निर्णय क्षमता, साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता: रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार

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नई दिल्ली, सात मार्च। भारत की महिलाएं परंपरा की वाहिकाएं ही नहीं, परिवर्तन की वाहिकाएं भी हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विज्ञान भवन में महिला विचारकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन भारती- नारी से नारायणी के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। आठ मार्च तक चलने वाले सम्मेलन का समापन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी। सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और स्वयंसेवी संस्था शरण्या ने किया है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि निर्णय क्षमता, साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता। आज हर क्षेत्र में भारतीय महिलाएं पुरुषों से बेहतर काम कर रही हैं। महिलाओं ने खुद ही अपने लक्ष्य तय करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और देश की अपेक्षाएं महिलाएं अवश्य पूरी करें, लेकिन अपने मन की खुशी के लिए भी उन्हें कुछ समय निकालना चाहिए। पूरे परिवार की सेहत का ध्यान रखते हुए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने माताओं से अपील की कि जो माहौल उन्हें नहीं मिला, वह उन्हें अपनी बेटियों को जरूर देकर उड़ने के लिए खुला आकाश देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम करें, यह क्षमता उनमें है। अगर वे अपने लक्ष्य स्वयं निर्धारित करें, तो नारी से नारायणी बन जाएंगी। रेखा गुप्ता ने कहा कि इस सभागार में उपस्थित महिलाओं के चेहरों पर मैं मुसकान देख रही हूं। बड़े और जिम्मेदार पदों पर आसीन महिलाओं को अन्य महिलाओं को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनकी सरकार ने बेटियों को शक्ति संपन्न करने के लिए लखपति बिटिया योजना लागू की है। पहले केवल 10वीं पास करने तक ही दिल्ली की बेटियों को आर्थिक लाभ दिया जाता था। लेकिन उनकी सरकार ने बेटियों के स्नातक करने पर करीब सवा लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय किया है। साथ ही उनकी सरकार ने महिलाओं को रात में भी काम करने की छूट दी है। पहले रात्रि पाली में महिलाओं के काम करने पर रोक थी। महिलाओं के उत्थान के लिए बहुआयामी काम करने के लिए मुख्यमंत्री ने राष्ट्र सेविका समिति की जम कर तारीफ भी की।

समारोह की अध्यक्ष राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य संचालिका सुश्री वी. शांता कुमारी ने इस मौके पर कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत महत्व दिया जाता है। नारी समाज को धारण करने वाली सुदृढ़ शक्ति है, इसलिए नारायणी बन सकती है। उन्होंने कहा कि मंगलाचरण या वेदों के अध्ययन की बात हो या फिर ऑपरेशन सिंदूर, भारत की महिलाओं ने अप्रतिम शौर्य का परिचय हर क्षेत्र में दिया है।

शांता कुमारी ने कहा कि महिला विचारकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन भारती- नारी से नारायणी में हो रहे मंथन से निकलने वाली अमृत धारा को देश भर में पहुंचा कर सही विमर्श स्थापित करना ही कार्यक्रम का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टि से होने वाले चिंतन, मनन को कृति रूप में भी स्थापित करना होगा।

उद्घाटन समारोह में भारतीय विद्वत परिषद की सचिव शिवानी वी. ने कहा कि नारी से नारायणी पवित्र यात्रा है। लोग अक्सर नारी के सशक्तीकरण की बात करते हैं, लेकिन नारी तो अपने आप में ही ऊर्जा और शक्ति का स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारती- नारी से नारायणी राष्ट्रीय सम्मेलन में हर नारी सशक्तीकरण की बात करने नहीं, बल्कि अपनी शक्ति को जगा कर आत्म-बोध के लिए आए हैं।

शिवानी ने कहा कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। वे समस्या नहीं, बल्कि ‘अल्टीमेट सॉल्वर’ हैं। उन्होंने महिलाओं को उचित सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ सिर्फ अक्षर विद्या नहीं है, बल्कि शक्ति का संस्कार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि दो दिन के इस सम्मेलन में मिलने वाले सुझाव भारत सरकार के संबंधित विभागों को भेजे जाएंगे।

समारोह में शरण्या की अध्यक्ष अंजू आहूजा, अदम्य चेतना की मैनेजिंग ट्रस्टी तेजस्विनी अनंत कुमार, राष्ट्र सेविका समिति की विजया शर्मा और चारु कालरा ने भी विचार व्यक्त किए। दो दिन के इस सम्मेलन में आठ विषयों पर गंभीर चर्चा हो रही है। इस दौरान महिला सांसदों, वाइस चासलरों और साध्वियों के विशेष पैलन भी चर्चा करेंगे।

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