गुरु
दिल्ली । जेसिका लाल हत्याकांड सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की परत-दर-परत नाकामी की कहानी है। 1999 की उस रात एक पब में शराब ना मिलने के कारण नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा(सिद्धार्थ) द्वारा सरेआम गोली चलाई जाती है, एक बेगुनाह लड़की मारी जाती है, गवाह मौजूद होते हैं, आरोपी पहचाना जाता है—फिर भी सत्ता, पैसे और डर के आगे कानून घुटनों पर आ जाता है। गवाह पलटते हैं, सबूत कमजोर पड़ते हैं और 2006 में मनु शर्मा उर्फ़ सिद्धार्थ बरी हो जाता है।
यह फैसला एक संदेश था: रसूख हो तो खून भी माफ़ हो सकता है। बाद में मीडिया के दबाव से सजा तो हुई, लेकिन सालों बाद फिर से हुई रिहाई ने फिर वही सवाल खड़े कर दिए—क्या इंसाफ पूरा हुआ?
यह फैसला एक संदेश था: रसूख हो तो खून भी माफ़ हो सकता है। बाद में मीडिया के दबाव से सजा तो हुई, लेकिन सालों बाद फिर से हुई रिहाई ने फिर वही सवाल खड़े कर दिए—क्या इंसाफ पूरा हुआ?

रिहाई के बाद मनु शर्मा “इंद्री” लॉन्च करता है जो 800 करोड़ की कमाई के साथ ही आजकल भारतीय ब्रांड में नंबर वन सिंगल मॉल्ट के खिताब पर काबिज है, इसी ब्रांड के लोगो पर बनी लाल बिंदी के डिज़ाइन को लेकर लोगों के मन में शंका उत्पन्न हुई। यह सवाल उठता है कि यह बिंदी जेसिका लाल की उस एकमात्र तस्वीर में लगी बिंदी से मिलती-जुलती क्यों लगती है जो उस समय हर ख़बर में छपती थी। क्या यह महज़ एक संयोग है, या एक ऐसे अपराध की पीड़िता की स्मृति के साथ असंवेदनशील खेल?
कोई ठोस सबूत नहीं कि यह जानबूझकर किया गया डिज़ाइन है, लेकिन भारत में जहां प्रतीक भावनाओं से जुड़े होते हैं, वहां यह सवाल उठना लाज़मी है। सिस्टम जब जवाब नहीं देता, तो शक और गुस्सा अपनी जगह बना लेते हैं।



