अशोक श्रीमाल
हैदराबाद । Temple का रंगमंडप (रंगा-मंटपा) अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और रहस्यमय 56 संगीत स्तंभों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इन स्तंभों को सामान्यतः “सारेगामा स्तंभ” या Musical Pillars कहा जाता है। यह मंदिर दक्षिण भारत की प्राचीन वास्तुकला, शिल्पकला और वैज्ञानिक समझ का एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मंदिर के रंगमंडप में बने ये 56 स्तंभ पत्थर से तराशे गए हैं, लेकिन इनकी सबसे विशेष बात यह है कि इनसे संगीत की ध्वनियाँ निकलती हैं। प्रत्येक मुख्य स्तंभ के चारों ओर 7 छोटे-छोटे उप-स्तंभ बनाए गए हैं। जब इन स्तंभों को हल्के से चंदन की लकड़ी या किसी मुलायम वस्तु से थपथपाया जाता है, तो इनसे अलग-अलग संगीत के स्वरों (सा, रे, गा, मा, प, ध, नि) जैसी ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।
इन स्तंभों की संरचना इतनी सटीक और वैज्ञानिक है कि पत्थर के भीतर की ध्वनि तरंगें विशेष प्रकार से गूंजती हैं और संगीत जैसा अनुभव कराती हैं। यह बात आज भी शोधकर्ताओं और वास्तु विशेषज्ञों के लिए आश्चर्य का विषय है कि लगभग 500 वर्ष पहले विजयनगर साम्राज्य के शिल्पियों ने इतनी उन्नत तकनीक और ध्वनि विज्ञान का प्रयोग कैसे किया।
Hampi स्थित यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य परंपरा का एक उत्कृष्ट नमूना है और आज यह क्षेत्र UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। संगीत स्तंभों की यह अद्भुत संरचना न केवल प्राचीन भारतीय कला की श्रेष्ठता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि उस समय के शिल्पकार ध्वनि, वास्तुकला और गणित के गहरे ज्ञान से संपन्न थे।
आज इन स्तंभों को संरक्षित रखने के लिए उन्हें बजाने की अनुमति नहीं दी जाती, फिर भी ये “संगीतमय पत्थर” भारतीय स्थापत्य की अद्वितीय प्रतिभा और रहस्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं।



