आज़ादी का गौरवपूर्ण अध्याय है 15 फरवरी 1932 का ‘ तारापुर शहीद दिवस ’

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जयराम विप्लव

(लेखक गुमनाम शहीदों के लिए अभियान चलाने वाली संस्था युवा ट्रस्ट के अध्यक्ष है )

भारतवर्ष के गौरवशाली अतीत का स्वर्णिम अध्याय लिखने वाले तारापुर के बलिदानी वीर हमारी स्मृतियों में जीवित है वो मर नहीं सकते | गीता में भगवन श्रीकृष्ण ने कहा है –“ न जायते म्रियते वा कदाचि –न्नायं भूत्वा भविता वा न भूय : | अजो नित्यः शाश्वात्यो अयं पुराणो – न हन्यते हन्यमाने शरीरे || “

तारापुर के बलिदानियों के राष्ट्र प्रेम के तत्व ने कालचक्र की सीमाओं के पार जाकर उन्हें अमर कर दिया. और आज जब भारत आज़ादी के 75 वें वर्ष का समारोह – अमृत महोत्सव मना रहा है। ऐसे में इतिहास में अछूते रह गए उन राष्ट्र नायकों की जीवनी, उनसे जुड़ी जगहों और घटनाओं को प्रकाश में लाने का बेहतरीन अवसर है, जिनकी वजह से हमें आजादी मिली ।

प्रसन्नता का विषय यह है कि ऐसे राष्ट्रनायकों और स्वातंत्रय वीरों को, घटनाओं को और इनसे जुड़े स्थलों को दुनिया के सामने लाकर उनका यथोचित सम्मान करने के विजन को  हमारे प्रधानमंत्री आ नरेंद्र मोदी जी ने सफलता पूर्वक क्रियान्वयित किया है. चाहे सरदार वल्लभ भाई पटेल स्मारक के रूप में स्टेचू ऑफ़ यूनिटी की स्थापना हो , नेताजी सुस्भाश चन्द्र बोस से जुडी फाइलों को सार्वजनिक करना और उनके जयंती को पराक्रम दिवस घोषित करना हो या अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के जन्मस्थान आजाद कुटिया पर जाकर उन को सम्मान देना हो या आज़ाद हिन्द फ़ौज के लालतीराम (98 वर्ष), परमानंद (99 वर्ष ), हीरा सिंह (97 वर्ष), और भागमल (95 वर्ष) सिपाहियों को 70वें गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनाने का काम हो, उन्होंने इतिहास को पुनर्जीवित किया है.

इसी कड़ी में बीते 31 जनवरी को मन की बात में आ. मोदी जी ने इतिहास के एक और अछूते अध्याय का जिक्र किया तो देश भर में तारापुर शहीद दिवस का इतिहास खोजा जाने लगा है . आइये जानते हैं ,

15 फ़रवरी 1932 का वो बलिदानी दिन तारापुर ही नहीं समूचे भारतवर्ष के लिए गौरव का दिन है जब क्रांतिकारियों के धावक दल ने थाना पर फहराते हुए जान की बाजी लगा दी थी | ब्रिटिश थाना पर राष्ट्रीय झंडा फहराने के क्रम में भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का दूसरा सबसे बड़ा बलिदान तारापुर ” की धरती ने अपने 34 सपूतों की शहादत दी थी |

आरम्भ से तारापुर में स्वाधीनता का संघर्ष

वीर बलिदानियों की धरती ‘तारापुर’ (मुंगेर,बिहार) में राष्ट्रवाद का अंकुर सन 1857 की ऐतिहासिक क्रांति के समय से ही फूटने लगा था और बंगाल से बिहार की विभाजन के बाद वह अपना आकार लेने लगा था |

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तारापुर का हिमालय ढोल पहाड़ी’ इन्डियन लिबरेशन आर्मी का शिविर था | जिसका संचालन क्रांतिकारी बिरेन्द्र सिंह करते थे ,इनके प्रमुख सहायक डॉ भुवनेश्वर सिंह थे | यहाँ के शिविर में दर्जनों ऐसे क्रान्तिकारी थे जो अपने क्रांतिकारी नेता के एक इशारे पर देश की आजादी के लिए जान हथेली पर लेकर घूमते थे |

तारापुर में सेनानियों का दूसरा बड़ा केन्द्र संग्रामपुर प्रखंड के सुपौर जमुआ ग्राम स्थित ‘श्रीभवन’ से संचालित होता था | जहां उस वक्त कांग्रेस से बड़े -बड़े नेता भी आया करते थे | इसी केन्द्र से तारापुर तरंग “ और “ विप्लव “ जैसी क्रांतिकारी पत्रिका छपती थी |

बिहार में देश के अन्य हिस्सों ही भांति गुलामी को तोड़ने के सतत प्रयास चल रहे थे | जब भी कोई चिंगारी देश के किसी कोने में लगती तो उसकी प्रतिध्वनि बिहार में जरुर सुनाई पड़ती |

बिहार में विप्लव की सुलगती आग

1930 में बिहार में अंग्रेज बिरोधी आन्दोलन में हजारों लोग शामिल हुए। उत्तर बिहार के बिहपुर सत्याग्रह आन्दोलन काफी महत्वपूर्ण रहा। बिहपुर कांग्रेस भवन को अंग्रेजों से मुक्त कराते समय डा. राजेन्द्र प्रसाद पर पुलिस लाठी चलाने लगी। इसे देख मधेपुरा जिलान्तर्गत करामा के सिंहेश्‍वर झा उनके बदन पर लेट गये और राजेन्द्र प्रसाद को अधिक मार खाने से बचाया। पुलिस सिंहेश्‍वर झा को पकड़ ली और साईकिल के पम्प से प्रताड़ित कर उन्हें बहरा बना दी। राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी आत्मकथा में इस प्रसंग का जिक्र किया है।

जब देश भर में 26 जनवरी 1931 को प्रथम स्वाधीनता दिवस को पूरे जोश से मनाने का निर्णय किया गया तब रघुनाथ ब्रह्मचारी के नेतृत्व में बेगूसराय जिले के पसराहा से एक जुलूस निकाला गया। डीएसपी वशीर अहमद ने गोली चलवा दी और 6सेनानी उस घटना स्थल पर ही शहीद हो गए |

आगे 23 मार्च 1931 को सरदार भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु की फांसी से  पूरे देश में युवाओं में उबाल था | ऐसे में बिहार के अंग क्षेत्र का  मुंगेर,भागलपुर,खगडिया,बेगुसराय सहित कोसी के इलाकों तक जनमानस इन छोटी-छोटी घटनाओं से सुलग ही रहा था |

गोलमेज की विफलता से शुरू हुआ दमन और सरदार शार्दुल का आवाहन

उधर 1931 में गाँधी–इरविन समझौता भंग हो चूका था. 27 दिसम्बर 1931 को  गोलमेज सम्मेलन लंदन से लौटते ही 1 जनवरी 1932 को  जब महात्मा गाँधी ने पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रारंभ कर दिया तो ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को अवैध संगठन घोषित कर सभी कांग्रेस कार्यालय पर भारत का झंडा (तत्कालीन कांग्रेस का झंडा) उतार कर ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक लहरा दिया | 4 जनवरी को गांधी जी गिरफ्तार हो गए थे। सरदार पटेल ,जवाहर लाल नेहरु और राजेंद्र बाबू जैसे दिग्गज नेताओं सहित हर प्रान्त के प्रमुख लोगोंको गिरफ्तार कर लिया गया | अंग्रेजी हुकुमत इस दमनात्मक कार्यवाई और भारत पर उनकी नाजायज हुकुमत के खिलाफ देशभर में एक आक्रोश पनपने लगा था | ऐसे वातावरण में अंग्रेजों के क्रिया की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी | लार्ड विलिंग्डन के उस ऐतिहासिक दमन से मुंगेर भी अछूता नहीं रह पाया था श्रीकृष्ण सिंह ,नेमधारी सिंह ,निरापद मुखर्जी , पंडित दशरथ झा ,बासुकीनाथ राय दीनानाथ सहाय ,जय मंगल शास्त्री आदि गिरफ्तार हो चुके थे.

ऐसे में युद्धक समिति के प्रधान सरदार शार्दुल सिंह कवीश्वर द्वारा जारी संकल्प पत्र कांग्रेसियों और क्रांतिकारियों में आजादी का उन्माद पैदा कर गया | और इसकी प्रतिध्वनि 15 फरवरी 1932 को तारापुर के जरिये लन्दन ने भी सुनी |

सरदार शार्दुल सिंह के द्वारा प्रेषित संकल्प पत्र में स्पष्ट आह्वान था कि सभी सरकारी भवनों पर तिरंगा झंडा राष्ट्रीय ध्वज लहराया जाए | उनका निर्देश था कि प्रत्येक थाना क्षेत्र में पांच ध्वजवाहकों का जत्था राष्ट्रीय झंडा लेकर अंग्रेज सरकार के भवनों पर धावा बोलेगा और शेष कार्यकर्त्ता 200 गज की दूरी पर खड़े होकर सत्याग्रहियों का मनोबल बढ़ाएंगे |

तारापुर में ‘ श्री भवन ‘ की बैठक में बना धावक दल

युद्धक समिति के प्रधान सरदार शार्दुल सिंह कवीश्वर के आदेश को कार्यान्वित करने के लिए वर्तमान में संग्रामपुर प्रखंड के सुपोर-जमुआ गाँव के ‘श्री भवन‘ में इलाके भर के क्रांतिकारियों, कांग्रेसियों और अन्य देशभक्तों ने हिस्सा लिया | बैठक में  मदन गोपाल सिंह (ग्राम – सुपोर-जमुआ), त्रिपुरारी कुमार सिंह (ग्राम-सुपोर-जमुआ), महावीर प्रसाद सिंह(ग्राम-महेशपुर), कार्तिक मंडल(ग्राम-चनकी)और परमानन्द झा (ग्राम-पसराहा) सहित दर्जनों सदस्यों का धावक दल चयनित किया गया |

15 फरवरी 1932 का वह बलिदानी दिन

15 फ़रवरी सन 1932 सोमवार को तारापुर थाना भवन पर राष्ट्रीय झंडा तिरंगा फहराने के कार्यक्रम की सूचना पुलिस को पूर्व में ही मिल गयी थी | इसी को लेकर ब्रिटिश कलेक्टर मिस्टर ई० ओ. ली डाकबंगले में  और एसपी डब्ल्यू.एस. मैग्रेथ सशस्त्र बल के साथ थाना परिसर में मौजूद थे |

दोपहर 2 बजे धावक दल ने ब्रिटिश थाना पर धावा बोला और अंग्रेजी सिपाहियों की लाठी और बेत खाते हुए अंततः ध्वज वाहक दल के मदन गोपाल सिंह ने तारापुर थाना पर तिरंगा फहरा दिया | उधर दूर खड़े होकर मनोबल बढ़ा रहे समर्थक धावक दल पर बरसती लाठियों से आक्रोशित हो उठे | गुस्से से उबलते नागरिकों और पुलिस बल के बीच संघर्ष और लाठीचार्ज हुआ जिसमें कलेक्टर ई० ओ० ली० घायल हो गये, पुलिस बल ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर कुल 75 चक्र गोलियाँ चलाई जिसमें कुल 34 क्रान्तिकारी शहीद हुए एवं सैंकडों क्रान्तिकारी घायल हुए | 

तिरंगे की आन पर जो हो गए बलिदान

तिरंगे की आन पर खुद को बलिदान कर देने वाले 34 वीर शहीदों में से मात्र 13 की ही पहचान हो पाई थी ,वो थे शहीद विश्वनाथ सिंह (छत्रहार), महिपाल सिंह (रामचुआ), शीतल (असरगंज), सुकुल सोनार (तारापुर), संता पासी (तारापुर), झोंटी झा (सतखरिया), सिंहेश्वर राजहंस (बिहमा), बदरी मंडल (धनपुरा), वसंत धानुक (लौढि़या), रामेश्वर मंडल (पड़भाड़ा), गैबी सिंह (महेशपुर), अशर्फी मंडल (कष्टीकरी) तथा चंडी महतो (चोरगांव)  । इसके अलावे 21 शव ऐसे मिले जिनकी पहचान नहीं हो पायी थी ।

उस दौर के प्रत्यक्षदर्शियों की कही बाते बताते हुए स्थानीय लोग इस गोलीकांड में 60 से ज्यादा सेनानानियों के मारे जाने की बात कहते हैं | उनके मुताबिक पुलिस द्वारा बहुत से शव तो गंगा में बहा दिए गए थे |

BBC न्यूज चैनल पर चीन ने लगाया बैन

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ब्रिटिश टेलीविजन न्यूज चैनल ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ को चीन ने अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया है। चीन का दावा है कि बीबीसी अनुचित और असत्य पत्रकारिता कर रहा है।

राष्ट्रीय रेडियो और टेलीविजन प्रशासन प्रतिबंध का ऐलान करते हुए चीन ने कहा कि बीबीसी ने कोरोना वायरस और शिनजियांग को लेकर गलत रिपोर्टिंग की है। चीन ने यह भी कहा कि बीबीसी ने समाचार के सत्य और निष्पक्ष होने की आवश्यक शर्त का भी उल्लंघन किया है।

मालूम हो कि बीते कुछ महीनों में चीन ने बीबीसी की कोरोना वायरस महामारी और शिनजियांग में वीगर मुसलमानों के शोषण पर रिपोर्टों की आलोचना की है।

चीन की एनआरटीए ने आरोप लगाया कि बीबीसी की रिपोर्टों से चीन के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा है और उसकी राष्ट्रीय एकता भी कमजोर हुई है। इसलिए, बीबीसी चीन में प्रसारण करने वाले विदेशी चैनलों के आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करता है। चीन ने बीबीसी पर अगले साल भी प्रसारण के लिए आवेदन करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

वहीं, बीबीसी वर्ल्ड न्यूज चैनल पर प्रतिबंध लगाने के चीन के फैसले को ब्रिटिश के विदेश मंत्री डॉमिनिक रैब ने अस्वीकार्य बताया और कहा कि इससे चीन के वैश्विक रुख को नुकसान पहुंचा है। रैब ने ट्विटर पर कहा कि चीन में बीबीसी वर्ल्ड न्यूज पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय चीन की मीडिया स्वतंत्रता की अस्वीकार्यता है। चीन में इंटरनेट और मीडिया पर सबसे सख्त पाबंदियां लागू हैं। बयान में कहा गया है कि चीन का ये फैसला दुनिया के सामने उसकी ही साख को कम करेगा।

प्रतिबंध लगाए जाने पर ब्रिटेन के बीबीसी प्रसारणकर्ता ने निराशा व्‍यक्‍त की है। बीबीसी के प्रवक्ता ने एक ईमेल में दिए बयान में कहा कि चीन अधिकारियों की इस कार्रवाई से हम निराश हैं। बीबीसी दुनिया का सबसे भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय समाचार प्रसारक है और दुनिया भर की स्‍टोरी को निष्पक्ष और बिना किसी डर या पक्ष के रिपोर्ट करता है।

चीन के इस फैसले को बदले की भावना के तहत देखा जा रहा है, क्योंकि 4 फरवरी को ही ब्रिटेन ने चीन के सरकारी मीडिया सीजीटीएन को अपने देश में प्रतिबंधित किया था। तभी से इस बात की चर्चा थी कि चीन भी इसके जबाव में बीबीसी को प्रतिबंधित करेगा। ब्रिटेन की जांच में पाया गया था कि सीजीटीएन के पास संपादकीय नियंत्रण का अभाव था। इसके अलावा इस चैनल का संबंध चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के साथ भी था, जिसके बाद ब्रिटिश संचार नियामक ऑफकाम ने चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) का ब्रिटेन में लाइसेंस रद्द कर दिया था।

राम मंदिर में अंशदान कर समाज का प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्रीय प्रवाह का अंग बनेगा – महामंडलेश्वर कृष्णशाह विद्यार्थी महाराज

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त्रिलोकपुरी के वाल्मीकि मंदिर में महामंडलेश्वर कृष्णशाह विद्यार्थी महाराज के सानिद्ध्य में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान के अंतर्गत भजन व निधि संग्रह का कार्यक्रम आयोजिक किया गया. विश्व हिन्दू परिषद् के अन्तराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार मुख्य वक्ता के रूप में इसमें सम्मिलित हुए.

कृष्ण शाह विद्यार्थी ने बताया की अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनाने के लिए समाज में ऐसे बहुत से सक्षम व्यक्ति हैं जिन्होंने अकेले ही सारा निर्माण खर्च उठाने की बात कही है लेकिन संघ, विश्व हिन्दू परिषद् का मानना है की जहाँ एक और बड़े-बड़े बंगले में रहने वाले व्यक्ति जहाँ आज इसमें योगदान दे रहे हैं वहीं समाज के अन्दर झुग्गी, अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाला व्यक्ति भी इसमें सहभागी बने. इसलिए निधि समर्पण के लिए 10 रूपए से रसीद की शुरुआत की है. समाज का प्रत्येक व्यक्ति श्रीराम मंदिर से इस तरह से जुड़ेगा और जब कभी अयोध्या में मंदिर बनने के पश्चात दर्शन करने जाएगा तो भावनात्मक रूप से इस राष्ट्र मंदिर से जुड़कर स्वतः राष्ट्रीय प्रवाह का अंग बनेगा. इसके लिए लगभग 13 करोड़ परिवारों से संपर्क किया जाएगा. 5.25 लाख गावों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास करेंगे. उन्होंने समस्त समाज से आह्वान किया कि दिल्ली में 1 जनवरी से आरम्भ और 27 फरवरी तक चलने वाले निधि समर्पण अभियान में अधिक से अधिक लोग जुड़ें. इस अभियान में अंशदान करने के बाद अपने जीवन में कम से कम एक बार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन करने अवश्य जाएं.

विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर हम सभी का संकल्प है. सामाजिक एकता व सद्भाव का एक स्वर्णिम अवसर हम सबके सामने है. श्रीराम जी की कथा से रामायण के माध्यम से जगत का परिचय करवाने वाले भगवान वाल्मीकि का स्थान भी रामजन्मभूमि मंदिर में बनेगा. भगवान वाल्मीकि के बिना श्रीराम का चरित्र अपूर्ण है. इस गणतंत्र दिवस पर सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार प्राप्त करने वाली श्रीराम मंदिर की झांकी में सबसे आगे भगवान वाल्मीकि जी प्रतिमा का होना इस तथ्य प्रकट करता है. यह झांकी राम मंदिर के पीछे बनने वाले संग्रहालय में भी रखी जाएगी. भगवान राम भगवान राम हैं यह हमें भगवान वाल्मीकि ने बताया. 

कार्यक्रम के पश्चात त्रिलोकपुरी में विहिप कार्यकर्ता स्वामी कृष्ण शाह विद्यार्थी व अलोक कुमार के साथ त्रिलोकपुरी व मयूर विहार में समाज के सभी लोगों के घरों में राम मंदिर निर्माण के जनजागरण व सामाजिक एकता आह्वान करते हुए निधि समर्पण की राशि एकत्र करने के लिए गए. मयूर विहार में रामभक्तों की 168 टोलियाँ प्रत्येक हिन्दू परिवार में निधि संग्रह के लिए जा रहे हैं. इस अवसर पर साह पंथ वाल्मीकि संप्रदाय के मुकेश शाह जी महाराज, गोपी साह महाराज, चिल्ला गाँव रोड मयूर विहार के महंत राममंगल दास महाराज की मंच में गरिमामयी उपस्थिति रही.

NBF ने सूचना प्रसारण मंत्रालय को TV रेटिंग्स को लेकर लिखा लेटर

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‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ से न्यूज चैनल्स की रेटिंग तुरंत प्रभाव से जारी करने की मांग ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ ने की है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार अरनब गोस्वामी के नेतृत्व वाले ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ ने इस बारे में सूचना प्रसारण मंत्रालय से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

‘एनबीएफ’ का सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे इस पत्र में कहना है कि वे BARC के किसी भी बदलाव के लिए तैयार हैं, लेकिन पूरी तरह से रेटिंग्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल्स की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।  

लेटर में कहा गया है, ‘हम BARC में स्टेकहोल्डर्स हैं। डाटा मीजरमेंट हमारी ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री की लाइफलाइन है। पूर्व में भी डाटा में हेरफेर की घटनाएं हुई हैं, लेकिन डाटा जारी करना बंद कर देना इसका समाधान नहीं है। इसमें सुधार तभी हो सकता है, जब डाटा का प्रवाह लगातार हो। यह सुधार की एक सतत प्रक्रिया है। हम विनम्रतापूर्वक आपसे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध कर रहे हैं।’

BARC से ‘एनबीएफ’ ने पहले भी इसी तरह की दलीलों के साथ संपर्क किया था, लेकिन अब तक कुछ भी हल नहीं हुआ है। पत्र में निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं:

1- BARC को न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स को पब्लिश करना चाहिए, ताकि विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत लोगों की आजीविका को बचाया जा सके।

2- यदि साप्ताहिक रेटिंग्स को पब्लिश करने में समस्या है तो रेटिंग्स को पब्लिश करने के लिए एक वैकल्पिक सिस्टम अपनाया जा सकता है, ताकि ताकि न्यूज जॉनर में एडवर्टाइजर्स का विश्वास बहाल हो सके।

3- हमने कोई गलत काम नहीं किया है। ऐसे में हमें अपना संचालन बंद करने के लिए मजबूर न किया जाए।

यह भी इस लेटर में कहा गया है कि इस कदम से तमाम न्यूज चैनल्स में कार्यरत लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि यहां कार्यरत एम्प्लॉयीज की आजीविका न्यूज चैनल्स द्वारा जुटाए गए रेवेन्यू पर निर्भर होती है और चैनल्स के रेवेन्यू का सीधा संबंध टीआरपी से है। इसलिए एनबीएफ BARC के स्टेकहोल्डर्स से आह्वान करता है कि वे तत्काल प्रभाव से न्यूज चैनल्स की रेटिंग जारी करने के लिए कदम उठाएं। ‘एनबीएफ’ से पहले टीवी9 नेटवर्क के सीईओ बरुन दास ने भी सूचना प्रसारण मंत्री को इसी तरह का एक लेटर लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

मालूम हो कि टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर मचे घमासान के बीच ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) ने 15 अक्टूबर 2020 को 12 हफ्ते के लिए न्यूज चैनल्स की रेटिंग्‍स न जारी करने का फैसला लिया था, जिसकी समय-सीमा 15 जनवरी को समाप्त हो चुकी है। गौरतलब है कि मुंबई पुलिस द्वारा टीवी रेटिंग को लेकर किए गए खुलासे के बाद से BARC इंडिया की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में है। ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) तमाम कमियों को दूर करने के लिए टीवी रेटिंग्स की वर्तमान गाइडलाइंस का विश्लेषण कर रहा है। टीवी व्यूअरशिप/टीआरपी की समीक्षा के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा चार सदस्यीय समिति भी गठित की गई थी, जिसने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है।

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