नेशन फर्स्ट, रिलिजन लास्ट — यही भारत का सच्चा राष्ट्रधर्म है: डॉ. इंद्रेश कुमार

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लखनऊ, 27 जनवरी। विकसित भारत के संकल्प काल में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए लखनऊ के एरम गर्ल्स डिग्री कॉलेज में “एक क़ौम, एक वतन – हिंदुस्तान” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि “नेशन फर्स्ट, रिलिजन लास्ट और वतन की मुहब्बत जन्नत पहुंचाती है”—यही भारत की आत्मा और सच्चा राष्ट्रधर्म है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में हर नागरिक की जिम्मेदारी निर्णायक है। संगोष्ठी में राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रनिष्ठा और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर विमर्श हुआ।

कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार और उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश अंसारी के साथ साथ एनसीएमईआई के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर, आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति राज कुमार मित्तल, जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार कर्नल ताहिर मुस्तफा, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक सैयद रज़ा रिज़वी और डॉ. शालिनी अली, एरम ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर ख्वाजा फैज ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शौकत अली, ठाकुर राजा रईस, आलोक चतुर्वेदी, जियारत बाबा मलंग, ताहिर शाह, कारी अबरार जमाल, मज़ाहिर खान, पूर्व आईपीएस मंजूर अहमद, पूर्व कुलपति माहरुख मिर्ज़ा, समाजसेवी सहर बानो, सुन्नी वक्फ बोर्ड की सदस्य सबिहा अहमद समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, समाजसेवी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।

डॉ. इंद्रेश कुमार ने नफरत, अलगाव और कट्टरता की राजनीति करने वालों को समाज और देश दोनों का दुश्मन बताते हुए सभी समुदायों से आपसी भाईचारा, संविधान के सम्मान और राष्ट्र निर्माण में एकजुट होकर योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में एकता है और इसी भावना के साथ आगे बढ़कर ही देश विश्वगुरु बनेगा।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि बांग्लादेशी मुसलमान जो घुसपैठिए हैं वो भारतीय मुसलमानों का हक खा रहे हैं। भारतीय मुसलमान बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं जबकि घुसपैठिए नौकरी कर रहे हैं, रोजगार में लगे हैं, व्यापार कर रहे हैं, सड़कों पर ठेले लगा रहे हैं। हज पर जाने वाले मुसलमान वहां आवाज उठाएं कि बांग्लादेश के मुसलमानों को कुछ कुछ लाख सभी 59 मुस्लिम देश रख लेंगे तो ये सबका भला होगा। भारतीय मुसलमानों को उनका हक मिल सकेगा।

राज्यमंत्री दानिश अंसारी ने इस अहम मुद्दे पर आयोजित संगोष्ठी को वक्त की मांग बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ का संकल्प पूरे देश को साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच है। उन्होंने कहा कि यह सरकार दल से ऊपर उठकर पूरे देश को एकजुट कर भारत को आगे बढ़ाने में लगी है। विकसित भारत का संकल्प बहुत बड़ा है और इसके लिए पूरे देश में इंद्रेश कुमार और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की विकसित भारत की सोच पूरे देश को विकसित करने की सोच है, जिससे भारत दुनिया के बड़े देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होगा, जो हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

दानिश अंसारी ने कहा कि यदि भारत का एक-एक नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभा ले तो देश खुद-ब-खुद विकसित हो जाएगा। गांव में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक की जिम्मेदारी उतनी ही है जितनी सरहद पर खड़े सैनिक की है। आज़ादी के लिए हमने बड़ी कीमत चुकाई है और लाखों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। उन्होंने कहा कि हम सब भारतीय हैं और हमें एकजुट होकर सोचना और आगे बढ़ना है, तभी एक भारत, सशक्त भारत और श्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा।

एनसीएमईआई (NCMEI) के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि 140 करोड़ लोगों के इस देश में विविधता के बीच एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और बहुलतावाद में बसती है, और यही मूल्य हमें विश्व में एक अनूठी पहचान देते हैं।

प्रो. अख्तर ने नफरत फैलाने वाली सोच और विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को संवाद, समझ और सकारात्मक मार्गदर्शन के जरिए सही रास्ते पर लाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कानून या सरकार ही नहीं, बल्कि परिवार, शिक्षण संस्थान, धार्मिक नेता और सामाजिक संगठन मिलकर ही सौहार्दपूर्ण वातावरण बना सकते हैं।

उन्होंने सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और एक-दूसरे के त्योहारों में सहभागिता को राष्ट्रीय एकता की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि जब हम एक-दूसरे की खुशियों और परंपराओं में शामिल होते हैं, तो आपसी अविश्वास और दूरी अपने आप कम हो जाती है।

प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करें, अफवाहों और नफरत भरे संदेशों से दूर रहें तथा सद्भाव, शांति और राष्ट्रीय एकता के संदेश को आगे बढ़ाएं।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत तभी सशक्त और समृद्ध बनेगा, जब हर नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म, भाषा या क्षेत्र से हो, खुद को इस देश का समान भागीदार महसूस करे और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को व्यवहार में उतारे।

आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति राज कुमार मित्तल ने युवाओं की शक्ति को शिक्षा, राष्ट्रहित और रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गरीबी, बेरोजगारी और भेदभाव से मुक्त, सौहार्द और समरसता से भरा भारत ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

डॉ. शालिनी अली ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है। उन्होंने कहा, “हम सब एक हैं। हमारी पूजा-पद्धतियाँ भले ही अलग-अलग हों, लेकिन हमारा संविधान एक है और हमारा डीएनए भी एक है। यही भारतीयता की पहचान है।” उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण बच्चों की सही तालीम और संस्कारों से होता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदार नागरिक बनने की शिक्षा भी दें।

डॉ. अली ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि बिना सत्यापन के किसी भी प्रकार की सामग्री साझा करना समाज में भ्रम, नफरत और वैमनस्य फैलाने का कारण बन सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे किसी भी खबर, वीडियो या संदेश को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सच्चाई की जांच अवश्य करें और अफवाहों का हिस्सा न बनें।

उन्होंने “मोमिन” और “मुसलमान” के फर्क को समझाने पर भी जोर दिया और कहा कि सिर्फ नाम या पहचान से नहीं, बल्कि अपने आचरण, चरित्र और कर्म से ही कोई सच्चा मोमिन बनता है। उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान वही है जो देश के कानून का सम्मान करे, समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखे और इंसानियत की सेवा को अपना धर्म माने। उनके विचारों ने उपस्थित लोगों को आत्ममंथन और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित किया।

कर्नल ताहिर मुस्तफा ने कहा कि “एक कौम, एक वतन हिंदुस्तान” हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत की मुहिम को आगे बढ़ाने का आह्वान किया और देश में नफरत फैलाने वालों का समाज को मिलकर मुकाबला करने की जरूरत बताई।

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