दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में एक ऐसी तकनीकी चूक हुई है, जो राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा का विषय बनी हुई है। मंगलवार (10 फरवरी 2026) को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा महासचिव को यह नोटिस सौंपा, जिसमें स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया गया है। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत अन्य दलों के कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसे दोपहर 1:14 बजे नियम 94(सी) के तहत जमा किया।
लेकिन प्रस्ताव की तैयारी में ही एक बड़ी भूल हो गई—नोटिस में घटनाओं की तारीख 2026 की जगह बार-बार 2025 लिख दी गई। यह गलती इतनी स्पष्ट थी कि बीजेपी ने तुरंत तंज कसना शुरू कर दिया। बीजेपी प्रवक्ताओं ने इसे “बालक बुद्धि पार्टी” की हरकत करार देते हुए कहा कि बजट सत्र 2026 में चल रहा है, लेकिन विपक्ष ने पिछले साल का साल लिख दिया। इस तकनीकी खामी के कारण शुरुआती नोटिस स्वीकार नहीं किया गया, और विपक्ष को संशोधित नोटिस दोबारा जमा करना पड़ा।
विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन में राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया, झूठे आरोप लगाए और पक्षपाती रवैया अपनाया। इसीलिए संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत प्रस्ताव लाया गया। राहुल गांधी ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि कांग्रेस सूत्रों के अनुसार विपक्ष के नेता के रूप में स्पीकर के खिलाफ ऐसा कदम संसदीय गरिमा के खिलाफ माना गया। टीएमसी ने भी नोटिस पर साइन नहीं किए और पहले स्पीकर से शिकायत पत्र देने की बात कही।
बीजेपी ने इसे विपक्ष की गंभीरता पर सवालिया निशान बताया और कहा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में ऐसी बेसिक गलती लोकतंत्र की मजाक उड़ाने वाली है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे “चरस फूंककर तैयार” नोटिस कहकर मजाक उड़ाया, जैसा कि पुराने राजस्थान बजट पढ़ने या गलत भाषण वाली घटनाओं से जोड़कर तंज कसे गए।
स्पीकर ओम बिरला ने फैसला लिया है कि प्रस्ताव पर चर्चा और फैसला होने तक वे कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। अब यह प्रतीकात्मक प्रस्ताव संख्या बल के कारण पास होने की कम संभावना है, लेकिन संसद में तनाव बढ़ा हुआ है।



