नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह एक बार फिर अपनी विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति अपमानजनक रवैये को दर्शाया। संजय ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का नाम ज्ञानेश नहीं अज्ञानेश कुमार होना चाहिए। संजय यहां रूके नहीं, उन्हें यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार मुर्ख हैं या वे जानबुझकर मुर्ख बन रहे हैं।
उनके संबंध में यह भी कहा जाता है कि शुरुआती दिनों में वे सिनेमा हॉल में टिकट ब्लैक करने जैसे कार्यों में लिप्त थे। आज एक संवैधानिक संस्था के बारे में ऐसे व्यक्ति से अमर्यादित भाषा सुनना देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है।
संजय सिंह को आम आदमी पार्टी की खोज के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनके इस व्यवहार ने पार्टी की छवि को धूमिल करने का काम किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी में ऐसे ही नेता बने रहे, तो धीरे-धीरे पार्टी का पतन निश्चित है। जिसकी शुरुबात दिल्ली से हो चुकी है।
राज्यसभा में संजय की स्थिति पहले से ही कमजोर मानी जा रही है, और आने वाले समय में उनके लिए अपनी सीट बचाना मुश्किल हो सकता है। कई लोग यह भी अनुमान लगा रहे हैं कि क्या संजय सिंह राहुल गांधी की चापलूसी करके किसी जुगाड़ से फिर राज्यसभा में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि चुनाव जीतना उनके लिए असंभव-सा प्रतीत होता है।
संजय सिंह की यह टिप्पणी उस समय सामने आई है, जब आप पहले ही कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से जूझ रही है। पार्टी के समर्थकों का कहना है कि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि एक सांसद के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आप जैसी पार्टी, जो स्वच्छ राजनीति का दावा करती है, अपने नेताओं के व्यवहार को नियंत्रित करने में नाकाम हो रही है।
संजय सिंह के समर्थक उनकी बेबाकी को उनकी ताकत बताते हैं, लेकिन विपक्षी दल इसे उनकी अराजकता और अपरिपक्वता का प्रतीक मान रहे हैं।