रोजा से रामायण तक: एआर रहमान क्यों कहते हैं बॉलीवुड ने दूरी बनाई?

2-13.jpeg

मुम्बई। एआर रहमान के हालिया इंटरव्यू में बॉलीवुड में काम कम मिलने की बात ने चर्चा बटोरी है, लेकिन इसे सीधे मोदी सरकार या धार्मिक भेदभाव से जोड़ना अतिरंजित और तथ्यों से परे है।

रहमान ने बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में कहा कि पिछले 8 सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनके लिए काम कम हुआ है। उन्होंने इसे पावर स्ट्रक्चर में बदलाव से जोड़ा, जहां अब नॉन-क्रिएटिव लोग फैसले ले रहे हैं। उन्होंने “कम्यूनल थिंग” का जिक्र किया, लेकिन स्पष्ट किया कि यह उनके सामने नहीं, बल्कि “चीनी व्हिस्पर्स” की तरह सुना गया है। वे इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेते और कहते हैं कि वे परिवार के साथ समय बिताने में खुश हैं, काम की तलाश नहीं करते।

यह बयान प्राइवेट इंडस्ट्री (बॉलीवुड) के बारे में है, न कि सरकारी नीतियों या मोदी सरकार द्वारा दिए प्रोजेक्ट्स का। फिल्म इंडस्ट्री में सरकार डायरेक्ट काम नहीं देती। उल्टा, मोदी सरकार के दौरान रहमान को 3 नेशनल अवॉर्ड्स मिले हैं (उनके कुल 7 में से), जो सरकारी सम्मान हैं और किसी भेदभाव की बात को खारिज करते हैं।

बॉलीवुड में आज भी शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान जैसे मुस्लिम सुपरस्टार्स टॉप पर हैं और कई मुस्लिम कलाकार सक्रिय हैं। जावेद अख्तर और शान जैसे सहयोगी भी कहते हैं कि कोई कम्यूनल एंगल नहीं है—काम प्रतिभा, नेटवर्क और उपलब्धता पर निर्भर करता है।

रहमान खुद साउथ फिल्मों में व्यस्त हैं और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रहे हैं। वे रामायण (नितेश तिवारी की फिल्म) के लिए हंस जिमर के साथ संगीत बना रहे हैं, जो हिंदू-मुस्लिम-यहूदी कलाकारों का सहयोग है। अंतरराष्ट्रीय सफलता (ऑस्कर, ग्रैमी) और एआई जैसे विषयों पर भी वे खुलकर बोलते हैं।

कुल मिलाकर, बॉलीवुड में कमी इंडस्ट्री के बदलावों (कॉर्पोरेटाइजेशन, म्यूजिक लेबल्स का प्रभाव) से जुड़ी लगती है, न कि धर्म से। रहमान का बयान राजनीतिक रंग देकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि तथ्य उनके करियर की विविधता और सरकारी सम्मानों से विपरीत दर्शाते हैं।

Share this post

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों से मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान स्टेप से जुड़े हुए हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

scroll to top