अक्षय तृतीया : सरकारों ने बाल विवाह रोकने की ठानी

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जितेंद्र परमार

आठ राज्य सरकारों ने प्रशासनिक अमले को दिए इस अक्षय तृतीया हर हाल में बाल विवाह रोकने
के निर्देश

कई राज्य सरकारों ने लिया पंचायतों कोबाल विवाह मुक्तबनाने का संकल्प

कई राज्यों के विभागों ने अफसरों को धार्मिक गुरुओं, विवाह का कार्ड छापने वालों और रसोइयों को बाल विवाह के अपराध और इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने को कहा

देशभर के 161 गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन बाल विवाह मुक्त भारत ने दिया इन पहलों को पूर्ण समर्थन

जयपुर। देश की आठ राज्य सरकारों ने अधिसूचनाएं जारी कर सरकारी अमले को अक्षय तृतीया के दौरान बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए गांवों और प्रखंडों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। जनगणना के 2011 के आंकड़ों केअनुसार देश में रोजाना 4000 बच्चों को बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता हैं। लेकिन विवाह के लिए शुभ माने जाने वाले अक्षय तृतीया के दौरान बाल विवाहों की संख्या में खास तौर से भारी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। लेकिन इस वर्ष राज्यसरकारों के सख्त रुख को देखते हुए इसमें कमी की उम्मीद की जा सकती है। दस मई को पड़ने वाली अक्षय तृतीया से पूर्व राज्य सरकारों की इस अभूतपूर्व सामूहिक पहलों का स्वागत करते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान (सीएमएफआई) नेबाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए इन प्रयासों में हरसंभव सहयोग का हाथ बढ़ाया है। सीएमएफआई गहरे तक जड़े जमाए बैठे इस सामाजिक अपराध के खात्म के लिए बाल विवाह के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दर वाले देश के 257 जिलों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे 161 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है।

सरकार के इन प्रयासों में पूर्ण सहयोग की बात दोहराते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के संयोजक रवि कांत ने कहा, “बाल विवाह एक गहरे तक जड़ें जमाए बैठा अपराध है जिसकी दुर्भाग्य से सामाजिक स्वीकार्यता है। इसके पूरी तरह खात्मे केलिए सभी हितधारकों की भागीदारी के साथ एक बहुआयामी रणनीति और समन्वित कार्रवाइयों की आवश्यकता है। यह तथ्य कि बाल विवाह के खात्मे के लिए इतनी राज्य सरकारों ने अद्वितीय संकल्प का प्रदर्शन करते हुए कई पहलें की हैं, उम्मीदजगाने वाला है। इस अक्षय तृतीया अगर हम बच्चों को बाल विवाह के नर्क में झोंके जाने से बचा सके तो यह न सिर्फ हमारी साझा लड़ाई में एक बड़ी जीत होगी बल्कि एक नए मानदंड स्थापित करेगी। इस हौसले, परस्पर सहयोग और कार्रवाइयों सेभारत का 2030 तक बाल विवाह मुक्त होना निश्चित है।”

बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों ने अपने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों और ग्राम पंचायतों को निर्देश जारी कर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जरूरी एहतियातीकदम उठाने के निर्देश दिए हैं। महिला एवं बाल कल्याण विभाग, पंचायती राज, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय और विभिन्न राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोगों ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए अपने गांवों और पंचायतों में अनिवार्य रूप सेएक विवाह रजिस्टर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कई राज्यों ने अपने प्रशासनिक अमले को विवाह संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाने वाले पंडितों, मौलवियों सहित सभी धर्मों के पुरोहितों, शादी में खाना बनाने वालों, शादी के कार्ड छापने वालोंके बीच जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि वे बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसमें किसी भी तरह से भागीदार बनने के कानूनी परिणामों से अवगत हो सकें।

इन निर्देशों के अलावा हरियाणा के महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने बाल विवाहों की रोकथाम के उपायों के तौर पर सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पढ़ाई बीच में छोड़ देने वाले बच्चों और लंबे समय से स्कूल से नदारद बच्चों की विद्यालयवारसूची बनाने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने बाल विवाहों की रोकथाम में नाकामी पर गांव के मुखिया, पंचों और ग्रामस्तरीय बाल संरक्षण समितियों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पंड़ितों और मौलवियों कोविवाह संपन्न कराने से पहले जोड़े की उम्र को सत्यापित करने का भी निर्देश दिया है जबकि राजस्थान के पंचायती राज विभाग ने अक्षय तृतीया पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सभी जिलाधिकारियों को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।बताते चलें कि हाल ही में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में राजस्थान सरकार को कहा कि वह सुनिश्चित करे कि इस अक्षय तृतीया कोई बाल विवाह नहींहोने पाए। साथ ही, हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि बाल विवाह को रोक पाने में विफल रहने पर पंचों व सरपंचों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान देश के 161 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है जो 2030 तक इस बुराई के खात्मे के खात्मे के लिए बाल विवाह की ऊंची दर वाले 257 जिलों में राज्य सरकारों के करीबी समन्वय के साथ जमीनी स्तर पर काम कररहा है। यह गठबंधन बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु की किताब ‘व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज’ में बाल विवाह के खात्मे के लिए सुझाई गई रणनीतियों व रूपरेखा पर अमल करते हुए यह अभियान चला रहा है।भुवन ऋभु इस गठबंधन में शामिल गैरसरकारी संगठनों के सलाहकार हैं।

भारत में गरीबी उन्मूलन पर, गम्भीरता से ध्यान ही नहीं दिया गया

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पिछले 10 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारतीय बैंकों के माध्यम से इस दृष्टि से बहुत ठोस कार्य किया गया है। केवल 50 करोड़ से अधिक बचत खाते विभिन्न भारतीय बैंकों में खोले गए हैं बल्कि आज इनबचत खातों में 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि भी जमा हो गई है

भोपाल। भारत में हाल ही के वर्षों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों की संख्या में आई भारी कमी के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक एवं विकसित देशों के कई वित्तीय एवं आर्थिक संस्थानों ने भारत की आर्थिक नीतियोंकी मुक्त कंठ से सराहना की है। यह सब दरअसल भारत में तेज गति से हुए वित्तीय समावेशन के चलते सम्भव हुआ है। याद करें वर्ष 1947, जब देश ने राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी, उस समय देश की अधिकतम आबादी गरीबी रेखा के नीचेजीवन यापन करने को मजबूर थी। जबकि, भारत का इतिहास वैभवशाली रहा है एवं भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। परंतु, पहिले अरब से आक्रांताओं एवं बाद में अंग्रेजों ने भारत को जमकर लूटा तथा देश के नागरिकों को गरीबी की ओरधकेल दिया। भारत में राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत से ‘गरीबी हटाओ’ के नारे तो बहुत लगे परंतु, गरीबी नहीं हटी। ‘गरीबी हटाओ’ के नारे के साथ राजनैतिक दलों ने कई बार सता हासिल की किंतु देश से गरीबी हटाने के गम्भीर प्रयासशायद कभी नहीं हुए और गरीब वर्ग को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा।

भारत में प्रधानमंत्री जनधन योजना को वर्ष 2014 में लागू किया गया जिसके माध्यम से आम नागरिकों के बैंकों में बचत खाते खोले गए, आवश्यकता आधारित ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, धन के प्रेषण की सुविधा, बीमा तथा पेंशन सुविधाभी उपलब्ध कराई गई। इस योजना के अंतर्गत जमाराशि पर ब्याज मिलता है, हालांकि बचत खाते में कोई न्यूनतम राशि रखना आवश्यक नहीं है। एक लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा भी मिलता है। साथ ही, इस योजना के माध्यम से दो लाखरुपए का जीवन बीमा उस लाभार्थी को उसकी मृत्यु पर सामान्य शर्तों पर मिलता है।

भारत में प्रधानमंत्री जनधन योजना को सफलता पूर्वक लागू करने के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना (Direct Benefit Transfer Scheme) को भी लागू किया गया जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा गरीब वर्ग के हितार्थचलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली सहायता की राशि को सीधे ही हितग्राहियों के बचत खातों में जमा कर दिया जाता है। इससे विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को 100 प्रतिशत लाभ की राशि सीधे ही उनकेहाथों में पहुंच जाती है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के अंतर्गत, वर्ष 2013 के बाद से 31 मार्च 2022 तक, 24.8 लाख करोड़ रुपए की राशि सीधे ही लाभार्थियों के बचत खातों में जमा की जा चुकी है, इसमें अकेले वित्तीय वर्ष 2021-22 में ही 6.3 लाख करोड़ रुपए की राशि लाभार्थियों के बचत खातों में हस्तांतरित की गई थी। वर्ष 2014 के पूर्व तक जब इन लाभार्थियों के बचत खाते विभिन्न बैंकों में नहीं खुले थे तब तक कांग्रेस एवं अन्य सरकारों के शासनकाल के दौरान विभिन्न योजनाओं केअंतर्गत प्रदान की जाने वाली सहायता की राशि सामान्यतः नकद राशि के रूप में इन लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जाती थी।

आपको शायद ध्यान होगा कि एक बार देश के प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी ने कहा था कि केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली सहायता की राशि के एक रुपए में से केवल 16 पैसे ही लाभार्थियों तक पहुंचपाते हैं। शेष 84 पैसे इन योजनाओं को चलाने वाले तंत्र की जेब में पहुंच जाते है। अब आप स्वयं आंकलन करें कि यदि बैंक में 50 करोड़ लाभार्थियों के बचत खाते नहीं खुले होते और यदि उक्त वर्णित केवल 8 वर्षों के दौरान उपलब्ध कराई गई 25 लाख करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न लाभार्थियों को नकद राशि के रूप में उपलब्ध कराई जाती तो इन लाभार्थियों के पास केवल 4 लाख करोड़ रुपए की राशि ही पहुंच पाती एवं शेष 21 लाख करोड़ रुपए कीराशि इन योजनाओं को चलाने वाले तंत्र के पास ही रह जाती। अब आप आगे एक और कल्पना कर लीजिये कि पिछले 70 वर्षों के दौरान कितनी भारी भरकम राशि इन गरीब हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पाई होगी। इस राशि का आकार शायदआपकी कल्पना से भी परे है। सहायता की यह राशि यदि गरीबों तक पहुंच गई होती तो शायद हो सकता है कि देश से अभी तक गरीबी भी दूर हो चुकी होती। अब जब प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के अंतर्गत सहायता की राशि हितग्राहियों के खातों मेंसीधे ही पहुंच रही है तो देश से गरीबी भी तेजी से कम होती दिखाई दे रही है, जिसकी तारीफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुक्त कंठ से हो रही है।

पिछले 10 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारतीय बैंकों के माध्यम से इस दृष्टि से बहुत ठोस कार्य किया गया है। न केवल 50 करोड़ से अधिक बचत खाते विभिन्न भारतीय बैंकों में खोले गए हैं बल्कि आज इन बचत खातों में2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि भी जमा हो गई है और बचत की यह भारी भरकम राशि बैंकों द्वारा देश के आर्थिक विकास में उपयोग की जा रही है। इस प्रकार, भारत का गरीब वर्ग भी इन बैंक खातों के माध्यम से देश के आर्थिक विकास मेंप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान देता हुआ दिखाई दे रहा है। उक्त 50 करोड़ से अधिक बचत खातों में 50 प्रतिशत खाते महिलाओं द्वारा खोले गए हैं, अर्थात अब भारतीय महिलाएं, ग्रामीण महिलाओं सहित, भी आत्मनिर्भर बनती जा रही हैं।

भारी मात्रा में खोले गए इन बचत खातों के माध्यम से गरीब वर्ग के नागरिकों का बैकिंग सम्बंधी इतिहास भी धीरे धीरे विकसित हो रहा है, जिससे इस वर्ग के नागरिकों को बैंकों द्वारा ऋण प्रदान करने में आसानी होने लगी है। केंद्र सरकार द्वारा बैकों केमाध्यम से लागू की जा रही विभिन्न प्रकार की ऋण योजनाओं का लाभ भी अब गरीब वर्ग को मिलने लगा है। कोरोना महामारी के तुरंत बाद जब देश में स्थितियां सामान्य बनने की ओर अग्रसर हो रहीं थीं तब केंद्र सरकार ने खोमचा वाले, रेहड़ी वालेएवं ठेलों पर अपना सामान बेचकर छोटे छोटे व्यवसाईयों द्वारा अपना व्यापार पुनः प्रारम्भ करने के उद्देश्य से एक विशेष ऋण योजना प्रारम्भ की थी। इस योजना के अंतर्गत उक्त वर्णित छोटे छोटे व्यवसाईयों को बैंक द्वारा आसानी से ऋण प्रदान कियागया था क्योंकि इस वर्ग के नागरिकों के पूर्व में ही बैकों में बचत खाते खुले हुए थे। बैकों द्वारा यह ऋण बगैर किसी व्यक्तिगत गारंटी के प्रदान किया गया था। और, हजारों की संख्या में छोटे छोटे व्यवसाईयों ने निर्धारित समय सीमा में इस ऋण कोअदा कर, पुनः बढ़ी हुई राशि के ऋण बैकों से लिए थे और अपने व्यवसाय को तेजी से आगे बढ़ाया था। बैकों में खोले गए बचत खातों से गरीब वर्ग को इस प्रकार के लाभ भी हुए हैं।

भारत में प्रधानमंत्री जनधन योजना ने देश के हर गरीब नागरिक को वित्तीय मुख्य धारा से जोड़ा है। समाज के अंतिम छोर पर बैठे गरीबतम व्यक्तियों को भी इस योजना का लाभ मिला है। आजादी के लगभग 70 वर्षों के बाद भी भारत के 50 प्रतिशतनागरिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ अर्थात बैकों से नहीं जुड़े थे। प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत खाताधारकों को प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं का लाभ भी भारी मात्रा में नागरिकों ने उठाया है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से 15.99 करोड़ नागरिक जुड़ गए हैं, इनमें 49 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, इस योजना के अंतर्गत 2 लाख रुपए का जीवन बीमा केवल 436 रुपए के वार्षिक प्रीमीयम पर उपलब्ध कराया जाता है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से 33.78 करोड़ नागरिक जुड़गए हैं, इनमें 48 प्रतिशत महिला लाभार्थी हैं, इस योजना के अंतर्गत 2 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा केवल 20 रुपए के वार्षिक प्रीमीयम पर उपलब्ध कराया जाता है। अटल पेंशन योजना से 5.20 करोड़ नागरिक जुड़ गए हैं। मुद्रा योजना के अंतर्गत40.83 करोड़ नागरिकों को ऋण प्रदान किया गया है।

प्रधानमंत्री जनधन योजना अपने प्रारम्भिक समय से ही वित्तीय समावेशन के लिए एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत खोले गए बचत खातों में से लगभग 67 प्रतिशत बचत खाते ग्रामीण एवं अर्धशहरी केंद्रों पर खोले गए हैं, जिसे मजबूत होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। भारत में बैंकिंग व्यवस्था को आसान बनाने के उद्देश्य से डिजिटल इंडिया को आगे बढ़ाने का कार्य भी सफलतापूर्वक किया गया है। इस योजना के अंतर्गत खोले गए बचतखाताधारकों को रूपे डेबिट कार्ड प्रदान किया गया है। यह रूपे कार्ड उपयोगकर्ता द्वारा समस्त एटीएम, पोस टर्मिनल एवं ई-कामर्स वेबसाइट पर लेनदेन करने की दृष्टि से उपयोग किया जा सकता है। वर्ष 2016 में 15.78 करोड़ बचत खाताधारकों कोरूपे कार्ड प्रदान किया गया था एवं अप्रेल 2023 तक यह संख्या बचकर 33.5 करोड़ तक पहुंच गई है।

 

वैचारिक संघर्ष में कोई अकेला आखिर पड़ा क्यों

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इसमें वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव पर दूरदर्शन स्टूडियो में कांग्रेस के गुंडों द्वारा हुए हमले को भी शामिल कर लीजिए। कांग्रेस नेता उदित राज तो इसके गवाह हैं। ऑपइंडियाकी नुपूर शर्मा को बंगाल पुलिस द्वारा लगातार परेशान किया जाता रहा। गैर वामपंथी पत्रकार ना प्रताड़ना के इन मुद्दों पर कभी एक हो पाए और ना यह अपने देश में चर्चा औरविमर्श का विषय बन पाया। मानोंकहने की आजादी का अधिकारदेश में विचारधारा विशेष के लोगों के लिए ही सुरक्षित है…   

इन दिनों प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस के बड़े नेता पवन खेड़ा धमकाने की भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन यह बात किसी चैनल की पैनल चर्चा में नहीं सुनाई पड़ती। खेड़ा जांच अधिकारियों को धमका देते हैं किएक-एक की फाइल खुलवाएंगे, हद्द तो तब हो गई जब प्रेस कांफ्रेंस में वे मीडिया को धमका रहे थे कि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो उनकी मर्जी की खबर जिन्होंने नहीं चलवाई, उन पत्रकारों को मीडिया संस्थान सेआजाद करा देंगे। पवन खेड़ा की धमकियों का असर कुछ मीडिया संस्थान और एंकरों पर दिखाई भी देने लगा है। यह तय है कि कांग्रेस सरकार में नहीं आ रही लेकिन उसने धमकी और आक्रामक भाषा का इस्तेमालकरके एक भय का माहौल तो बना दिया है।

कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है लेकिन वह अजीत अंजुम, आरफा खानम, राजदीप सरदेसाई, रवीश कुमार पांडेय, पुण्य प्रसून वाजपेयी, दीपक शर्मा, अभिसार शर्मा, साक्षी जोशी जैसेसमर्थकों के साथ मजबूती से खड़ी है। विश्लेषकों में आशुतोष गुप्ता, अभय दुबे, विनोद शर्मा, राहुल देव, प्रभु चावला, पंकज शर्मा जैसे विश्लेषक किसी हद्द तक जाकर यूं ही कांग्रेस को डिफेंड नहीं कर रहे हैं। कांग्रेसनेता और पूर्व पत्रकार सुप्रिया श्रीनेत जो इन दिनों कांग्रेस पार्टी में हैं, वह कांग्रेस में शामिल होने से पहले किस तरह की पत्रकार थीं, इस पर किसी छात्र को अध्ययन करना चाहिए। सुप्रिया का परिवार पुराना कांग्रेसीहै। फिर उनकी कांग्रेसोन्मुख पकत्रारिता ‘चरण चुंबक’ सिर्फ इसलिए नहीं कही जाएगी क्योंकि परिवार पहले से ही पार्टी की चरणों में बिछा हुआ था? इसका जवाब क्या सुप्रिया देंगी? सवाल और भी हैं, जैसेराजदीप और तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य बनी सागरिका घोष की पत्रकारिता। प्रणॉय राय, बरखा दत्त और करण थापर की पत्रकारिता? क्या यही लोग थे भारत के प्रारंभिक गोदी मीडिया?

 वैसे सुप्रिया की तारीफ इस बात के लिए की जानी चाहिए कि उन्होंने अपने साथ कांग्रेस आईटी सेल में काम करने वाले युवाओं से दिल्ली पुलिस द्वारा की गई पूछताछ पर प्रेस कांफ्रेंस कर किया। आम तौर पर नएकार्यकर्ताओं की राजनीतिक पार्टियों में उपेक्षा ही होती है। इन्हीं बातों से कांग्रेस पोषित सोशल मीडिया को बल मिलता है। उनके यू ट्यूबर बड़े से बड़ा खतरा मोल लेते हैं क्योंकि उनका मुकदमा लड़ने के लिएकपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे काबिल वकील कांग्रेस ने अपने पास रखे हैं। दूसरी तरफ अजीत भारती हों, नुपूर जे शर्मा हों या फिर रचित कौशिक सभी को अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ती है।

बात यहां कांग्रेस पोषित यू ट्यूबर बनाम भाजपा आईटी सेल तक महदूद नहीं है। इस बात को समझना होगा कि 10 साल की सरकार के दौरान गोदी मीडिया टर्म चिपकाने वाले संगठित थे। जिन पर यह आरोपलगा, वे कभी संगठन की ताकत समझ ही नहीं पाए। उन्होंने चुप्पी ओढ़ ली। कभी पलट कर जवाब नहीं दिया। उनकी इसी चुप्पी को सहमति मान ली गई। एक दो बार जवाब आया भी तो इतनी आवाज उसकीदबी हुई थी कि किसी ने ठीक से सुनी तक नहीं।

जब चौदह पत्रकारों का बायकॉट हुआ, वे सभी पत्रकार अलग—थलग पड़ गए। उस समय भी उनके साथ खड़े होने की कोई कोशिश नहीं हुई, ना पत्रकार समाज की तरफ से और ना ही नागरिक समाज की तरफ से।

अजीत अंजुम को लेकर एक यू ट्यूबर ने यू ट्यूब पर अपनी बात कहते हुए, कुछ तथ्यात्मक गलती कर दी। रातों रात अजीत अंजुम के साथ, कितना बड़ा समूह आ गया। यह अजीत अंजुम या राजीव शुक्ला/ News 24 की नहीं, बल्कि कांग्रेस इको सिस्टम की ताकत थी।

वह हर बार गायब होता है, जब किसी अमन चोपड़ा पर एफआईआर हो जाए, कैपिटल टीवी के मनीष कुमार को जब गिरफ्तार करने की कोशिश हो, रचित कौशिक को पंजाब पुलिस जब पकड़ कर ले जाए, रोहितसरदाना की मृत्यु पर एशियन ह्यूमन राइट कमीशन का एजेंट, उनकी बिटिया पर अभद्र टिप्पणी कर दे और सोशल मीडिया पर कांग्रेस इको सिस्टम द्वारा जश्न मनाया जाए, सुधीर चौधरी जैसे सम्मानित पत्रकार कोकांग्रेस पोषित पत्रकार तिहाड़ी बोल दें, अर्णब गोस्वामी को उनके घर से किसी खतरनाक अपराधी की तरह घसीट कर ले जाया जाए, उन्हें गिरफ्तार करने के लिए एन्काउंटर स्पेशलिस्ट को घर भेजा जाए, इतना हीनहीं, रुबिका लियाकत के लिए भाषा की सारी मर्यादा लांघ ली जाए।

इसमें वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव पर दूरदर्शन स्टूडियो में कांग्रेस के गुंडों द्वारा हुए हमले को भी शामिल कर लीजिए। कांग्रेस नेता उदित राज तो इसके गवाह हैं। ऑपइंडिया की नुपूर शर्मा को बंगाल पुलिस द्वारालगातार परेशान किया जाता रहा। गैर वामपंथी पत्रकार ना प्रताड़ना के इन मुद्दों पर कभी एक हो पाए और ना यह अपने देश में चर्चा और विमर्श का विषय बन पाया। मानों ‘कहने की आजादी का अधिकार’ देश मेंविचारधारा विशेष के लोगों के लिए ही सुरक्षित है।

 दूसरी तरफ इस बात से भी इंकार कैसे कर सकते हैं कि इन सबके बीच सन्नाटा पीड़ित पक्ष के बीच होता है क्योंकि यहां एक दूसरे के साथ खड़े होने का साहस जुटाने को कोई तैयार नहीं है। वे अमीश देवगन हों, सुशांत सिन्हा हों या बृजेश सिंह। जिसे कांग्रेस पोषित पत्रकारों ने गोदी मीडिया नाम दिया है, वहां सभी अकेले हैं। वे संगठित हो नहीं पाए हैं। इनमे अधिक नाम उनके हैं, जो समाज से पूरी तरह कटे हुए हैं। सबसेलिब्रिटी हैं और सभी अलग-अलग खड़े हैं। उन मौकों पर भी साथ नहीं आते, जब इनके साथ वाले पर हमला होता है। कुछ तो यह मान कर चल रहे हैं कि ना जाने कब अपना स्टैंड बदलना पड़े। ऐसे में फालतू कास्यापा कौन पाले?

इतना कुछ सिर्फ इसलिए लिख दिया है ताकि सनद रहे। यह किसी के पक्ष या किसी के विरोध में मोर्चा खोलने के भाव से नहीं लिखा गया है। इसलिए जिस भाव से लिखा है, अपेक्षा है कि आप सब उसीभाव से पढ़ें। लिखते लिखते कुछ शेष रह गया हो तो उसे जरूर जोड़िए। हमें लिख भेजिए: mediainvite2017@gmail.com

रामद्रोह व रामभक्ति की विचारधाराओं का संग्राम है यह लोकसभा चुनाव

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तीसरे चरण का मतदान संपन्न होने के पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उनके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि पर निर्मित दिव्य नव्य रामलला मंदिर में पूजा अर्चना की। दोनों ने प्रभु श्रीराम को साष्टांग दंडवत करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। जहाँ राष्ट्रपति महोदया ने अपनी अनुभूतियाँ सोशल मीडिया पर साझा कीं वही  प्रधानमंत्री रामलला के दर्शन के उपरांत जनता का आशीर्वाद  लेने के लिए रोड शो पर निकल पड़े। स्वाभाविक रूप से विगत दशक में राम मंदिर आन्दोलन के राजनैतिक खेवनहार रहे नरेंद्र मोदी का रोड शो देखने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। राम मंदिर पर उमड़ने वाला यह जन समुद्र  कांग्रेस, सपा, बसपा और इंडी गठबंधन में शामिल अन्य दलों को रास नहीं आता है, यही कारण है कि वे प्रभु श्रीराम व उनके भव्य मंदिर से लेकर सनातन तक पर लगातार हमले करते रहते हैं।
सनातन के प्रति कांग्रेस व इंडी गठबंधन के खतरनाक इरादों का खुलासा भी कांग्रेस के ही नेता व प्रवक्ता कर रहे हैं। पूर्व कांग्रेस नेता कल्कि पीठाधीश्वरर आचार्य प्रमेद कृष्णम ने कहा कि, “कांग्रेस कभी भगवान राम को मानने वाली नहीं हो सकती। उसने तो भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था। श्रीराम मंदिर का फैसला आने के बाद एक गोपनीय बैठक में अमेरिका में रहने वाले अपने नजदीकी  से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि यदि उनकी सरकार आई तो वह सुपर पावर कमीशन बनाकर शाहबानो प्रकरण की तरह राम मंदिर का फैसला बदल देंगे। आचार्य प्रमोद का कहना है कि वह कांग्रेस में 32 साल रहे हैं,  भगवान श्रीराम को लेकर कांग्रेस में क्या चलता है़ वह जानते हैं। मंदिर का फैसला आने के बाद राहुल गाँधी ने  अपने नजदीकी लोगों की बैठक बुलाई थी इसमें राम मंदिर को लेकर अपनी योजना जाहिर की थी। आचार्य प्रमोद  लोकसभा चुनावों को साधारण चुनाव नहीं बताते अपितु वह इसे धर्मयुद्ध बता रहे हैं ।
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुईं छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने भी अपने साक्षात्कार में बताया कि कांग्रेस में प्रभु श्रीराम व सनतान के प्रति कितनी नफरत भरी हुई है। राधिका खेड़ा का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर जाने और इंटरनेट मीडिया पर मंदिर के फोटो साझा करने के बाद से ही उन्हें कांग्रेस से सिर्फ नफरत मिली। उन्होंने बताया कि पार्टी ने उन्हें चुनाव की अवधि में मंदिर जाने से रोका था लेकिन वह खुद को रामलला के दर्शन करने से नहीं रोक पाईं।उनका कहना था कि, “मैने सुना था कि कांग्रेस राम विरोधी, सनातन विरोधी और हिन्दू विरोधी है पर कभी माना नहीं था किंतु जब मैं अपनी मां व परिवार के साथ रामलला के दर्शन  करने गई तब कांग्रेस की असलियत का पता चल गया।जब मैंने अपने घर पर राम ध्वजा लगाई तब से कांग्रेस ने मुझे तिरस्कृत करना प्रारम्भ कर दिया।
कांग्रेस के नेतृत्व में बने इंडी गठबंधन में शामिल सभी दल राम विरोधी़, सनातन विरोधी  हैं यह प्रतिदिन साबित हो रहा है और इसी कारण बार- बार कहा जा रहा है कि रामभक्त सनातन समाज उठो- जागो और मतदान केंद्र तक पहुंचकर अपने मतों का सही प्रयोग करके ऐसी ताकतों को ध्वस्त कर दो, जो हिंदू सनातन समाज की परम्पराओं  को नष्ट करने की ताक में बैठे हैं। अभी विगत वर्ष विधानसभा चुनावों  के पहले द्रमुक नेता सनातन के उन्मूलन की बात कर रहे थे। बिहार में चारा चोर लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव का कहना है कि जब देश का प्रधानमंत्री हिंदू़ राष्ट्रपति हिंदू, सभी मुख्यमंत्री, राज्यपाल व सेना के तीनों प्रमुख हिंदू तो फिर सनातन को कैसा खतरा। यह वही तेजस्वी है जिनके पिता लालू यादव ने रामरथ यात्रा को रुकवाने के लिए भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
आज राम मंदिर भी बनकर खड़ा हो गया है और आडवाणी जी को भारत रत्न का सम्मान भी मिल चुका है। ये वही कांग्रेस है जिसके तत्कालीन राष्ट्रपति दिवंगत शंकर दयाल शर्मा ने 6 दिसंबर 1992 की शाम को राष्ट्रपति भवन में आंसू बहाये थे और उन्हीं आसुओं की धार में सनातन समाज से बदला लेने के लिए अपनी तथाकथित संवैधानिक तानाशाही  का अभूतपूर्व परिचय देते हुए उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार सहित चार प्रान्तों की भाजपा सरकारों  को को भंग कर दिया था । आज की कांग्रेस की नजर में उस समय संविधान सुरक्षित हो गया था। यह वही कांग्रेस है जो समय समय पर देश के सर्वोच्च न्यायालय में प्रभु श्री राम को काल्पनिक बता चुकी है।
तीसरे चरण के मतदान के मध्य ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी नेता रामगोपाल यादव ने बयान दे दिया कि अयोध्या का राम मंदिर तो बेकार है, मंदिर ऐसे बनाए जाते हैं क्या? मंदिर ऐसे नहीं बनते है। दक्षिण से उत्तर तक देख लीजिए नक्शा ठीक से नहीं बना है । समाजवादी पार्टी तो सदा से ही राम मंदिर विरोधी रही है । रामभक्त कारसेवकों का नरसंहार कराने के निकृष्टतम पाप से लेकर उसके बाद जितने  भी ऐतिहासिक अवसर आए हर  बार  समाजवादी नेताओं ने राम मंदिर के खिलाफ नफरत भरी आग उगली है। भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक हर समय सपा़, बसपा व कांग्रेस सहित इंडी गठबंधन में शामिल सभी दलों के नेता अपने बयानो से हिंदू सनातन समाज व प्रभु राम का अपमान ही करते रहे हैं।
रामगोपाल यादव के बयान से राम मंदिर को लेकर राजनीति एक बार फिर गर्म हो गयी है और भारतीय जनता पार्टी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे तत्वों पर करारा प्रहार  किया है। भाजपा का कहना है कि  समाजवादी काल में कब्रिस्तान बनवाना अच्छा था वो उत्तर प्रदेश जो मुख्तार अंसारी, अबू सलेम, अतीक अहमद और छोटा शकील के लिए जाना जाता था वह उनके लिए अच्छा था।  एक समय था जब फिल्में बनती थी यूपी में जिला गाजियाबाद, लखनऊ सेंट्रल, मिर्जापुर अर्थात पूरी अपराध केंद्रित तब ये सब अच्छा था। यहां पर भी ध्यान देने योग्य है कि एक समय था जब अवध की पहचान केवल और नवाबों की संस्कृति तक ही सीमित हो गयी थी। एक समय वह भी था जब गंगा- जमुनी तहजीब के नाम पर अवध का भव्य सनातन इतिहास और  हमारी संस्कृति को दबाया जा रहा था, कुचला जारहा था। समाजवाद व कांग्रेस की नजर में वह समय अच्छा था, जब गंगा-जमुनी तहजीब के नाम पर लव जिहाद और धर्मांतरण का गजब का खेल चरम सीमा पर चल रहा था।वही समाजवादी पार्टी राम मंदिर को बेकार का कह रही है जिसके स्वर्गीय नेता मुलायम सिंह यादव ने रामभक्तों का संहार किया था।
आप नेता अरविंद केजरीवल जो अब शराब घोटाले में जेल में बंद हैं और रिहाई की भीख मांग रहे हैं उनकी पार्टी के नेता मनीष सिसौदिया व संजय सिंह ने रामभक्त चंपत राय जी पर फर्जी जमीन घोटाले का आरोप लगा दिया था। अक्षत वितरण कार्यक्रम पर तंज कसते हुए इन लोगो ने कहा था कि भाजपा युवाओं को रोजगार देने की बजाय घर -घर अक्षत बांट रही है।
वास्तविकता ये है कि अब उत्तर  प्रदेश में अयोध्या, मथुरा और काशी सहित सभी हिंदू तीर्थस्थलों में भक्तों की भारी भीड़ आ रही है, जिसके कारण निवेश बढ़ रहा है और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं किंतु वह सब कुछ समाजवादियों को बेकार लग रहा है।आज भाजपा सपा से पूछ रही है कि वैज्ञानिक ढंग से इतना शानदार और भव्य सूर्य तिलक हुआ, राम मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर ही एक लाख करोड़ से अधिक का व्यापार हो गया, अयोध्या में एयरपोर्ट बना, रेलवे स्टेशन भव्य बन गया, वहां पर मेडिकल कालेज भी विस्तृत हो रहा है तो क्या यह सब कुछ बेकार है?
आम जनमानस को अच्छी तरह से याद है कि रामपुर में का यह लोग किस प्रकार अपने चहेते आजम खां जन्म दिन मनाने जाते थे, विदेश से केक मंगाया जाता था और सैफई में कैसे वालीबुड नायिकाओं का नृत्य आयोजन किया जाता था। समाजवाद की नजर में वह सब कुछ समाजवाद था और अच्छा था।
एक समय था जब समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने रामकथा का प्रचार- प्रसार प्रारम्भ किया था और आज के फर्जी समाजवादी राम मंदिर व उसकी प्राण प्रतिष्ठा ही नहीं अपितु तुलसीदास रचित रामचरित मानस व वाल्मीकि कृत रामायण को भी अपमानित करते हैं । सपा के पूर्व नेता स्वामी प्रसाद मौर्य तो रामचरित मानस जैसे पवित्र गंथ के खिलाफ हल्ला ही बोल दिए और उसकी आड़ में बेतहाशा नफरत भरी बयानबाजी कर रहे थे।
सपा, बसपा कांग्रेस के नेताओं  के पास भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने के लिए समय नहीं है किंतु माफिया मुख्तार व अतीक के यहां जाकर फातिहा पढ़ने का समय जरूर मिल जाता है। कांग्रेस व इंडी गठबंधन के खतरनाक इरादों को ध्यान में रखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जनसभाओं में जनता से कह रहे हैं कि हम सदन में 400 सीट इसलिए चाह रहे हैं कि ताकि कांग्रेस कश्मीर में धारा 370 को फिर से न लागू करने और और सुपर कमीशन बना कर राम मंदिर का निर्णय बदलने का सपना न देख पाए ।
विपक्ष के सनातन और प्रभु राम के प्रति  नफरत से भरी राजनीति के कारण ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राम मंदिर,  हिंदू व सनातन धर्म को को लेकर आक्रामक होना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि कांग्रेस ने लगातार रामभक्तों व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का अपमान किया है। उसका ये आचरण दिखाता है कि वह वास्तव में सनातन राष्ट्र का अपमान करती रही है। यह समय रामभक्तों के लिए अत्यंत सावधानी का समय है और उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचकर अपने  मत का सही प्रयोग अवश्य करना चाहिए ताकि राम मंदिर पर फिर साजिश का बाबरी ताला न लग सके।
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