आम चुनाव 2024 और बस्तर (आलेख – 2)

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राजीव रंजन प्रसाद
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राजतन्त्र और लोकतंत्र के बीच की रस्साकशी थी। क्या वे लोग जिन्हे लोकतंत्र का ध्वज थामना था वे भी अंग्रेजों की भांति की व्यवहार कर रहे थे? निस्संदेह बस्तर के राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की लोकप्रियता थी लेकिन राजाओं का समय तो चुक गया था। उस समय देश भर के अनेक राजा महाराजा देश के पहले आम चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे थे, तो ऐसा क्यों था कि तत्कालीन मध्यप्रदेश के कॉंग्रेस की स्थानीय इकाई राजा से इस तरह व्यवहार कर रही थी मानो अब भी सिंहासन उनका ही है और सिक्का उनका ही चल रहा है? बदलती हुई व्यवस्था में अधिक संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है अन्यथा परिणाम बहुत घातक होते हैं। हम नेपाल का उदाहरण यहाँ ले सकते है; ऐसा क्यों है कि दशक भर ही बीता है लेकिन एक बड़ी जनसंख्या अब वहाँ राजतन्त्र की वापसी की मांग को ले कर सड़कों पर है? इसका सीधा सा कारण है वहाँ जिस तरह व्यवस्था परिवर्तन हुआ उसमें आंचलिकता को, सामाजिक परिवेश को और लोकमान्यताओं को ध्यान में रखा ही नहीं गया था, परिणाम सामने है। क्या बस्तर में भी इसी तरह से राजनैतिक-प्रशासनिक बदलाव हुआ था?

महाराजा प्रवीरचंद्र भँजदेव ने अपनी पुस्तक ‘लौहड़ीगुड़ातरंगिणी’ में विस्तार से उस समय की राजनैतिक स्थिति का वर्णन किया है जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं। यही नहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री से अपने मतभेद को स्पष्ट करते हुए वे लिखते है “मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल किसी कर्मचारी या कॉंग्रेस के आदमी की मुंह जबानी बात पर विश्वास करते थे”। वर्ष 1947 तक बस्तर एक रियासत थी, इसकी अपनी भौगोलिक, सांस्कृतक और समाजशास्त्रीय विशेषतायें थी, ऐसे में राज्य निर्माण की खींचातानी में एक ओर ओड़ीशा, दूसरी ओर आंध्र और तीसरी और मराठा भूभाग बस्तर के अलग अलग परिक्षेत्रों को अपना हिस्सा चाहते थे। विविध दावेदारियों के साथ बस्तर के विभाजन की चर्चा भी जोरों पर थी। यह संभव है कि संयुक्त प्रयासों से बस्तर का विभाजन ताल दिया गया जिसका श्रेय सुंदरलाल त्रिपाठी ने लिया जबकि महाराज इसे अपना प्रयास मानते थे। ऐसी खीचातानी बस्तर में राजनैतिक ताकत के दो केंद्र बनाती जा रही थी, जिसमें जोर आजमाईश का सही समय पहला राष्ट्रीय चुनाव था।

महाराजा प्रवीर अपनी पुस्तक ‘लौहड़ीगुड़ातरंगिणी’ में लिखते हैं “जगदलपुर की जनता मेरे पास आई, वे चाहते थे कि एक स्वतंत्र प्रतिनिधि मेरी ओर से खड़ा कर दिया जाये”। इसी पुस्तक में प्रवीर यह भी लिखते है कि वे राजनीति नहीं करना चाहते थे। उन्होंने स्थानीय कॉन्ग्रेसी नेताओं से क्षुब्ध हो कर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना आरंभ किया। अपने विरोध में लगातार चल रहे दुष्प्रचार से क्षुब्ध महाराजा प्रवीर अब राजनीति में अपने प्रभाव का आकलन कर लेना चाहते थे, यही कारण है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस के विरुद्ध वोट की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया। अब तलाश थी एक ऐसे उम्मीदवार की जिसे कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी सुरती क्रीस्टैय्या के विरुद्ध खड़ा किया जा सके। यहीं से बस्तर के पहले सांसद मुचाकी कोसा की कहानी आरंभ होती है। मुचाकी कोसा वर्तमान सुकमा जिले के ग्राम इड़जेपाल के रहने वाले थे। वे बस्तर राजपरिवार के दरबारियों में सम्मिलित थे।

बस्तर के बड़े बुजुर्ग और विद्वान एक रोचक वृतांत बताते हैं। महाराजा के निर्देश पर राजगुरु एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जिसे लोकसभा के चुनाव में उम्मेदवार बनाया जा सके। उन्होंने देखा कि आदिवासियों का एक झुंड दलपत सागर में स्नान करने के उद्देश्य से जा रहा है। भीड़ मे मुचाकी कोसा तगड़ा, कदकाठी में प्रभावशाली दिखाई दिया, बस यही चयन का आधार बना और उसे बुलवाया गया। मुचाकी कोसा न तो चुनाव क्या है, यह जानते थे, न ही वे चुनाव लड़ना चाहते थे। महाराजा के आगे उनकी एक न चली और वे अब देश के पहले लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस के प्रत्याशी सुरती क्रीस्टैय्या के विरुद्ध उम्मेदवार थे। महाराजा समर्थित प्रत्याशी ने ऐसा इतिहास रचा जिसे आज भी बस्तर में तोड़ा नहीं जा सका है। आम चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार मुचाकी कोसा को 83.05 प्रतिशत (कुल 1,77,588 मत) वोट प्राप्त हुए जबकि कॉंग्रेस के प्रत्याशी सुरती क्रिसटैय्या को मात्र 16.95 प्रतिशत (कुल 36,257 मत) वोटों से संतोष करना पड़ा था। क्या इस जीत ने भारतीय राजनीति को आईना दिखाया था? विचारणीय प्रश्न है।

हिंदुत्व के स्टार प्रचारक बने -योगी आदित्यनाथ

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लोकसभा चुनाव के दो चरण का मतदान पूरा हो चुका है और उनकी रिपोर्ट के आधार पर सभी राजनैतिक दलों ने अगले चरण के मतदान के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी है। वर्तमान राजनैतिक परिदृष्य में सभी दलों के स्टार प्रचारक अपनी विचारधारा के प्रचार में जुटे हैं। 2024 लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक स्टार प्रचारक भारतीय जनता पार्टी के पास हैं जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं, “अबकी बार 400 पार के नारे” के साथ संपूर्ण भारत में आक्रामक प्रचार में जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाद जो स्टार प्रचारक सबसे अधिक चर्चा में है वह हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं अपितु दूसरे राज्यों में भी उसी तरह प्रचार कर रहे हैं। अब तक 24 दिनों में वो सात राज्यो में 25 रैलियां व दो रोड शो कर चुके हैं । योगी जी की मांग सबसे अधिक उन सीटों व क्षेत्रों में है जहां राजपूत व क्षत्रिय मतदाता अधिक हैं तथा जहां ध्रुवीकरण की संभावना अधिक है वह उन स्थानों पर भी रैलियां कर रहे हे जो हिंसा से प्रभावित रहे हैं। दूसरे राज्यों में योगी जी की लोकप्रियता बुलडोजर बाबा के रूप में भी हो रही है।

योगी जी अब तक पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ जम्मू -कश्मीर और बिहार में रैलियां कर चुके हैं। बंगाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार रैलियां की हैं जो मुस्लिम बहुल और हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में हुई है। योगी जी ने आसनसोल ल में भी रैली की जहां भाजपा दो बार जीत चुकी है। बंगाल एक ऐसा राज्य है जहां के कटटरपंथी मौलाना मुख्मयंत्री योगी जी को देख लेने की धमकी तक दे चुके हैं किंतु वह बंगाल जाकर और अधिक आक्रामक होकर हिंदुत्व का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। वह अपनी जनसभा में बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा की याद दिलाते हुए कहते है कि “अगर कोई यूपी में रामनवमी के अवसर पर दंगा करता है तो उसे उल्टा लटकाकर ठीक कर दिया जाता है”। उन्होंने बंगाल में योगी जी ने साफ सन्देश दिया कि मोदी जी की तीसरी बार सरकार आने पर रामनवमी और वैषाखी के दंगाईयों और सन्देशखाली के जिम्मेदार गुंडो को सजा दिलाने का काम करेंगे।

छत्तीसगढ़ में योगी जी ने तीन रैलियां की हैं जिसमें दो सीटें कांग्रेस व एक भाजपा की रही है। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में योगी जी का 21 बुलडोजर से बेहद भव्य स्वागत किया गया था जो बहुत चर्चित रहा था। यहां पर उन्होंने लव जिहाद व नक्सलवाद के साथ कांग्रेस के आंतरिक समझौते का मुद्दा मुखरता के साथ उठाया।

मुख्यमंत्री योगी ने उत्तराखंड की 5 लोकसभा सीटों के लिए 4 रैलियां की और उसमें उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश हो या उत्तराखंड या देश को कोई भी कोना जो कानून नहीं मानेगा उसका राम नाम सत्य ही होगा। कुछ लोगों को लगता था कि अपराध करेंगे तो जेल चले जाएंगे लेकिन जेल जाने से पहले ही हम जहन्नुम में पहुंचा देते हैं। राजस्थान में भी उन्होंने चार रैलियां व 2 रोड शो किये जिनमें भारी भीड़ आयी । राजस्थान में उन्होंने देश की सुरक्षा का मुददा जोर शोर से उठाया और कहा कि कांग्रेस देश की सुरक्षा व आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है। योगी का कहना है कि आज देश में कहीं पर पटाखा भी फटता है तो सबसे पहले पाकिस्तान सफाई देता है कि हमारा उसमें कोई हाथ नहीं है क्योंकि उसे पता है कि उसका क्या परिणाम होगा क्योकि यह बदला हुआ भारत है। राजस्थान में योगी ने राजपूत ,जाट व मीणा समाज के बाहुल्य क्षेत्रों तथा जहां पर हिंदू -मुस्लिम ध्रुवीकरण भी आसानी से हो जाता है वहां पर रैलियां कर समां बांधा है। इसी प्रकार महाराष्ट्र में भी वह 6 रैलियां कर चुके हैं। अभी तक बिहार में केवल दो रैलियां ही हो पाई है किंतु वहां पर अभी उनकी और रैलियां प्रस्तावित हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 400 पार के नारे के साथ अबकी बार यूपी में 80 की 80 सीटों पर कमल खिलाने के संकल्पवान हैं और वह इसके लिए काफी कड़ी महनत भी कर रहे हैं अब उस मेहनत का उन्हें कितना प्रतिफल मिलता है यह तो 4 जून 2024 की मतगणना के दिन ही तय हो सकेगा। यूपी में भी योगी 75 से अधिक रैलियां व रोड षो कर चुके है।

उत्तर प्रदेश की रैलियों में योगी जी आक्रामकता के साथ सपा , बसपा व कांग्रेस पर हमलावर हो रहे है। वह कांग्रेस को उसके घोषणापत्र के छिपे हुए हिंदू विरोधी एजेंडे के आधार पर बेनकाब कर रहे हैं। योगी जी स्पष्ट रूप से हमला करते हुए कह रहे हैं कि अगर कांग्रेस व इंडी गठबंधन के लोग सत्ता में वापस आये तो यह लोग देश में शरिया लागू कर देंगे और हमारे गोवंश को कसाईयो के हाथों में दे देंगे। योगी जी अपनी हर जनसभा में जनता को याद दिला रहे हैं कि कांग्रेस के कारण ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण लटका रहा। कांग्रेस ने ही भगवान राम को कोर्ट में काल्पनिक बताया था। संपत्ति के विभाजन, मंगल सूत्र और विरासत टैक्स का मुद्दा भी वे अपनी रैलियों में उठा रहे हैं। योगी जी बेटियों की सुरक्षा व कानून व्यवस्था पर कोई समझौता नहीं करने वाले हैं और वह बार -बार कहते हैं कि अगर कोई बहिन- बेटियो की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेगा तो उसका राम नाम सत्य ही होगा। योगी जी कह रहे हैं कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का काम हो गया अब मथुरा की गलियां भी श्रीकृष्ण की बांसुरी सुनने के लिए बैचेन हो रही हैं । अब वह काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा। योगी जी का कहना है कि कांग्रेस पहले तो केवल दिशाहीन थी किंतु अब तो नेतृत्वविहीन भी हो चुकी है। योगी जी कहते हैं कि कांग्रेस को वोट देने से कोई बड़ा पाप नहीं हो सकता।

दूसरे राज्यों में जाने पर योगी जी का भव्य स्वागत किया जाता है । इसमें कोई दो राय नही कि उत्तर प्रदेश में अयोध्या में दिव्य, भव्य एवं नव्य राम मंदिर बन जाने के बाद उनकी लोकपियता में भारी वृद्धि हुई है तथा उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का व्यापक विस्तार व विकास हो रहा है। अभी लखनऊ में आयोजित आईपीएल टूर्नामेट के मुकाबले के लिए पधारे क्रिकेट खिलाड़ी पीटरसन से लखनऊ एयरपोर्ट की तारीफ करते हुए योगी जी की प्रशंसा की और उसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि उत्तर प्रदेश में अविश्वसनीय विकास व अच्छा काम हो रहा है। योगी जी के नेतृत्व में कानून का राज है, अपराधियों का मनोबल गिरा हुआ है और विकास के लिए निवेश का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

भगवा वस्त्र, वाणी में ओज, ह्रदय में सनातन, आचरण में संत योगी जी इस चुनाव में हिंदुत्व का प्रमुख स्वर हैं ।

अक्षय तृतीया से पूर्व बाल विवाह के खिलाफ राजस्थान हाई कोर्ट का अहम फैसला

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एमएस डेस्क

बाल विवाहों की रोकथाम में नाकामी पर पंच व सरपंच होंगे जवाबदेह
*सभी बाल विवाह निषेध अफसरों से उनके अधिकार क्षेत्र में हुए बाल विवाहों और इनकी रोकथाम के कदमों के बाबत मांगी रिपोर्ट
*मामले की की गंभीरता और तात्कालिकता का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की जनहित याचिका पर फौरी सुनवाई करते हुए जारी किया आदेश

जयपुर। प्रदेश में बाल विवाह की मौजूदा स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार से कहा है कि वह अक्षय तृतीया के मद्देनजर यह सुनिश्चित करे कि कहीं भी बाल विवाह नहीं होने पाए। साथ ही, आदेश में कहा गया है कि बाल विवाह को रोकने में विफलता पर पंचों-सरपंचों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। हाई कोर्ट का यह फौरी आदेश ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस’ की जनहित याचिका पर आया है। इन संगठनों ने अपनी याचिका में इस वर्ष 10 मई को अक्षय तृतीया के मौके पर बड़े पैमाने पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।

न्यायमूर्ति शुभा मेहता और पंकज भंडारी की खंडपीठ ने याचियों द्वारा बंद लिफाफे में सौंपी गई अक्षय तृतीया के मौके पर होने वाले 54 बाल विवाहों की सूची पर गौर करने के बाद राज्य सरकार को इन विवाहों पर रोक लगाने के लिए ‘बेहद कड़ी नजर’ रखने को कहा है। यद्यपि इस सूची में शामिल नामों में कुछ विवाह पहले ही संपन्न हो चुके हैं लेकिन 46 विवाह अभी होने बाकी हैं।

खंडपीठ ने कहा, “सभी बाल विवाह निषेध अफसरों से इस बात की रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए कि उनके अधिकार क्षेत्र में कितने बाल विवाह हुए और इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयास किए गए।” आदेश में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि सूची में शामिल जिन 46 बच्चों के विवाह होने हैं, वे नहीं होने पाएं।”

खंडपीठ ने यद्यपि इस बात का संज्ञान लिया कि राज्य सरकार के प्रयासों से बाल विवाहों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, फिर भी काफी कुछ किया जाना बाकी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 20-24 आयु वर्ग की 25.4 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 साल की होने से पहले ही हो गया था जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 23.3 प्रतिशत है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल विवाह वह घृणित अपराध है जो सर्वत्र व्याप्त है और जिसकी हमारे समाज में स्वीकार्यता है। बाल विवाह के मामलों की जानकारी देने के लिए पंचों व सरपंचों की जवाबदेही तय करने का राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है। पंच व सरपंच जब बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक होंगे तो इस अपराध के खिलाफ अभियान में उनकी भागीदारी और कार्रवाइयां बच्चों की सुरक्षा के लिए लोगों के नजरिए और बर्ताव में बदलाव का वाहक बनेंगी। बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पूरी दुनिया के लिए एक सबक हैं और राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।”

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस पांच गैरसरकारी संगठनों का एक गठबंधन है जिसके साथ 120 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठन सहयोगी के तौर पर जुड़े हुए हैं जो पूरे देश में बाल विवाह, बाल यौन शोषण और बाल दुर्व्यापार जैसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
हाई कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है जब अक्षय तृतीया के मौके पर बाल विवाह के मामलों में खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है और जिसे रोकने के लिए सरकार के साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे तमाम गैरसरकारी संगठन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

आर्थिक क्षेत्र में नित नए विश्व रिकार्ड बनाता भारत

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भोपाल। दिनांक 1 मई 2024 को अप्रेल 2024 माह में वस्तु एवं सेवा कर के संग्रहण से सम्बंधित जानकारी जारी की गई है। हम सभी के लिए यह हर्ष का विषय है कि माह अप्रेल 2024 के दौरान वस्तु एवं सेवा कर का संग्रहण पिछले सारे रिकार्ड तोड़ते हुए 2.10 लाख करोड़ रुपए के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो निश्चित ही, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शा रहा है। वित्तीय वर्ष 2022 में वस्तु एवं सेवा कर का औसत कुल मासिक संग्रहण 1.20 लाख करोड़ रुपए रहा था, जो वित्तीय वर्ष 2023 में बढ़कर 1.50 लाख करोड़ रुपए हो गया एवं वित्तीय वर्ष 2024 में 1.70 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया। अब तो अप्रेल 2024 में 2.10 लाख करोड़ रुपए के स्तर से भी आगे निकल गया है। इससे यह आभास हो रहा है कि देश के नागरिकों में आर्थिक नियमों के अनुपालन के प्रति रुचि बढ़ी है, देश में अर्थव्यवस्था का तेजी से औपचारीकरण हो रहा है एवं भारत में आर्थिक विकास की दर तेज गति से आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर अब यह कहा जा सकता है कि भारत आगे आने वाले 2/3 वर्षों में 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। भारत में वर्ष 2014 के पूर्व एक ऐसा समय था जब केंद्रीय नेतृत्व में नीतिगत फैसले लेने में भारी हिचकिचाहट रहती थी और भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की हिचकोले खाने वाली 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल थी। परंतु, केवल 10 वर्ष पश्चात केंद्र में मजबूत नेतृत्व एवं मजबूत लोकतंत्र के चलते आज वर्ष 2024 में भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है।

आज भारत आर्थिक क्षेत्र में वैश्विक मंच पर नित नए रिकार्ड बना रहा है। वैश्विक स्तर पर विदेशी प्रेषण के मामले में आज भारत प्रेषण प्राप्तकर्ता के रूप में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। भारत में आज सबसे बड़ा सिंक्रोनाईजड बिजली ग्रिड है। बैकिंग क्षेत्र में वास्तविक समय लेनदेन की सबसे बड़ी संख्या आज भारत में ही सम्पन्न हो रही है। भारत आज विश्व में दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश है एवं भारत आज पूरे विश्व में मोबाइल फोन का निर्माण करने वाला दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। भारत में आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेट्वर्क है। मात्रा की दृष्टि से भारत में आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा फार्मासीयूटिकल उद्योग है। भारत में आज पूरे विश्व में तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेट्वर्क है। भारत ने स्टार्टअप को विकसित करने के उद्देश्य से विश्व का तीसरा सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा कर लिया है। भारत का स्टॉक बाजार, पूंजीकरण के मामले में, विश्व में चौथे स्थान पर आ गया है। भारत में आज विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेट्वर्क है। विश्व में पैटेंट हेतु आवेदन किए जाने वाले देशों में भारत आज छठे स्थान पर आ गया है। आर्थिक क्षेत्र में भारत को यह सभी उपलब्धियां पिछले 10 वर्षों के दौरान प्राप्त हुई हैं।

पिछले केवल 10 वर्षों के दौरान शेयर बाजार में निवेशकों को अपार सफलता हासिल हुई है और सेन्सेक्स ने 200 प्रतिशत की रिकार्ड वृद्धि दर्ज की है, इसी प्रकार निफ्टी भी इसी अवधि में 206 प्रतिशत की रिकार्ड वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा है। यह स्थानीय एवं विदेशी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना विश्वास जता रहा है। भारत में शेयर बाजार में व्यवहार करने के उद्देश्य से खोले जाने वाले डीमेट खातों की संख्या वर्ष 2014 में 2.2 करोड़ थी जो वर्ष 2024 में बढ़कर 15.13 करोड़ हो गई है अर्थात इन 10 वर्षों में 7 गुणा से अधिक की वृद्धि दर अर्जित की गई है। देश का प्रत्येक उद्यमी/उपक्रमी/व्यवसायी बहुत उत्साह में है कि देश में व्यापार करने हेतु वातावरण में बहुत सुधार हुआ है एवं ईज आफ डूइंग बिजनेस में काफी सुधार हुआ है। आज भारत ही नहीं बल्कि भारतीय कम्पनियों द्वारा विदेश में भी पूंजी उगाहना बहुत आसान हो गया है। अतः एक प्रकार से उद्यमियों के लिए पूंजी की समस्या तो नहीं के बराबर रह गई है।

भारतीय नागरिकों में आज स्व का भाव जगाने में भी कामयाबी मिली है, जिसके चलते स्वदेश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग बढ़ रहा है एवं अन्य देशों से विभिन्न उत्पादों के आयात कम हो रहे हैं। इसके चलते भारत के विदेशी व्यापार घाटे में सुधार दृष्टिगोचर है। आज भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में मामूली वृद्धि दर्ज हो रही है तो कई उत्पादों के आयात में कमी दिखाई देने लगी है। इसे भारतीय नागरिकों के आत्म निर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा सकता है। फरवरी 2024 माह में भारत का व्यापारिक निर्यात 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 4140 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया, जो पिछले 20 महीनों में उच्चतम स्तर पर है। इसके अतिरिक्त, सेवा निर्यात 3210 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिकार्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। फरवरी 2024 माह में माल एवं सेवाओं को मिलाकर कुल निर्यात 7355 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा है, जो फरवर 2023 की तुलना में 14.2 प्रतिशत अधिक है। इसी कारण से, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी आज 64,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गया है।

आज भारतीय नागरिकों ने सनातन संस्कृति का अनुपालन करते हुए भारत को विकसित एवं मजबूत बनाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा लिए हैं। आज भारत में प्रत्येक नागरिक का औसत जीवन वर्ष 2022 के 62.7 वर्ष से बढ़कर 67.7 वर्ष हो गया है। यह भारत में लगातार हो रही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते ही सम्भव हो सका है। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रतिवेदन के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय में पिछले 12 महीनों के दौरान 6.3 प्रतिशत की वृद्ध दर्ज हुई है। इसी प्रकार, एक सर्वे के अनुसार, आज भारत में 36 प्रतिशत कम्पनियां आगामी 3 माह में नई भर्तियां करने पर गम्भीरता से विचार कर रही हैं, इससे भारत में रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित होते दिखाई दे रहे हैं।

गरीब वर्ग को भी केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाये जाने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। जल जीवन मिशन ने पूरे भारत में 75 प्रतिशत से अधिक घरों में नल के पानी का कनेक्शन प्रदान करके एक बढ़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया है। लगभग 4 वर्षों के भीतर मिशन ने 2019 में ग्रामीण नल कनेक्शन कवरेज को 3.23 करोड़ घरों से बढ़ाकर 14.50 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचा दिया गया है। इसी प्रकार, पीएम आवास योजना के अंतर्गत, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 4 करोड़ से अधिक पक्के मकान बनाए गए हैं एवं सौभाग्य योजना के अंतर्गत देश भर में 2.8 करोड़ घरों का विद्युतीकरण कर लिया गया है। विश्व भर के सबसे बड़े सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना – के अंतर्गत 55 करोड़ लाभार्थियों को माध्यमिक एवं तृतीयक देखभाल एवं अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार 5 लाख रुपए का बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है। साथ ही, पीएम गरीब कल्याण योजना के माध्यम से मुफ्त अनाज के मासिक वितरण से 80 करोड़ से अधिक परिवारों को लाभ प्राप्त हो रहा है। पीएम उज्जवल योजना के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किये गए हैं। इन महिलाओं के जीवन में इससे क्रांतिकारी परिवर्तन आया है क्योंकि ये महिलाएं इसके पूर्व लकड़ी जलाकर अपने घरों में भोजन सामग्री का निर्माण कर पाती थीं और अपनी आंखों को खराब होते हुए देखती थीं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत भी 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं की सुरक्षा एवं गरिमा को कायम रखा जा सका है। जन धन खाता योजना के अंतर्गत 52 करोड़ से अधिक खाते खोलकर नागरिकों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाया गया है। इससे गरीब वर्ग के नागरिकों के लिए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। पूरे भारत में 11,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो 50-90 प्रतिशत रियायती दरों पर आवश्यक दवाएं प्रदान कर रहे हैं।

अंत में यह कहा जा सकता है कि भारत आर्थिक क्षेत्र में आज पूरे विश्व में एक चमकते सितारे के रूप में दिखाई दे रहा है एवं अपनी विकास दर को 10 प्रतिशत के ऊपर ले जाने के भरसक प्रयास कर रहा है। इससे निश्चित ही भारत शीघ्र ही पहिले विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा एवं इसके बाद वर्ष 2027 तक भारत एक विकसित राष्ट्र भी बन जाएगा।

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