शब्दोत्सव: एक नई दिशा में साहित्यिक यात्रा

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दिल्ली। जश्ने रेख्ता, आज तक साहित्य उत्सव या जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे आयोजनों की तरह शब्दोत्सव भी एक साहित्यिक उत्सव बन सकता है। ईश्वर का शुक्र है कि जब शब्दोत्सव आकार ले रहा है, तब यह किसी मौजूदा आयोजन की नकल नहीं है। यह न जश्ने रेख्ता है, न आज तक साहित्य उत्सव, न ही जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल। यह अपना अलग शब्दोत्सव है – एक स्वतंत्र पहचान वाला आयोजन।
कुछ लोगों को लग सकता है कि शब्दोत्सव अनियोजित है, इसके पीछे कोई स्पष्ट योजना या दृष्टि नहीं है। लेकिन यह धारणा गलत है। शब्दोत्सव दिशाहीन नहीं है; इसकी दिशा बिल्कुल साफ और स्पष्ट है। जब कोई आयोजन अपनी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ता है, तो उस पर विश्वास स्वतः जागृत हो जाता है। यदि चुना हुआ रास्ता सही है, तो यात्रा अवश्य मंजिल तक पहुंचेगी।

शब्दोत्सव का पहला आयोजन ही इसके प्रमाण के रूप में सामने आया। यह ऐसा उत्सव था जैसा पहले किसी ने नहीं देखा। यहां बच्चे “दम मारो दम” जैसे गीतों पर नहीं, बल्कि श्रीराम, शिव और राधा रानी के भक्ति गीतों पर झूम रहे थे। मंच से देशप्रेम की बातें हो रही थीं। दो सौ से अधिक वक्ताओं में एक भी ऐसा नहीं था जो देश को बांटने वालों के पक्ष में दलील देता। न कोई विभाजनकारी विचारधारा, न कोई विवादास्पद एजेंडा। दिशा एकदम स्पष्ट थी, मंशा पर कोई संदेह की गुंजाइश नहीं थी। यदि केवल अनियोजित होने की बात है, तो अगले संस्करण में यह कमी दूर हो जाएगी और आयोजन अधिक सुनियोजित रूप ले लेगा।

शब्दोत्सव ने अपने पहले ही आयोजन से साबित कर दिया है कि साहित्यिक उत्सवों की दुनिया में एक नया मानदंड स्थापित किया जा सकता है। यदि बिना किसी बाधा के यह आयोजन अपनी इस नई यात्रा के पांच वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लेता है, तो भविष्य में नए साहित्यिक आयोजनों की प्रतिस्पर्धा में जश्ने रेख्ता या आज तक साहित्य उत्सव की जगह “शब्दोत्सव” एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगा। लोग नए उत्सवों की तुलना शब्दोत्सव से करेंगे, क्योंकि इसने दिखा दिया है कि साहित्य और संस्कृति का उत्सव राष्ट्रप्रेम, भक्ति और एकता के साथ भी मनाया जा सकता है – बिना किसी विभाजनकारी स्वर के।

शब्दोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक दिशा है, एक विश्वास है और एक नई शुरुआत है। यह साबित करता है कि साहित्यिक मंचों पर सकारात्मक, राष्ट्रवादी और आध्यात्मिक मूल्यों को केंद्र में रखकर भी व्यापक स्वीकार्यता हासिल की जा सकती है। आने वाले वर्षों में यह अन्य आयोजनों के लिए एक प्रेरणा और प्रतिस्पर्धी मानक बनेगा।

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आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों से मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान स्टेप से जुड़े हुए हैं

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