सीमा सिद्दीकी को माइक्रोसॉफ्ट में मिली बड़ी जिम्मेदारी

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सीमा सिद्दीकी को अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ ने ‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’  का डायरेक्टर (कम्युनिकेशंस) नियुक्त किया है।

सिद्दीकी माइक्रोसॉफ्ट में आने से पहले ‘शिनाईजेर इलेक्ट्रिक’ में जीएम और हेड (PR, Corporate & Internal Communication) की जिम्मेदारी निभा रही थीं। यहां वह करीब साढ़े चार साल से कार्यरत थीं।  

पब्लिक रिलेशंस, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, इंटरनल कम्युनिकेशन, स्ट्रैटेजी मैनेजमेंट और ब्रैंड रेपुटेशन मैनेजमेंट में सीमा को विशेषज्ञता हासिल है। सीमा ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत पीआर एजेंसी Text 100 अब (Archetype) से की थी। अब तक वह PwC India, Dessault Systemes और Scheider Electric समेत तमाम प्रतिष्ठानों में प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। फिलहाल नई नियुक्ति के बारे में सीमा सिद्दीकी की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

अदालत ने जारी किया गंभीर आरोपों में घिरे न्यूज एंकर के खिलाफ गैरजमानती वारंट

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दिल्ली की एक अदालत ने युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित मुंबई के न्यूज एंकर वरुण हिरेमथ की गिरफ्तारी के लिए गैरजमानती वारंट जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने वरुण की गिरफ्तारी के लिए इनाम की घोषणा करने का भी फैसला किया है और इस संबंध में मंजूरी के लिए एक फाइल दिल्ली पुलिस मुख्यालय भेजी गई है।

पूर्व में वरुण की अग्रिम जमानत की अर्जी को दिल्ली की अदालत खारिज कर चुकी है और पुलिस उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर चुकी है। मालूम हो कि दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में दर्ज एफआईआर में एक युवती ने आरोप लगाया था कि अंग्रेजी न्यूज चैनल में कार्यरत वरुण हिरेमथ उसे दोस्ती के नाम पर दिल्ली के एक होटल में ले गया था और उसके साथ रेप किया।

करीब 22 वर्षीय इस युवती का अपनी शिकायत में कहना है कि वह पुणे में कॉलेज के दिनों से वरुण को करीब तीन सालों से जानती है। मामले के सामने आने के बाद से ही वरुण फरार हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि वरुण की तलाश के लिए टीमें मुंबई भेज दी गई हैं और विभिन्न स्थानों पर कई छापे मारे गए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे न्यूज चैनल्स को अब यूं होगा फायदा

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न्यूज वेब चैनल्स को सूची में सम्मिलित करने के लिए पंजाब सरकार ‘द पंजाब न्यूज वेब चैनल पॉलिसी 2021’ लेकर आयी है।

मीडिया खबर के मुताबिक, पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह समय की मांग है कि पंजाब सरकार की नीतियों के प्रचार के लिए आज के युग के इन मंचों का सही तरीके से प्रयोग किया जाए।

यह भी प्रवक्ता ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और यूट्यूब पर चल रहे न्यूज चैनल्स को इस नीति के अंतर्गत कवर किया जाएगा।

इन शर्तो पर मिलेंगे सरकारी विज्ञापन

नीति की अन्य शर्तों और नियमों के अलावा पंजाब आधारित न्यूज चैनल जिनमें मुख्य तौर पर 70 प्रतिशत खबरें पंजाब से संबंधित होती हैं, को सूची में सम्मिलित करने पर विचार किया जाएगा। इस नीति के अंतर्गत सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा सूचीबद्ध किए जाने वाले चैनल सिर्फ राजनैतिक इंटरव्यू या खबरों, डेली न्यूज बुलेटिन, बहस या चर्चा विशेषकर संपादकीय इंटरव्यू और पंजाब संबंधी खबरों के दौरान ही सरकारी विज्ञापन प्रदर्शित करेंगे।

मालूम हो कि पंजाब सरकार के पास अखबार, सैटेलाइट टीवी चैनल्स, रेडियो चैनल्स और वेबसाइट्स के लिए एक विज्ञापन नीति पहले से ही मौजूद है। यह नई नीति मौजूदा प्रचलन और फेसबुक और यूट्यूब चैनल्स की व्यापक उपलब्धता के मद्देनजर लाई गई है। इससे राज्य सरकार को और ज्यादा लोगों तक कल्याण योजनाओं संबंधी जागरूकता फैलाने में और मदद मिलेगी।

खबर के मुताबिक, नीति संबंधी विस्तृत नियम और शर्तें सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब से प्राप्त की जा सकतीं है या विभाग की वेबसाइट से भी डाउनलोड की जा सकतीं है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में पंजाब में यू-ट्यूब और वेब चैनल्स की भरमार है, जो इस वक्त पंजाब की रोजाना खबरों को कवर कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान पंजाब सरकार इन वेब चैनल्स के माध्यम से अपनी उपलब्धियों का प्रचार प्रसार कर सकती है।

संविधान को ढाल बनाती नक्सली अपील

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राजीव रंजन प्रसाद

नक्सल हमले के बाद बस्तर में गृहमंत्री का आवश्यक दौरा हुआ। कार्रवाई के जो निर्देश और घोषणायें हुईं उसके बाद एक नक्सल पर्चा बाहर आया है जिसमें नृशंस हत्याओं के घिसे पिटे जस्टीफिकेशन के अतिरिक्त एक वाक्य गौर करने योग्य है। नक्सल पर्चे में लिखा है – “अमित शाह देश का गृहमंत्री होने के बावजूद बीजापुर की तेर्रेम घटना पर बदला लेने की असंवैधानिक बात कहता है।  इसका हम खण्डन करते हैं। यह उनकी बौखलाहट है और यह उनकी फासीवादी प्रवृत्ति को ही जाहिर कर रहे हैं”। बाकी पर्चे में क्या है उसे परे कीजिये इन पंक्तियों में बहुत कुछ ऐसा है जिसपर बात आवश्यक है। नक्सलियों ने तीन शब्द प्रयोग में लाये हैं पहला देश, दूसरा संविधान और तीसरा फासीवाद। क्रूर और नृशंस हत्यारे    “फासीवाद” शब्द को एसे उछालते हैं मानो वे अहिंसा की प्रतिमूर्ति हैं। बस्तर अंचल में जवानों की हत्या का जो सिलसिला है वह तो जारी है लेकिन रोज रोज मुखबिरी के नाम पर की जाने वाली ग्रामीण आदिवासियों की हत्या को फासीवाद नहीं कहते तो क्या इसे माक्सवाद-लेनिनवाद जैसे अलंकार मिले हुए है? खैर वामपंथी शब्दावली पर चर्चा मेरा उद्देश्य नहीं वे सिगरेट के छल्लों की तरह गोल गोल शब्द गढते हैं जिनके अर्थ हवा में मिल कर बदबू-बीमारी ही फैलाते हैं सार्थकता तो उनमें क्या खाक होगी। 

अब नक्सल पर्चे के दूसरे शब्द देश पर आते हैं। किसका है यह देश? नृशंश लाल-हत्यारों और उनके शहरी समर्थकों का? यह देश पारिभाषित होता है अपने संविधान से और उसी अनुसार चलेगा….अरे हाँ मैं तो भूल ही गया कि लाल-आतंकवादियों ने गृहमंत्री को संविधान के अनुसार चलने के लिये कहा है। उस संविधान के अनुसार जिसे लालकिले पर लाल निशाल लगाने का चेखचिल्ली सपना देखने वाले हत्यारे मानते ही नहीं? संविधान में देश के विरुद्ध युद्ध करने वालों के लिये कुछ व्यवस्थायें हैं, संविधान में उन नागरिकों को भी सांस लेने का अधिकार है जो हसिया हथैडा वाली मध्यकालीन सोच से तंग आ चुके हैं, संविधान के पास अपनी न्यायव्यवस्था और अदालते हैं वे राक्षसी जन-अदालत तंत्र से संचालित नहीं हैं और संविधान हथियार ले कर हत्या करने वालों को क्रांतिकारी किस पृष्ठ संख्या में मानता है? राज्य और केंद्र सरकार को एक पृष्ठ पर आ कर इन वैचारिक रक्तबीजों का मुकाबला करना ही होगा यही देश के संविधान से आम आदमी की अपेक्षा है। नक्सल और उनके शहरी तंत्र की शब्दावलियों की बारीक जांच कीजिये, इस बार “संविधान” शब्द का प्रयोग इसे न मानने वाले नक्सलियों ने अपनी ढाल बनाने के लिये किया है। 

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