बात-बात पे जंग : व्यंग्य और हास्य के बदलते रंग

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मुंबई: पिछले दो दशकों में हमने एक पूरी जमात को गुम होते देखा है। वो जमात जो हमें हंसाती थी, गुदगुदाती थी, और सोचने पर मजबूर करती थी। व्यंग्यकार, कार्टूनिस्ट, और हास्य के बादशाह अब धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं।

उनकी जगह यूट्यूबर्स और स्टैंड-अप कॉमेडियन ने ले ली है, जिनके चुटकुलों में गालियों और अश्लीलता का बोलबाला है। ये वो दौर है जब हंसी की जगह चीखने-चिल्लाने, मार-पीट, और नफरत भरे संवादों ने ले ली है। क्या यही है आज की लोकतांत्रिक हकीकत?

एक जमाना था जब अखबारों की पहचान लक्ष्मण, रंगा, सुधीर धर, विजयन और शंकर जैसे कार्टूनिस्टों के उम्दा कार्टूनों से होती थी। उनके कार्टून सिर्फ हंसाते ही नहीं थे, बल्कि समाज और राजनीति पर गहरी चोट करते थे। आर.के. लक्ष्मण के “कॉमन मैन” ने हर भारतीय को अपनी छवि दिखाई, और शंकर के कार्टून ने नेताओं की पोल खोल दी।

मगर आज? अखबारों में कार्टून गायब हैं, और राजनीति से हास्य गायब हो गया है। ऐसा लगता है कि अखबार डरते हैं, कार्टूनिस्ट डरते हैं, और हम सब डरते हैं। क्या यही है आजादी का मतलब? चो रामास्वामी की तमिल में तुगलक पत्रिका, शरद जोशी के व्यंग, खुशवंत सिंह के कटाक्ष, काका हाथरसी की कविताएं, अब कहां गायब हो गए इस परंपरा के वारिस! फिल्मों से जॉनी वॉकर, महमूद, देवेन वर्मा, जौहर, ॐ प्रकाश टाइप कॉमेडियंस गायब हुए, टीवी से कॉमेडी के सीरियल्स।

राजनीति और हास्य का रिश्ता हमेशा से जटिल रहा है। एक जमाने में संसद में मजाक, शेर-ओ-शायरी, और हंसी-मजाक का दौर था। पीलू मोदी और राज नारायण जैसे नेता खूब हंसाते थे। मगर आज? संसद हो या विधानसभा, सभी जगह मान्यवर गंभीर मुद्रा में बैठे रहते हैं। हंसी-मजाक की जगह गंभीरता ने ले ली है। क्या यही है लोकतंत्र की परिभाषा?

आज के दौर में राजनीतिक या धार्मिक हस्तियों पर व्यंग्य करना जानलेवा हो सकता है। कार्टूनिस्ट और कॉमेडियन धमकियों, ऑनलाइन उत्पीड़न, और कानूनी कार्रवाई का शिकार हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, विवादास्पद धार्मिक हस्तियों को चित्रित करने वाले कार्टूनिस्टों को व्यापक विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा है। भारत में भी, राजनीतिक नेताओं या धार्मिक हस्तियों की आलोचना करने वाले कार्टूनिस्ट अक्सर ऑनलाइन ट्रोलिंग और कानूनी कार्रवाई का शिकार होते हैं।

मगर, यह सब इतना भी निराशाजनक नहीं है। भारत में कुछ बहुत ही मज़ेदार लोग हैं जो हंसी की मशाल जलाए रखते हैं। वीर दास, बस्सी, उपमन्यु, केनी , और कल्याण रथ जैसे कॉमेडियन ने हास्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। यूट्यूब पर कैरी, डॉली, भुवन, आशीष जैसे क्रिएटर्स ने हंसी को नया रंग दिया है। मगर, इनमें से ज्यादातर राजनीति से दूर भागते हैं।

कपिल शर्मा के शो में नेता नहीं आते, और वह खुद भी राजनीति से दूर रहते हैं। क्या यही है हास्य की आजादी? कुछ श्रोता और दर्शक टीवी न्यूज चैनल को मनोरंजन के लिए देखते हैं, जब एंकर चिल्लाता है या लड़वाता है तो बहुत मजा आता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अक्सर आपत्तिजनक समझे जाने वाले कंटेंट को हटा देते हैं, कभी-कभी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बिना। इससे सेल्फ-सेंसरशिप की स्थिति पैदा हो जाती है। कॉमेडियन और क्रिएटर्स को अपने कंटेंट को लेकर सतर्क रहना पड़ता है। हिंसा की धमकियों के कारण कई कॉमेडियन के शो रद्द हुए हैं। इंटरनेट शटडाउन और सेंसरशिप का इस्तेमाल असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए किया जाता है, जिसमें हास्य कलाकार और ऑनलाइन क्रिएटर भी शामिल हैं।

मगर, यह सब इतना भी निराशाजनक नहीं है। भारत में कुछ बहुत ही मज़ेदार लोग हैं जो हंसी की मशाल जलाए रखते हैं। स्टैंड-अप कॉमेडियन, यूट्यूबर्स, और ब्लॉगर्स का उदय लचीलापन और रचनात्मकता की स्थायी मानवीय भावना को प्रदर्शित करता है। ये नई आवाज़ें राजनेताओं और सामाजिक मुद्दों का मज़ाक उड़ाती रहती हैं, यह साबित करते हुए कि हास्य को आसानी से चुप नहीं कराया जा सकता।

ह्यूमर टाइम्स की प्रकाशक मुक्ता गुप्ता कहती हैं, “राजनीतिक कार्टूनिंग का पतन एक बड़े सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। ग्राफिक डिज़ाइन और एनिमेटेड पात्रों का उदय, तकनीकी रूप से उन्नत होते हुए भी, अक्सर पारंपरिक रेखाचित्रों की वैचारिक गहराई और सरलता नहीं रखता है।”

हास्य और व्यंग्य सिर्फ मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि सत्ता को जवाबदेह ठहराने, सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने, और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक तंत्र हैं। खुले समाजों में, हास्य और व्यंग्य स्वतंत्रता, सहिष्णुता, और उदार मूल्यों के महत्वपूर्ण बैरोमीटर के रूप में काम करते हैं। मगर, आज के दौर में हास्य और राजनीतिक व्यंग्य के लिए जगह कम होती जा रही है, जो बढ़ती असहिष्णुता, धार्मिक कट्टरता, और राजनीतिक शुद्धता से प्रभावित है।

फिर भी, इन चुनौतियों के बीच, आशा की किरणें हैं। हंसी की जंग जारी है, क्योंकि, जब तक हंसी है, तब तक जिंदगी है। और जब तक जिंदगी है, तब तक हंसी है। शायद इंसान के अलावा कोई जीव हंसने की काबिलियत नहीं रखता है।

‘पानी पंचायत’ पुस्तक के पांच अध्यायों का लोकार्पण किया गया

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तभासं के स्वर्ण जयंती वर्ष  अवसर पर हिन्दू कॉलेज सांगानेरिया सभागार, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली में ‘‘पानी पंचायत’’ आयोजन किया गया। इस पंचायत का आयोजन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास और तरुण भारत संघ द्वारा किया गया,  जिसमें देश भर से विद्वानों, पर्यावरणविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, विधायक, सांसद, मंत्री आदि ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत के पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी जी ने की।

पानी पंचायत में जलपुरुष राजेंद्र सिंह जी द्वारा लिखित नालंदा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित तरुण भारत संघ के पांच दशकों के जमीनी कार्यों पर आधारित “पानी पंचायत“ पुस्तक के पांचों अध्यायों का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का विमोचन पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री मुरली मनोहर जोशी जी, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी, जनजातीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके जी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे जी, दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन प्रो. रंजन त्रिपाठी जी, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार जी, श्याम सहाय द्वारा किया गया।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री मुरली मनोहर जोशी जी ने कहा कि, ़हमारी मूल्यसंस्कृति, प्रकृति और संस्कार के अनुसार भारत का पुर्नगठन होना चाहिए। ऋषितुल्य जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने जो समाज की चेतना को जागृत करने का बेड़ा उठाया है, यह अद्भुत उपक्रम है। इसकी महत्ता इसमें है कि, बिना सरकार से पैसे लिए, मनुष्य उद्म से समाज की चेतना जागृत करना, भूमि और जल के प्रति मनुष्य का क्या कृतव्य है, इसको जगाना और भारत ही नहीं पूरे विश्व में ले जाना ऋषि तुल्य कार्य है। इसलिए जल ऋषि के तौर पर इनकी सराहना करता हूं। जैसे हमने महामना मालवीय जी को महामना शब्द का प्रयोग किया, ऐसे ही मेरी दृष्टि में राजेन्द्र सिंह को जल ऋषि शब्द का प्रयोग करता हूं।

आगे कहा कि, हमे यह समझना चाहिए कि, प्रथ्वी जल से आयी है। पृथ्वी और जल का संबंध माता-पुत्र की तरह है। लेकिन यह सत्य लग रहा है कि, आने वाला जो बड़ा युद्ध होगा, वह जल से ही होगा। जल संकट सारे विश्व के लिए सबसे बड़ा संकट है। इस संकट के मध्य में हमारा देश विद्मान है।
जनजातीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि, हमारा सौभाग्य है कि, हमने भारत भूमि पर जन्म लिया। फिर जो वैदिक ग्रंथ हमे मिले है, उनसे लघु से विराट बनने की यात्रा की सीख मिली है। इसमें ही प्रकृति का मूल छिपा है। इस मूल को श्रद्धेय राजेन्द्र सिंह जी ने जन चेतना को ‘‘पानी पंचायत’’ के तौर पर प्रस्तुत किया है, इस शुभ कार्य के लिए हमे अभीनंदन करना चाहिए।

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा कि, ब्रह्माण्ड का सृजन करने वाला ’पानी’ और उसके पंचपरमेश्वरों की पंचायत प्रक्रिया ही इस पुस्तक में है। इसमें पंचायत को शुरू करने की प्रक्रिया, साध्य, साधन, साधना और सिद्धि को समझ सकते हैं। पानी पंचायत जल संकट से जूझते, उजड़ते लोगों को सचेत और स्वावलंबी बनाने के लिए भारतीय ज्ञानतंत्र को ही मुख्य मानती है। इसमें पंच परमेश्वर सर्वोपरि हैं। पंच परमेश्वर के दिखाए रास्ते पर चलना निरापद माना जाता है। तभासं ने इसी रास्ते का अनुसरण किया है। पानी पंचायत प्रक्रिया में केवल वादी-प्रतिवादी और न्यायमूर्ति के निर्णय ही सभी कुछ नहीं है; यह तो समाज को समग्रता से जोड़कर समता की तरफ बढ़ाने वाली प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में लोगों को स्वयं अपनी समस्या का समाधान खोजना सिखाने का प्रयास किया गया है। देशज ज्ञान से काम करके स्वावलंबी एवं स्वाभिमानी बनकर श्रमनिष्ठा से काम करने की प्रक्रिया पानी पंचायत ने चलाई है। इस प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों को जोड़ा गया है। पानी पंचायत से तभासं ने उजड़े हुए लोगों को पुनः बसाया है। बंदूकधारियों को पानीदार, समझदार, इज्जतदार और सुसम्पन्न बनाया है। उस काम की जानकारी इस पानी पंचायत में है।

पानी पंचायत के पांचों अध्याय पढ़ने पर तभासं की संपूर्ण जानकारी मिलेगी। दूसरी पानी पंचायत के अध्याय में पंचायत में जमीनी अनुभव पढ़ने को मिलेंगे। यह अध्याय तो केवल जल, प्रदूषण, विकास का विस्थापन, बिगाड़ और विनाश से बचाव, भारतीय विद्या द्वारा समाधान खोजने के प्रयास की शुरूआत है। दूसरे अध्याय में समाधान और जमीनी स्तर पर समय सिद्धि से काम हुआ है। प्रकृति को बचाने की प्रत्यक्ष लड़ाई की जीत का अगला अध्याय है। तीसरा अध्याय तभासं और समाज के गंगा-यमुना नदी सत्याग्रह की सफलता को विस्तार देता है। राजस्थान से अपने काम को पूरे देश में जल बिरादरी द्वारा फैलाता है। यह अध्याय सामुदायिक जलाधिकार की लड़ाई में विजय दिलाने वाला रहा है। ‘लावा का वास’ सामुदायिक बाँध से जल स्वराज्य पाने में विजय मिली। नीमी गाँव जल क्रांति की सफलता है। चौथे अध्याय में सरकार व संयुक्त राष्ट्र की नीतियों को लोकोन्मुखी एवं प्रकृति अनुकूल बनवाने की संघर्ष-भरी कहानी है। इस काल में सामुदायिक जल संरक्षण, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और लोक विज्ञान से किए गए तभासं के कार्यों को वर्ष 2015 में ‘स्टॉकहोम वाटर प्राइज’ से सम्मानित किया गया। पाँचवाँ अध्याय तभासं के कार्यों को दुनिया में प्रयोग करके देखना और सफल सिद्ध होने पर उन्हें अपनाना है। यह कार्य विश्व जल शांति यात्रा द्वारा पूरी दुनिया में काम आ रहा है। सुखाड़-बाढ़ विश्व जन आयोग द्वारा तभासं का अनुभव दुनिया में पहुँचा है। विश्व शांति वर्ष 2024 में तीन हजार बागियों को विश्व शांति जल दूत पुरस्कार से सम्मानित करने का अध्याय है। प्राकृतिक शोषण के विरुद्ध एवं जल बाजारीकरण को रोकने के लिए निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोला गया है। पानी पंचायत के निर्णय से तभासं ने अपने काम का रास्ता चुना है।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे जी ने कहा कि, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी का लोक विज्ञान और देशज जीवन पद्धति, जीवन मूल्य बन गया है। जीवन को मूल्यवान बनाने में सदैव सभी कुछ स्मरण कराने हेतु महात्मा गांधी, जयप्रकाशनारायण का जीवन संदेश साथ रहता है। मुझे लगता है कि, यह पानी पंचायत पुस्तक पढ़ने से ही पाठक जल के कामों की भी सिद्धि प्राप्त कर सकेगा।

जम्मूकश्मीर की आयुक्त आईएएस रश्मि सिंह जी ने कहा कि, हमने जलपुरुष का काम समझा है;इन्होने जो काम किया है उसकी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जरूरत है। जलपुरुष ने इस जरूरत को पूरा करने के लिए गहन श्रमनिष्ठ बनकर साधन और तपस्या करके सूखी मरी नदियों को पुनर्जीवित किया है। इन्होने सबको इस काम को जोड़ा है।

प्रो. मधुलिका बनर्जी और प्रो. सोनाझारिया मिंज ने कहा कि, हमने इनका काम आंखों से देखा, अध्ययन और समझा है। अब यही समयसिद्ध कार्य का अनुभव है जिससे हम जल संकट का समाधान खोज सकते है। यह जलपुरुष प्रत्यक्ष तौर पर करके दिखाया है।

नालंदा प्रकाशन के अध्यक्ष नीरज कुमार जी के कहा कि, यह पानी पंचायत पुस्तक, जल संकट के सवालों का समाधान है। जलपुरुष जी के नेतृत्व में तभासं इस प्रक्रिया को आगे ले जाने वाला साधन मात्र है। तभासं लोक परम्परा में विश्वास रखता है। भारतीय ज्ञान तंत्र तभासं के काम का आधार है। इसलिए पानी पंचायत के निर्णय ही तभासं को रास्ता दिखाते हैं।

पानी पंचायत के अंतिम सत्र में नूह-मेवात, चंबल क्षेत्र धौलपुर, करौली से आए तभासं के कार्यकर्ता और बुन्देलखंड की जल सहेलियों को पूर्व केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा जल नायक सम्मान से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में डॉ इंदिरा खुराना द्वारा लिखित पुस्तक Climate resilient socioeconomic growth through water conservation का विमोचन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी जी में किया।

इस कार्यक्रम में प्रो. अशोक कुमार, डॉ जी. अशोक कुमार (आईएएस), डॉ. आर. विश्वास, प्रेमनिवास शर्मा, श्री संजय सिंह, श्री रमेश शर्मा, डॉ. वी.एन. मिश्रा, डॉ. इंदिरा खुराना, कृष्ण गांधी, इलांगो , ईश्वरचन्द्र, अरविंद कुशवाहा, प्रो. पी.के.सिंह, प्रो. वी.के. विजय, श्रीमति शोभा विजेन्द्र , दीपक परवतियार , विक्रांत चौहान, अनिल साठे, डॉ हिमांशु सिंह, संजय राणा, मुकेश एंगल, अनिल शर्मा, अजय तिवारी, नेहपाल सिंह, राजा रंजन,  राहुल सिंह, रणवीर सिंह, छोटेलाल मीणा , पारस प्रताप सिंह आदि ने भी अपने विचारों को प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पंजाब, जम्मूकश्मीर, तमिलनाडु, हरियाणा, दिल्ली , राजस्थान आदि राज्यों से 500 से अधिक लोगों ने साझेदारी निभायी।

पूरा विश्व हमारा आभारी है.. गर्व से कहो हम बिहारी हैं

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भारत के इतिहास में ‘बिहार’ राज्य अपनी विशेष महत्व रखता है। प्राचीन काल में “बिहार” विशाल साम्राज्यों, शिक्षा केन्द्रों एवं संस्कृति का गढ़ था। नीदरलैंड में सूरीनामी प्रवासियों जो 151 पहले बिहार व उसके आसपास के राज्यों से सूरीनाम व सूरीनाम से नीदरलैंड में आए और भारत के बिहार प्रदेश से आए बिहार निवासियों की संख्या नीदरलैंड की जनसंख्या की 3% है।

कल “ बिहार फ़ाउंडेशन नीदरलैंड (BFNL) जिसके अध्यक्ष दया शंकर कुमार उपाध्यक्ष दर्शन राज आशुतोष, द्वारा नीदरलैंड के भारतीय दूतावास Indian Ambassy Nederland के सांस्कृतिक केन्द्र Gandhi Center DenHaag में “ बिहार दिवस “ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय राजदूत आदरणीय डॉ. कुमार तुहिन जी उनकी धर्म पत्नी श्रीमति तुहिन, फ़र्स्ट सेक्ट्री व भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक आदरणीय Kris Gupta ji ,भारतीय दूतावास के अताशय आदरणीय राजेश कुमार सिन्हा , Stichting Maitry ( मैत्री) Vriendschap voor iedereen ‘ के संस्थापक डव सूरीनाम गिरमिटिया की चौथी पीढ़ी डॉ. दिनेश ननंन पाँडे व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी संगठन नीदरलैंड की अध्यक्ष डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का आरंभ “ बिहार फ़ाउंडेशन “ के अध्यक्ष दया शंकर कुमार व उपाध्यक्ष दर्शनराज व जयंत शांडिल्य के साथ भारत के माननीय राजदूत डॉ कुमार तुहिन जी व उनकी धर्मपत्नी जी द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया। श्रीमती रुचि सौम्या द्वारा भगवान श्री गणेश स्तुति की गई और इसके बाद माननीय राजदूत डॉ कुमार तुहिन जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सांस्कृतिक केन्द्र के सभागार में उपस्थित अतिथियों को बिहार की संस्कृति से परिचित कराया साथ ही आज के समय में बिहार एक तेज़ी से आधुनिक व प्रगतिशील राज्य के रूप में भारत व विदेशों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है।इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक विकास,कृषि, महिला सशक्तिकरण,डिजिटल प्रशासन और जलवायु परिवर्तन जैसे बिन्दुओं पर भी प्रकाश डाला। बिहार को पर्यटन से जड़ने और बिहार में विदेशी व आधुनिक नई-नई तकनीकों का आदान-प्रदान किस प्रकार किया जाएँ, व युवाओं की प्रतिभाओं को किस प्रकार बिहार को और ज़्यादा सशक्त बनाने में किस प्रकार उपयोग किया जाए इस पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। उन्होंने बताया की भारत के बिहार केवल बौद्ध सर्किट या संस्कृति तक ही सीमित नहीं है वहाँ राम सर्किट, सीता जन्मभूमि,नालंदा विश्वविद्यालय मधुबनी चित्रकला , टिकुलि, आदि चित्रकला यहाँ की शान है।

इस अवसर पर सूरीनाम से ऑनलाइन भारतीय दूतावास के राजदूत आदरणीय डॉ सुभाष प्रसाद गुप्ता जी ने भी इस अवसर पर बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की और अपने वक्तव्य में बताया की पहला डाइसपोरा तो 151 साल पहले भारत से सूरीनाम आए भारतीयों द्वारा आरंभ हुआ । सूरीनाम के भारतीयों ने ही सही अर्थों में बिहार की संस्कृति को पाँच पीढ़ी से संजोए कर रखा है। मैं सूरीनाम में आ कर बिहार को भारत को बहुत ज़्यादा याद नहीं करता क्योंकि यहाँ सूरीनाम में एक छोटा बिहार बसता है।

इस अवसर पर बिहार की कोकीला मैथिली ठाकुर भी ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ी उन्होंने सभी को बिहार दिवस की शुभकामनाएँ अपने एक गीत के साथ प्रेषित करी । इस बीच आभासी पटल पर बिहार की सासंकतिक , साहित्यिक व शैक्षणिक संस्थानों के विषय में जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में भारतीय सूरीनामी कवि, गायक सतेफन रविनदर पिकार ने अपनी सरनामी हिन्दी में एक गीत “तीन देश तीन संस्कृति “ प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया ।इसके बाद डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे ने बिहार की संस्कृति पर आधारित कविता “पूरा विश्व हमारा आभारी है” ने सभागार में बैठे दर्शकों से भूरी भूरी प्रशंसा बटोरी ।

रंगारंग कार्यक्रम के अंतर्गत श्वेता वर्मा जी, रुचि सौम्या जी व सुनीता रॉय जी ने बिहार के प्रसिद्ध लोकगीत झिझरी को सुना कर पूरे सभागार को झूमने पर विवश कर दिया। इस समारोह में भारतीय राजदूत माननीय डॉ. कुमार तुहिन जी व भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक व बिहार फ़ाउंडेशन नीदरलैंड के सदस्यों के साथ “अंतरराष्ट्रीय हिन्दी संगठन नीदरलैंड “अध्यक्ष डॉ ऋतु शर्मा व Stichting Maitry मैत्री Vriendschap voor iedereen “ के संस्थापक व सूरीनाम भारतीयों की चौथी पीढ़ी डॉ दिनेश ननंन पाँडे “ रविन्द्रनाथ टैगोर विश्व विद्यालय द्वारा विश्व हिन्दी ओलंपियार्ड का विमोचन किया गया साथ ही डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की नीदरलैंड की संस्कृति पर आधारित लेखन में तीसरी पुस्तक “ नीदरलैंड की चर्चित कहानियाँ “ व काव्य संग्रह “संदुकची “ का लोकार्पण हुआ। भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केन्द्र में इन पुस्तकों सहित डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की पाँच पुस्तकें रजिस्टर्ड कर दी गई हैं। सांस्कृतिक केन्द्र में मधुबनी चित्रकला की प्रदर्शनी भी लगाई गई ।इस अवसर पर बच्चों के लिए एक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी रखी गई।जिसके विजेताओं व कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम के अंत में राजदूत महोदय द्वारा प्रमाण पत्र दे कर सम्मानित किया गया। इसके बाद बिहार राज्य का राजकीय गीत गाया गया।

कार्यक्रम का आभार ज्ञापनज्ञापन करते हुए कहा कि आज बिहार दिवस मनाने के पीछे एक बड़ा उद्देश्य नीदरलैंड में पीहर संस्कृति का प्रचार प्रसार करना है । हमें बिहार को भी यूरोप व अन्य विकसित देशों की सूची में लाने के लिए हमें ही प्रयास करने होंगे ।हम सभी को समाज में परिवर्तन लाना है। जिसकी पहल हमें स्वयं से करनी होगी।बिहार के उत्पादन को विदेश में भी व्यवसायिक रूप में उतारना होगा। जितना ज़्यादा हो सके वर्तमान और आने वाली पीढ़ी तक अपनी संस्कृति और भाषा पहुँचाना हमारा ही कर्तव्य है। बिहार के निवासी जो नीदरलैंड में रह कर यहाँ के उत्पादन व आर्थिक विकास में सहयोग कर रहें हैं यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है । इसके बाद बिहार के लोकप्रिय व्यंजनों के आनन्द के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।

संघ शताब्दी के उपलक्ष्य में संकल्प

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विश्व शांति और समृद्धि के लिए समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण

अनंत काल से ही हिंदू समाज एक प्रदीर्घ और अविस्मरणीय यात्रा में साधनारत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव एकता और विश्व कल्याण हैI तेजस्वी मातृशक्ति सहित संतों, धर्माचार्यों, तथा महापुरुषों के आशीर्वाद एवं कर्तृत्व के कारण हमारा राष्ट्र कई प्रकार के उतार–चढ़ावों के उपरांत भी निरंतर आगे बढ रहा है।

काल के प्रवाह में राष्ट्र जीवन आए अनेक दोषों को दूर कर एक संगठित, चारित्र्यसंपन्न और सामर्थ्यवान राष्ट्र के रूप में भारत को परम वैभव तक ले जाने हेतु परम पूजनीय डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने सन 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया। संघकार्य का बीजारोपण करते हुए, डॉ हेडगेवार ने दैनिक शाखा के रूप में व्यक्ति निर्माण की एक अनूठी कार्यपद्धति विकसित की, जो हमारी सनातन परंपराओं व मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण का नि:स्वार्थ तप बन गया। डॉ उनके के जीवनकाल में ही इस कार्य का एक राष्ट्रव्यापी स्वरूप विकसित हो गयाI द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय श्री गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय जीवन के विविध क्षेत्रों में शाश्वत चिंतन के प्रकाश में कालसुसंगत युगानुकूल रचनाओं के निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।

सौ वर्ष की इस यात्रा में संघ ने दैनिक शाखा द्वारा अर्जित संस्कारों से समाज का अटूट विश्वास और स्नेह प्राप्त किया। इस कालखंड में संघ के स्वयंसेवकों ने प्रेम और आत्मीयता के बल पर मान–अपमान और राग–द्वेष से ऊपर उठ कर सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया। संघकार्य की शताब्दी के अवसर पर हमारा कर्त्तव्य है कि पूज्य संत और समाज की सज्जन शक्ति जिनका आशीर्वाद और सहयोग हर परिस्थिति में हमारा संबल बना, जीवन समर्पित करने वाले निःस्वार्थ कार्यकर्ता और मौन साधना में रत स्वयंसेवक परिवारों का स्मरण करें।

अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के चलते सौहार्दपूर्ण विश्व का निर्माण करने के लिए भारत के पास अनुभवजनित ज्ञान उपलब्ध है। हमारा चिंतन विभेदकारी और आत्मघाती प्रवृत्तियों से मनुष्य को सुरक्षित रखते हुए चराचर जगत में एकत्व की भावना तथा शांति सुनिश्चित करता है।

संघ का यह मानना है कि धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित सामूहिक जीवन के आधार पर ही हिंदू समाज अपने वैश्विक दायित्व का निर्वाह प्रभावी रूप से कर सकेगा। अतः हमारा कर्त्तव्य है कि सभी प्रकार के भेंदों को नकारने वाला समरसता युक्त आचरण , पर्यावरणपूरक जीवनशैली पर आधारित मूल्याधिष्ठित परिवार, ‘स्व’बोध से ओतप्रोत और नागरिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध समाज, का चित्र खड़ा करने के लिए हम सब संकल्प करते हैं । हम इसके आधार पर समाज के सब प्रश्नों का समाधान, चुनौतियों का उत्तर देते हुए भौतिक समृद्धि एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण समर्थ राष्ट्रजीवन खड़ा कर सकेंगे।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा सज्जन शक्ति के नेतृत्व में संपूर्ण समाज को साथ लेकर विश्व के सम्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने वाला समरस और संगठित भारत का निर्माण करने हेतु संकल्प करती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, बेंगलुरु
23 March 2025

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