01. धर्मेंद्र प्रधान बिना किसी स्पष्टीकरण के हटाए जाएँ।
02. यूजीसी वाली संसदीय कमिटी में जो भी सदस्य भाजपा के थे, उनमें से जो भी वामपंथियों के साथ कॉम्प्रोमाइज्ड हैं, उन्हें निकाला जाए।
03. अतिमहत्वपूर्ण: सामान्य वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राओं को अनुसूचित जाति के स्तर की निःशुल्क/सब्सिडी की सुविधा- निःशुल्क कोचिंग, परीक्षा के फॉर्म, हॉस्टल की फीस, कोर्स की फीस आदि SC के समकक्ष। ऐसा करने से किसी को कोई समस्या नहीं होगी।
04. UGC-AICTE को समाप्त करने वाले बिल को बजट सत्र में ही ला कर यह कहें कि पूर्व के जो भी नियम हैं, उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में समीक्षा के उपरांत ही लागू किया जाएगा एवम् समाज के हर वर्ग का उचित ध्यान रखा जाएगा। कैम्पस को पुलिस थाना नहीं बनने देंगे।
05. हर नेता की भाषा में ‘दलित-वंचित-पीड़ित’ जैसी शब्दावली का लोप और ‘हर वर्ग के लिए समर्पित’ जैसे वाक्यांशों का प्रयोग। टोन में यह बदलाव काफी सहायक सिद्ध होगा।
05. पार्टी के लिए ‘नैरेटिव बनाने वाली’ हर कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करें, ऑडिट हो कि इन्होंने कौन सा सर्वे सही किया, किस विषय पर कितना नैरेटिव बनाया, पार्टी के लिए कौन से बीस अकाउंट बनाए जो प्रभावशाली कहे जा सकते हैं। जो कसौटी पर खड़ा उतरे उसे रखें।
06. अम्बेडकर को बाप मानना बंद करें। जितना कर दिए, वही जितनी घृणा उत्पन्न कर रहा है, वह आपसे हैंडल नहीं हो सकेगा।
08. आइटी सेल (के नाम से चलने वाले, या माने जाने वाले) हैंडलों को पार्टी-विरोधी गतिविधि करने से रोकें। उन्हें समझाएँ कि किसी को पर्सनल गाली दे कर पार्टी को सामूहिक क्षति पहुँचाना किस स्तर की मूर्खता है। ऐसे लोगों को बताएँ कि उनकी डिफेंस पार्टी पर कितनी भारी पड़ रही है।
09. वैसी कोई योजना न बनाएँ जिसमें SC/ST/OBC का तुष्टिकरण स्पष्ट दिखे। जिन चीजों को माँगा न जाए, वो दे कर पागल न करें।
10. कैम्पस और सोशल मीडिया में ब्राह्मण-घृणा फैलाने वाले लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई, हैंडलों पर भारत में प्रतिबंध। इस बात की स्वीकार्यता हो कि ऐसी कोई बात हो रही है देश में जो नारेबाजी से आरंभ हो कर अब एक ब्राह्मण छात्र को बाथरूम में बंद कर, अग्निशामक से शुष्क कार्बन डाई ऑक्साइड चला कर मारने तक पहुँच चुका है। विक्टिम कार्ड नहीं, उचित कार्रवाई का आश्वासन और एक्शन।
11. हर राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह पास होते सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को अपराधी बनाने वाले कानून (BC एट्रोसिटी एक्ट) पर आपकी पार्टी के वकील उसका प्रतिकार कोर्ट में करें। या, आप उसे सर्वसमावेशी बनाने पर बल दें कि जातिवादी घृणा का शिकार किसी भी जाति का व्यक्ति हो सकता है।
१2. किसी बड़े नेता द्वारा किसी पॉडकास्ट आदि पर यह स्वीकार कराएँ कि पार्टी की चुप्पी ने बहुत क्षति पहुँचाई, दोनों ही तरफ के लोग अपने हैं, उनके कन्सर्न्स उचित हैं। यह भी कि यह नियमावली वर्तमान परिस्थितियों को देखने की जगह वामपंथी प्रायोजित विमर्श को सत्य मान कर बनाई गई, जो अनुचित है।
१3. कोर्ट यदि ऐसे मामलों में कोई निर्णय दे, तो उसे पलट कर राजीव गाँधी न बनें।



