पोर्नोग्राफी और एआई को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और पोर्न वेबसाइट्स को एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर के डीपफेक और एआई-जनरेटेड अश्लील तस्वीरों और वीडियो को हटाने का निर्देश दिया। यह मामला न केवल गोपनीयता और गरिमा के उल्लंघन से संबंधित है, बल्कि यह एआई तकनीक के दुरुपयोग और डिजिटल युग में व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अपने आदेश में कहा कि अपलोड किया गया कंटेंट “पूरी तरह से निंदनीय, अपमानजनक और वादी के मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन” है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वादी को स्वतंत्रता है कि वह प्रतिवादी नंबर 28 से 31 या किसी अन्य मध्यस्थ प्लेटफॉर्म/वेबसाइट को बाद में खोजे गए उन यूआरएल की सूचना दे सकती है, जिनमें आपत्तिजनक तस्वीरें या समान कंटेंट हो। इन प्लेटफॉर्म्स को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।

सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए दावा किया कि ऑनलाइन अपलोड किए गए वीडियो और तस्वीरें उन्हें अश्लील और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्शाते हैं। उनके वकील ने तर्क दिया कि इस तरह का कंटेंट न केवल उनकी गोपनीयता, गरिमा और प्रतिष्ठा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर सिविल टॉर्ट (नागरिक अपकृत्य) भी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों से सहमति जताते हुए निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) जारी की।

जस्टिस कौरव ने मेटा (फेसबुक) और एक्स कॉर्प (ट्विटर) को निर्देश दिया कि वे उन सोशल मीडिया हैंडल्स का पूरा विवरण साझा करें, जिन्होंने अपमानजनक कंटेंट पोस्ट किया। इसके अलावा, कोर्ट ने मामले की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए वादी का नाम और अन्य विवरण कोर्ट कार्यवाही से हटाने और मुकदमे के शीर्षक को संशोधित करने के लिए रजिस्ट्री को निर्देश दिया।

इस मामले में वादी-इन्फ्लूएंसर की ओर से अधिवक्ता राघव अवस्थी ने पैरवी की, जबकि गूगल की ओर से अधिवक्ता ममता रानी झा, रोहन आहूजा, श्रुत्तिमा एहेरसा, दिया और ऐश्वर्या उपस्थित हुए। केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता चेतन्य पूरी, अनुभव त्यागी, निशा और पुनीत सिंह ने किया।

यह निर्णय डिजिटल युग में एआई-जनित कंटेंट के दुरुपयोग को रोकने और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कोर्ट तकनीकी दुरुपयोग के खिलाफ कठोर कदम उठाने को तैयार है।

बीजेपी की नई रणनीति: पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सुशासन का मिश्रण

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कोलकाता : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जैसा कि वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने अपने पॉडकास्ट में उल्लेख किया। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्गापुर रैली में ममता बनर्जी पर सीधा हमला करने के बजाय बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को प्राथमिकता दी। ‘जय श्री राम’ के नारे की जगह ‘जय मां काली’ और ‘जय मां दुर्गा’ के उद्घोष ने बीजेपी की नई रणनीति को रेखांकित किया, जो बंगाली अस्मिता के साथ जुड़ने का प्रयास है।

बंगाल की सांस्कृतिक पहचान, कुशासन और नीतियों पर ध्यान

यह बदलाव बीजेपी की उस समझ को दर्शाता है कि बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का स्थानीय संदर्भ में उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अतीत में बीजेपी पर ‘बाहरी’ होने और उत्तर भारतीय राष्ट्रवाद थोपने का आरोप लगाया था। इस बार, ममता का नाम न लेकर और बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को उभारकर, बीजेपी ने टीएमसी के कुशासन और नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया। यह रणनीति व्यक्तिगत हमलों से हटकर सुशासन और विकास के वादों पर आधारित है।

बंगालियों के गौरव को किया संबोधित

मोदी ने बंगाली भाषा में भाषण शुरू कर और स्थानीय मनीषियों का उल्लेख कर बंगालियों के गौरव को संबोधित किया। यह कदम बीजेपी को बंगाल की जनता के करीब लाने का प्रयास है, विशेषकर ग्रामीण और हिंदू मतदाताओं को, जो मां काली और दुर्गा की पूजा में गहरी आस्था रखते हैं। यह रणनीति टीएमसी के ‘बंगाली अस्मिता’ के दावे को चुनौती देती है और बीजेपी को स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य बनाने की कोशिश करती है।

दिल्ली में दुर्गा पूजा विसर्जन की समस्या का समाधान

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नई दिल्ली: दिल्ली के बंगाली समाज ने दुर्गा पूजा विसर्जन से संबंधित समस्याओं को लेकर माननीय कैबिनेट मंत्री (PWD, विधायी मामले और जल) साहिब सिंह वर्मा से मुलाकात की। भारतीय जनता पार्टी (बंगाली प्रकोष्ठ, दिल्ली प्रदेश) के सहसंयोजक अरुण मुखर्जी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने मंत्री जी को विसर्जन के दौरान आने वाली परेशानियों से अवगत कराया।

बंगाली समाज ने बताया कि विसर्जन की प्रक्रिया में लंबे समय से व्यवधान उत्पन्न हो रहे हैं, जो 27 साल पुरानी मांग का हिस्सा है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने आश्वासन दिया कि आईटीओ के पास स्थित घाट पर माता दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

इस मुलाकात में बंगाली समाज ने इस पहल के लिए मंत्री जी का हार्दिक आभार व्यक्त किया। अरुण मुखर्जी ने कहा, “यह बंगाली समाज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। हम माननीय मंत्री प्रवेश वर्मा के प्रति आभारी हैं, जिनके प्रयासों से यह मांग पूरी हुई।” इस आश्वासन से दिल्ली के बंगाली समुदाय में उत्साह का माहौल है।

बीजेपी की नई रणनीति: पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सुशासन का मिश्रण

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जैसा कि वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने अपने पॉडकास्ट में उल्लेख किया। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्गापुर रैली में ममता बनर्जी पर सीधा हमला करने के बजाय बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को प्राथमिकता दी। ‘जय श्री राम’ के नारे की जगह ‘जय मां काली’ और ‘जय मां दुर्गा’ के उद्घोष ने बीजेपी की नई रणनीति को रेखांकित किया, जो बंगाली अस्मिता के साथ जुड़ने का प्रयास है।

*बंगाल की सांस्कृतिक पहचान, कुशासन और नीतियों पर ध्यान*

यह बदलाव बीजेपी की उस समझ को दर्शाता है कि बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का स्थानीय संदर्भ में उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अतीत में बीजेपी पर ‘बाहरी’ होने और उत्तर भारतीय राष्ट्रवाद थोपने का आरोप लगाया था। इस बार, ममता का नाम न लेकर और बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को उभारकर, बीजेपी ने टीएमसी के कुशासन और नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया। यह रणनीति व्यक्तिगत हमलों से हटकर सुशासन और विकास के वादों पर आधारित है।

*बंगालियों के गौरव को किया संबोधित*

मोदी ने बंगाली भाषा में भाषण शुरू कर और स्थानीय मनीषियों का उल्लेख कर बंगालियों के गौरव को संबोधित किया। यह कदम बीजेपी को बंगाल की जनता के करीब लाने का प्रयास है, विशेषकर ग्रामीण और हिंदू मतदाताओं को, जो मां काली और दुर्गा की पूजा में गहरी आस्था रखते हैं। यह रणनीति टीएमसी के ‘बंगाली अस्मिता’ के दावे को चुनौती देती है और बीजेपी को स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य बनाने की कोशिश करती है।

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