दयानंद पांडेय
लखनऊ : पता नहीं क्यों कुछ लोग राहुल गांधी को पप्पू और नासमझ आदि-इत्यादि बताते रहते हैं। मेरा मानना है कि राहुल गांधी में समझ तो है l बिना समझ के तो हर बार संसद का अपहरण कर लेना आसान नहीं है l पट्ठा समूची भाजपा को नचा देता है l शीर्षासन करवा देता है। सारे योग प्राणायाम भी। फिर भी कुछ परिणाम हासिल नहीं होता। चिल्लाते रहिए संसदीय नियम , यह-वह। पर वह अपनी अराजकता के दम पर सही , समूची भाजपा को सिर के बल खड़ा कर देता है l लोकसभा में ऐन स्पीकर के सामने पूरी हेकड़ी से खड़े हो कर चाय की चुस्कियां लेते रहने का आत्मविश्वास और अभद्रता भी सोची समझी बात है। नासमझी नहीं। अभी तक किसी नेता प्रतिपक्ष को ऐसा करते देखा या सुना नहीं गया। यह मोदी की कायरता से उपजी हुई हनक है।
राहुल का चुनाव न जितवा पाना , कांग्रेस की हार का रिकार्ड बनाना , कांग्रेस को निरंतर दीमक बन कर ख़त्म करते जाना , अपनी अराजक , सामंती और नशेड़ी छवि बना लेना आदि-इत्यादि यह सब अलग विषय है।
जब तक देश की जनता राहुल गांधी को प्रधान मंत्री नहीं बनवा देती तब तक उसे यह सब देखने और बर्दाश्त कर लेने की क्षमता विकसित कर लेनी चाहिए। क्यों कि दुनिया एक बार ट्रंप को शायद समझ ले , राहुल गांधी को समझना नामुमकिन है। क्यों कि वह बहुत समझदार आदमी है। पहले के समय में लोग कहते थे कि भाजपा और मोदी की पिच पर राहुल गांधी खेलता है। लोग जाने क्या – क्या कहते थे।
अब का मंज़र यह है कि मोदी समेत समूची भाजपा राहुल गांधी की पिच पर पस्त है। हर बार मोदी को राहुल लोकसभा में घेर कर गिरा देता है। चुनाव जीतना भले मोदी को आता हो। दुनिया भर की डिप्लोमेसी आती हो। ट्रंप को झुकाना भी आता हो , पाकिस्तान की चटनी बनाना भी आता हो पर लोक सभा में राहुल से लड़ना नहीं आता। हार-हार जाता है मोदी , राहुल के आगे।
तो सिर्फ़ इस लिए कि राहुल समझदार बहुत है। यह राहुल का ही डर है कि ओ बी सी को ख़ुश करने के लिए जातीय जनगणना और यू जी सी एक्ट लाना पड़ता है मोदी को। यह राहुल गांधी की पिच है। आप होंगे 370 हटाने के उस्ताद , तीन तलाक़ को ख़त्म करने के मास्टर। सी ए ए के शौक़ीन। मुफ़्त अनाज , शौचालय , गैस जैसी लोकल्याणकारी बातें करने के बाजीगर होंगे आप। देते रहिए देश को इंफ्रास्ट्रक्चर। पर जो आत्मविश्वास राहुल गांधी के चेहरे पर मोदी को अपनी अराजकता में चित्त करने के बाद दीखता है , मोदी के चेहरे पर यह आत्मविश्वास कभी किसी ने देखा हो तो बताए भी।
इस लिए भी कि राहुल गांधी अपने कोर वोटर की पीठ में कभी मोदी की तरह छुरा नहीं घोंपता। मोदी को इस में महारत है। महारत तो ममता बनर्जी की भी देखने लायक़ है कि दिल्ली आ कर जिस तरह चुनाव आयोग में अपनी बात चुनाव आयुक्त को सुना कर बिना उस को सुने उठ गई। कपिल सिब्बल , सिंघवी जैसे वकीलों की फ़ौज को साथ ले कर सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील ख़ुद को उपस्थित किया , शेरनी की तरह गरज कर मोदी के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। तो ममता बनर्जी भी यह सारी नौटंकी अपने कोर वोटर कहिए , घुसपैठिया वोटर कहिए , के लिए कर रही है। दहाड़ती हुई घूम रही है।
पर मोदी ?
अपने वोटर का दुःख-दर्द नहीं जानता। अपने वोटर को चूस कर सिर्फ़ सत्ता का शहद जानता है। अपने वोटर को इमोशनली ब्लैकमेल करता रहता है। टेकेन फॉर ग्रांटेड लिए रहता है। अपने वोटरों को जातियों के खाने में बांट कर आपस में लड़ा देता है। आरक्षण अस्सी से पचासी प्रतिशत करने के मंसूबे पाले हुए है ताकि 2029 में फिर सत्ता का शहद चखे। इसी लिए कभी राहुल गांधी तो कभी ममता बनर्जी अपनी ही पिच पर ला कर मोदी को लुढ़का देती है। अब आप ही बताइए कि नासमझ कौन है ?
राहुल गांधी कि नरेंद्र मोदी ?
दिग्विजय सिंह की अमृता राय के साथ की अंतरंग फ़ोटो कंप्यूटर पर हैक करवा कर दिग्विजय सिंह की थू-थू करवा दी। संजय जोशी की अंतरंग वीडियो निकलवा ली। सार्वजनिक जीवन ख़त्म हो गया संजय जोशी का। प्रणव पांड्या पागल बने घूम रहे। गोविंदाचार्य पता नहीं कहां धूल फांक रहे हैं। एक से एक सूरमा सांस नहीं ले पा रहे। हार्दिक पटेल की अय्याशी भी दिखा दी सब को। सब जानते हैं राहुल गांधी भी अय्याश है। विदेश यात्राओं के लिए बदनामी इसी लिए है राहुल की। पर एक फ़ोटो भी नहीं निकाल पाए ? वीडियो तो बहुत दूर की बात है। राहुल तो ललकार रहा है कि एप्स्टीन फ़ाइल के कारण मोदी ट्रंप से कंप्रोमाइज कर गए। अभी बहुत माल है उस के पास।
यह भी राहुल की पिच है जहां वह मोदी को लुढ़का रहा है। कौन सा खेत चर रहे हैं भाजपा के चाणक्य लोग ? क्यों भैंस बन गए हैं। और यह भैंस भी किस पानी में थाह ले रही है। नक्सली देश से ख़त्म करने की गर्जना करने वाले लोग इस अराजक की चिकित्सा करने में अक्षम क्यों हैं भला !
सोचिए कि जो एक समझदार राहुल गांधी का इलाज नहीं कर पा रहा , वह देश का , देश की समस्याओं का क्या इलाज करेगा ? फिर तमन्ना ग्लोबल लीडर बनने की है।



