प्रो रामेश्वर मिश्र पंकज
दिल्ली । विचार संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है विचारना, चिंतन करना, मनन करना, सोचना, उहा पोह करना ,संकल्प पूर्वक किसी कर्म की योजना बनाना या उचित अनुचित का विचार करना, विवेक की कसौटी पर किसी बात को कसना और विवेक की कसौटी पर अपने संकल्प एवं कर्म की ,अपने एवं अन्य के भी संकल्प और कर्म की परीक्षा करना।
यह सब जो है विचार के अर्थ हैं।
परंतु विचारधारा वह भी आईडियोलॉजी के अर्थ में विचारधारा जैसा कोई भी शब्द भारत के किसी भी शास्त्र में नहीं है।
क्योंकि यह शब्द अंग्रेजी के आईडियोलॉजी का गलत अनुवाद है। जैसे रेलिजन और धर्म यानी रिलिजन का अनुवाद जैसे धर्म कर दिया गया जो पूरी तरह गलत है
थियोलॉजी का अनुवाद जैसे ब्रह्म विद्या कर दिया गया जो पूरी तरह गलत है।
इसी प्रकार आईडियोलॉजी का अर्थ विचारधारा करना पूरी तरह गलत है।
अगर आप क्रिश्चियनिटी को नहीं जानते हैं तो आप थियोलॉजी का स्वरूप समझ ही नहीं सकते। थियोलॉजी एक पथ विद्या का नाम है। थियोलॉजी का अर्थ होता है ख्रीस्तपथ विद्या मुख्यतः।
वैसे शाब्दिक अर्थ है पंथ विद्या।
चर्च थियोलॉजी का अपने को स्वामी मानता था और जो उसकी थियोलॉजी को ना माने उसे हिदन या विधर्मी कहता था ।ब्रह्म विद्या से इसका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है ।लेकिन भारत में जब ईसाई मिशनरियों ने काम करना शुरू किया तो पादरियों ने भारतीय भाषाओं के व्याकरण के क्षेत्र में और भारतीय भाषाओं के शब्दकोश या डिक्शनरी के क्षेत्र में बहुत काम किया और तमाम सामान्य या घटिया जो पद थे ईसाईयत के,
उनका हिंदी पर्याय बहुत ही उच्च वैदिक अथवा श्रेष्ठ पद से किया जिससे भ्रम पैदा कर सकें।
जैसे चर्च को गिरजाघर कहना महा पाप है ।भगवती जगदंबा की जहां प्रार्थना हो, वह है गिरजाघर।
उसका चर्च से क्या रिश्ता?
लेकिन चर्च को गिरजाघर कह दिया।
हालांकि अब जागरूकता आई है और ऑक्सफोर्ड न्यू इंग्लिश डिक्शनरी में धर्म शब्द की इंट्री अलग है और उसे हिंदू और बौद्ध दृष्टि से सार्वभौम नियमों की संज्ञा दी गई है जबकि रिलिजन शब्द की इंट्री अलग है और उसे किसी पथ प्रवर्तक द्वारा प्रवर्तित विचार या इलहाम या रेवलिशन या देवी संकेत के प्रति फेथफुल होना, ईमान लाना और उसके अनुसार आचरण करना यह बताया गया है।
इस प्रकार अब तो रिलिजन और धर्म दोनों की अलग-अलग एंट्री स्वयं अंग्रेजी शब्दकोश में है ।
वैसे पहले भी जब ईसाई लोग आए चाहे अंग्रेज या जर्मन तो उन्होंने धर्म शब्द का जो अंग्रेजी में अनुवाद किया वह था ड्यूटी या virtue। कर्तव्य या गुण। जर्मन में भी इसके पर्याय को ही रखा गया।
यहां तक कि सर गंगा नाथ झा जैसा दिग्गज विद्वान जिसे अंग्रेज भी बड़ा भारी संस्कृत विद्वान मानते थे और जो अंग्रेजी के भी बहुत बड़े विद्वान थे उन्होंने भी जब पूर्व मीमांसा का भाष्य लिखा तो अथातो धर्म जिज्ञासा के अंग्रेजी अर्थ करने में वहां धर्म का ड्यूटी ही किया है और अंग्रेज उसे ही प्रामाणिक मानते थे ।
परंतु उसके बाद पादरियों ने और पादरियों के सेवक या उनके शिष्यवत जो भारतीय नेता है जैसे गांधी जी आदि वह रिलीजन को धर्म कहने लगे इससे बहुत बड़ा भ्रम फैला क्योंकि रिलिजन किसी भी रूप में धर्म नहीं होता और धर्म किसी भी रूप में रिलिजन नहीं होता ।मज़हब नहीं होता।
तो ईसाइयत और इस्लाम को वैधता देने के लिए गाँधी जी आदि ने मज़हब और रिलिजन को भी धर्म कहा। जबकि भारत में वह म्लेच्छ विचार माने जाते थे ।।अशुभ विचार माने जाते थे। तो उनको वैधता देने के लिए मजहब और रिलीजन को भी धर्म कहने लगे जो गलत था और असत्य था ।
इसी प्रकार थियोलॉजी के नाम पर चर्च केअत्याचारों से यूरोप कराह उठा और नवमी शताब्दी से 16वीं शताब्दी तक किए गए बहुत से दुष्कर्म और पापों को वह संसार के सामने छिपाने योग्य मानने लगे तो उसको उन्होंने डार्क ages कह कर जानकारी से बाहर कर दिया ।तब इस बीच दुनिया के संपर्क में यूरोपीय लोग आए तो उन्होंने देखा कि हमारे जो चर्च के पादरी हैं वह झूठ बोलते थे कि संसार में प्रकाश केवल हमारे पास ही है, दुनिया में केवल अंधेरा है ।उन्होंने देखा कि भारत जैसे देश में विशाल ज्ञान राशि है ।प्रकाश ही प्रकाशहै। तब उन्होंने चर्च पर अविश्वास किया। चर्च के विरुद्ध बहुत से प्रयास करने लगे और उसी में उन्होंने चर्च को ही त्यागने योग्य बात मानकर थियोलॉजी के विरुद्ध बातें शुरू की। तब उसी में खासकर कम्युनिस्टों ने आईडियोलॉजी शब्द को उछाला कि थियोलॉजी तो त्याग दीजिए पर आइडियालॉजी अपनाइये। क्योंकि आइडिया से संबंधित है, लौकिक बातों से संबंधित है इसलिए ऊंची चीज है। लेकिन बुद्धि वही थी संस्कार वही थे तो जिस प्रकार थियोलॉजी के नाम से जकड़बंदी कर रहे थे ,पूर्ण नियंत्रण कर रहे थे, अब आईडियोलॉजी के नाम से जकड़ बंदी करने लगे ।चित् वृत्ति वही थी शब्द बदल गए।
तो ऐसे में आईडियोलॉजी की हिंदी होगी वैचारिक पथ अनुशासन । विचारधारा नहीं।।
लेकिन अज्ञान में या जानबूझकर लोगों ने उसको विचारधारा जैसा एक सुंदर दिखने वाला शब्द दे दिया जिससे बहुत से अनर्थ हुए ।क्योंकि आईडियोलॉजी बहुत ही कठोर अनुशासन मांगती है।दृढ़ दास्य भाव मांगती है और उसके द्वारा लोगों के मस्तिष्क को नियंत्रित किया जाता है।
इसलिए वह एक भयंकर वैचारिक पंथ अनुशासन है और सबसे पहले आईडियोलॉजी की बात कम्युनिस्ट लोगों ने की ।
जवाहरलाल नेहरू सोवियत संघ के प्रति और स्टालिन तथा लेनिन के प्रति झुकाव रखते थे ।
स्टालिन की मृत्यु पर उन्होंने संसद में कहा भी कि हम सब स्टालिन युग के बच्चे हैं जबकि उन्होंने कभी अपने को गांधी युग का बच्चा नहीं कहा था ।
केवल इतना कहा था गांधी जी की मृत्यु पर कि एक रोशनी थी जो बुझ गई ।एक प्रकाश था जो चला गया।
लेकिन अपने को गांधी युग का बच्चा जवाहरलाल ने नहीं कहा ।
अपने को स्टालिन युग का बच्चा कहा जवाहरलाल ने ।
तो स्टॅलिन की नकल में उन्होंने यहां सोवियत संघ जैसा भयंकर अनुशासन चलाया। शिक्षा उद्योग वाणिज्य व्यापार सब में शासन का नियंत्रण हो और इसीलिए उन्होंने आईडियोलॉजी को यहां काफी प्रचारित किया और शिक्षा पर उनका ही नियंत्रण होने के कारण संस्कारी हिंदू घरों के बच्चों को भी पढ़ाया वही सब गया।
जिससे कि संघ और जनसंघ के लोग भी धीरे-धीरे आईडियोलॉजी को विचारधारा ही समझने लगे औरcommunism के समानांतर अपनी एक विचारधारा प्रस्तुत करने लगे जो बहुत बड़ा भ्रम था।
क्योंकि भारत में अपनी एक ज्ञान परंपरा है ।
उसके अपने शब्द हैं।अनुशासन सम्पन्न पदावली है और धर्म अधर्म ,पाप पुण्य ,उचित अनुचित इसका ही विवेक मुख्य है ।
किसी आईडियोलॉजी की हिंदुओं को जरूरत नहीं है।
क्योंकि आईडियोलॉजी लादी जाएगी तो स्वाभिमानी और समृद्ध इतिहास से संपन्न हिंदू विराट समाज में सैकड़ो आइडियोलॉजी खड़ी होगी और एकता नही बचेगी क्योंकि आईडियोलॉजी कभी विशाल समाज को बांधती नहीं है ।वह तो एक छोटे समूह को कठोरता से नियंत्रित करती है। आईडियोलॉजी बहुत ही क्रूर चीज है और यह कुछ-कुछ डाकुओं और चोरो के समुदाय के लिए उपयुक्त काम है ।क्रूर कर्म के लिए कठोर अनुशासन रखने की इच्छा वाले लोग ही आईडियोलॉजी की आड़ लेते हैं।
ब्लैक बुक ऑफ कम्युनिज्म में पढ़िए तो पता चलेगा कि विश्व भर में करोड़ों निर्दोष नागरिकों की हत्या आईडियोलॉजी के नाम से की गई ।।
इस प्रकार आईडियोलॉजी लोगों को वैचारिक दास बनाने की योजना से रचित एक नारा है या एक पद है ।एक पदावली है,एक आवरण है ।।
विचार पुण्य कर्म है लेकिन आईडियोलॉजी पाप कर्महै।
वह पाप कर्म को प्रवाहित रखने के लिए रचा गया एक आवरण है और भारतीय राजनेता विचारधारा विचारधारा रटने लगे क्योंकि वे भी अपनी पार्टी के भीतर वैसा ही व्यक्तियों और गिरोहों का या समूहों का अनुशासन चाहते थे। वह धर्म और अधर्म ,उचित और अनुचित ,सत्य और असत्य के आधार पर पार्टी में और समाज में विवेक फैले ,यह नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने समाजवाद और कम्युनिज्म के प्रति उत्तर में किसी एक विचारधारा की खोज शुरू कर दी जो आईडियोलॉजी की खोज बन गई और आइडियलॉजी तो एक भयंकर वस्तु है। आईडियोलॉजी तो एक पाप कर्म को ढकने के लिए रचा गया आवरण है ।
भारतीय राजनीति जब से आईडियोलॉजी की खोज करने लगी तब से वह छल और लोगों को ठगने का एक माध्यम बनती जा रही है। हमें आइडियालॉजि क्यों चाहिए और आइडियालॉजी जैसी भयंकर वस्तु श्रेष्ठ राजनीति में कैसे हो सकती है? धर्म और अधर्म, पुण्य और पाप ,श्रेय और अकरणीय आदि पदावली हमारी है।(क्रमशः)



