वर्ष 2023 में आर्थिक क्षेत्र में भारत की कुछ विशेष उपलब्धियां रही हैं

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वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर लगभग 7 प्रतिशत के आसपास रहने की प्रबल सम्भावनाएं बन रही हैं। इस वर्ष की प्रथम तिमाही, अप्रेल-जून 2023, में आर्थिक विकास दर 7.8 प्रतिशत की रही है, वहीं द्वितीय तिमाही, जुलाई- सितम्बर 2023 में 7.6 प्रतिशत की रही है। इसी प्रकार, दीपावली त्यौहार पर लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के व्यापार के चलते एवं अक्टोबर 2023 माह में विनिर्माण के क्षेत्र में विकास दर के 12 प्रतिशत से ऊपर रहने से इस वर्ष की तृतीय तिमाही, अक्टोबर-दिसम्बर 2023, में भी आर्थिक विकास 7 प्रतिशत रह सकती है। इससे पूरे वित्तीय वर्ष 2023-24 में भी आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने की प्रबल सम्भावनाए बन रही हैं। जबकि, विश्व के कई अन्य विकसित देशों में मंदी की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार भारत वर्ष 2023 में भी लगातार विश्व की सबसे तेज गति से विकास करती अर्थव्यवस्था बना रहा।

भारत के आर्थिक विकास में लगातार गति आने से भारत में विदेशी निवेश की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 62,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गया है। 8 दिसम्बर 2023 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 60,700 करोड़ अमेरिकी डॉलर पर था, जो 15 दिसम्बर 2023 को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 61,600 करोड़ अमेरकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया एवं 22 दिसम्बर 2023 को समाप्त सप्ताह में 62,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गया है। इस प्रकार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। हालांकि, अक्टोबर 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने उच्चतम स्तर 64,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया था, अब शीघ्र ही इस उच्चत्तम स्तर को पार कर जाने की भरपूर सम्भावना व्यक्त की जा रही है। कोरोना महामारी के दौरान, भारतीय रुपए पर अत्यधिक दबाव आ गया था, अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपए को अवमूल्यन से बचाने एवं भारत रुपए के मूल्य को स्थिर बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने अमेरिकी डॉलर को भरपूर मात्रा में बाजार में बेचा था इससे भारत में विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया था। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश को जरूरत पड़ने पर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। विदेशी मुद्रा भंडार के बढ़ने से केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक को देश के आर्थिक विकास में गिरावट के चलते पैदा हुए किसी भी बाहरी एवं अंदरूनी वित्तीय अथवा आर्थिक संकट से निपटने में मदद मिलती हैं। यह आर्थिक मोर्चे पर संकट के समय देश को आरामदायक स्थिति उपलब्ध कराता है।

विश्व बैंक द्वारा जारी की गई एक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में अनिवासी भारतीयों ने रिकार्ड 12,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि का प्रेषण भारत में किया है। अनिवासी भारतीयों द्वारा भारत में भेजी गई यह राशि पूरे विश्व में किसी भी देश को भेजी गई राशि में सर्वाधिक है। यह आर्थिक क्षेत्र में भारत की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है। विदेशी निवेशकों के साथ ही अनिवासी भारतीयों का भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर एवं खाड़ी के देशों में अनिवासी भारतीयों की भारी संख्या निवास करती है और केवल इन 4 देशों से ही 54 प्रतिशत प्रेषण भारत को प्राप्त हुआ है। वर्ष 2022 में अनिवासी भारतीयों द्वारा 11,110 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भारत में प्रेषित की गई थी।

भारत आज विश्वभर के निवेशकों के लिए एक आकर्षक केंद्र के रूप विकसित हो गया है। विशेष रूप से केंद्र सरकार एवं कुछ राज्यों द्वारा की जा रही पहल विदेशी पूंजी को भारत में आकर्षित करती नजर आ रही है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए भारत आज इमर्जिंग अर्थव्यवस्थाओं के बीच स्वीट स्पॉट के रूप में दिखाई दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे 14 प्रमुख क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी उत्पादन प्रोत्साहन योजना ने विदेशी निवेशकों की भारत में रुचि बढ़ा दी है। साथ ही, पिछले कुछ वर्षों में श्रम, कराधान, और व्यापार परमिट जैसे क्षेत्रों में नियामक सुधारों से व्यापार करने में आसानी बढ़ी है। अच्छी तरह से विकसित बुनियादी ढांचा और कुशल श्रम की उपलब्धता देश को निवेश के अन्य देशों के विकल्प के मामले में एक तरह की बढ़त देते हैं, जो विदेशी निवेशकों के निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता करते नजर आ रहे हैं।

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए एक अनुपालन प्रतिवेदन में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 की द्वितीय तिमाही, जुलाई-सितंबर 2023, में भारत का चालू खाता घाटा 830 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि से कम होकर सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत रह गया है। यह वित्तीय वर्ष 2022-23 की द्वितीय तिमाही, जुलाई-सितम्बर 2022, में 3000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहते हुए सकल घरेलू उत्पाद का 3.8 प्रतिशत था। भारत के विदेशी व्यापार के मामले में यह एक अतुलनीय सुधार दृष्टिगोचर हुआ है। चालू खाता घाटा किसी भी देश के वस्तुओं और सेवाओं के आयात एवं निर्यात के मूल्य के साथ साथ वित्तीय हस्तांतरण के बीच के अंतर को मापता है। चालू खाता घाटे का कम होना किसी भी देश के लिए अच्छी स्थिति कही जाती है क्योंकि इससे मजबूत हो रहे निर्यात एवं कम हो रहे आयात की स्थिति का पता चलता है।

वर्ष 2023 में भारतीय बैंकों विशेष रूप से सरकारी क्षेत्र के बैंकों में गैर निष्पादनकारी आस्तियों का स्तर लगभग न्यूनतम स्तर पर आ गया है और पूंजी पर्याप्तता अनुपात लगभग उच्चत्तम स्तर पर आ गया है। कई बैंकों में तो यह स्तर अमेरिकी बैकों के पूजीं पर्याप्तता अनुपात से भी अधिक है। कुछ वर्ष पूर्व तक सरकारी क्षेत्र के बैंकों में पूंजी पर्याप्तता अनुपात को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार को इन बैंकों में पूंजी डालनी होती थी परंतु आज सरकारी क्षेत्र के बैंक केंद्र सरकार को भारी भरकम लाभांश की राशि का भुगतान कर रहे हैं। बैंकिंग के क्षेत्र में तो जैसे टर्न अराउंड ही दिखाई देता है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक अन्य प्रतिवेदन के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों की बजटीय स्थिति एवं इनके राजकोषीय स्वास्थ्य में लगातार मजबूती दिखाई दे रही है। विभिन्न राज्यों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 में किए गए सुधारों को जारी रखा है, जिसके चलते राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा नियंत्रण में रहते हुए कम हुआ है। केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्यों के राजकोषीय घाटे पर, कोविड महामारी के बाद अत्यधिक दबाव पैदा हो गया था परंतु इसके बाद से लगातार स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्य रूप से कर संग्रहण के अनुपालन में सुधार करते हुए कर संग्रहण में पर्याप्त वृद्धि हुई है एवं कुछ राज्यों द्वारा खर्चों पर नियंत्रण भी किया जा सका है, हालांकि पूंजीगत व्ययों को प्रभावित नहीं होने दिया गया है, जिसके कारण राजकोषीय घाटे की स्थिति में सुधार दिखाई देने लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने उक्त प्रतिवेदन में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए विभिन्न राज्यों के बजट, राजकोषीय संकेतक एवं व्यय के पैटर्न का विश्लेषण किया है। मुख्य बिंदु जिन पर सुधार बताया गया है उनमें शामिल हैं, वस्तु एवं सेवा कर के संग्रहण में लगातार हो रहा सुधार, राजस्व घाटे में आ रही कमी, पूंजीगत व्यय में लगातार हो रही वृद्धि और बकाया ऋण स्तर में कमी होना, बताया गया है। राज्य स्तर पर आगे आने वाले समय में मजबूत आर्थिक विकास और राजकोषीय सुधारों द्वारा राज्यों की समग्र बजटीय स्थिति सकारात्मक होने का अनुमान इस प्रतिवेदन में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगाया गया है। इस स्थिति को भारत के लिए राहत देने वाली माना जा सकता है। राज्यों का राजस्व घाटा कम होने के कारण राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य के मुकाबले सकल घरेलू उत्पाद का 2.8 प्रतिशत पर सीमित रहा है। पूंजी निवेश समर्थन के लिए केंद्रीय योजना के नेतृत्व में वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में पूंजीगत व्यय में 52.6 प्रतिशत की आकर्षक वृद्धि दर्ज हुई है। राजस्व व्यय वृद्धि में कमी आई है और व्यय की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात के रूप में बकाया देनदारियां वित्तीय वर्ष 2011 में 31 प्रतिशत से घटकर वित्तीय वर्ष 2024 में 27.6 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है।

डेविड वार्नर ने की अंतर्राष्ट्रीय एक दिवसीय क्रिकेट मैच से संन्यास लिया

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डेविड वार्नर ने अंतर्राष्ट्रीय एक दिवसीय क्रिकेट-ओडीआई मैच से संन्यास लेने की घोषणा की है। दो बार के एकदिवसीय क्रिकेट विश्‍व कप विजेता ने पहले सिडनी में होने वाले पाकिस्‍तान के विरुद्ध टेस्‍ट मैच के बाद टेस्‍ट करियर से संन्‍यास लेने की घोषणा की थी। हालांकि इस सलामी बल्लेबाज ने बताया कि वे 2025 की चैंपियंस ट्राफी के लिए उपलब्‍ध हैं।

डेविड वार्नर ओडीआई प्रारूप में ऑस्‍ट्रेलिया के छठवें सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। ऑस्‍ट्रेलिया की ओर से ओडीआई प्रारूप में सर्वाधिक शतक लगाने वाले पूर्व कप्‍तान रिकी पोंटिंग के बाद डेविड वार्नर दूसरे नम्‍बर पर हैं।

वार्नर के नाम पर वनडे विश्व कप के दो खिताब दर्ज हैं जिनमें विश्व कप 2023 में भारत के खिलाफ फाइनल की जीत भी शामिल है। इस टूर्नामेंट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सर्वाधिक रन बनाए थे। बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज वार्नर ने 2009 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होबार्ट में अपने वनडे करियर का आगाज किया था।

इसरो ने अंतरिक्ष में छोड़ा एक्सपोसैट

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन – इसरो ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान- पीएसएलवी-सी58 से एक्स-रे पोलरीमीटर सैटेलाइट-एक्सपोसैट को अंतरिक्ष में छोड़ा। यह प्रक्षेपण आज सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा से किया गया। इसके साथ दस अन्य वैज्ञानिक पेलोड का भी प्रक्षेपण किया गया।

यह मिशन खगोलीय स्रोतों से ब्रह्मांडीय एक्सरे के ध्रुवीकरण का अध्ययन करने संबंधी भारत के पहले समर्पित वैज्ञानिक प्रयास को दर्शाता है। इस प्रक्षेपण के बाद भारत ब्लैक होल और न्यूट्रॉन नक्षत्रों के अध्ययन के लिए विशिष्ट खगोल शास्त्रीय वेधशाला भेजने वाला दूसरा देश बन गया है। इसरो के अध्यक्ष एस0 सोमनाथ ने बताया कि एक्सपोसैट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक्सपोसैट के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो को बधाई दी है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. सिंह ने कहा, इसरो ने 2024 की शुरुआत अपने अंदाज़ में की है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में अंतरिक्ष विभाग से जुड़े होने पर उन्हें गर्व है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और संरक्षण से टीम इसरो एक के बाद एक सफलता हासिल कर रही है।

वर्ष 2023 में भारत में निवेशक हुए मालामाल

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भारतीय शेयर (पूंजी) बाजार द्वारा वर्ष 2023 में 20 प्रतिशत की रिकार्ड वृद्धि दर अर्जित की गई है। वर्ष 2023 में सेन्सेक्स 11,399 अंकों (18.73 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 72,082 अंकों के स्तर पर बंद हुआ है तो वहीं निफ्टी 3,626 अंको (20 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 21,731 अंकों के स्तर पर बंद हुआ है।

भारत के शेयर बाजार में उक्त वर्णित तेजी के चलते वर्ष 2023 में भारत के शेयर बाजार में निवेशकों के शेयरों में निवेश का बाजार मूल्य 81.90 लाख करोड़ रुपए से बढ़ गया है, जबकि वर्ष 2022 में यह 16.38 लाख करोड़ रुपए से बढ़ा था। यह भारत की लगातार उच्च स्तर की आर्थिक प्रगति एवं देश में राजनैतिक वातावरण के स्थिर बने रहने के कारण सम्भव हो सका है। हाल ही में तीन राज्यों में सम्पन्न हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के कारण भी शेयर बाजार में उच्छाल देखा गया था। वर्ष 2023 में बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज पर लिस्टेड कम्पनियों के शेयरों का बाजार पूंजीकरण 81.90 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि के साथ 364.28 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पर कर गया है। वर्ष 2023 में भारतीय शेयर बाजार में दर्ज की गई उक्त वृद्धि दर विश्व के समस्त इमर्जिंग बाजारों के बीच सबसे अधिक है। 29 नवम्बर 2023 को तो बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज पर पंजीकृत समस्त कम्पनियों का बाजार पूंजीकरण का स्तर 4 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया था जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार से भी अधिक है। भारत के संदर्भ में यह भी अपने आप में एक रिकार्ड है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार अभी 3.75 लाख करोड़ रुपए का ही है। 24 मार्च 2021 को बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज पर पंजीकृत समस्त कम्पनियों का बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचा था, इस प्रकार केवल 2 वर्ष 8 माह के खंडकाल में ही उक्त कम्पनियों द्वारा जारी शेयरों का बाजार पूंजीकरण एक लाख करोड़ रुपए की राशि से बढ़ गया है।

वर्ष 2023 में भारत के बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज के समाल केप (छोटे आकर की कम्पनियों द्वारा जारी शेयरों का बाजार पूंजीकरण) इंडेक्स में तो 47.52 प्रतिशत की बृद्धि दर आंकी गई है। वहीं, मिड केप (मध्यम आकार की कम्पनियों द्वारा जारी शेयरों का बाजार पूंजीकरण) इंडेक्स द्वारा 45.52 प्रतिशत की वृद्धि दर अर्जित कर की गई है।

30 शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज इंडेक्स ने केवल नवम्बर 2023 माह में ही 4.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और दिसम्बर 2023 माह तो 7.83 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है। इस प्रकार नवम्बर एवं दिसम्बर 2023 माह भारत में निवेशकों के लिए बहुत फलदायी सिद्ध हुए हैं। यह सब भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2023-24 की दो तिमाहीयों, अप्रेल-जून 2023 में 7.8 प्रतिशत की एवं जुलाई-सितम्बर 2023 में 7.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल करने एवं कम्पनियों की लाभप्रदता में हुई अतुलनीय वृद्धि दर के चलते सम्भव हो पाया है। साथ ही, भारत में वृहद्द (मैक्रो) स्तर पर अर्थव्यवस्था में मजबूत संकेत बने हुए है तथा अब मुद्रा स्फीति पर भी नियंत्रण प्राप्त कर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी कुछ नरमी आई है। इससे भारतीय रुपए के मूल्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमत में भी स्थिरता दिखाई दी है।

आज भारत के शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का बाजार पूंजीकरण 17.48 लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया है, जो भारत में प्रथम स्थान पर है। द्वितीय स्थान पर टाटा कन्सल्टैंसी सर्विसेज है, जिसका शेयर बाजार पूंजीकरण 13.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, तृतीय स्थान पर 12.98 लाख करोड़ रुपए के शेयर बाजार पूंजीकरण के साथ एचडीएफसी बैंक है। चतुर्थ स्थान पर 6.99 लाख करोड़ रुपए के शेयर बाजार पूंजीकरण के साथ आईसीआईसीआई बैंक है। इनफोसिस कम्पनी का पांचवा स्थान है, जिसका शेयर बाजार पूंजीकरण 6.40 लाख करोड़ रुपए का है।

विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों ने भी भारत के शेयर बाजार में वर्ष 2023 में 1.70 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का निवेश किया है। यह विदेशी निवेशकों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार बढ़ रहे विश्वास को दर्शा रहा है। केवल दिसम्बर 2023 माह में ही 66,134 करोड़ रुपए का निवेश विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों द्वारा भारत के शेयर बाजार में किया गया है।

वर्ष 2024 में अमेरिकी बाजार में अब ब्याज दरों में कमी की सम्भावना व्यक्त की जा रही है इसके चलते वर्ष 2024 में भी भारत के शेयर बाजार में अमेरिकी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों द्वारा और अधिक मात्रा में निवेश किया जा सकता है। वर्ष 2022 में विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.21 लाख करोड़ रुपए निकाले थे क्योंकि विकसित देशों ने मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में लाने के उद्देश्य से ब्याज दरों में बेतहाशा वृद्धि की थी। जबकि वर्ष 2021 में 25,752 करोड़ रुपए का, वर्ष 2020 में 1.7 लाख करोड़ रुपए का एवं वर्ष 2019 में 1.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों द्वारा किया गया था।

वर्ष 2024 में विभिन्न देशों में मुद्रा स्फीति के नियंत्रण में रहने की सम्भावनाओं के बीच केंद्रीय बैकों द्वारा ब्याज दरों में कमी किए जाने के संकेत मिलने लगे हैं, अमेरिका में तो बांड यील्ड 5 प्रतिशत से अधिक रहते हुए अब 4 प्रतिशत के भी नीचे आ गई है अतः विदेशी निवेशक अब भारत जैसी तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में अपना निवेश निश्चित रूप से बढ़ाएंगे। इस प्रकार, भारत के शेयर बाजार में तेजी की सम्भावनाएं वर्ष 2024 में लिए भी बनी हुई हैं।

भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की संख्या तो बढ़ी ही है साथ ही इन निवेशकों का शेयर बाजार पर विश्वास भी बढ़ा है और अब खुदरा निवेशक भी निवेश के सम्बंध में सही समय पर सही निर्णय लेकर अपने निवेश का बाजार मूल्य बढ़ाने में सफलता हासिल करने लगे हैं। भारत में 8 करोड़ से अधिक खुदरा निवेशकों के 13 करोड़ से अधिक डीमैट खाते खोले जा चुके हैं। डीमैट खाता उस खाते को कहते हैं जिसके माध्यम से शेयर बाजार में शायर खरीदे एवं बेचे जाते हैं।

वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी लगभग 10 प्रतिशत कम हुई हैं, इसका भी विशेष रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था पर अच्छा प्रभाव रहा है और अन्य देशों में भी इससे मुद्रा स्फीति की दर में कमी आ सकी है तथा कम्पनियों की लाभप्रदता में वृद्धि दर्ज हुई है। यह भी एक सुखद खबर है कि रूस यूक्रेन युद्ध, हम्मास इजराईल युद्ध एवं पश्चिमी एशियाई देशों के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव का असर भारतीय पूंजी बाजार पर नहीं के बराबर पड़ा है।

विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार में किए जा रहे भारी निवेश एवं भारत में लगातार बढ़ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार भी 62,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गए हैं। यह भारत के लिए बहुत सुखद स्थिति है।

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