RBI ने UPI पर एक नवाचारी भुगतान पद्धति “संवादात्मक भुगतान” शुरू करने का प्रस्ताव दिया

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भारतीय रिजर्व बैंक ने यूपीआई पर नवाचारी भुगतान पद्धति संवाद के माध्‍यम से भुगतान के शुभारंभ का प्रस्‍ताव किया है। यह पद्धति उपभोक्‍ताओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित प्रणाली पर बातचीत के जरिए लेनदेन को सुरक्षित तरीके से सम्‍पन्‍न करनी की सुविधा देगी।

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह चैनल स्‍मार्ट फोन और फीचर फोन आधारित यूपीआई चैनलों में उपलब्‍ध होगा। इससे देश में डिजिटल समझ को बढ़ाने में मदद मिलेगी। शुरूआत में यह सुविधा अंग्रेजी और हिंदी माध्‍यम में उपलब्‍ध कराई जाएगी। बाद में अन्‍य भारतीय भाषाओं में भी यह सुविधा दी जाएगी। केन्‍द्रीय बैंक ने यूपीआई लेन-देन में निकट क्षेत्र संचार प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल करने का भी प्रस्‍ताव किया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल भुगतान की पहुंच व इस्तेमाल को और बढ़ाने के लिए ‘यूपीआई लाइट’ पर ऑफलाइन माध्यम से एक बार में भुगतान की सीमा को 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये करने का प्रस्ताव किया है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की मंगलवार से शुरू हुई तीन दिन की बैठक में किए गए निर्णय की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यूपीआई पर छोटे मूल्य के लेनदेन की गति बढ़ाने के लिए सितंबर, 2022 में ‘यूपीआई लाइट’ को लाया गया था।

चम्‍पारण की सक्रियता

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पत्रकार अनुरंजन झा जी के संदेश पर एवं संस्कृति मंत्रालय अन्तर्गत गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक ज्वाला प्रसाद जी के सहयोग एवं आशीष कुमार अंशु जी जैसे ऊर्जावान युवाओं के सहयोग से दिल्ली में 30 जनवरी मार्ग स्थित परिसर भवन में चम्पारण (बिहार) के वे युवजन एकत्रित हुए जो दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। चम्पारण में एक अस्पताल (जो बनकर तैयार है) का संचालन प्रारम्भ करने की बात हुई। शिक्षा, पर्यावरण तथा अन्य क्षेत्रों में कार्यों को गति प्रदान करने के बारे में सहमति बनी। मैं भी इन गतिविधियों का साक्षी रहा। इस पोस्ट के साथ संलग्न चित्र उसी अवसर का है।

यद्यपि मैं चम्पारण का नहीं, जमुई का हूँ, फिर भी मूलतः एक बिहारवासी होने के नाते मेरे मन में भी चम्पारण के प्रति वही भाव है जो चम्पारण की मिट्टी से जुड़े लोगों का है।

चम्पारण से जुड़े लोगों की यह सक्रियता अत्यन्त हर्ष प्रदान करती है और आशाएँ जगाती है। साथ ही यह प्रश्न भी मन में पैदा करती है कि यदि चम्पारण के लोग इतने आगे हैं तो चम्पारण इतना पीछे क्यों है? इसी प्रश्न को मैं ऐसे कहना अधिक उपयुक्त समझता हूँ कि यदि बिहार के लोग इतने आगे हैं तो बिहार इतना पीछे क्यों है? वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन जी एवं रवीश कुमार जी भी चम्पारण के हैं।

मिथिलावासियों को भी मैंने हर जगह बहुत सक्रिय और एकत्रित देखा है, दिल्ली में भी और बंगलोर में भी। अच्छा हो कि मगध के लोग भी इसी प्रकार ही सक्रिय होने की प्रेरणा लें एवं अग्रसर हों।

दिल्ली, बंगलोर अथवा विदेशों में कार्यरत स्थूल शरीर सूक्ष्म शरीर के रूप में अपने जन्मस्थान की मिट्टी की सुगन्ध ढूँढ़ता हुआ विचरण करता रहता है, इस मर्म को कितने लोग महसूस करते हैं?

– राजकिशोर सिन्हा

इसी महीने 300 रुपये के पार पहुंच सकता है टमाटर

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व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों मे टमाटर की कीमतों में और उछाल आएगी। टमाटर का रेट 300 रुपये किलो तक पहुंच सकता है। इसके अलावा इस महीने भिंडी, करेला और शिमला मिर्च सहित अन्य हरी सब्जियों की कीमत में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

दिल्ली की आजादपुर मंडी के होलसेल व्यापारियों का कहना है कि बारिश की वजह से कई राज्यों में टमाटर की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है। इससे टमाटर के उत्पादन में गिरावट आई है। इसके चलते मंडियों में टमाटर की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। यही वजह है कि पिछले एक महीने से टमाटर की कीमत आम जनता को रूला रही है। लेकिन अगस्त महीने में लोगों को महंगाई की एक और मार झेलनी पड़ सकती है।

बता दें कि पिछले डेढ़ महीने से टमाटर की कीमतें सातवें आसमान पर हैं। 30 से 40 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर 200 रुपये किलो से भी ज्यादा महंगा बिक रहा है। एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर मंडी में अच्छी क्वालिटी के टमाटर का रेट अभी 170-220 रुपये किलो है।

हट सकता है चावल के एक्सपोर्ट से बैन

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हाल में केंद्र सरकार ने 20 जुलाई को भारत से गैर-बासमती चावल के निर्यात पर बैन लगा दिया था। सरकार का कहना था कि चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए ये कदम उठाया गया है। लेकिन क्या यही एकमात्र वजह है चावल एक्सपोर्ट पर बैन लगाने की, क्या सरकार इस बैन को वापस लेगी?

इस बारे में नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद ने कहा कि भारत इस साल भी 2 करोड़ टन से अधिक चावल का एक्सपोर्ट करेगा। इससे देश की फूड सिक्योरिटी पर भी असर नहीं होगा। हालांकि भारत कौ ‘गैर बासमती सफेद चावल’ के एक्सपोर्ट को रोकना पड़ा है. इसकी वजह वैश्विक बाजारों में चावल की मांग का बहुत अधिक हो जाना है। अगर सरकार इस चावल के एक्सपोर्ट पर बैन नहीं लगाती तो देश से 3 करोड़ टन से ज्यादा चावल का निर्यात होता।

उन्होंने कहा कि जब से रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ है, तब से खाने-पीने की चीजों के दाम बेहताशा बढ़े हैं। पिछले 6 से 7 महीनों में चावल और चीनी के दाम इंटरनेशनल मार्केट में बहुत बढ़े हैं और इनकी डिमांड भी हाई है । इससे घरेलू बाजार पर असर पड़ने की संभावना थी. वहीं सरकार का दूसरे देश की सरकार के साथ होने वाला गैर-बासमती चावल का निर्यात अब भी जारी है।

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि सरकार चावल के एक्सपोर्ट से बैन हटा सकती है। ये इंटरनेशनल मार्केट की डिमांड पर निर्भर करेगा।

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