कौन है ये दिल्ली का नेता…

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एमएस डेस्क

बीजापुर (बस्तर/ छत्तीसगढ़) का एक पत्रकार नक्सलियों का मुखबीर हुआ करता था। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और कुछ दिनों तक अपने पास रख कर यूं ही बिना कोई मुकदमा बनाए छोड़ दिया।

इस तरह से छोड़ दिए जाने की वजह से उस कथित मुखबीर पत्रकार ने नक्सलियों का विश्वास खो दिया। बात यहां खत्म नहीं होती। नक्सलियों ने बाहर आने पर उस पत्रकार की हत्या कर दी। उन्होंने बयान जारी किया और हत्या की जिम्मेवारी ली। उस पत्रकार को अपने बयान में पुलिस का मुखबीर बताया। इस हत्याकांड को नक्सलियों ने दिन दहाड़े बासगुडा के बीच बाजार में अंजाम दिया।

दिल्ली में इससे मिलती जुलती एक कहानी इन दिनों चल रही है। एक राजनीतिक दल के सभी बड़े नेता जेल के अंदर हैं। किसी को उम्मीद नहीं थी और अचानक कुछ दिनों पहले उन नेताओं में से एक नेता को जेल से बाहर भेज दिया गया। अब वह नेता अपनी वफादारी साबित करने की भरसक कोशिश कर रहा है लेकिन पार्टी के अंदर और बाहर सभी उसे संदेह की नजर से देख रहे हैं।

निष्पक्षता का मतलब, कांग्रेस से प्यार और बीजेपी से नफरत

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एमएस डेस्क
नीचे जिनकी तस्वीर लगी है, मोदी सरकार में चाहे उन्हें अधिक भाव ना मिल रहा हो लेकिन कांग्रेस की सरकार में सभी बड़े शक्तिशाली थे। मतलब सरकार की गोद में बैठे हुए निष्पक्ष जन थे। उनकी सरकार सुनती थी और वहां उनकी चलती भी थी।
ऐसे निष्पक्ष जन जो कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते थे, इन जैसे निष्पक्ष देश भर में हजारों की संख्या में कांग्रेस के लिए काम करते थे। इन निष्पक्षो की खास पहचान थी कि ये सत्ता में बैठी कांग्रेस नेतृत्व से सिर्फ असहमत होते थे और विपक्ष की पार्टी बीजेपी – संघ से नफरत करते थे।
 इस सूची में आप मेधा पाटकर, अरुणा राय, शबनम हाशमी, हर्ष मंदर, मुकुल सिन्हा (जिनके जाने के बाद नफरत वाली गद्दी प्रतीक सिन्हा ने संभाली), संजीव भट्ट का नाम शामिल कर सकते हैं।
देश का यदि कोई इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़ा श्रेष्ठतम दो गोदी पत्रकार होगा तो उनका नाम राजदीप सरदेसाई और सागरिका घोष ही लिखा जाएगा। राजदीप के गोदी वाले किस्से नहीं जानते तो गूगल-रिसर्च कीजिए। कुछ ना मिले तो ‘Media Scan है ना’ …

क्या वाट्सएप यूनिवर्सिटी से अब झूठ फैलाएगा विदेश में बैठा ध्रुव राठी

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एमएस डेस्क

दिल्ली। ध्रुव राठी जैसे यू ट्यूबर वाट्सएप यूनिवर्सिटी के खिलाफ ज्ञान देते हुए प्रसिद्ध हुए थे। अब उसने अपनी एक वाट्सएप यूनिवर्सिटी खोल ली है। जहां फैक्ट चेक का कोई झंझट नहीं है। उसके झूठ के लिए दूसरे लोग माफी मांगेगे। वह भारत से बाहर है, वहां से कोई भी झूठ यहां फैला सकता है।

वीडियो के कन्टेंट और उसके व्यूअर्स के तुलनात्मक अध्ययन से इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि ध्रुव राठी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा, पुण्य प्रसून वाजपेई जैसे दर्जनों यू ट्यूबर के वीडियो को यू ट्यूब प्रमोट करता है। मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक के अनुसार मार्केट में कंटेंट नहीं, डिस्ट्रीब्यूशन किंग है। ध्रुव राठी जैसे यू ट्यूबर का वीडियो विदेश में बनता है और 24 घंटे में एक करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचता है। उन तक भी जिन्होंने कभी ना इस नाम को सर्च किया है और ना इस नाम को जानते हैं।

एक मित्र यू ट्यूब नोटिफिकेशन में कांग्रेस इको सिस्टम के प्रोपगेंडा वाले नामों को देख कर कभी लिंक पर चटका नहीं लगाते। वे सावधानी बरतते हैं लेकिन बार बार उनके नोटिफिकेशन में ध्रुव, रवीश, अजीत के वीडियो ठेल दिए जाते हैं। मित्र को हर्ष वर्धन त्रिपाठी, मनीष कुमार और मनीष ठाकुर के वीडियो देखने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।

वे यू ट्यूबर रचित कौशिक की भाषा के फैन हैं। जिन्हें पिछले दिनों पंजाब की पुलिस गिरफ्तार करके ले गई। उसकी गिरफ्तारी पर ना प्रेस क्लब कुछ बोला और ना ही दिल्ली पत्रकार संघ। उसकी गिरफ्तारी पर रवीश कुमार भी चुप थे और संदीप चौधरी भी। अपनी बात कहने के लिए रचित लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनका चैनल बार बार स्ट्राइक का शिकार हुआ है। रचित ने हौसला नहीं हारा और हर बार एक नए चैनल के साथ फिर उठ खड़े हुए। जबकि ध्रुव राठी के फेक वीडियो को शेयर करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को न्यायालय में माफी मांगनी पड़ी। उसके बाद भी आम आदमी पार्टी उसके वीडियो शेयर करती रहती है। उसके चैनल पर झूठ से कोई प्रभाव नहीं पड़ा।  ध्रुव राठी तो इंडिया से बाहर रहकर अपना प्रोपगेंडा भारत पर थोप रहा है। उसके वीडियो को यू—ट्यूब खूब प्रमोट करता है। मतलब एक घंटे में एक करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा देता है।

यू ट्यूब के इस मनमाने बर्ताव की जांच होनी चाहिए। उस Youtube Alogrthim की जांच होनी चाहिए, जिसके आधार पर विचारधारा विशेष के यू ट्यूबर्स को यू ट्यूब प्रमोट करता है।  यू ट्यूब के प्लेटफॉर्म पर जो वीडियो अपलोड हो रहे हैं, सभी का फैक्ट चेक करना तो बहुत मुश्किल है लेकिन जिनके वीडियो यू ट्यूब पांच लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा रहा है। उनका वाच टाइम भी अधिक है। ऐसे वीडियोज के फैक्ट चेक की जिम्मेवारी यू ट्यूब को लेनी चाहिए। वरना ध्रुव राठी जैसे लोग झूठ फैला कर निकल जाएंगे और अरविन्द केजरीवाल को वीडियो शेयर करने के लिए माफी मांगनी पड़ेगी। राठी जैसे विदेश में रहने वाले यू ट्यूबर तथ्यों से गलत तरीके से खेल सकते और जब तक उनके झूठ पर स्पष्टीकरण आएगा, देर हो चुकी होगी। यह सावधान होने का समय है क्योंकि यू ट्यूब का डिस्ट्रीब्यूशन ईमानदार नहीं है और उनकी सच्चाई को सामने लाने के लिए कोई भी स्वदेशी सोशल मीडिया विकल्प मौजूद नहीं है। यह चिंता की बात है, जिस पर विचार करने की जरूरत है।

यू ट्यूबर महिला के तीखे सवालों का कब जवाब देंगे अजीत अंजुम

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एमएस डेस्क

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर यू ट्यूब चैनल The Alternate Media की खूब चर्चा हुई। चर्चा के केन्द्र में इंडि गंठबंधन की तरफ रूझान रखने वाले वरिष्ठ यू ट्यूबर अजीत अंजुम थे। उनके ऊपर एक युवा पत्रकार श्रीकांत ने कुछ गंभीर आरोप लगाए। जिस पर विस्तार से एक वीडियो बनाकर ना सिर्फ अजीत ने सफाई दी बल्कि पत्रकार और साक्षात्कारकर्ता को कोर्ट की कार्रवाई की धमकी देकर माफी मांगने के लिए कहा। श्रीकांत को अपनी गलती का एहसास हुआ। बकौल श्रीकांत उन्हें अजीत अंजुम के एक करीबी ने ही सारी जानकारी दी थी। जो गलत साबित हुई। उन्हें लगता है कि अजीत के खिलाफ उनका इस्तेमाल हो गया।

एक सवाल जो सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर निकल कर जमीन पर इन दिनों तैर रहा है कि श्रीकांत तो इस्तेमाल हुए लेकिन इसका फायदा सबसे अधिक अजीत अंजुम को हुआ। श्रीकांत से हुई भूल ने अजीत अंजुम को चर्चा में आने का अवसर दे दिया। उन्होंने का मौके का फायदा उठाकर एक के बदले तीन वीडियो बनाए।

इस पूरे मामले पर The Alternate Media की प्रतिक्रिया यू ट्यूब पर आ गई है। चैनल के अनुसार— अजीत अंजुम को क्या देश की जुडिशियरी पर विश्वास नही है। पहला वीडियो उन्होंने बनाया। वह ठीक था। ऐसे गंभीर आरोप के बाद कोई भी ऐसा करेगा लेकिन न्यायालय की शरण में जाने के बाद तीन—तीन वीडियो एक ही मामले पर बनाने का क्या मतलब है? अजीत अंजुम को इस प्रश्न का जवाब देना चाहिए।

The Alternate Media ने अजीत की रिसर्च टीम पर भी सवाल उठाए हैं। अजीत अपने वीडियो में रिसर्च टीम का जिक्र करते हैं लेकिन चैनल के अनुसार, उनका काम ठीक नहीं है। दूसरे और तीसरे वीडियो में तथ्यों की गलतियां थी। चैनल के अनुसार अजीत अंजुम ने दावा किया कि उनके नोटिस के बाद वीडियो का थम नेल बदला गया। चैनल के अनुसार — वीडियो 12 अप्रैल को अपलोड हुआा। थमनेल 14 अप्रैल को बदला। लीगल नोटिस आया 17 अप्रैल को। थमनेल को बदलने और लीगल नोटिस मिलने के बीच 72 घंटे का अंतर था।

चैनल के अनुसार — लीगल नोटिस में चैनल का नाम तक गलत लिखा गया था। अजीत अंजुम ने यू ट्यूब चैनल के मॉडरेटर के इंटेंट पर सवाल उठाया। इसके जवाब में मॉडरेटर गायत्री देवी ने कहा— वे दस साल से विदेश में रहती हैं। वे कभी अजीत अंजुम से मिली नहीं। फिर इंटेंट की बात क्यों की गई, जो समझ आने वाली नहीं है।

अजीत अंजुम ने वीडियो में बताया की गायत्री पत्रकार हैं। गायत्री का कहना है कि वे पत्रकार नहीं हैं। अजीत अंजुम की रिसर्च टीम ने गायत्री के तीन नाम तलाशने का दावा किया। ऐसी रिसर्च टीम तो अजीतजी के भी तीन नाम तलाश कर ला सकती है। पहला अजीत कुमार, दूसरा अजीत अंजुम और पिता के सिंह सरनेम वाला तीसरा अजीत सिंह। अजीतजी घुम घुम कर देश भर में दूसरों की जाति पता लगा कर लाते हैं लेकिन अपनी जाति नहीं बताते।

The Alternate Media ने अजीत अंजुम से श्रीकांत के सवालों के जवाब पर भी एक प्रश्न किया है। चैनल के अनुसार, जवाब देने में वे सेलेक्टिव क्यों थे? वे जब जवाब दे रहे थे तो सभी सवालों के जवाब देते। वे जवाब के साथ कोई प्रमाण नहीं दे रहे थे। जिससे उनके यू ट्यूब चैनल की विश्वसनीयता दर्शकों के सामने बनी रहे। क्या इसका अर्थ उनका दर्शक यह लगा सकता है कि जिन प्रश्नों के जवाब अजीत अंजुम ने नहीं दिए, श्रीकांत के वे सारे सवाल वाजिब हैं।

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