
तो क्यों न पार्टी का सारा ढांचा उलट-पलट कर दिया जाए? राहुल गांधी को “लाइव फील्ड विजिट” के लिए भेजा जाए, और ध्रुव राठी को कमान सौंपी जाए। कल्पना कीजिए-अगला चुनावी घोषणा-पत्र यूट्यूब वीडियो में आएगा, जिसमें ध्रुव जी बैकग्राउंड में ग्राफिक्स के साथ “फैक्ट्स” दिखाएंगे: “दोस्तों, BJP ने जो झूठ बोला, वो देखिए…” और नीचे कमेंट्स में “Jai Hind” और “Modi Out” की बाढ़। प्रेस कॉन्फ्रेंस की जगह लाइव स्ट्रीम, जहां सवालों के जवाब देने की बजाय “लाइक और सब्सक्राइब” का नारा लगेगा। पार्टी का नया स्लोगन-“कांग्रेस: जहां हर मुद्दा एक्सप्लेनेशन वीडियो बनता है”।
फिर क्या होगा? युवा वोटर तो फंस जाएगा, क्योंकि ध्रुव जी की आवाज में ‘चीन की घुसपैठ’ सुनकर लगेगा कि अब असली लड़ाई शुरू हो गई। पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता सोचेंगे-अब तो हमें भी एडिटिंग सीखनी पड़ेगी। और राहुल गांधी? वो शायद खुश होंगे, क्योंकि अब उन्हें सिर्फ ‘कमेंट पढ़कर जवाब देना’ होगा, स्पीच देने की जरूरत नहीं।
लेकिन एक छोटी-सी दिक्कत है-कांग्रेस को वोटर चाहिए, फॉलोअर्स नहीं। सोशल मीडिया पर लाखों लाइक्स मिल सकते हैं, लेकिन बूथ पर वोट डालने वाला आदमी अभी भी जमीन पर ही मिलता है। ध्रुव राठी को अध्यक्ष बनाने से पार्टी ‘वायरल’ तो हो जाएगी, लेकिन ‘विजयी’ होना थोड़ा मुश्किल लगता है। वैसे भी, इन्फ्लूएंसर राजनीति में उतरें तो मजा आएगा-क्योंकि तब कम से कम एक्सप्लेनेशन वीडियो में पार्टी की हार का कारण भी साफ-साफ बता देंगे: ‘दोस्तों, ये सब एडिटिंग की कमी से हुआ!’



