे कृत्यों को याद करते रहने की आवश्यकता है, ताकि सनद रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री जी ने यूं ही नहीं कह दिया है कि कांग्रेस के प्रश्रय और आसरे से ही माओवादी आतंक फूला-फला।
सही है न? क्या लगता है आपको?



