दिल्ली। भारतीय नारी की आंतरिक शक्ति का उत्सव 07 और 08 मार्च 2026 को दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में ‘भारती – नारी से नारायणी’ नामक एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। यह सम्मेलन भारत की महिला विचारकों का पहला ऐसा बड़ा मंच है, जहाँ नारी को केवल परिवार की आधारशिला से आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण की मुख्य इकाई के रूप में स्थापित करने का गहन चिंतन होगा। भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और उसकी सहयोगी संस्था शरण्या के संयुक्त तत्वाधान में यह दो दिवसीय महा-मंथन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हो रहा है, जो महिलाओं की बहुआयामी क्षमता को भारतीय दृष्टिकोण से रेखांकित करता है।
इस सम्मेलन की विशेषता यह है कि यह पश्चिमी फेमिनिज्म की संघर्षपूर्ण अवधारणा से अलग, भारतीय परंपरा पर आधारित है। जहाँ पश्चिमी नारीवाद में पुरुष-नारी के बीच टकराव की बात होती है, वहीं भारतीय विचारधारा में नारी और पुरुष एक ही प्रकाश की दो ज्योतियाँ माने जाते हैं-समान, पूरक और सहयोगी।
राष्ट्र सेविका समिति, जो 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर द्वारा दशहरे के पावन अवसर पर स्थापित हुई, पिछले 90 वर्षों से इसी सोच के साथ महिलाओं के बहुआयामी उत्थान के लिए कार्यरत है। समिति का कार्यक्षेत्र केवल महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के सकारात्मक विकास पर केंद्रित है।
शरण्या (2016 में स्थापित) वंचित वर्गों की महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता प्रदान कर रही है, जबकि भारतीय विद्वत परिषद (2009 से सक्रिय) भारतीय शास्त्रों के अध्ययन को आधुनिक संदर्भों से जोड़ती है। इन तीनों संस्थाओं का संयुक्त प्रयास इस सम्मेलन को एक सशक्त और प्रामाणिक मंच प्रदान करता है।
सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समापन सत्र की प्रमुख अतिथि होंगी, जबकि उद्घाटन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी। यह उपस्थिति सम्मेलन को राष्ट्रीय स्तर की गरिमा प्रदान करती है। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएँ-शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, रक्षा, चिकित्सा, उद्योग, उद्यमिता, न्यायपालिका, अध्यात्म, खेल, मीडिया, साहित्य आदि-यहाँ एकत्र होंगी। विशेष रूप से महिला सांसदों का पैनल, महिला वाइस चांसलरों (कुलपतियों) का अलग सत्र और साध्वी संगम (महिला संतों का समूह) चर्चा को गहराई देगा।
सम्मेलन की आठ मुख्य थीम्स हैं—विद्या, शक्ति, मुक्ति, चेतना, प्रकृति, संस्कृति, सिद्धि और कृति। ये थीम्स भारतीय नारी की आंतरिक यात्रा को दर्शाती हैं:
- विद्या: ज्ञान ही शक्ति है। उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, लड़कियों की ड्रॉपआउट समस्या, विशेष पाठ्यक्रम और सेल्फ-डिफेंस को अनिवार्य बनाने पर चर्चा होगी।
- शक्ति: आत्म-बोध और आत्म-निर्भरता। वित्तीय साक्षरता, स्किल एजुकेशन और आर्थिक स्वावलंबन पर जोर।
- मुक्ति: रूढ़ियों से मुक्ति। घरेलू हिंसा, सामाजिक बंधनों से बाहर निकलकर सम्मानपूर्ण जीवन।
- चेतना: कार्यक्षेत्र में समान भागीदारी। नीति-निर्माण और निर्णयों में महिलाओं की बराबर भूमिका।
- प्रकृति: महिलाओं की शारीरिक-मानसिक प्रकृति को सम्मान। कार्यस्थलों पर पीरियड लीव, मातृत्व अवकाश, शिशु-पालन सुविधाएँ और मेनोपॉज जैसी स्थितियों के लिए सहायक व्यवस्था।
- संस्कृति: मजबूत जड़ें। परिवार और समाज में संस्कारों को संरक्षित रखते हुए आधुनिकता को अपनाना।
- सिद्धि: सफल महिलाओं की प्रेरक कहानियाँ। उनकी उपलब्धियाँ समाज को प्रेरित करेंगी।
- कृति: ठोस कार्य-योजना। विचारों को क्रियान्वयन में बदलना।
देश भर में पहले से चलाए गए अभियानों से प्राप्त सुझावों को मुख्य सम्मेलन में शामिल किया जाएगा। विभिन्न परिचर्चाओं से निकले सुझाव भारत सरकार के संबंधित विभागों को भेजे जाएंगे, ताकि नीतिगत स्तर पर उनका क्रियान्वयन हो सके।
यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ‘मौन शक्ति से रणनीतिक शक्ति’ की यात्रा का प्रतीक है। महिलाएँ सदियों से परिवार को संभालती आई हैं, परंपराओं को जीवित रखती हैं और समाज को मजबूती प्रदान करती हैं। अब समय है कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की धुरी बनाया जाए। वैश्विक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को आवश्यक माना जाता है, और भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ इसे और सशक्त बना सकता है।
सम्मेलन का दृष्टिकोण स्पष्ट है-एक समावेशी मंच जहाँ महिलाएँ जुड़ें, सहयोग करें और समाधान तैयार करें। इससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत का लक्ष्य मजबूत होगा। अपेक्षित परिणामों में शामिल हैं: सरकार को बहु-आयामी नीति सुझाव, ‘भारती’ को स्थायी मंच बनाना, महिला नेतृत्व नेटवर्क तैयार करना और भविष्य में वार्षिक आयोजन की रूपरेखा।
राष्ट्र सेविका समिति का 90 वर्षों का अनुभव, प्रचार से दूर रहकर सेवा का कार्य और विशुद्ध भारतीय विचारधारा इस सम्मेलन की सफलता की गारंटी है। जब विभिन्न पृष्ठभूमि, आयु और प्रदेशों की महिलाएँ एक साथ आती हैं, तो सामूहिक ज्ञान से बड़े परिवर्तन संभव होते हैं।
‘नारी से नारायणी’ सम्मेलन महिलाओं की शक्ति का उत्सव है, जो उन्हें नेतृत्व की मुख्य धारा में लाकर राष्ट्र को मजबूत बनाएगा। यह एक सौम्य, सकारात्मक और भारतीय मूल्यों से ओतप्रोत प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। दिल्ली का विज्ञान भवन इन दो दिनों में न केवल विचारों का केंद्र बनेगा, बल्कि नारी शक्ति के नवजागरण का साक्षी भी।



