भारत सरकार के गैर-बासमती चावल पर रोक लगाने के फैसले ने पूरी विश्व की चिंताए बड़ा दी हैं, क्योकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के चावलों की एक बड़ी हिस्सेदारी हैं। इसलिए भारत सरकार के इस फैसले से दुनिया भर में चावल की कीमत बहुत बढ़ गई हैं। इससे परेशान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत से गैर-बासमती चावल के प्रतिबंध पर दोबारा विचार करने के लिए कहा हैं।
हांलाकि इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया हैं, लेकिन सरकार से सरकार को बेचे जाने वाले गैर-बासमती चावल के लिए आग्रह पर विचार किया जा सकता हैं। भारत पश्चिमी अफ्रीका के देशों के लिए तो प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में चावल का निर्यात करता हैं। इन देशों को ध्यान में रखते हुए सरकार अपने फैसले पर विचार कर सकती हैं, क्योकि भारत वहां प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।
भारत की वैश्विक चावल निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी हैं। पूरे विश्व में भारत 140 से अधिक देशों के लिए गैर-बासमति चावल का निर्यात करता हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश भर के सभी किसानों के लिए बड़ी सौगात देते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 14वीं किस्त जारी की थी। श्री मोदी ने 27 जुलाई को पीएम किसान योजना के तहत 8.5 करोड़ किसानों के खातों में 17 हजार करोड़ रूपये ट्रांसफर किए थे। लेकिन अभी कुछ ऐसे किसान है जो जिनके खातों में अभी तक 14वीं किस्त की राशि नहीं आई हैं तो आपको कुछ जरूरी काम करने होंगे।
इन कारणों से अटक सकते हैं किस्त के पैसे
ऐसे किसानों ने जिन्होने अगर ई-केवाइसी नहीं कराया हैं तो भी उनके अटक सकते हैं पीएम किसान योजना की 14वीं किस्त के पैसे। इसके अलावा अगर आपने अभी भी अपने आधार कार्ड को बेंक खाते से लिंक नहीं कराया हैं तो तुरंत लिंक कराये नहीं तो इसके कारण भी किस्त खाते में नहीं आएगी। या फिर आपसे रजिस्ट्रेशन या फॉर्म भरते समय गलत जानकारी भरी हो गई हो तो एक बार चेक करें और तुरंत इन सभी कामो को पूरा कर लें ताकि समय पर आपके खातों में पैसे आ सकें।
इसके अलावा भी जो अपात्र किसान हैं फिर भी उन्होंने पीएम किसान योजना में आवेदन किया हैं ऐसे किसानों के खातों में पैसे नहीं आयेंगे और यह किसान शिकायत करने के पात्र नहीं हैं।
खाते में नही आये किस्त के पैसे तो क्या करें?
पीएम किसान योजना के लिए पात्र होने के बाद भी अगर रकम नहीं मिली हैं तो ऐसे किसान पीएम किसान योजना की हेल्प डेस्क पर जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस हेल्प डेस्क पर किसान सोमवार से शुक्रवार तक अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं या फिर मेल भेजकर भी शिकायत की जा सकती हैं। पीएम किसान योजना की ऑफिशियल ईमेल-आइ़डी pmkisan-ict@gov.in और pmkisan-funds@gov.in पर जाकर मेल करें या फिर टेलीफोन नंबर (012) 243-0606 और (155261) पर संपर्क करें। इसके अलावा पीएम किसान योजना के टोल फ्री नंबर 18001155266 पर भी संपर्क कर सकते हैं। शिकायत करने से पहले याद रखें वही किसान शिकायत कर सकते हैं, जो पीएम किसान योजना के पात्र हैं।
भारत में इलेक्ट्रानिक मीडिया के इतिहास परिचित पत्रकार इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि पत्रकारिता को गोदी मीडिया का टर्म देने वाला एनडीटीवी ही इस देश का पहला ‘गोदी मीडिया’ है। गोदी मीडिया शब्द का इस्तेमाल करते हुए इस चैनल के अभूतपूर्व पत्रकारों ने हर बार यह बात छुपाई है
पत्रकार स्मिता प्रकाश ने एक साक्षात्कार में कहा, यूपीए की सरकार में सबसे अधिक पहुंच वाला चैनल एनडीटीवी था। उसके एंकर रवीश कुमार गोदी मीडिया शब्द लेकर आए। एनडीटीवी को कभी किसी ने गोदी मीडिया नहीं कहा। जितनी सुविधाएं एनडीटीवी को सरकार से मिलती थी। उसकी उम्मीद राहुल कंवल, अर्णव गोस्वामी, अंजना ओम कश्यप इस सरकार से नहीं कर सकते।
एनडीटीवी की पहुंच भारत की सरकार और पाकिस्तान की सरकार के अंदर तक थी। पाकिस्तान में भारतीय प्रधानमंत्री के इवेन्ट को कवर करने के बाद भारत डाटा ट्रासफर के लिए सीमित साधन थे। चैनल वालों को बहुत कठीनाई होती थी। उस दौर में एनडीटीवी के लोगों को पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री के कार्यालय की सारी सुविधा मुहैया होती थी।
व्हाइट हाउस के इवेंट में एनडीटीवी के पत्रकारों को वरियता दी जाती थी। आज की सरकार से कोई भी पत्रकार यह उम्मीद नहीं कर सकता कि प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करके कहे कि अर्णव गोस्वामी या राहुल कंवल को कुछ विशेष सुविधाएं दो। यह सारी सुविधाएं एनडीटीवी को यूपीए सरकार से मिल रही थी और दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे लोगों को पता था। बावजूद इसके किसी ने एनडीटीवी को गोदी मीडिया नहीं कहा। जबकि उनकी पूरी पत्रकारिता ही यूपीए सरकार की गोदी में बैठकर चल रही थी।
नोट : यहां स्मिता प्रकाश के जवाब का शब्दानुवाद नहीं किया गया है। उनके साक्षात्कार का जितना हिस्सा याद रहा, उसका भावानुवाद है यह।
यू ट्यूब पर इस कार्यक्रम के वीडियो को देखकर ऐसा लगा कि चैनल संपादकों के अपमान का शोक नहीं बल्कि टीआरपी बढ़ने का उत्सव मना रहा था
यह देखना ही दुर्भाग्यपूर्ण था कि एक चैनल ने कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया कुमार के साक्षात्कार के लिए पांच संपादकों को बिठा दिया। चैनल को इस बात पर विचार करना चाहिए था कि क्या कन्हैया पांच संपादकों के साथ बैठने के काबिल है?
जब पांच संपादक कार्यक्रम का नाम रख रहे हैं तो उनके सामने आप सड़क चलते किसी को भी लाकर बिठा दें। यह ठीक नहीं है। संपादकों के साथ बैठेने वाला भी संपादकीय गरीमा का सम्मान करने वाला होना चाहिए। जाफराबाद से अपनी जीह्वा में ब्लेड बांधकर आया कोई मुर्गा लड़ाने वाला नहीं।
क्या चैनल को इस बात पर तनिक भी शर्मिन्दगी नहीं हुई कि आपका अतिथि कैमरे पर आपके संपादकों का अपमान करता रहा और आपका एंकर बेबस होकर खड़ा देखता रहा। यह जो तमाशा चैनल पर हुआ है, वास्तव में इससे चैनल ही तमाशा बना है।
पांच संपादकों के साथ जिस मेहमान को आप बिठाते हैं। उस मेहमान के चयन में चैनल को सावधानी नहीं बरतनी चाहिए या फिर चैनल पर सम्मानित अतिथि आने को ही तैयार नहीं हो रहे? जो कन्हैया जैसों से काम चलाना पड़ रहा है। चैनल के दर्शकों के बीच ऐसे ‘छीछोरे साक्षात्कार’ से यही संदेश जा रहा है कि चैनल को पांच संपादक तो मिल गए हैं लेकिन जिनका साक्षात्कार लेना है। उसके लिए कायदे के लोग नहीं मिल रहे।
कन्हैया कुमार जिस तरह का व्यवहार टीवी चैनल पर आकर कर रहा था, इस कार्यक्रम को बीच में ना रोक देने की कोई वजह समझ नहीं आई। सबसे दयनीय स्थिति में इस शो के एंकर नजर आ रहे थे। वे ना जाने किस मजबूरी में इस कार्यक्रम को पूरा करने का संकल्प निभा रहे थे। हो सकता है कि ‘शर्माजी’ का दबाव काम कर रहा हो। बात इतने पर खत्म हो जाती तो बात थी। अफसोस यह देखकर हुआ कि इस कार्यक्रम के छोटे—छोटे क्लिप बनाकर व्यूअर इकट्ठे करने वाला थमनेल डालकर, इसे यू ट्यूब पर ठेल दिया गया। ऐसी स्थिति में कन्हैया से अधिक हास्यास्पद स्थिति में वह चैनल और पांच संपादक दिखाई देते हैं क्योंकि कन्हैया तो सालों से अपनी ‘नंगई’ के लिए प्रसिद्ध है लेकिन चैनल पर आकर उसने अपने साथ—साथ सबको नंगा कर दिया।
इन दिनों लगता है कि खबरिया चैनलों को व्यूअरशिप के मामले में यूट्यूबर्स से टक्कर मिलने लगी है। इसलिए उनकी यह दशा हो रही है। दुख की बात इतनी है कि इस तरह की टक्कर में पत्रकारिता की फिक्र किसी को नहीं है।