दो टीवी चैनलों के दफ्तरों में जमकर तोड़फोड़

114.1.jpg

कुछ उपद्रवियों ने पाकिस्तान में दो टीवी चैनलों पर हमला कर दिया और दफ्तरों में जमकर तोड़फोड़ की। बताया जा रहा है कि ये हमला कॉमेडी शो में किए गए मजाक को लेकर किया गया है। टीवी शो पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसके जरिए सिंध प्रांत और सिंधी भाषी लोगों का मजाक बनाया जा रहा है।

सूचना के अनुसार, गुस्साए लोग रविवार को ‘जियो न्यूज’ और ‘जंग न्यूज’ के ऑफिस में घुस आए। उन्हें रोकने का काफी प्रयास भी किया गया, लेकिन वे नहीं माने और ऑफिस के अंदर घुस आए। उन्होंने जमकर तोड़फोड़ मचाई और स्टाफ के साथ मारपीट भी की।

स्थानीय मीडिया द्वारा जारी की गई टीवी फुटेज के मुताबिक, जगह-जगह बिखरा सामान, टूटे शीशे साफ देखे जा सकते हैं।

टीवी चैनल के शो ‘खबरनाक’ के होस्ट इरशाद भट्टी ने बयान देकर कहा है कि उनका मकसद किसी का अपमान करना नहीं था। दरअसल, अपने इसी शो में सिंधी लोगों पर की गई पत्रकार इरशाद भट्टी की टिप्पणियों से ही लोगों में नाराजगी है।  इस महीने के शुरुआत में इरशाद भट्टी ने सिंधी समुदाय के लोगों को अपने कार्यक्रम में ‘भूखा-नंगा’ (भूखा और नंगा) कहा, तो लोगों का धैर्य टूट गया और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

पत्रकार इरशाद भट्टी ने कार्यक्रम की शुरुआत में भिखारी-नंगे लोगों के करोड़पति नेता के तौर पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी को इंट्रोड्यूस किया। फिर कहा था कि सिंध में बहुत से भीख मांगने वाले लोग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से भोले-भाले लोग जरदारी की रैलियों में शामिल होने आते हैं, जिन्हें इसके लिए भुगतान भी नहीं किया जाता है। इरशाद ने कहा कि भूखे-नंगे लोगों को पैसे का वादा करके पीपीपी रैलियों में लाया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें भुगतान भी नहीं किया जाता है।

 इस हमले को लेकर, पत्रकार जेबुनिसा बुरकी ने कहा कि पुलिस की आंखों के सामने यह सब हुआ। जब पुलिस को सूचना दी गई, तब तक भी हमलावर वहीं थे।

जियो न्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने ट्वीट कर इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, ‘जियो और जंग के ऑफिस पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने रिसेप्शन एरिया में तोड़फोड़ की और हमारे कैमरामैन के साथ मारपीट भी की। आखिर सरकार कहा है?’

जियो न्यूज कराची के पत्रकार फहीम सिद्दिकी ने कहा कि भट्टी ने स्पष्टीकरण देने के बाद माफी भी मांगी थी। ऐसे में यह नहीं होना चाहिए था। इस विरोध प्रदर्शन के बारे में पहले से पता था, फिर भी पुलिस ने कुछ नहीं किया। कोई सुरक्षा न्यूज चैनल को मुहैया नहीं कराई गई। हम इस घटना के पीछे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं।

 घटना की निंदा करते हुए सिंध के सूचना मंत्री नासिर हुसैन शाह ने कहा कि हम मामले की जांच कर रहे हैं। सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली ने भी कहा कि उन्होंने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और जियो न्यूज के प्रबंध निदेशक से इस बारे में बात भी की है। हालांकि विपक्षी दल इस घटना के बाद इमरान सरकार पर सवाल उठा रहा है।

यूपी विधानसभा में उठा पत्रकारों से जुड़ा मुद्दा

116-8.jpg

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के बाद विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र में विधानसभा की पत्रकार दीर्घा में कवरेज के लिए मीडिया को नहीं बैठने देने का मुद्दा उठाया, जिसके जवाब में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल के कारण पत्रकारों के लिए अलग व्यवस्था की गई थी और इस बारे में जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा।

राज्यपाल के अभिभाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने पूछा कि विधानसभा में पत्रकार दीर्घा से पत्रकारों को क्यों दूर रखा गया है और क्या कोविड-19 केवल पत्रकारों को ही प्रभावित करता है, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता विपक्ष को नहीं?

बहुजन समाज पार्टी के विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता अराधना मिश्रा ने भी चौधरी की इस बात का समर्थन किया। इस पर विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि कोरोना काल में पत्रकारों की सहमति से यह निर्णय लिया गया था कि मीडिया के लिए बैठने की अलग व्यवस्था कर दी जाए और उसी हिसाब से अलग व्यवस्था की गई थी।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। लालजी वर्मा और अराधना मिश्रा ने इस पर कहा कि कुछ पत्रकारों को अनुमति दी जानी जाए, जिससे कि वे सदन की कार्यवाही सही ढंग से देखें और उसकी रिपोर्टिंग करें। विधानसभा अध्यक्ष ने इसके जवाब में कहा कि इस पर कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विचार कर लिया जाएगा।

TV पर विज्ञापनों को लेकर TAM AdEx की रिपोर्ट

115.1-1.jpg

टीवी पर नए एडवर्टाइजर्स की संख्या में पिछले साल जनवरी की तुलना में टैम एडेक्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी महीने में कमी आई है। हालांकि, इस साल जनवरी में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले टीवी पर विज्ञापनों की संख्या में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 के मुकाबले जनवरी 2021 में टीवी पर 1500 से अधिक नए विज्ञापनदाताओं ने विज्ञापन दिया है। जनवरी 2020 में कुल विज्ञापनदाताओं की संख्या 3000 से ज्यादा थी, वहीं नवंबर और दिसंबर में यह क्रमश: 2900 से ज्यादा और 2300 से ज्यादा थी। जबकि पिछले साल जनवरी की तुलना में इस साल जनवरी में 1900 से ज्यादा एक्सक्लूसिव विज्ञापनदाता गायब थे।   

‘Starcom MediaVest Group’ के मैनेजिंग डायरेक्टर (नॉर्थ) दीपक शर्मा का कहना है,’किसी भी एडवर्टाइजर अथवा इंडस्ट्री के लिए साल की दो तिमाही अप्रैल-मई-जून और अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर काफी महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि तकरीबन 60 प्रतिशत रेवेन्यू इन्ही तिमाहियों में आता है। अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर के मुकाबले जनवरी-फरवरी-मार्च का कम महत्व है, लेकिन यदि हम जनवरी-फरवरी-मार्च को तिमाही दर तिमाही देखें तो यह ज्यादा होगी, क्योंकि फाइनेंस सेक्टर, स्टूडेंट सेक्टर व अन्य के लिए मार्च काफी महत्वपूर्ण महीना है। इसके अलावा यह वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना भी होता है।’

 व्हाइट हैट एजुकेशन टेक्नोलॉजी इस साल जनवरी में टॉप एडवर्टाइजर्स की लिस्ट में शामिल रहा। पिछले महीने टीवी पर दस नए एडवर्टाइजर्स की बात करें तो इनमें Dhani services, Airtel Payment Bank, International Cricket Council, Honda Cars India, Thangamayil Jewellery, Piccadily Agro Industries, Accenture Solutions, Ather Energy और Acko General Insurance आदि ब्रैंड्स ने अपनी जगह बनाई।  

शर्मा के अनुसार, महामारी के दौरान ऑटो, हॉस्पिटैलिटी, और ट्रैवल जैसे सेक्टर काफी प्रभावित हुए। ये सेक्टर विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले हैं, लेकिन पिछले साल इनके खर्च में गिरावट देखी गई और इसलिए विज्ञापन प्रभावित हुआ।

एक विशेषज्ञ के अनुसार , ‘सर्विस प्रोवाइडर्स, ऑनलाइन एजुकेशन, एजुटेक और ई-कॉमर्स जैसी कुछ कैटेगरी हैं, जिनमें इस साल उछाल आने की उम्मीद है। इसके अलावा लोन सर्विसेज और सर्विस सेक्टर जो नीचे खिसक गया है, वह आने वाले महीनों में ऊपर आ सकता है। भले ही नए विज्ञापनदाताओं की संख्या कम हो, लेकिन अन्य विज्ञापनदाताओं द्वारा खर्च में कटौती नहीं की गई। पिछले साल इन कैटेगरी में तमाम एडवर्टाइजर्स मौजूद थे, जिन्हें अभी रिकवर करना है। हालांकि, अब खर्च बंद नहीं किया गया है, एडवर्टाइजर्स सिर्फ टीवी पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।’

डाटा के अनुसार, जनवरी 2020 के मुकाबले जनवरी 2021 में दस टॉप नए एडवर्टाइजर्स में से चार सर्विस सेक्टर से जबकि दो ऑटो सेक्टर से थे।

‘पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट’ 2021 के अनुसार, पहली तीन तिमाहियों में वर्ष 2019 के मुकाबले 31 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, वर्ष 2020 की चौथी तिमाही (Q4’20) में तीसरी तिमाही (Q3 2020) के मुकाबले 66 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वर्ष 2019 की चौथी तिमाही (Q4 2019) के मुकाबले इसमें 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, कैटेगरीज की बात करें तो कोविड-19 वर्ष में सबसे बड़ी वृद्धि अनुमानित रूप से ई-कॉमर्स कैटेगरी से आई है, जिसमें वर्ष 2019 के मुकाबले 95 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है। ई-कॉमर्स में ऑनलाइन शॉपिंग, मोबाइल वॉलेट्स और मीडिया/एंटरटेनमेंट/सोशल मीडिया/ओओटी प्रमुख कैटेगरी थीं। इसके बाद अगली बड़ी ग्रोथ एजुकेशन सेक्टर से देखने को मिली है।

इफको ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए 2.51 करोड़ का दिया दान

116.1.jpg

अयोध्या में चल रहे निर्माण कार्य हेतु विश्व की अग्रणी सहकारी संस्था इफको ने 2.51 लाख भेट किये। श्रद्धा से साथ सम्पूर्ण इफको परिवार की ओर से इस पूण्य कार्य के लिए योगदान है। इफको के अध्यक्ष श्री बलविंदर सिंह नकई जी के साथ इफको के उपद्यक्ष श्री दिलीपभाई संघणी, प्रबंध निदेशक श्री उदय शंकर अवस्थी, सं० प्रबंध निदेशक श्री राकेश कपूर, निदेशक (मानव संसाधन एवं विधि) श्री आर पी सिंह तथा विपणन निदेशक श्री योगेन्द्र कुमार ने मिलकर इफको निदेशक मंडल की ओर से श्री राम जनमभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से सप्रेम 2.51 करोड़ का चेक भेट किया। ये चेक विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख श्री आलोक कुमार और टीम को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की उपस्थिति में सौंपा।

ज्ञात हो कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 05 अगस्त, 2020 को अयोध्या में प्रभु श्री राम के जन्म स्थल पर मंदिर निर्माण कार्य के लिए भूमि पूजन किया था। इफको सहकारिया, किसानों व लोक मानस की भलाई हेतु अलग-अलग कार्य करती रहती है। पिछले वर्ष इफको ने कोविड महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री केयर फड़ में 25 करोड़ का योगदान दिया था। इसके साथ-साथ इफको ने कोविड महामारी के दौरान देश भर में ‘इफको फाइट करोना – ब्रेक दी चैन’ की एक विशेष अभियान पूरे भारतवर्ष में चलाया था। साथ ही देश भर में ठंड के दौरान गरीबों में कंबल का वितरण करवाया गया था।

इफको पूरे भारत में किसानों को शिक्षित करने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने हेतु कई शैक्षिक कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करता आ रहा है । इन कार्यक्रमों में संतुलित प्रजनन, गाँव को गोद लेना, कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के लिए किसानों का दौरा, किसानों की बैठकें, फसल सेमिनार, स्टेटिक / मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला आदि शामिल हैं। इफको किसानों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के हेतु विभिन्न गतिविधियाँ करता है जैसे : सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में चारा की आपूर्ति, पशु चिकित्सा जांच और दवाइयों का वितरण, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छ पेयजल सुविधा, वाटरशेड विकास और किसानों के बच्चों की स्कूली शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता। इफको ने ग्रामीण समुदायों की कला और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है।

scroll to top