मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पेश किया नए राजस्थान के विकास का खाका

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जयपुर: 12 मार्च 2025 का दिन प्रदेशवासियों के लिए बेहद खास रहा। विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को नए राजस्थान को विकास का खाका पेश किया। वित्त और विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनसे 8 करोड़ प्रदेशवासियों में उत्साह की लहर दौड़ गई।

युवाओं, महिलाओं, किसानों और श्रमिकों में खुशी का माहौल

मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लेकर प्रदेश के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं, किसानों और श्रमिकों में भारी उत्साह देखा गया। सरकार द्वारा की गई घोषणाओं ने जनता की उम्मीदों को सच कर दिखाया और प्रदेशवासियों का दिल जीत लिया।

राज्य बजट 2025-26: बढ़ता हुआ विश्वास

राज्य बजट 2025-26 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के प्रत्येक वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। इससे आमजन में सरकार के प्रति विश्वास और बढ़ा है, और जनता ने अब महसूस किया है कि यह सरकार उनके हित में काम कर रही है।

होली पर मिला विकास का उपहार

आज विधानसभा की कार्यवाही पर हर किसी की नज़रें टिकी रही, और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने होली के अवसर पर राज्य के विकास के लिए नई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि उनकी सरकार प्रदेश के हर नागरिक की खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने दिया सशक्त शासन का संदेश

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनकी सरकार “सिटीजन फर्स्ट” की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे कोई महत्वपूर्ण फैसला लेते हैं, तो गरीब, युवा, किसान और महिला उनकी नीतियों के केंद्र में होते हैं।

राज्य में पहली बार “ग्रीन बजट” पेश किया गया है, जो सरकार की नई सोच और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “यह हमारी नीतियों का कमाल है कि अब देश के प्रधानमंत्री 100 रुपए भेजते हैं, तो आम आदमी तक वही 100 रुपए बिना किसी कटौती के पहुँचते हैं।”

राइजिंग राजस्थान” का सफल आयोजन: भजनलाल सरकार की नीयत पर जोर

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनके शासन के पहले साल में ही “राइजिंग राजस्थान” का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि उनकी सरकार प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार दिखावे के लिए काम नहीं करती, बल्कि प्रदेश के विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है।

कांग्रेस शासन के गलत कार्यों की जांच की घोषणा

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एक वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य ने मांग की थी कि कांग्रेस के शासन के दौरान हुए गलत कार्यों की जांच कराई जाए, तो उनके अनुरोध पर मैं कांग्रेस सरकार के समय हुए गलत कार्यों की जांच कराने का घोषणा करता हूं।

कांग्रेस पर तंज: “पश्चाताप करें और अपने गलत कामों पर ध्यान दें”

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस नेताओं पर सीधा हमला करते हुए कहा, “आपको अपनी ओर देखना चाहिए और यह सोचने की आवश्यकता है कि पिछले समय में आपने कौन से गलत काम किए। जब आप दूसरों पर उंगली उठाते हैं, तो याद रखें कि चार उंगलियां आपकी ओर भी होती हैं। आपको अब पश्चाताप करना चाहिए। यदि आपने सही काम किए होते, तो राजस्थान की जनता आज आपको विपक्ष में और हमें पक्ष में बैठाती।”

*जनता के साथ सच्चाई और वादों को पूरा करने का संदेश*

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच में रहते हुए उनके काम करने चाहिए और उनसे किए गए वायदों को पूरा करना चाहिए। “झूठ बोलकर आप ज्यादा समय तक नहीं चल सकते, हमें जनता के साथ खड़े होकर उनके काम को करना होगा,” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को राजस्थान दिवस

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 1949 में नव संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा विभिन्न रियासतों को मिलाकर वृहद राजस्थान की स्थापना की गई। इसलिए 30 मार्च 2025 को नव संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन राजस्थान दिवसके अवसर पर सप्ताह भर आयोजन किए जाने के लिए 25 करोड़ रुपए के प्रावधान किए जाने की घोषणा करता हूं। साथ ही अब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही राजस्थान दिवस मनाया जाएगा।

आज के दिन की घोषणाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार हर वर्ग के हित में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रदेश का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए तत्पर है।

माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने की ये बड़ी घोषणाएं

30 मार्च 2025 को नव संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन राजस्थान दिवसके अवसर पर सप्ताह भर आयोजन किए जाने के लिए 25 करोड़ रुपए के प्रावधान किए जाने की घोषणा। साथ ही अब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही राजस्थान दिवस मनाया जाएगा

•प्रथम बार संगठित निजी क्षेत्र में नौकरी प्राप्त करने वाले युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए 50 हजार रुपए तक मासिक वेतन प्राप्त करने वाले नव नियुक्त युवा को एकबारीय सहायता के रूप में 10 हजार रुपए उपलब्ध कराने हेतु मुख्यमंत्री युवा प्रोत्साहन रोजगार योजना प्रारंभ करने की घोषणा

•गवर्नेंस के विस्तार को सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों को जोड़ते हुए राजस्थान डिजिटल मिशन प्रारंभ करने की घोषणा

•विभिन्न विभागों में कार्यरत मंत्रालय कर्मियों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के साथ ही उनके कार्य दक्षता में वृद्धि के लिए कार्मिक विभाग के अधीनस्थ मंत्रालयिक निदेशालय की स्थापना की घोषणा

•प्रदेश के विभिन्न शहरों में 1 लाख स्ट्रीट लाइट लगाए जाने की घोषणा

•प्रदेश में ग्रीष्मकाल में आमजन को आसानी से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आगामी वर्ष में 2500 हैंडपम्प की घोषणा

•आगामी वर्ष में 2500 दिव्यांगों को मिलेंगी स्कूटी

•नवगठित आठ जिलों में पॉलिटेक्निक कॉलेजों की स्थापना की घोषणा

• प्रदेश के नवगठित आठ जिलों में मिनी सचिवालय बनाए जाने की घोषणा

• सड़क सुरक्षा हेतु प्रदेश में 10 ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर की स्थापना होगी

• नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के स्थापना की घोषणा

• देवनारायण कल्याण बोर्ड में 450 करोड़ रुपए के प्रावधान की घोषणा

• गोडावण पक्षी के संवर्धन हेतु जैसलमेर के राष्ट्रीय मरू उद्यान के 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे

एक महान सम्राट पोरस का कुछ इतिहास जिसने सिकंदर को भी हराया

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रामगोपाल

आपने यूनान के राजा अलेक्जेंडर सिकंदर के बारे में जरूर सुना होगा। सिकंदर ने दुनिया जीतने के इरादे से जब भारत में कदम लिया तो एक राजा ने उसके होश उड़ा दिए। इस युद्ध में सिकंदर यह समझ गया कि भारत के राजाओं को हराना इतना आसान नहीं है।

राजा पोरस पंजाब-सिंध क्षेत्र के राजा थे। उनके राज्य का नाम पुरुवास था, जो पंजाब में झेलम नदी से चेनाब नदी तक फैला था।इतिहासकारों के अनुसार, राजा पोरस पोरवा वंश के राजा था। उनका साम्राज्य 340 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व तक बताया जाता है।

जब सिकंदर दुनिया में तबाही मचाते हुए भारत पहुंचा तो उसका सामना राजा पोरस से हुआ। दरअसल, हिंदुस्तान में घुसने के लिए झेलम और चिनाब नदियों को पार करना जरूरी था। लेकिन यहां राजा पोरस का साम्राज्य था।

उस समय जो राज्य सिकंदर के सामने घुटने नहीं टेकता था उस पर सिकंदर आक्रमण कर देता था। सिकंदर की विशाल सेना को देखकर गांधार-तक्षशिला के राजा आम्भी ने उसका स्वागत किया और उसकी मदद भी की। लेकिन राजा पोरस ने अलेक्जेंडर सिकंदर की अधीनता स्वीकार नहीं की।

सिकंदर ने राजा आम्भी की मदद से जैसे ही झेलम नदी को पार किया, वैसे ही राजा पोरस की सेना से उसका मुकाबला हुआ। इतिहासकार बताते हैं कि राजा पोरस के पास गजसेना थी। पोरस की सेना ने यवन सेना के छक्के छुड़ा दिए। इतिहास के आंकड़ों के अनुसार, सिंकदर की सेना में 50 हजार से ज्यादा सैनिक थे, वहीं राजा पोरस के पास करीब 20 हजार की सेना थी।

कुछ इतिहासकार कहते हैं कि राजा पोरस के सेनापति हाथियों पर सवार थे। ऐसे में सिकंदर की सेना तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं हरा पा रही थी। युद्ध के पहले दिन ही सिकंदर के कई सैनिक जख्मी हो गए। बताया जाता है कि राजा पोरस के भाई अमर ने भाले से सिकंदर के घोड़े बुकिफाइलस को मार गिराया। सिकंदर ने पूरे जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा था।

अमर के वार ने सिंकदर को जमीन पर गिरा दिया। राजा पोरस चाहते तो पलभर में सिकंदर का खेल खत्म हो सकता था। लेकिन उन्होंने उसे क्षमा कर दिया। इसके बाद सिकंदर के अंगरक्षक उसे वहां से ले गए।

भारत के इतिहासकारों ने भले ही कुछ भी लिखा हो लेकिन यूनानी इतिहासकार प्लूटार्क ने कुछ और ही लिखा है। इस युद्ध के बारे में उन्होंने लिखा, ‘इस युद्ध में यूनानी आठ घंटे तक लड़ते रहे लेकिन इस बार किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।’ प्लूटार्क के इस वाक्य से समझ में आता है कि इस युद्ध में सिकंदर की हार हुई।

इसलिए जो जीता वह सिकन्दर नही… पोरस कहिए !!

अमेरिका ने वैश्विक आर्थिक नीतियों पर लिया यू टर्न

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत के पूंजी (शेयर) बाजार से अपना निवेश अक्टोबर 2024 माह से लगातार निकाल रहे हैं। फरवरी 2025 माह में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा 34,574 करोड़ रुपए (397 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक) की राशि का निवेश भारतीय शेयर बाजार से निकाला गया है। वर्ष 2025 में अभी तक 137,000 लाख करोड़ रुपए (1,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर) से अधिक की राशि का निवेश भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा निकाला जा चुका है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से अपना निवेश निकालने के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। सबसे पहिले तो वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम एवं द्वितीय तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर में आई गिरावट एक मुख्य कारण रही इसके बाद सितम्बर 2024 तिमाही में भारतीय कम्पनियों की लाभप्रदता में आई कमी को दूसरे कारण के रूप में देखा गया। परंतु अब तो अमेरिका में नव निर्वाचित राष्ट्रपति श्री ट्रम्प के प्रशासन द्वारा टैरिफ के संदर्भ में की जा रही नित नयी घोषणाओं को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। ट्रम्प प्रशासन ने चीन, कनाडा एवं मेक्सिको से अमेरिका में आयात किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों पर टैरिफ की दर को बढ़ा दिया गया है और अब यह घोषणा भी की जा रही है कि भारत सहित विभिन्न देशों द्वारा अमेरिकी उत्पादों के आयात पर लगाए जाने वाले टैरिफ की तरह ही अमेरिका भी इन समस्त देशों से अमेरिका में होने वाले विभिन्न उत्पादों के आयात पर 2 अप्रेल 2025 से टैरिफ लगाएगा। ट्रम्प प्रशासन का तो यहां तक कहना है कि भारत अपने देश में होने वाले कुछ उत्पादों के आयात पर तो 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाता है अतः अब अमेरिका भी भारत से अमेरिका में होने वाले कुछ उत्पादों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाएगा। इससे बहुत सम्भव है कि भारत के फार्मा क्षेत्र, ऑटोमोबाइल क्षेत्र, इंजीनीयरिंग क्षेत्र एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर विपरीत प्रभाव पड़े। 

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारत के शेयर बाजार में किये गए निवेश का पोर्टफोलियो लगभग 20 प्रतिशत गिर गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को यह आभास हो रहा है कि इसमें अभी और गिरावट आ सकती है अतः विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना निवेश अभी भी लगातार निकाल रहे है। दूसरे, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को भारतीय बाजार तुलनात्मक रूप से महंगे लग रहे हैं क्योंकि चीन एवं कुछ अन्य देशों की कम्पनियों के शेयर इन देशों के शेयर बाजार में सस्ते में उपलब्ध हैं। अमेरिका में बांड यील्ड के उच्च स्तर (4.75 प्रतिशत से भी ऊपर) जाने के चलते भी अमेरिकी पोर्टफोलियो निवेशक भारत से अपना निवेश निकाल कर चीन, अमेरिका एवं अन्य इमर्जिंग बाजारों में निवेश कर रहे हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के लगातार मजबूत होते जाने से भारतीय रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है एवं भारतीय रुपए का अवमूल्यन हुआ है। हाल ही के समय में एक अमेरिकी डॉलर का मूल्य भारत के लगभग 88 रुपए के स्तर पर पहुंच गया है, इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारत के शेयर बाजार में होने वाली आय भी कम हुई है एवं उनकी लाभप्रदता पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। 

सितम्बर 2024 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय कम्पनियों में किए गए निवेश का पोर्टफोलियो 40,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था जो आज गिरकर 30,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा गया है। इसमें 25 प्रतिशत की भारी भरकम गिरावट दर्ज की गई है। 2 अप्रेल 2025 से ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत पर रेसिपरोकल टैरिफ लगाए जाने की घोषणा के चलते अभी भी भारतीय पूंजी बाजार पर लगातार दबाव बना रह सकता है। हालांकि, इसी समय में भारतीय संस्थागत निवेशक एवं खुदरा (रीटेल) निवेशक भारतीय कम्पनियों के शेयरों में भारी मात्रा में निवेश कर रहे हैं इसीलिए भारतीय शेयर बाजार बहुत अधिक नहीं गिरा है। परंतु फिर भी, भारतीय शेयर बाजार में माहौल तो बिगड़ ही रहा है। 

अभी तक तो विकसित देशों द्वारा वैश्वीकरण की नीतियों के आधार पर अपनी आर्थिक नीतियां बनाई जा रही थीं एवं विश्व के अन्य विकासशील देशों पर यह दबाव बनाया जा रहा था कि वे भी इन नीतियों का अनुपालन करते हुए विश्व के विकसित देशों के लिए विकासशील देश अपने द्वार खोलें ताकि इन देशों के संस्थागत निवेशक विकासशील देशों के पूंजी बाजार में अपना निवेश बढ़ा सकें। जबकि आज, विशेष रूप से अमेरिका, वैश्वीकरण की नीतियों को धत्ता बताते हुए केवल अपने देश को प्रथम स्थान पर रखकर वैश्वीकरण की नीतियों के संदर्भ में यू टर्न लेता हुआ दिखाई दे रहा है। किसी भी देश के लिए टैरिफ को अंधाधुंध बढ़ाना दुधारी तलवार की तरह है। जिस भी देश में भारी मात्रा में टैरिफ बढ़ाए जा रहे हैं उस देश के नागरिकों पर निश्चित रूप से इन उत्पादों के महंगे होने के चलते भारी बोझ पड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है। क्योंकि, टैरिफ बढ़ाए जाने वाले देश में आयात की जा रही वस्तुओं के महंगे होने का खतरा बढ़ता है जिससे उस देश में मुद्रा स्फीति की दर में वृद्धि होती है और आर्थिक मंदी की सम्भावना बढ़ती जाती है।

अमेरिका की देखा देखी अब रूस ने भी चीन से आयात किए जा रहे चारपहिया वाहनों पर टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। चीन ने, आज रूस के 3/4 ऑटोमोबाइल बाजार पर अपना कब्जा कर लिया है। चीन ने हालांकि रूस में चार पहिया वाहनों के निर्यात के मामले में पश्चिमी देशों को  झटका देते हुए अपना निर्यात रूस में बढ़ाया है। शुरू शुरू में तो रूस को यह सब अच्छा लगा परंतु अब उसे महसूस हो रहा है कि किसी भी उत्पाद के आयात के मामले में केवल एक देश पर निर्भरता उचित नहीं है। अतः अब रूस ने चीन से आयात किए जाने वाले चारपहिया वाहनों पर टैरिफ लगाना प्रारम्भ कर दिया है। साथ ही, रूस अब अपने देश में ही चारपहिया वाहनों का उत्पादन करने वाली विनिर्माण इकाईयों की स्थापना करना चाहता है ताकि रूस में ही रोजगार के नए अवसर निर्मित हो सकें।  

टैरिफ युद्ध के चलते अमेरिका में भी आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि इसकी सम्भावना वर्ष 2024 में भी की जा रही है। जे पी मोर्गन ने पूर्व में अपने एक आंकलन में बताया था कि अमेरिका में आर्थिक मंदी की सम्भावना 17 प्रतिशत है जबकि अब अपनी एक नई रिसर्च के आधार पर एक आंकलन में बताया है कि अमेरिकी में आर्थिक मंदी की सम्भावना 31 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसी प्रकार गोल्डमैन सैचस ने भी पूर्व में अमेरिका में आर्थिक मंदी की 14 प्रतिशत की सम्भावना व्यक्त की थी जो अब बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है। अमेरिका अपने देश में विभिन्न वस्तुओं के आयात पर टैरिफ लगा रहा है क्योंकि अमेरिका को ट्रम्प प्रशासन एक बार पुनः वैभवशाली बनाना चाहते हैं परंतु इसका अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ही विपरीत प्रभाव होता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार नसदक पिछले माह के दौरान 7 प्रतिशत से अधिक नीचे आया है, डाउ जोनस 4 प्रतिशत के आसपास नीचे आया है एवं एसएंडपी-500, 5 प्रतिशत के आसपास टूटा है। अमेरिका में जनवरी 2025 माह में उपभोक्ता खर्च में 0.2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए उपभोक्ता खर्च में वृद्धि बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसके साथ ही, ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ सम्बंधी निर्णयों की घोषणा में भी एकरूपता नहीं है। कभी किसी देश पर टैरिफ बढ़ाने के घोषणा की जा रही है तो कभी इसे वापिस ले लिया जा रहा है, तो कभी इसके लागू किए जाने के समय में परिवर्तन किया जा रहा है, तो कभी इसे लागू करने की अवधि बढ़ा दी जाती है। कुल मिलाकर, अमेरिकी पूंजी बाजार में सधे हुए निर्णय होते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं इससे पूंजी बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों का आत्मविश्वास टूट रहा है। और, अंततः इस सबका असर भारत सहित अन्य देशों के पूंजी (शेयर) बाजार पर पड़ता हुआ भी दिखाई दे रहा है। 

हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का मूलभूत आधार बहुत मजबूत बना हुआ है। अमेरिका में फरवरी 2025 माह में 150,000 रोजगार के नए अवसर निर्मित हुए हैं, यह आर्थिक मंदी का चिन्ह तो नहीं हो सकता है, बल्कि यह तो मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था का संकेत है। हां, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर में कुछ कमी आ सकती है। मोर्गन स्टैनली के एक अनुमान के अनुसार अमेरिका में इस वर्ष विकास दर घटकर 1.5 प्रतिशत के स्तर पर आ सकती है। अमेरिका में धीमी हो रही आर्थिक विकास की दर के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बहुत सम्भव है कि, यू एस फेड रेट (ब्याज दर) में कमी की शीघ्र ही घोषणा करे, इससे अमेरिका में बांड यील्ड में कमी आ सकती है एवं अमेरिकी डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है, इससे रुपए को मजबूती मिल सकती है एवं अंततः  विदेशी पोर्ट फो लियो निवेशक एक बार पुनः वापिस भारत लौट सकते हैं।  

Indonesia Joins as Country Partner for Kalinga Literary Festival to Celebrate Cultural Connections with India

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Delhi : The Kalinga Literary Festival (KLF), one of India’s leading literary and cultural events, proudly announces Indonesia as its official Country Partner for the upcoming edition of KLF being organized from 21st to 23rd March 2025. This landmark partnership aims to celebrate the deep-rooted historical and cultural connections between Indonesia and India while paving the way for stronger bilateral relations through literature, arts, and cultural exchange.

H.E. Ina Hagniningtyas Krisnamurthi, the Ambassador of Indonesia to India will join as Guest of Honour, Acclaimed Indonesian novelist and essayist Mahfud Ikhwan, Mr. Undri – Director of Cultural Promotion, the Indonesian Ministry of Culture will join as speaker at the festival.

As part of this vibrant collaboration, Indonesia’s renowned cultural ensemble, Belantara Budaya Indonesia Foundation, will captivate audiences with mesmerizing performances showcasing the rich diversity of Indonesia’s cultural heritage. The Foundation will present a series of vibrant and symbolic traditional dances, including the graceful “Nusantara Medley Dance,” the powerful “Mandau Dance,” the community-spirited “Maumere Dance,” the sacred “Tor Tor Dance” from North Sumatra, the lively “Solo Jaipong Dance” from West Java, and the evocative “Gelang Ro’om Dance” from Madura, East Java.

Belantara Budaya Indonesia Foundation, renowned for promoting Indonesian culture globally, will lead the cultural delegation, highlighting the diverse traditions of the archipelago. This partnership is an opportunity to deepen cultural diplomacy, foster intercultural dialogue, and enhance people-to-people ties between India and Indonesia.

“We are honored to have Indonesia as our Country Partner, celebrating a vibrant culture that resonates deeply with India’s own rich heritage,” said Rashmi Ranjan Parida, Founder Director of Kalinga Literary Festival. “This partnership not only highlights the historical bond our countries share but also provides an incredible platform for fostering future collaborations across cultural, literary, and diplomatic spheres.”

Belantara Budaya Indonesia Foundation, representing Indonesia, will showcase performances reflecting Indonesia’s diverse and dynamic cultural tapestry. “Our participation at the Kalinga Literary Festival underscores our commitment to promoting Indonesian culture internationally,” said a spokesperson from the Belantara Budaya Indonesia Foundation. “We look forward to sharing our cultural heritage and forging stronger bonds with the Indian community through this remarkable platform.”

The event will host performances, workshops, and discussions featuring prominent Indonesian and Indian writers, cultural practitioners, and intellectuals, creating a dynamic space for cross-cultural exchange and mutual understanding.

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