मोदी तानाशाह होते तो राजदीप, बरखा, रवीश, ध्रुव दिन में तारे देख रहे होते

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प्रधानमंत्री मोदी को बार बार कांग्रेस उपनिवेश के एक्सराती और यू ट्यूबर तानाशाह साबित करने में दिन रात लगे हुए हैं। यदि कांग्रेस इको सिस्टम के पचासों लोग एक साथ मोदी को तानाशाह कह रहे हैं और एक—दो पर भी कोई एफआईआर नहीं है तो पब्लिक सवाल पूछेगी ना! भाई कैसा तानाशाह है ये? मोदी की पुलिस ने अजित अंजुम को छुआ तक नहीं। वह मजे में घुम रहा है। बीजेपी के खिलाफ झूठ और सच का एजेन्डा चला रहा है। उन लोगों को अपने चैनल पर प्रमोट कर रहा है जो उसके चैनल पर आकर कहते हैं कि मोदी आया तो बचकर नहीं जाएगा। अजीत उस बयान को संपादित भी नहीं करता और राहुल गांधी की पुलिस गिरफ्तार अजीत भारती को करने आ जाती है! अब बताओ, तानाशाह कौन है? राहुल या मोदी?

अट्ठारहवी लोकसभा के गठन के लिए हुए चुनावों के प्रचार के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाला इंडी गठबंधन, संविधान बचाओ  का नारा लगाकर अफवाह फैलाता रहा कि अगर भाजपा लोकसभा में 400  पार चली जाती है तो संविधान बदल दिया जायेगा और आरक्षण समाप्त कर दिया जायेगा। चुनावों के बाद इन दलों का रवैया बदला नहीं है और एक बार फिर हारने के बाद अब वह नये तरीके से मैदान पर उतर आये हैं । अब यह लोग संवैधानिक संस्थानों से लेकर न्यायपालिका, मीडिया और सोशल मीडिया तक में स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले लोगों पर भी हमला बोल रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का नारा लगाने वाली कांग्रेस व इंडी गठबंधन ने चुनावों से पूर्व भी देश के मीडिया संस्थानों व कुछ एंकरों का बहिष्कार किया था।

यही सब मिलकर प्रधानमन्त्री मोदी जी को तानाशाह कहकर बुलाते हैं और कुछ अधिक सीट लेकर विपक्ष में बैठने पर कहते हैं – हमने तानाशाह की बोलती बंद कर दी, अब तानाशाही नहीं चलेगी। सत्य तो यह है कि कांग्रेस की तानाशाही बहुत पुरानी और सर्वविदित है । यह ऐतिहासिक तथ्य है कि मीडिया  का सबसे अधिक दमन करने वाली कांग्रेस ही है। नेहरू काल से लेकर अभी तक कांग्रेस तानाशाही व्यवहार से बाहर नहीं आ पा रही है। 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी  कुर्सी बचाने के लिए देश पर आपताकाल थोपा और सैकड़ों नेताओं के साथ साथ हजारों निरीह नागरिकों  को भी  जेल में डाल दिया था फिर अनेकानेक मीडिया संस्थानों पर ताले डाल दिये गये और सैकड़ो पत्रकारों को भी  जेल में बंद कर दिया गया ।

पत्रकारों पर भी उसी प्रकार अत्याचार किये गए जिस प्रकार अंग्रेज सरकार जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों के साथ किया करती थी। फिल्मों और गीतों तथा गायकों पर भी इंदिरा – संजय का कहर बरपा। अब कांग्रेस विपक्ष में रहकर भी तानाशाही  रवैया अपना रही है, कांग्रेस की  प्रेस वार्ता में सवाल पूछने पर पत्रकार बेइज्जत करके बाहर निकाल दिए जाते हैं । कांग्रेस अपने गिरेबान में झांके बिना किसी को भी तानाशाह कह सकती है और तो और चुनावो के समय वह चुनाव आयेग पर भी तानाशाही का आरोप लगाती रही । अभी नयी संसद का सत्र भी आरम्भ  नहीं हुआ है और विपक्ष की ओर से तानाशाह और तानाशाही शब्द की माला का जप आरम्भ हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह जो दिल्ली शराब घोटाले के एक आरोपी हैं ने बयान दिया है कि अगर भाजपा का लोकसभा अध्यक्ष बनता है तो सरकार तानाशाह हो जायेगी। एक कांग्रेसी तानाशाह प्रधानमंत्री द्वारा लिखी गई आपातकाल की क्रूर गाथा के बाद भी  कांग्रेस का तानाशाही रूप समय -समय पर उजागर होता रहा है। तेलंगना राज्य के गठन के समय दिखाई गयी कांग्रेस की तानाशाही भी कम भयावह नहीं थी।

अब  कांग्रेस व इंडी गठबंधन ने अब राष्ट्रवादी विचारधारा के लेखकों पत्रकारों व सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों पर हमले बोलना प्रारम्भ कर दिया है। राहुल गांधी कहते हे मोदी जी डरे  हुए तानाशाह हैं जबकि वास्तविकता यह है कि असली तानाशाह तो स्वयं राहुल गांधी ,कांग्रेस पार्टी व इंडी गठबंधन है। अभी कुछ समय पूर्व एक यूटयूबर पत्रकार अजीत भारती के एक वीडियो से कांग्रेस पार्टी व राहुल गांधी इतना डर गये कि कर्नाटक की पुलिस अजीत भारती को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंच गयी किंतु यह अच्छा रहा कि अजीत भारती यूपी में रहते हैं और  यूपी ने अजीत भारती को पूरी सुरक्षा प्रदान कर दी है।

कांग्रेस व इंडी गठबंधन की तानाशाही की कहानियां भरी  पड़ी हैं  फिर भी ये प्रधानमंत्री मोदी को  तानाशाह कहते है। कांग्रेस की आक्रामक तानाशाही का  शिकार न जाने कितने लोग हुए हैं और लगातार हो रहे हैं।फिल्म अभिनेत्री पायल रोहतगी को नेहरू और एडविना की फोटो पोस्ट करने पर ही राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने रात नौ बजे उनके घर पर पुलिस भेजकर हिरासत में ले लिया था। फेसबुक पर टिप्पणी करने वाले युवक सुमित ठक्कर को उद्धव सरकार पर व्यंग्य करने पर  महाराष्ट्र में उसके ऊपर 40 जिलों में केस दर्ज कर लिये गये और उसे  हथकड़ी और बेड़ियों  में किसी आतंकवादी की तरह पकड़ कर पूरे महाराष्ट्र में घुमाया गया था। सुमित ने तत्कालीन मुख्यमंत्री की तुलना एक पेग्विंन से की थी। इसी तरह केतकी चेताली ने फेसबुक पर लिखा कि जो झूठ बोलता है उसका मुंह टेढ़ा हो जाता है।

उन्होंने कहीं शरद पवार का नाम नहीं लिखा था पर उनको सुबह सात बजे घर से उठा लिया गया जब उसे 104 डिग्री बुखार था और उसके ऊपर पूरे महाराष्ट्र में 80 से ज्याद जगह एफआईआर दर्ज करवायी गयी, बाद में  मुंबई हाईकोर्ट के एक जज उसे जमानत देने का आदेश दिया गया।महाराष्ट्र में ही विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे चुके पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को पुलिस विभग मे वापस बुलाया जाता है और रिपब्लिक भारत के अर्नब गोस्वामी को सबके सामने से उठाकर लाया जाता है क्योकि अर्नब गोस्वामी और उनकी टीम तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार की लगातार पोल खोल रही थी जिसमें पालघर में दो साधुओं की नृशंस हत्या व फिल्म स्टार सुशांत सिंह की मौत के कारणों  की असलियत का भी पता लगाया जा रहा था। उद्धव ठाकरे की सरकार ने अर्नब को दबाने के लिए सारे उपक्रम किए । मुंबई में फिल्म अभिनेत्री व वर्तमान सांसद कंगना रनौत का घर इसलिए तोड़ा गया क्योंकि उन्होंने उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी कर दी थी। अभी जब कंगना सांसद बनीं और चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर उन्हें थप्पड़ मारा गया तब सारे कांग्रेसी नेता व इंडी गठबंधन के  नेताओं ने  परोक्ष रूप से उसका समर्थन किया, ऐसा व्यवहार तानाशाही नहीं तो और क्या है अपितु यह कांग्रेसी तानाशाही का और भी घिनौना रूप है। हम लेकर रहेंगे आजादी जैसे नारों के समर्थक व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लंबरदार आम आदमी पार्टी की तानाशाही भी कम नहीं है।

टाइम्सनाउ नवभरत की पत्रकार भावना द्वारा अरविंद केजरीवाल के शीशमहल के भ्रष्टाचार को उजागर करने पर उसकी गाड़ी से एक दलित ई रिक्शा चालक से दुर्घटना दिखाकर पंजाब पुलिस उसे दलित एक्ट में उठा ले गई जबकि वह गाड़ी चला भी नहीं रही थी अपितु वह बगल में बैठी थी। पंजाब हाईकोर्ट ने भवना को न्याय दिया और पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि तुम तानाशाह बन चुके हो। कोर्ट में वह ई- रिक्शा चालक भी मुकर गया और उसने कहा कि मुझे पैसे का लालच दिया गया था। केजरीवाल के शीशमहल का वीडियो बनाने वाले पत्रकार रचित कौशिक का भी उत्पीडन किया गया। केजरीवाल के भ्रष्टाचार पर ट्वीट करने वाले तेजिंदर बग्गा का भी पंजाब पुलिस अपहरण करके ले गई ।

कुमार विष्वास ने जब बिना किसी का नाम लिए लिखा कि अब खालिस्तानी सर उठाएंगे तो उनके घर पर पंजाब पुलिस भेज दी गई। छत्तीसगढ़ में जब भूपेष बघेल की सरकार थी तब उन्होंने नोएडा में आठ बार छत्तीसगढ़ पुलिस भेजकर उन्हाने तमाम चैनल के पत्रकारों का उठाने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा व कांग्रेस सहित सभी दलों ने अलग अलग तरह की तानाशाही दिखाई है।सपा व बसपा की सरकारों में सभी समाचार पत्रों  के लिए विज्ञापन लेने के लिए परोक्ष रूप से कई शर्तें होती थीं, सपा व बसपा के खिलाफ कोई भी पत्रकार व लेखक एक शब्द तक नहीं लिख सकता था। लोकसभा चुनावों के दौरान ही सपा मुखिया अखिलेश यादव अपनी तानाशाही का परिचय दे चुके हैं,  एक पत्रकार के सवाल करने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से धमकी देते हुए कहा कि, “तुम्हारा दूसरा इलाज किया जाये क्या ?” सपा बसपा की सरकारों में पत्रकारो व संपादकों को बराबर डर सताया रहता था। आज लोग डर का वह पुराना  समय भूल चुके हैं।

चुनावों के बाद ही एक प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने एक आज तक टीवी चैनल की महिला पत्रकार पर बहुत ही अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा था कि आपने बीजेपी की टी शर्ट  पहन रखी है। यह प्रश्न विचारणीय है कि वास्तव में  तानाशाह है कौन? कांग्रेस बार- बार प्रधानमंत्री मोदी व बीजेपी पर तानाशाही  का आरोप लगाती रहती है किंतु स्मरण करने योग्य बात है कि 22 जनवरी 2024 के दिन अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समारोह को हिंदू जनता देख न सके उसके लिए मीडिया पर किस किस  तरह के प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था? बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों  ने हरसंभव प्रयास किया कि आम जनमानस येन केन प्रकारेण रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह टीवी पर न देख सके।  तो असली तानाशाह कौन हुआ ?विडंबना है कि इस तरह के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह बता रहे हैं जिनका भूत और वर्तमान दोनों ही तानाशाही में रसे पगे हैं।

आ गया, आ गया, ‘सनातन’ की मंगल बेला का टाइम आ गया

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मोहन चरण मांझी के मुख्यमंत्री बन जाने से परिवर्तन के शुभ संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करने के वे तीन द्वार खुलवा दिये हैं जो बंद कर दिये गये थे

अट्ठारहवीं लोकसभा का गठन पूरा हुआ और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने शपथ लेकर अपना काम काज भी आरम्भ कर दिया। यद्यपि लोकसभा में संख्याबल कुछ कम पड़ जाने के कारण भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता व समर्थक कुछ उदास रहे किन्तु उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की विधान सभाओं ने इस उदासी को उत्सव में बदलने का अवसर दे दिया। उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के चुनाव परिणाम सनातन की मंगल वेला का संकेत हैं।

उड़ीसा विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी  को 147 सीटों में से 78 सीटों पर विजय मिली और वर्ष 2000 से 2024 तक लगातार मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक जी को पराजय का मुंह देखना पड़ा। यह उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय है। प्रदेश में भाजपा ने  मोहन चरण मांझी, जिनका राज्य में राजनैतिक संघर्ष का लम्बा समय  रहा है तथा जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे हैं को मुख्यमंत्री पद की बागडोर सौंपी है। मांझी 1997 से राजनीति सक्रिय हैं, एक मजबूत तेजतर्रार आदिवासी नेता हैं जिनका व्यापक प्रभाव है। मोहन चरण मांझी सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यापक भी रहे हैं । माझी की  जनसाधरण से जुड़ने की असीम क्षमता ने आदिवासी क्षेत्रों में उन्हें विशेष लोकप्रियता दिलाई है। चार बार के विधायक के रूप  मे उन्हें राज्य की शासन प्रणाली की गहरी समझ है और उन्होंने इस क्षेत्र के लिए भाजपा की नीतियों को आकार देने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।भारतीय जनता पार्टी ने मोहन चरण मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर आदिवासी समाज को एक बडा संदेश दिया है ।
 आगामी दिनों में झारखंड में भी विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं जहां पर भारतीय जनता पार्टी  मांझी की  लोकप्रियता व प्रभाव का उपयोग कर सकती है। मोहन चरण मांझी के मुख्यमंत्री बन जाने से परिवर्तन के शुभ संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करने के वे तीन द्वार खुलवा दिये हैं जो कोविड काल में बंद कर दिये गये थे। ये बंद द्वार उड़ीसा विधानसभा चुनावों में एक बहुत बड़ा मुद्दा बनकर उभरे थे । अब मंदिर में जाने वाले भक्त चारों द्वार से प्रवेश कर  सकते हैं। चारों द्वार खोले जाने के बाद यह प्रश्न उठ रहा है  कि रहस्यों से भरे जगन्नाथ  मंदिर के इन द्वारों  को बंद क्यों किया गया था और इनको खोले जाने से  क्या बदलाव आने वाला है ?   जगन्नाथ मंदिर में कुल चार द्वार  हैं और ये सभी कभी बंद नहीं रहे, कोविडकाल मे इनको  बंद कर दिया गया था और श्रद्धालुओं की मांग के बाद भी इनको खोला नहीं जा रहा था। जिस द्वार से अभी भक्तों का प्रवेश था था उसका नाम सिंहद्वार है, जबकि एक द्वार का नाम व्याघ्र द्वार है जो पश्चिम  दिशा में है और आकांक्षा का प्रतीक माना जाता है यहां से साधु संत प्रवेश करते हैं। हस्ति द्वार का नाम हाथी पर है और यह उत्तर दिशा में है, हाथी धन की देवी लक्ष्मी का प्रतीक है। इस द्वार के  दोनों तरफ हाथी की आकृति बनी हुई है जिन्हें मुगलकाल में क्षतिग्रस्त कर दिया गया। दक्षिण दिशा में अश्व द्वार है।
घोड़ा इसका प्रतीक है। इसे विजय का द्वार भी कहा जाता है और योद्धा इस द्वार का उपयोग विजय के लिए करते रहे हैं।  जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खुल जाने से अब भक्तो को आसानी से दर्शन  हो सकेंगे। इअके साथ ही मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने जगन्नाथ मंदिर के रखरखाव तथा अन्य कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये का  विशेष कोष भी बना  दिया है।हिन्दू धर्म के लोगों के लिए आंध्र प्रदेश  से भी अच्छा समाचारआया है कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद तिरुमला में प्रसिद्ध वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन -पूजन किया तथा पूर्ववर्ती जगन  सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जगन सरकार ने तिरुपति देवस्थानम का व्यसायीकरण कर दिया था, सरकार दर्शन के टिकट की ब्लैक मार्केटिंग कर रही थी जिसे अब ठीक किया जाएगा। जगन सरकार में मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता में काफी गिरावट आ गई थी और महंगा भी हो गया था अतः मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता को ठीक करते हुए उसे सस्ता किया जायेगा।चंद्रबाबू नायडू ने कहाकि पिछली सरकार में मंदिर को जुआ, शराब व मांसाहार का केंद्र बना दिया गया था जो कि अब नहीं चलेगा। उन्होंने कहाकि अब तिरुमला देवस्थानम की सफाई की जायेगी क्योंकि यह मंदिर पूरी तरह से सनातनी हिन्दुओं का है और रहेगा। ज्ञातव्य है कि जगन सरकार में मंदिर का ट्रस्ट ईसाइयों के हाथ में चला गया था ।
उड़ीसा और आंध्र प्रदेश की छद्म धर्मनिरपेक्ष  ताकतों को यह दृश्य पसंद नही आयेगा क्योंकि वह तो जानते हैं कि  आंध्र पदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सेक्युलर नेता हैं और मुस्लिम आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं  किंतु यहां पर यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि वह सनातन विरोधी भी कतई नहीं हैं। अभी आगे आने वाले दिनों में आंध्र और उड़ीसा के मुख्यमंत्री सनातन को कुछ और अच्छे समाचार  देंगे। विगत पांच वर्षो में विपक्ष में रहकर आंध्र प्रदेश की तेलुगूदेशम पार्टी ने वहां के मंदिरों व संत समाज की सुरक्षा के लिए काफी  कार्य व आंदोलन किया है। उधर उड़ीसा में इस बात की प्रबल संभावना है कि समान नागरिक संहिता व धर्मांतरण पर लगाम  लगाने के लिए एक व्यापक कानून आए ।एक अच्छा समाचार यह भी है कि तेलूगुदेशम पार्टी के नेता राममोहन नायडू  मंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब अपने कार्यालय पहुंचे तब उन्होंने सबसे पहले 21 बार ॐ श्रीराम लिखा और उसके बाद पहली फाइल पर हस्ताक्षर किये। नायडू को नागरिक उड्डयन मत्री बनाया गया है, उनके पिता एर्नाकुलम से बहुत ही कम आयु में सांसद बने थे राम मोहन नायडू के पिता रामभक्त थे तथा राजनीती में  चंद्रबाबू नायडू के बहुत करीबी थे।राम मोहन नायडू एक युवा सांसद हैं और वह चाहते हे कि देश  के गरीब नागरिक भी हवाई जहाज में यात्रा कर सकें।
तेलुगुदेशम पार्टी  के सांसद का ॐ श्रीराम लिखना सेक्युलर विचारकों के लिए हैरान करने वाला रहा। जगन्नाथ मंदिर के सभी द्वार खुलने और तिरुपति देवस्थानम की पवित्रता वापस लाने के प्रयासों से से चारों  दिशाओं में सनातन  का डंका बजने वाला है। प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित फोन नं.- 9198571540[20/06, 12:51 pm] Mrityunjay Dixit Lucknow Whatsapp Group: किसानों और गरीबों के साथ, फिर भाजपा सरकार  मृत्युंजय दीक्षित 18वीं लोकसभा के गठन तथा तदुपरांत शपथ ग्रहण के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग गठबंधन की सरकार ने अपना कामकाज प्रारम्भ कर दिया है ।कठिन चुनौतियों में भी अवसर खोजने वाली भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना संकल्प पत्र अमल में लाकर राजनैतिक गणित ठीक करने का अभियान भी आरम्भ कर दिया है। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि नए दौर की भारतीय जनता पार्टी सदा चुनावी मोड में रहती है विशेष रूप से मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भाजपा सदा सक्रिय रहती है, वो बात अलग है कि चुनावों में कभी सफलता मिलती है और कभी नहीं भी मिलती है। वर्तमान लोकसभा में भापजा को 241 सीटें प्राप्त हुई हें और उसे उप्र, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र में अच्छा खासा नुकसान हुआ है किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तनिक भी विलम्ब न करते हुए, भाजपा ने  सब कुछ ठीक करने के लिए कमर कर कर अभियान आरम्भ कर दिया है।
लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली फाइल पर हस्ताक्षर करके  किसानों  की सम्मान निधि की अगली किश्त को मंजूरी दी वहीं कैबिनेट ने अपनी बैठक में गरीबों के लिए 3 करोड़़ आवास बनाने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद जहां जी 7 में भाग लेने के लिए इटली गये वहीं भारत में उन्होंने सर्वप्रथम अपने संसदीय क्षेत्र काशी की यात्रा की और किसानों को सम्मान निधि जारी करते हुए मतदाताओं को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने काशी में बन रहे स्टेडियम की प्रगति का अवलोकन भी किया। काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से साथ तथा तनाव मुक्त दिखे  और साथ ही अपनी अगली अग्निपरीक्षा के लिए तैयार भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  संसदीय क्षेत्र वाराणसी से किसान सम्मान निधि के तहत 20 हजार करोड़ रुपये किसानों के खाते में डाले। अभी जब विपक्ष यही दिखाने में जुटा हुआ है कि इस बार बीजेपी का अपने दम पर बहुमत नहीं है तब बीजेपी मतदाता अभिनंदन यात्रा के माध्यम से यह बताने के लिए जुट रही है कि  ऐतिहासिक रूप से तीसरी बार सरकार बनाने का अवसर जनता ने भाजपा को ही दिया है।  आंकड़ों के अनुसार विगत चुनावो में भाजपा के पास ग्रामीण इलाके की 201 सीट थीं जबकि पार्टी इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 126 सीट ही जीत पाई है।  माना जा रहा है कि  किसानों, युवाओं और  महिलाओं का एक बड़ा वर्ग इस बार किसी न किसी कारण से भाजपा से नाराज हो गया था और उसकी सीटें काफी कम हो गयी हैं।  यही कारण है  कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से किसान सम्मेलन के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के नाराज मतदाता को मनाने के साथ ही कई समीकरण साधने  व संदेश देने का प्रयास किया है।
 प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 18वीं लोकसभा के लिए हुआ ये चुनाव भारत के लोकतंत्र की विशालता को, लोकतंत्र के सामर्थ्य को, भारत के लोकतंत्र की व्यापकता को, भारत के लोकतंत्र की जड़ों  की गहराई को दुनिया के सामने पूरे सामर्थ्य के साथ प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने संबोधन में एक बार फिर कहा कि मां गंगा ने मुझे गोद लिया है मैं यही का हो गया हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने किसान, नौजवान, नारी शक्ति और गरीब को विकसित भारत का मजबूत स्तंभ माना है और सरकार बनते ही सबसे पहले और सबसे बड़ा किसान और गरीब परिवारो से जुड़ा फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि आज 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है।
कृषि सखी के रूप में  बहनों की नई भूमिका उन्हें सम्मान और आय के लिए नये साधन दोनो सुनिश्चित  करेगी। कृषि निर्यात मे हमें और आगे जाना है। किसान सम्मेलन को उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संबोधित किया और प्रदेश के किसानों को बड़ा संदेश देते हुए उनकी नाराजगी को कम करने का प्रयास किया है ताकि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा  उपचुनावों तक किसानों की नराजगी को कम करके लाभ लिया जा सके। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि व किसानों के लिए बहुत बड़ी बाते कही हैं उनका कहना है कि खेती हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान आत्मा।

किसान भगवान के रूप हैं।इसी को ध्यान में रखकर सरकार किसानों के हित के लिए बहुत काम कर रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों में हुए नुकसान को देखते हुए बीजेपी ग्रामीण क्षेत्रों में अपना विशेष अभियान चलाने जा रही है। आगामी दिनों में  हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। जिसमें हरियाणा की 90 में से 35 सीट का फैसला किसान करते हैं झारखंड की 81 मेंसे 31 सीटों पर भी किसान असरकारी है जबकि महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों मे से 134 सीटें ऐसी हैं जहां किसान चुनाव परिणामों पर सीधा असर डालते हैं। भारतीय जनता पार्टी मतदाताओं को आभार जताने के लिए मतदाता अभिनंदन यात्रा भी निकालेगी। स्पष्ट है भाजपा एक गतिमान पार्टी है और वह अपने कार्यकर्ताओं को भी गतिमान बनाए रखना जानती है।

आदिवासियों के संघर्षों, सामाजिक-धार्मिक रूढ़ियों की पड़ताल करती ‘बात बस्तर की’

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संजीव सिन्हा

“बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और भावात्मक एकता का संगम पेश करती है यह किताब”- डॉ. अंजली

नई दिल्ली। डॉ. अंजली की पुस्तक “बात बस्तर की” का लोकार्पण समारोह मंडी हाउस स्थित साहित्य अकादमी सभागार में हुआ।

यश पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित यह किताब बस्तर के आदिवासियों के जीवन पर आधारित है, जिसमें उनके जीवन की चुनौतियों, धार्मिक रूढ़ियों, परंपराओं तथा सामाजिक मान्यताओं का विश्लेषण किया गया है। इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कलाकेंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, दिल्ली के पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय तथा बस्तर विषय विशेषज्ञ राजीव रंजन प्रसाद उपस्थित थे। राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बस्तर को ले कर बनाये गये वामपंथी नैरेटिव को तोड़ने की आवश्यकता है। हमें ‘बात बस्तर की’ जैसी पुस्तकों की आवश्यकता है जो एजेंडा या नैरेटिव से रहित हैं और शोधपरक हैं।

 

इस अवसर पर पुस्तक की लेखिका डॉ. अंजली ने कहा, इस किताब में मैंने बस्तर के आदिवासियों के जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालने की कोशिश की है। साथ ही वहां की नक्सलवादी परिस्थितियों के बारे में भी बताने का प्रयास किया है कि किस तरह बस्तर में रहने वाले आदिवासी अपनी संस्कृति और जीवन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।” बस्तर के आदिवासियों के जीवन को करीब से जानने और समझने के इच्छुक पाठकों को निश्चित रूप से इस किताब से काफी सहायता मिलेगी। कार्यक्रम मैं विशेष उपस्थित छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज कुमार झा और वरिष्ठ पत्रकार रास बिहार मौजूद थे। कार्यकम का संचालन आशीष कुमार अंशु ने किया। इस अवसर पर यश पब्लिकेशंस के निदेशक जतिन भारद्वाज ने सभी गणमान्य अतिथियों सहित बड़ी संख्या में यहां मौजूद लोगों का तहेदिलसे शुक्रिया अदा किया।

रायपुर में हुई डीकार्बनाइजेशन इंडिया अलायंस की शुरुआत, वर्ष 2070 तक नेट-जीरो प्राप्ति का लक्ष्‍य निर्धारित

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रायपुर: डीकार्बनाइजेशन इंडिया अलायंस (डीआईए) एक कार्योन्‍मुख और महत्‍वाकांक्षी परियोजना है। इसका लक्ष्‍य भारत को कम कार्बन उत्‍सर्जन वाली अर्थव्‍यवस्‍था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाना है। डीआईए की शुरुआत 14 जून को छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में की गयी। आने वाले महीनों में डीआईए को भारत के 10 शहरों में स्‍थापित किया जाएगा। इसके माध्‍यम से वर्ष 2070 तक भारत को ‘नेट-जीरो’ अर्थव्‍यवस्‍था बनाने के लक्ष्‍य के प्रति समर्पित उद्योग जगत के अग्रणी लोगों को एकजुट करने पर ध्‍यान केन्द्रित किया जाएगा।

डीआईए दरअसल सोसाइटी ऑफ इंजीनियर्स एण्‍ड मैनेजर्स (एसईईएम) की एक पहल है। सोशल इम्‍पैक्‍ट एडवाइजर्स (असर) और इंडिया ब्‍लॉकचेन अलायंस (आईबीए) की मदद से उठाये गये इस कदम के माध्‍यम से निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों, एमएसएमई, सेवा प्रदाताओं, शैक्षणिक एवं वित्‍तीय संस्‍थानों, सिविल सोसाइटी संगठनों और सरकारी विभागों सहित विभिन्‍न हितधारकों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जाएगी ताकि भारत के डीकार्बनाइजेशन के प्रयासों को गति मिले। एक स्‍वैच्छिक नेटवर्क के नेतृत्‍व वाली यह पहल एक मंच की तरह काम करेगी। इससे उन इंजीनियरों को मदद मिलेगी जो उद्योगों में बदलाव को लागू करने के मोर्चे पर सबसे आगे खड़े होकर काम कर रहे हैं। साथ ही इससे उन लोगों को भी सहायता मिलेगी जो ऐसे उत्‍पाद और सेवाएं तैयार कर सकते हैं जिनसे डीकार्बनाईजेशन को बढ़ावा मिलता हो।

रायपुर में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में राज्‍य के वाणिज्‍य एवं उद्योग विभाग के सचिव आईएएस श्री अंकित आनंद, छत्‍तीसगढ़ राज्‍य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा) के मुख्‍य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) श्री राजेश सिंह राणा, ग्‍लोबल ग्रीन ग्रोथ इनीशियेटिव के क्षेत्रीय प्रमुख श्री सौम्‍य गरनाइक और क्रेडा के अधीक्षण अभियंता श्री राजीव ज्ञानी सहित अनेक गणमान्‍य अतिथियों ने भाग लिया।
डीआईए का संचालन शुरू होने के बाद ऊर्जा सम्‍बन्‍धी समाधानों को आकार देने और उन्‍हें लागू करने के काम से जुड़े हितधारकों के साथ तालमेल करके उन्‍हें अपेक्षित परिणाम प्राप्‍त करने में सक्षम बनाने के लिये काम किया जाएगा। डीआईए का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करना और अपने कार्बन उत्‍सर्जन में कटौती करने के लिये तत्‍पर प्रतिष्‍ठानों की जरूरतों को पूरा करने के लिये प्रयासों को व्‍यवस्थित करना है। इसके माध्‍यम से उन समाधानों को बल मिलेगा जो भारत को वर्ष 2070 तक अपने नेट-जीरो के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में मदद करेंगे।

रायपुर-धनबाद और रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारों को जोड़ने वाले राज्‍य छत्‍तीसगढ़ में औद्योगिकीकरण बहुत तेज गति से हो रहा है। राज्‍य में आकांक्षात्‍मक जिलों को जोड़ा जा रहा है जो पिछले कई दशकों से आर्थिक रूप से पिछड़े और कमजोर हैं। रायपुर में डीआईए की सफलतापूर्वक स्‍थापना से 80 हजार से ज्‍यादा कुटीर, लघु एवं मध्‍यम उद्योगों (एमएसएमई) को मदद मिलेगी। डीआईए के माध्‍यम से-

● एमएसएमई को अपने कार्बन उत्‍सर्जन में कमी लाने में मदद की जाएगी। उन्‍हें ऐसी सेवाओं को चुनने में सहायता की जाएगी जिनसे ऊर्जा ऑडिट, प्रणालियों और प्रक्रियाओं में सुधार के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा उपायों से मिलने वाले परिणामों को अधिकतम किया जा सकता है। इसके अलावा एमएसएमई को औद्योगिक उत्‍सर्जन की तीव्रता से जुड़े लक्ष्‍यों को लेकर सार्थक विचार-विमर्श से जोड़ा जाएगा।

● प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण : ऑडिटर्स, सम्‍बन्धित क्षेत्रों के विशेषज्ञों, उद्योगों, उद्यमियों तथा अन्‍य लोगों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किये जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें बढ़ावा देना तथा कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करना होगा।

● प्रमाणन एवं पुरस्‍कार : कम कार्बन उत्‍सर्जन वाले विकास के लिये ऊर्जा दक्षता और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से विनिर्माणकर्ताओं, वेंडर्स, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, अभियंताओं और ऊर्जा ऑडिटर्स के लिये डीआईए प्रमाणपत्र उपलब्‍ध कराये जाएंगे।

● डीआईए नयी प्रौद्योगिकी विकसित करने वालों और उसके उपयोगकर्ताओं के बीच एक सेतु और एक नेटवर्किंग प्‍लेटफार्म की तरह काम करेगा। यह प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और उद्योगों के बीच विचारों, नवाचारों और सबसे अच्‍छी पद्धतियों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करता है, जिससे डीकार्बनाइजेशन के लिए अत्याधुनिक समाधानों को अपनाना संभव होगा।

● अनुसंधान एवं पक्षसमर्थन (एडवोकेसी) : डीआईए का उद्देश्‍य ऊर्जा दक्षता की पैठ जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देकर, राज्‍य तथा राष्‍ट्रीय स्‍तरों पर योजनाओं को लागू करके, अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, स्‍वच्‍छ प्रौद्योगिकियों और रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकियों को अपनाकर और ग्रीनहाउस गैसों में कमी के अनुमान और लेखे-जोखे के माध्‍यम से नीति सम्‍बन्‍धी प्रभावी ढांचे तैयार करने और व्यापक प्रणालीगत बदलावों के लिए पक्षसमर्थन करने के उद्देश्‍य से नीति निर्धारकों को सार्थक सूचनाएं देने का है।


● सफल व्‍यक्तियों और संस्‍थाओं का विवरण तैयार करना (प्रोफाइलिंग) : नेटवर्क के अंदर सफलता की कहानियों के रणनीतिक संचार में मदद करना और इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा करना।

बायोफ्यूल्‍स अथॉरिटी ऑफ छत्‍तीसगढ़ के सीईओ सुमित सरकार ने डीआईए की वेबसाइट का लोकार्पण और 10 नगरों में डीकार्बनाइजेशन के अभियान की शुरूआत करने के बाद कहा, ‘‘छत्‍तीसगढ़ एक व्‍यापक औद्योगिक नीति बनाने का लक्ष्‍य लेकर चल रहा है। इस नीति में ग्रीन हाइड्रोजन और विभिन्‍न प्रकार के बायोफ्यूल्‍स के प्रयोग पर जोर दिया गया है ताकि डीकार्बनाइजेशन के प्रयासों को मजबूती दी जा सके। 10 शहरों में आयोजित होने वाले डीआईए कार्यक्रम की शुरुआत जलवायु परिवर्तन से निपटने के हमारे सामूहिक प्रयास में एक महत्वपूर्ण क्षण का प्रतिनिधित्व करता है।’’

एसईईएम के महासचिव जी. कृष्‍णकुमार ने डीआईए के महत्‍व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी और उत्साह छत्तीसगढ़ के उन उद्यमियों की पर्यावरण के प्रति चेतना का प्रमाण है, जो नेट-जीरो परिदृश्य को व्यापक रूप से अपना रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की मदद करने के डीआईए के विजन से नेट-जीरो की दिशा में राज्य की प्रगति में तेजी आएगी।’’

असर सोशल इम्‍पैक्‍ट एडवाइजर्स की सीईओ विनुता गोपाल ने कहा, ‘‘प्रदूषणकारी तत्‍वों के उत्‍सर्जन में कमी लाने और उसे टालने के लिये जरूरी कदम उठाना इस दशक में बेहद महत्‍वपूर्ण हो गया है। असल काम तब शुरू होता है जब ऊर्जा दक्षता, बिजली सम्‍बन्‍धी सुरक्षा और उद्योगों में साफ ऊर्जा में रूपांतरण के तंत्र को जमीन पर उतारने के लिये वास्‍तविक कदम उठाये जाते हैं। डीआईए एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्‍य इस रूपांतरण के उत्‍प्रेरक की भूमिका निभाना है। यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हम सिर्फ बातें करने के बजाय सार्थक काम भी करें। इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी हमें एहसास करा रही है कि हमारे के लिये एकजुट होकर जलवायु परिवर्तन के इस गम्‍भीर संकट से निपटना कितना जरूरी है।’’

रायपुर में समन्‍वय और नवाचार का मंच तैयार करने के बाद डीआईए को बेंगलूरू, कोच्चि, कोलकाता, चेन्‍नई, संगरूर, हैदराबाद, अहमदाबाद और इंदौर में भी शुरू किया जाएगा।

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