पत्रकार आशुतोष गुप्ता क्यों बने छुट्टा सांड

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NEW DELHI, INDIA - JANUARY 11: TV journalist Ashutosh during a press conference on January 11, 2014 in New Delhi, India. Ashutosh, a leading face of Indian television who quit as editor of a news network today. Ashutosh is the first prominent journalist who joined the queue of professionals knocking at AAP's door after the year-old party's dazzling debut in the Delhi assembly election. (Photo By Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images)

दिल्ली। सोशल मीडिया पर दिल्ली के पत्रकारिता जगत में तीखी बहस छिड़ गई है, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष गुप्ता (@ashutosh83B) केंद्र में हैं। आशुतोष ने हाल ही में एक पोस्ट में उन पत्रकारों पर निशाना साधा जो 2014 से पहले अज्ञात थे, लेकिन अब बीजेपी या आरएसएस से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए खुद को निष्पक्ष बताते हैं। उन्होंने उन्हें “परजीवी पत्रकार” तक कहा और सत्ता से लाभ लेने का इल्ज़ाम लगाया।

इस पर पत्रकार अनुरंजन झा (@anuranjanj) ने तीखा जवाब दिया। अनुरंजन ने लिखा कि आशुतोष खुद 1995 से पहले किसी को ज्ञात नहीं थे, और उन्होंने कम समय में पुराने पत्रकारों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने कई पत्रकारों के छात्र जीवन में AISA या NSUI से जुड़े होने का जिक्र किया और नीरा राडिया जैसे उदाहरण देकर ब्रीफ लेने की पुरानी परंपरा याद दिलाई। सबसे बड़ा तीर उन्होंने आशुतोष की उस ‘ऐतिहासिक भूल’ पर मारा, जब वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया।

राजनीति में जाने के बाद आशुतोष ने ‘ऑन द रिकॉर्ड’ कसम खाई थी कि पत्रकारिता में नहीं लौटेंगे, लेकिन लौट आए-जिसे वे एक बड़ी गलती मानते थे। अब वह सही कैसे? उन्हें तो कम से कम कोई हक नहीं है कि वे पत्रकारिता पर ज्ञान दें।

उनके करीबी ही बताते हैं कि आशुतोष का पढ़ने-लिखने से अब वैसा ही रिश्ता रह गया है, जैसा सचिन तेंदुलकर का ध्रुपद गायन से। उन्होंने यह भी कहा कि आशुतोष अब व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स पर ज्यादा निर्भर लगते हैं।

सुप्रिया श्रीनेतजी ने आशुतोष को समझाइश दी कि यह ज्यादती है। आजकल के पत्रकार पढ़ते हैं। खूब पढ़ते हैं। वाट्सएप के फर्रे। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने इसे ‘फ्रेंडली मैच’ बताकर दोनों पर चुटकी ली।

इस पूरी जुगलबंदी के बाद आशुतोष सोशल मीडिया पर ‘छुट्टा सांड’ की तरह बौखलाए नजर आ रहे हैं- जिसे हर्षवर्धन और अनुरंजन ने लाल कपड़ा दिखा दिया हो।

एक के बाद एक पोस्ट, रिप्लाई और बहस में लगे हुए। यूजर्स पूछ रहे हैं कि आखिर इतना गुस्सा क्यों? क्या पुरानी राजनीतिक पसंद-नापसंद का असर है, या पत्रकारिता में वापसी की आलोचना से चोट लगी है?

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