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पटना पुस्तक मेला – कभी ना भूलने वाला अनुभव

पुस्तक ‘नया भारत: मोदी दृष्टि और विकास का विमोचन’
बुधवार को हुए विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि देश बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने विकास के कई प्रतिमान गढ़े हैं। उनके कार्यकाल में अभी तक वह हुआ है, जो 70 वर्षों में नहीं हुआ। श्री शेखावत ने कहा कि आज विकास का लाभ जन-जन तक पहुंच रहा है। मोदी सरकार की प्राथमिकता है कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि नकारात्मक राजनीति के बीच सकारात्मक चर्चा करना और सही को सही, अच्छे को अच्छा लिखने का साहस कम ही लोग कर पाते हैं। श्री रवि पाराशर ने यह काम किया है, तो वे बधाई के पात्र हैं। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री ने कहा कि देश में राजनीतिक विरोधी भले मोदी सरकार के काम की आलोचना करें, मगर वैश्विक मंचों पर मोदी सरकार के कामकाज की सराहना होती है।
उन्होंने कोरोना काल में मोदी सरकार के काम और आतंकवाद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने उन मौकों पर भी नकारात्मक राजनीति ही की। श्री शेखावत ने कहा कि पहले गरीबी हटाओ के नारे बहुत लगते थे, मगर उस पर काम कभी नहीं होता था। अब सरकारी तंत्र में पूरी तरह पारदर्शिता है। अब हर गरीब तक सरकारी योजनाओं का लाभ शत प्रतिशत पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भारत में विकास की दिशा में उठाए गए कदमों और देश के भविष्य की संभावनाओं को समझने का महत्वपूर्ण साधन है।
इस मौके पर प्रसार भारती के चेयरमैन श्री नवनीत सहगल ने कहा कि रवि पाराशर की पुस्तक ‘नया भारत: मोदी दृष्टि और विकास’ न सिर्फ मोदी सरकार की नीतियों पर सकारात्मक टिप्पणियां की गई हैं, बल्कि लेखक ने अपनी ओर से सुझाव देते हुए टिप्पणियां भी की हैं।
इस अवसर पर लेखक श्री रवि पाराशर ने पुस्तक की लेखन प्रक्रिया और प्रेरणा के बारे में अपने विचार साझा किए। अनुवादकों सुश्री डॉ. शबीना शेख और श्री केशव पटेल ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार यह पुस्तक भारत की जड़ों और भविष्य के दृष्टिकोण को जोड़ती है।
इस आयोजन में डॉ. सुरेंद्र सिंघल और तनुल सिंघल समेत कई साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी और श्री गोविंद सिंह, श्री राजकुमार सिंह, सुश्री सर्जना शर्मा, श्री खुशदीप, श्री ब्रह्म प्रकाश दुबे, श्री अवनींद्र कमल समेत कई वरिष्ठ मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। प्रकाशक किताबवाले के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रशांत जैन ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि नई सोच का प्रारंभ है। कार्यक्रम का संचालन श्री केशव पटेल ने किया।
शतरंज की दुनिया का नया नायक -डी गुकेश
भारत के शतरंज प्रेमियों के लिए वर्ष 2024 का लेखा – जोखा 18 वर्षीय भारतीय ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने सुनहरे अक्षरों में उस समय लिख दिया जब उन्होंने सिंगापुर में गत चैपिंयन चीनी ग्रैंडमास्टर डिंग लिरेन को फिडे विश्व चैपिंयनशिप में 14 बाजियों में मात दी और विश्व शतरंज के सबसे युवा चैपिंयन बन गये। क्लासिकल शतरंज की शुरुआती 13 बाजियों में 6.5-6.5 अंक से बराबरी पर चल रहे दोनों खिलाडियों को टाई ब्रेकर में जाने से बचने के लिए यह मैच किसी भी हाल में जीतना था और गुकेश ने यह बाजी अपने नाम करके इतिहास रच दिया।
भारत के पूर्व शतरंज मास्टर विश्वनाथ आनंद के बाद डी गुकेश ऐसे दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने यह वैश्विक खिताब अपने नाम किया है। गुकेश के पूर्व पूर्व सोवियत संघ के गैरी कास्परोव ने 22 वर्ष की अवस्था में यह ख़िताब अपने नाम कर इतिहास रचा था जिसको 18 वर्षीय गुकेश ने ध्वस्त कर दिया है। यह ऐतिहासिक विजय प्राप्त करने के साथ ही डी गुकेश को 21.21 करोड़ रूपये की धनराशि प्राप्त हुई है।
वर्ष 2024 शतरंज की दुनिया में भारत और डी. गुकेश के लिए बहुत ही शानदार रहा है। इस वर्ष गुकेश ने कैडिडेटस टूर्नामेंट जीतकर लिरेन को चुनौती देने का अधिकार प्राप्त किया और इस प्रकार वह विश्व चैपिंयन को चुनौती देने वाले पहले सबसे युवा भारतीय बने। उन्होंने यह खिताब विश्व नंबर 2 कारुआना, विश्व नंबर तीन नाकामुरा और भारत के प्रगनानंद की उपस्थिति में जीता। इसी वर्ष उन्होंने भारत को पहली बार चेस ओलम्पियाड चैपिंयन बनाया। गुकेश ने यहां शीर्ष बोर्ड पर व्यक्तिगत स्वर्ण पदक भी जीता।ओलम्पियाड में भारत ने महिला ओैर ओपेन दोनों वर्ग में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा था।
इससे पूर्व डी गुकेश ने 2015 में एशियन स्कूल शतरंज चैपिंयनशिप ओर अंडर- 12 श्रेणी में 2018 में विश्व युवा शतरंज चैम्पियनशिप का अंडर -9 वर्ग जीता। गुकेश इससे पहले अंडर-12 व्यक्तिगत रेपिड और ब्लिटज अंडर -12 टीम रैपिड और ब्लिटज और अंडर 12 शास्त्रीय प्रारूपों में 2018 एशियाई युवा शतरंज में पांच स्वर्ण जीतकर इतिहास रच चुके हैं। वह मार्च 2018 में फ्रांस में 34वें ओपन डे कैंपले ला ग्रांडे शतरंज टूर्नामेंट के समापन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के सबसे युवा खिलाड़ी बने और अब वे विश्व चैपिंयन हैं।
गुकेश का जन्म चेन्नई में 29 मई 2006 को हुआ, इनके पिता डा. रजनीकांत और माता डा. पद्मा हैं। गुकेश को बचपन से ही शतरंज खेलने का शौक था और उन्हें घर से बाहर जाना पड़ता था इसलिए उनके पिता ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी। गुकेश की प्रारम्भिक शिक्षा उस विद्यालय में हुई है जहां से कार्तिकेयन, अरविंद चिदंबरम, प्रगनानंद जैसे ग्रैंडमास्टर निकल चुके हैं। गुकेश ने शतरंज का अभ्यास मात्र 7 वर्ष की अवस्था से ही आरम्भ कर दिया था और वह बचपन से ही शतरंज की दुनिया के नये सबसे युवा नायक बनना चाहते थे, अब उनका यह सपना पूरा हो चुका है। उनके विद्यालय कोच भास्कर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना था और उन्हें प्रशिक्षण देना प्रारम्भ किया।
आज संपूर्ण भारत गुकेश को बधाई दे रहा है । राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित अनेक राजनेताओें व हस्तियों ने उनको बधाई दी है। जीत के बाद गुकेश की आंखों में खुशी के आंसू थे और चेहरे पर मुस्कान।अपनी विजय के बाद डी गुकेश ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बेहतरीन पल है। गुकेश का प्रदर्शन शतरंज के युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा की तरह काम करेगा।






