मोदी विरोध के ‘आंदोलनजीवी’ बोल

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कल्पेश पटेल
रायगढ़ : दलित कार्यकर्ता: “बीजेपी कभी किसी दलित को राष्ट्रपति नहीं बनाएगी।”
बीजेपी ने दलित नेता रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाया।
— वही दलित कार्यकर्ता: “राष्ट्रपति तो एक बेकार पद है।”
आदिवासी कार्यकर्ता: “बीजेपी कभी किसी आदिवासी को राष्ट्रपति नहीं बनाएगी।”
बीजेपी ने आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया।
— वही आदिवासी कार्यकर्ता: “राष्ट्रपति तो एक बेकार पद है।”
ओबीसी कार्यकर्ता: “बीजेपी को ओबीसी की कोई परवाह नहीं है।”
याद दिलाया गया कि नरेंद्र मोदी स्वयं ओबीसी हैं।
— वही ओबीसी कार्यकर्ता: “मोदी असली ओबीसी नहीं हैं।”
जनरल कैटेगरी के कार्यकर्ता: “बीजेपी कभी जनरल वर्ग के नेता को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनाएगी।”
बीजेपी ने कायस्थ समाज के नितिन नवीन को पार्टी अध्यक्ष बनाया।
— वही कार्यकर्ता: “पार्टी अध्यक्ष भी कोई पद होता है? उसकी क्या अहमियत है?”
हिंदुत्व समर्थक: “बीजेपी कभी राम मंदिर नहीं बनाएगी, यह सिर्फ चुनावी नारा है।”
बीजेपी ने राम मंदिर का निर्माण कराया।
— वही हिंदुत्व समर्थक: “इसमें बीजेपी की क्या भूमिका है? मंदिर तो वैसे भी बनना ही था।”
निष्कर्ष:
बीजेपी जो भी करे, चाहे वह इन समूहों की अपनी ही घोषित मांगों को पूरा क्यों न कर दे, ये लोग कभी संतुष्ट नहीं होंगे। क्योंकि उनका उद्देश्य कभी प्रतिनिधित्व, सुधार या समाधान नहीं था—उनका असली उद्देश्य केवल मोदी का विरोध करना और उसके विरुद्ध काम करना रहा है।
और यदि कभी राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यही सब लोग चुप हो जाएंगे—क्योंकि तब खुले हाथों से लूटने और भारत को “डीप स्टेट” के हवाले करने का समय आ जाएगा।

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