
बीजेपी दिल्ली प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट और उपलब्ध सूचियों के अनुसार, प्रो. महेश वर्मा न तो दिल्ली प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ताओं की लिस्ट में शामिल हैं और न ही राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के किसी प्रवक्ता पैनल में उनका नाम है। दिल्ली बीजेपी के मीडिया और जनसंपर्क प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर हैं, जबकि प्रवक्ताओं में शिखा राय, डॉ. अनिल गुप्ता, प्रवीण बब्बर, विक्रम बिधूड़ी, अजय शेहरावत, डॉ. राजकुमार फुलवारिया, शुभेंदु शेखर अवस्थी, प्रीती अग्रवाल, नीरज तिवारी, नोमा गुप्ता, ममता त्यागी, यासिर जिलानी और नितिन त्यागी जैसे नाम प्रमुख हैं। मीडिया रिलेशन का जिम्मा विक्रम मित्तल संभालते हैं, आईटी पुनीत अग्रवाल और सोशल मीडिया डॉ. रोहित उपाध्याय के पास है।
इनमें कहीं भी प्रो. महेश वर्मा का जिक्र नहीं मिलता। फिर भी एबीपी न्यूज उन्हें ‘बीजेपी प्रवक्ता’ का तमगा देकर डिबेट में बिठाता रहा है, जहां संदीप चौधरी उन्हें अक्सर ‘मदारी’ की तरह इस्तेमाल करते दिखते हैं—उनके बयानों से विवाद पैदा कर TRP कमाते हैं। यह फॉर्मेट इतना सेट है कि शो की पूरी विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है। अगर चैनल को लगता है कि थंबनेल और सनसनीखेज डिबेट से दर्शक बंधे रहेंगे, तो यह भूल है। असल में यह फेक नैरेटिव और फर्जी मेहमानों पर टिका हुआ तमाशा है।


यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एबीपी न्यूज की पूरी पत्रकारिता शैली पर सवाल उठाता है। जब खुद संदीप चौधरी शो में दूसरों को ‘फेक न्यूज’ या ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का ज्ञान देते हैं, तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होनी चाहिए। क्योंकि उनके शो में सालों से बीजेपी के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। एक ऐसे ‘प्रवक्ता’ को प्रमोट करना, जो पार्टी की आधिकारिक सूची में कहीं नहीं है, स्पष्ट रूप से भ्रामक पत्रकारिता है।

यह खुलासा मीडिया की विश्वसनीयता के संकट को उजागर करता है। जब चैनल जानबूझकर फर्जी मेहमान बिठाकर डिबेट आयोजित करते हैं, तो दर्शक कैसे भरोसा करें? संदीप चौधरी जैसे एंकर, जो खुद को निडर पत्रकार बताते हैं, असल में सनसनी और पक्षपात का खेल खेल रहे हैं। समय आ गया है कि एबीपी न्यूज इस फर्जीवाड़े पर सफाई दे और पारदर्शिता बरते, वरना उनकी ‘विश्वसनीयता’ का दावा सिर्फ हवा-हवाई साबित होगा।



